00:00अनंत चतुरदशी की पौरानिक कथा अनुसार एक बार महराज युदिष्टर ने राजसियू यग्य किया उस समय ऐसे यग्यमंडप का निर्मान किया गया जो बेहत अदभुत था वो यग्यमंडप देखने में इतना सुंदर और चमतकारी था कि वो जल और थल की भिन्नता
00:30कई लोग इस मंडप में धोखा खा जाते थे कई बार युदुरियोधन भी उसी यग्यमंडप में गए और तालाब को स्थल समझ उसमें जागिरे तब वहां खड़ा हर इनसान हसने लगा जससे दुरियोधन को काफी चड़ हुई
00:43दुरियोधन को उस घटना से बड़ा अपमान महसूस हुआ और उसने पांडवों से बदला लेने की ठान ली उसने बदला लेने के लिए पांडवों को द्यूत करड़ा में हरा कर उन्हें अपमानित करने की योजना बनाए जिसके चलते उन्होंने धोके से पांडवों को �
01:13का उपाय भी पूछा तब श्री कृष्ण ने युदश्टर को अनंत भगवान का व्रत करने के लिए कहा इस व्रत को करने से पांडवों को उनका खोया राज्य वापस पुनह प्राप्त हुआ इसी के साथ अनंत भगवान की जय कहते हुए इस कथा का मैं अंत करती हूँ
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