वरिष्ठ हनुमान जी पुणे बांध गार्डन रोड के यहां सिद्ध स्थान है जहां संपूर्ण मुफ्त हर तरह के समस्या का समाधान महाराज श्री द्वार हर रविवर को होता है. दैविक भौतिक समस्याओं का समाधान किया जाता है.
यहा भगवंत कथा, रामायण, हनुमान चालीसा, बजरंग बाण को बधावा दिया जाता है नकी अंधविश्वास और पाखंड को , भक्ति ज्ञान सत्संग भजन कीर्तन करना है और समस्या का समाधान लेना है वही आये , 5 से 21 पेशी में आराम लगता है.
*पूजा, पाठ, यंत्र के नाम पर किसी तरह की फीस नहीं है सम्पूर्ण निशुल्क सेवा है (अंधविशवास और पाखंड का कठोर विरोध )
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location- Near Rubby Hall Metro Station, Bund Garden Road, Pune 411001 (not available on Google map please whatsapp for full address)
03:43ुश्री राम, श्री कृष्ण को और बड़े-बड़े सादू संदों को भी ये श्रीर धारन करने के वशक्ता क्यों पड़ी।
03:50श्री कृष्ण वे ऐसे ही बोल देते कि अर्जुन रुखो, मैं तुम्हें ऐसे ही गिता बड़ा देता हूँ, आकाश्वानी करता हूँ, नहीं, उनको आना पड़ा श्रीर लेके, इसलिए बड़े-बड़े देविदे रता हूं को भी, और जो नकरात्म कुर्जा हैं अपना
04:20इसलिए ये श्रीर कभी अध्यात्मिक आतर में बादख नहीं हो सकता, सहयक जरूर हो सकता है, इसके प्रति आसकती अगर तुम्हें है, मैंने मैं अगर ये विचार है कि नहीं, ये श्रीर है मैं हूँ, ये सब मेरा ही है, ऐसा ही है, तो मुश्किल है, तो फिर ये आसकती त
04:50If you ask me, if you ask me,
04:55you are going to go to your house,
04:58you are going to go to your house.
05:00That means your life is your life.
05:07Your home is your life.
05:13Your life will be your life.
05:16If you ask me,
05:18you are going to go.
05:20If you ask me,
05:22you are going to come.
05:26You are going to go,
05:31you are going to go.
05:33This is your life.
05:35This is your life.
05:38This is your life.
05:45We could say that, but we are going to touch well.
05:54You have to touch it and, the body of jibatka,
05:58you have to touch.
06:01We are going to touch it.
06:06We are going to touch it.
06:08We are going to touch it with the physical awakening.
06:13SANGHARSH में FUSH जाता है
06:14और SANGHARSH करके
06:16ADHATMEN क्यातरा शुरू नहीं की जा सकती
06:18शांती से ADHATMEN क्यातरा शुरू की जा सकती है
06:20और शांती तभी प्राप्त होगी
06:22जब तुम वरतमान को स्विकार करो
06:24कि हाँ, मैं जैसा हूँ, वैसा हूँ
06:26हाँ, आज मेरी जो अवस्ता है, वो है
06:30देखो, एक चीज हमने
06:34हमेशा देखी होगी
06:35इस शरीर ने कभी
06:38तुमारा कोई दोश नहीं किया
06:40इस शरीर ने
06:42जिसको आज तक तुम गाली देते आये हो
06:44बोज समझते आये हो, अध्यात्मी क्यातरा में
06:46ख़़ि इसने तुमारा कुछ नहीं बिगड़ा है
06:48तुमारे मन ने बिगड़ा है
06:51तुमारा मन इस शरीर
06:52मैं आ सकते पकड़के बेटा, इसमें
06:54इस शरीर के क्या गल्ती है
07:00तुम जो भोजन दो, वो खा लेता है
07:03अगर तुम रोज इसको उधारन के तौर पे
07:07олол ки сабжи до олол ки сабжи кха сактта
07:10хи мртэ дам так
07:13Лекин пьорн болтахых
07:15Мен ту мхарھа болтахи ки
07:17арае кал хи тхо олол ки сабжи кха хи
07:18тяз куч олак кха на Чаeyе
07:21іс шariрг ки кој
07:23пекшня ашак куць бھی нэхи
07:25я тју تمьхе мадд кар раха
07:28я тју махи аяса бол раха
07:29ки чоло мэ тумхаре
07:30тумхаре адхятми гьяатрахме
07:31мадд керта хоу
07:32उसी के उपर तुम पेर देके तुम बोलते हो कि नहीं
07:36तुम तो न अश्वर हो, तुम तो घराब हो, तुम तो ये हो, तुम तो बंधन हो
07:40कोई चीज बंधन ने इस दुनिया में तुमारे मन क्या लावा
07:43आत्मा का बंधन सिर्फ मन है, शरीर नही
07:47कितने ऐसे सादू संत है,
07:51जो इसी शरीर में रहे के,
07:53अपनी अध्यात्म को प्रगती कर पाए,
07:56उन्होंने शरीर कामेशा धन्यवात किया,
08:00लेकिन तुम शरीर को,
08:01जो नकारते जा रहे हो,
08:03इसके अस्तित्व उनकारते जा रहे हो,
08:05यह तो अपने आप से चल है
08:07यह अपने आप से एक जूटा दिखावा है
08:12कि नहीं अध्यात्म कुछ और है
08:14अध्यात्म वरतमान स्विकार करने की प्रतमसीडी है
08:18अध्यात्म की प्रतमसीडी वरतमान को स्विकार करना
08:24तुम जो हो जैसे वो स्विकार करो
08:26तुम्हारे पास जो शरीर है जैसा है उसको स्विकार करो
08:30तुम हमेशा अगर अद्वन्द करते रहोगे तो मुश्किल हो जाएगी
08:34जरूरी नहीं हमेशा संगर्ष करना किसी चीज से
08:38कभी संगर्ष की उस रास्ते से बाजू में आके खड़े तो रहो
08:42फिर तुम्हें समझाएगा कि यह संगर्ष जो मैं कर रहा था
08:46अगर मैं वर्तमान को स्विकार करता तो संगर्ष जतना करनी की वशक्ता ही नहीं थी
08:50खास कर मैं सिर्फ अभी अध्यात्म की बात कर रहा हूं मैं जीवन की नहीं उन्नती की बात नहीं कर रहा हूं
08:55You know what about your mind?
08:57Tell me thatump has already been
09:23कभी भोजन दो ना दो तो भी उसने कभी कुछ बोला भी नहीं
09:26इसलिए शरीर को आज तक जो हम खराब खराब बोलते आए हैं
09:31हमें ऐसा लगता है कि आज यह समय है कि शरीर को हम धन्यवाद प्रकट करें
09:35इस शरीर को हम माध्यम बना के आगे बढ़े हैं
09:40क्योंकि इसको तुम जितना नकारोगे उतना ही बरतमान के अस्तित्व को टकर देना जैसा है
09:46और यह टकर हमेशा तुम्हारे नुकसान में होगी
09:49इस बात को समझो और आज से अपने शरीर को स्विकार करो
09:57कि हाँ यह मेरे अध्यात्मी के आत्रा में
09:59मुझे सहायता देने के लिए यहाँ पर उपस्तित है
10:03जब हम सभा में हर्मान जी की वरिष्ठ हर्मान जी की जब सभा लगती है
10:09और अलग-अलग गुर्जाओं को जब हम देखते हैं नकरात्म कुर्जाएं आदी
10:13उनकी एक ही लालसा और इच्छा होती है कि कब मुझे वापस मनुष्य शरीर मिले
10:18क्यूं क्यूंकि जब मनुष्य शरीर था तब उसकी कभी कीमत नहीं की
10:23तब उसको कभी हमने सम्मान नहीं दिया
10:26और जब शरीर छूटा तब तुम ये खोज में हो कि कब मुझे नया शरीर प्राप्त हो
10:30इसलिए भटकती रहती है कि कब नया शरीर मिले
10:33इसलिए आज से अपनी दिमाग से ब्रह्म हटाओ
10:38और जो तुमारे पास अभी है उसको बाधा मानने के बजाए
10:43उसका धन्यवाद प्रकट करो और उसको सहायक मानो जीवन में
10:47सिर्फ शरीर को नहीं सार इस्तिती परस्तिती वातावरन हर चीज़ को
10:51धन्यवाद प्रकट करो कि धन्यवाद तुमारी वज़े से हमाध्यात्म जान पा रहे हैं
10:58all part of human death
11:05तुम तो यही रहोगे
11:10method
11:16मैं वापस मुड़ के तुम्हें देखने वाला नहीं हूँ
11:20मुझे वेज़ा यह नहीं
11:22मैं जब आत्मा बनुँंगा
11:24तो वापस मैं तुम्हें आ के
11:26तुछ भी नहीं कर सकता, मैं चुब भी नहीं सकता
11:28you
11:31can
11:33you
11:35yeah
11:37I
11:39I
11:41I
11:43I
11:46I
11:50I
11:52I
11:55I
11:57I
11:57I
11:57And for those, always you have to be a waste of money.
12:01This is why you live in a huge field of money.
12:03And you can start from this.
12:09Because this is true, this is just the reality that you are living in a human.
12:13You don't believe it.
12:16You don't see it.
12:17You don't live in a way.
12:18You don't buy it.
12:19Your social media about this is different.
12:22You are being used to love.
12:22We are dealing with human disorder.
12:23We are talking about human being.
12:27Don't you know that one
12:29party
12:36Say
12:39to
12:39the
12:42people
12:46speak
12:48speak
12:51to
12:53speak
12:53word
12:54soft
12:55word
12:56लेकिन उसके अंदर जो यात्री बेटा है, मतलब तुमारी आत्मा, उस यात्री को वो कभी ठेस नहीं पहुचने देता है।
13:26क्यों? किसलिए? प्रकरती की दीव हुई हर चीज को तुम स्विकार क्यों नहीं कर सकते और उसकी वास्तविक्ता को तुम क्यों हमेशा न कारने जाते हो।
13:56मतलब इस शरीर को तुमें वापस छोड़के आगी की यात्रा करनी है, इसलिए इस नाव में, मतलब इस शरीर में तुम आसक्त मत रहो।
14:02इसका धन्यवात प्रकट करो, कि आज मैं इस तुमारे नाव में बेटा हूँ धन्यवात।
14:07और फिर अध्यत्म की यात्रा शुरू करो, बठकोगे नहीं।
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