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  • 6 months ago
NASA’s Search for Aliens | The Voyager Missions | Dhruv Rathee

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00:00नमाज़कार दोस्तों, क्या इस पूरे भ्रहमान में हम इनसान अकेले हैं?
00:05या फिर हमारे इलावा भी कहीं और कोई इंटेलिजेंट लाइफ मौजूद है?
00:09अगर इलिजेंट सही में एक्जिस्ट करते हैं, तो यह सोचना बड़ा सोभाविक है कि शायद इलिजेंट के मन में भी ऐसे ही सवाल उठते होंगे
00:17कि कहीं इस युनिवर्स में वो अकेले तो नहीं, हमारे युनिवर्स में दो इंटेलिजेंट स्पीशीज के बीच में कम्यूनिकेशन कैसे बनाया जाए?
00:25इसी सोच को ध्यान में रखते हुए, नासा ने कई प्रोजेक्ट शुरू किये, ताकि हम किसी तरह एलियन्स को एक संदेश भेज सके
00:32ये साल 1977 की बात है कि नासा ने अपना वोयजर वन स्पेस्क्राफ्ट लॉंच किया और उसका मिशन क्लियरली डिफाइन किये
00:39हमारा सोलर सिस्टम यानि सौर मंडल की खोज को बाहरी प्लैनेट्स के आसपास से लेकर सूर्य के प्रभाव शेत्र की बाहरी सीमाओं तक और शायद उससे भी आगे तक बढ़ाना
00:50सिंपल भाशा में कहा जाए तो ये एक इंटरस्टेलर मिशन था
00:53हमारी मिलकीवे गैलेक्सी में करोडो अर्बो सोलर सिस्टम्स हैं
00:57इन सोलर सिस्टम्स के बीच में जो जगे हैं उसे इंटरस्टेलर स्पेस कहा जाता है
01:01आज के दिन तक नासा ने सिरफ पाँच इंटरस्टेलर स्पेस क्राफ्ट्स लाँच किये हैं
01:09इनके नाम है Pioneer 10, Pioneer 11, Voyager 1, Voyager 2 और New Horizons
01:14और इन 5 में से सिरफ दो ही actually में Interstellar Space तक पहुँच पाए हैं
01:18क्योंकि Solar System को छोड़ कर जाने में बहुत बहुत लंबा समय लगता है
01:22और ये दो जो छोड़ कर जा पाए हैं ये दो बड़े खास हैं
01:26Voyager 1 और Voyager 2
01:28इन्होंने Solar System की एक ऐसी सेर लगाए कि हमें Jupiter, Saturn, Uranus और Neptune की एक कमाल की फोटोज मिल पाए
01:35आज की दिन तक Voyager 2 इकलौता स्पेस्क्राफ्ट है जो Uranus और Neptune के पास गया है
01:39और Voyager 1 का सफर तो इतना लंबा रहा है कि ये ओफिशली धरती से सबसे दूर पहुचने वाला man-made object बन चुका है
01:47As of October 2024 ये 24.7 billion kilometers दूर है धरती से
01:53लेकिन इन दोनों Voyagers की सबसे दिल्चस बात तो यही है कि इन में मौजूद है
01:57aliens के लिए धेर सारे messages जिनको साथ लिए ये अंतरिक्ष में घूम रहे
02:02ये messages जो इस उमीद से भेजे गए कि शायद हमारी कभी मुलाकात aliens से हो
02:07और इन संदेशों के जरीए हम उन्हें अपने बारे में कुछ बता सके
02:11आखिर क्या छिपा है इन पिटारों में
02:18क्या है वो संदेश इनसानों की तरफ से जो NASA aliens को बताना चाहती है
02:23आए जानते हैं Voyager Missions की पूरी कहानी आज के इस वीडियो में
02:27ये साल 1965 की बात है दोस्तों की NASA में काम करने वाले एक इंजीनियर ने नोटिस किया
02:42कि हमारे सोलर सिस्टम के आखरी चार प्लैनेट्स Jupiter, Saturn, Uranus और Neptune
02:47एक बड़ी ही अनोखी geometric arrangement में आ जाएंगे लेट 1970s के समय में
02:52एक ऐसी अनोखी arrangement जो 175 सालों में सिरफ एक बार आती है
02:57arrangement का मतलब था कि एक ऐसा spacecraft भेजा जा सकता था
03:01जो इन चारो planets के gravitational force का फायदा उठाकर इन चारो planets के पास से गुजर जाए
03:07बहुत कम fuel और समय इस्तिमाल करते हूँ
03:10इस principle को gravity assist कहा जाता है
03:13किसी planet या space में मौझूद किसी और object के mass का इस्तिमाल करना
03:16अपनी speed और trajectory बदलने के लिए
03:19इसी के आधार पर NASA ने Voyager 1 और Voyager 2 missions के plans बनाए
03:23और यही कारण किस साल 1977 का year चुना गया इन दोनों spacecraft को launch करने के लिए
03:28mission के अनुसार Voyager 1 को Jupiter और Saturn के पास से fly by करना था
03:32खासकर Saturn के बड़े moon टाइटन पर फोकस करते हुए
03:35और दूसरी तरफ Voyager 2 को Jupiter Saturn Uranus Neptune के पास से गुजरना था
03:42दोनो spacecraft के design की बात करें तो एक दूसरे से काफी similar थे
03:46दोनों ही तीन radio isotope thermoelectric generator द्वारा पावर थे
03:50इनमें कोई solar panels नहीं लगे थे
03:52क्योंकि Mars Jupiter को पार करते ही solar energy काफी हद तक useless हो जाती है
03:56उतनी दूर पहुँचकर सूरज की किरनों में इतनी energy ही नहीं रह जाती
04:00कि उससे कुछ solar energy निकाली जा से और इनका mission तो solar system को पार करना था
04:05इसलिए ये जो devices हैं ये plutonium element के radio active decay से powered हैं
04:10plutonium जब decay होता है तो heat निकलती है उस heat को बिजली में convert करा जा सकता है
04:16यहीं से ही ये नाम आता है radio isotope thermoelectric generator
04:20इसके लावा दोनों space probes में 10 scientific instruments लगाए गए थे
04:24इसमें था एक two camera imaging system तस्वीरे खीचने के लिए
04:28एक spectrometer जो hydrogen की abundance को measure करता
04:31दूसरा spectrometer जो अंतरिक्ष में ultraviolet activity को measure करता
04:35एक magnetometer जो planets की magnetic fields को मापता
04:39एक high gain antenna communicate करने के लिए धर्ती के साथ
04:42और बाकी कुछ छोटे मोटे instruments radiation के अलग अलग levels को मापने के लिए
04:46interesting चीज़ ये है कि Voyager 2 का launch Voyager 1 से पहले किया जाता है
04:5010 August 1977 में Voyager 2 launch होता है
04:54और 16 दिन बाद 5 सितंबर 1977 को Voyager 1 का launch होता है
05:01NASA Kennedy Space Center से
05:03जो रस्ता Voyager 1 ने लिया वो ज्यादा छोटा और तेज था
05:07Voyager 2 के comparison में
05:08तो Jupiter के पास सबसे पहले Voyager 1 ही पहुँचता है
05:11और March 1979 में ये जबरदस time-lapse इसके द्वारा लिया जाता है
05:16ये 66 अलग-लग photos से द्वारा बनाया गया एक time-lapse है
05:20हर एक तस्वीर Jupiter के एक rotation period के बाद ली गई है
05:23लग-बग 10 गंटे का समय लगता है Jupiter को rotate करने में
05:26ये पहली बार था कि Jupiter और Jupiter के moons की इतनी clear-cut photos हमें देखने को मिल पाई
05:31और यही पर discovery हुई Jupiter के rings की भी
05:34बहुत से लोगों को लगता है कि सिरफ Saturn planet के around rings मौझूद है
05:38लेकिन rings Jupiter के around भी है
05:39हलाकि वो इतने clearly दिखते नहीं है जब तक pass से ना देख
05:42ये जो Jupiter planet है इसके moons और इसके rings
05:45इन तीनो components को साथ में मिला कर
05:48Jovian system कहा जाता है
05:50ये Jovian शब the Roman god of sky and thunder से आता है
05:53जोव जिसका नाम है और जोव का ही दूसरा नाम Jupiter भी है
05:57जहां से इस planet का नाम भी पड़ा
05:58अब बात कुछ ऐसी है दोस्तों कि Jupiter जैसे ही
06:01तीन और planets मौझूद है मारे solar system
06:03Saturn, Uranus और Neptune
06:05इन सभी planets पर ring मौझूद है
06:07बहुत सारे moons मौझूद है
06:08और ये सारे के सारे gas giants भी है ये चारो
06:11यही कारेंट की इन चारो planets को मिला कर
06:14Jovian planets कहा जाता है
06:16Jupiter like planets
06:18इसी Jovian system की exploration के दुरान
06:20Voyager 1 ने Jupiter के
06:22I.O. Moon की ongoing volcanic activity की भी खोज करी
06:25ये भी पहली बार था जब इनसानों ने
06:27किसी और planet पर active volcanoes को देखा
06:31Voyager 1 के Jupiter पहुँचने से पहले
06:33हमें लगता था कि Jupiter के पास
06:3513 अलग-अलग moons मौझूद है
06:37लेकिन इसके आने के बाद पता चला कि
06:38दो और चांद मौझूद है
06:40कुछ महिने बाद 9 जुलाई 1979 को
06:42Voyager 2 Jupiter के पास पहुँचा
06:44और ये और भी ज्यादा करीब था Jupiter के
06:46इसके पास आने से
06:48एक और नया चांद हमें देखने को मिला
06:50पता चला एक और moon मौझूद है जुपिटर के पास
06:52इन Voyager Missions की discoveries के कारणड
06:55जुपिटर के जो moons थे
06:56वो 13 से वड़कर 16 हो गए
06:58लेकिन आज के दिन पता है क्या दोस्तो
07:00हम 95 अलग-अलग moons
07:02discover कर चुके हैं
07:04सही सुना आपने 95 अलग-अलग
07:06चांद जो जुपिटर के चारों तरफ गूम रहे है
07:08इसके करीब
07:10डेड साल बाद 12 नवेंबर साल
07:121980 को Voyager 1 पहुँचता है
07:14Saturn के पास इस वक्त तक
07:16Voyager 1 की स्पीड इतनी तेज हो गई थी
07:18Voyager 2 के मुकाबले है
07:19कि Voyager 2 को Saturn तक पहुचने में
07:21करीब 9 महिने और लगे
07:23Saturn पर पहुचते ही
07:24Voyager 1 ने 3 नए moons की खोज करी
07:26Atlas, Prometheus और Pandora
07:28हाँ ये Pandora नाम वही है
07:30जो अवतार फिल्म में Alien Planet का नाम रखा जाता है
07:32लेकिन असलियत में
07:33ये Saturn के एक moon का नाम है
07:35उस समय तक Saturn के 9 moons की list करीब 15 तक थी
07:38लेकिन आज के दिन हमने करीब 146 moons की खोज कर लिये Saturn के
07:43Voyager 1 ने कई सारे moons की photos खीची
07:46जो आप स्क्रीन पर देख सकते हैं
07:47इन में से शाथ सब से interesting
07:49ये Titan moon
07:50धर्ती के इलावा येकलोता ऐसा object है हमारे solar system में
07:53जिसका हमें clear evidence मिला है
07:55कि जहाँ पर बहुत सारा liquid state में पानी मौजूद है
07:59यही कारण की कई सारी science fiction movies इस पर बनी है
08:02जिसमें Titan को एक ऐसी जगें दिखा रखा है
08:04जहाँ पर या तो aliens रहते हों
08:05या फिर जहाँ पर इनसान जाकर रह सके
08:08Saturn को पार करने के बाद
08:12Voyager 1 और Voyager 2 के रास्ते अलग-अलग हो जाते है
08:15Voyager 2 जाता है Uranus और Neptune की ओर
08:18यह पहला और एकलोता man-made object बन जाता है
08:21इन planets के पास से गुजरने वाला
08:23साल 1986 में Uranus के पास
08:25और 1989 में Neptune के पास से गुजरता है
08:28और कुछ यह photos हमारे पास आती है
08:31Voyager 1 दूसरी तरफ अपनी trajectory बदल लेता है
08:33और ecliptic plane से बाहर चला जाता है
08:36ecliptic plane अगर आप नहीं जानते ही एक imaginary plane है
08:39जिस पर हमारे solar system के सारे planets
08:42अपने अलग-अलग orbits में सूरज के चक्कर लगाते है
08:45इसे अगर आप 3 dimensions में देखो
08:47तो कुछ ऐसा दिखाई देता है यह plane
08:49सारही planets में कुछ छोटे-मोटे degrees का अंतर होता है
08:52लेकिन सब एक flat plane पर लगते हैं almost
08:55लेकिन Voyager 1 इस plane से बाहर उपर उठकर निकल जाता है
08:58Voyager 1 का probe gravity assist की मदद से बहुत तेज speed पकड़ लेता है
09:02आज के दिन यह अंतरिक्ष में ऊड़ रहा है
09:0460,000 km per hour की ज्यादा speed से
09:08इस diagram में आप देख सकते हो roughly Voyager 1 और Voyager 2 आज के दिन कहां पर मौझूद है
09:121st January साल 1990 को Voyager के Interstellar Mission की शुरुवात होती है
09:17Official Mission Sun के influence से बाहर निकलने का
09:20अगले ही महीने Valentine's Day के दिन
09:2214 फरवरी साल 1990 को Voyager 1 के द्वारा एक बड़ी मशूर फोटो ली जाती है
09:27The Pale Blue Dot
09:29यह फोटो जिसमें Voyager 1 धर्ती से करीब 6 billion km दूर है
09:33और हमारी धर्ती इसमें सिरफ एक छोटी सी ब्लू कलर की डॉट की तरह दिखाई दे रही है
09:38इसी परस्पेक्टिफ से Voyager 1 के कैमरा ने एक सेलफी भी ली हमारे inner solar system की
09:44एक family portrait जिसमें Venus, Earth, Jupiter, Saturn, Uranus और Neptune सब शामिल थे
09:49अगर आप सोच रहे हो इसमें Mercury और Mars कहां गए
09:52तो वो इसलिए दिखाई नहीं दे रहे क्योंकि Sun की reflection इतनी ज्यादा पढ़ रही थी कि वो उसमें गायब से हो गए
09:58और Pluto बिचारा आज के दिन planet तो वैसे ही नहीं है उसकी कोई परवा नहीं करता
10:02लेकिन इस फोटो के लिए भी वो बहुत छोटा था इसलिए दिखाई नहीं दे रहा
10:06यह आखरी कुछ फोटोस खींचने के बाद Voyager 1 के कैमरा इसको बंद कर दिया जाता है
10:11ताकि power और memory दोनों बचाई जा सके
10:14और एक्चुली इसके बाद कुछ था भी नहीं जिसकी तस्वीर इतने अधेरे में खींची जा सके
10:18Voyager 1 सीधा आगे बढ़ रहा था
10:20Interstellar Space के अंधेरे की होग
10:22इसके बाद सालों तक Voyager 1 का कोई नया अपडेट नहीं आया
10:28साल 1998 में एक छोटा सापडेट बताय जाता है
10:31कि ये धरती से सबसे दूर पहुँचने वाला man-made object बन गया है
10:35फिर साल 2004 में बताय जाता है कि Voyager 1 ने termination shock पार कर लिया है
10:40ये एक ऐसा point होता है हमारे solar system की edge पर
10:43जहां solar wind अचानक से धीमी हो जाती है
10:46आप पूछोगे ये solar wind क्या चीज है
10:48ये असल में सूरज से आने वाले charged particles होते है
10:51ये solar system के चारो और एक bubble सा बना देते है
10:54इस bubble को heliosphere कहा जाता है
10:57और ये heliosphere हमें interstellar radiation से बचाता है
11:00जब हम heliosphere की outer boundary heliopause के करीब पहुँचते हैं
11:04तो solar wind और कमजोर हो जाती है
11:06इस diagram को देखकर आप बहतर समझ सकते हो
11:08शुरुआत में है हमारे planets सारे
11:10Neptune के बाद एक creeper belt आती है
11:13जहां से कई सारे comets निकल कर आते हैं
11:15इसकी बाद मैंने asteroid वाले वीडियो में करी थी
11:17यहीं से ही लगबग शुरू हो जाता है
11:19termination shock का region
11:20जिसके बाद आती है heliopause की boundary
11:23heliopause के आने के बाद
11:24कई सारे diagrams में एक बो शौक का region दिखाय जाता है
11:27interstellar space आने से पहले
11:29ऐसा कई सारे scientist का मानना था
11:31Voyager 1 जब तक यहां नहीं गया था
11:3325 August साल 2012 में
11:35Voyager 1 ने heliosphere को पीछे छोड़ दिया
11:38और finally interstellar space में entry मार दिया
11:41और उसके बाद से scientist का पूरा नजरिया ही बदल गया
11:44इस बो शौक वाले region को लेकर
11:46आज के दिन scientist का मानना है कि
11:47यह वाला region basically एक interaction का area है
11:50जहां पर interstellar radiation आकर
11:52solar wind से मिलती है
11:53एक तरीखे का diffusion वाला region
11:55जहां पर कोई clear cut boundary नहीं है
11:57लेकिन सोच कर देखो दोस्तों
11:59यह सिर्फ साल 2012 में ही था
12:01कि वाजर 1 ने boundary क्रॉस कर ले
12:03पूरे 22 साल का समय लग गया
12:05इस interstellar mission को
12:07interstellar space तक पहुचने में
12:09इस चीज को confirm करने में भी
12:11NASA ने 8 महीने का समय लगाया
12:13कई सालों तक हैंनों ने data को recheck किया
12:15double check किया
12:16और finally September 2013 में ही इनोंने
12:18announce किया था कि
12:19इंसानों के हातों द्वारा बनाई एक चीज ने
12:22पहली बार solar system की
12:24सरहदे पार कर ली है
12:25यह data science का ही कमाल है कि
12:27space exploration की इस field में हम इतनी सारी
12:29चीजों को बहतर समझ पाएं
12:31लेकिन सिर्फ space exploration ही नहीं
12:33data science आज के दिन one of the most lucrative careers
12:35बन चुका है इस दुनिया में
12:37इसका इस्तिमाल almost हर एक industry में किया जाता है
12:39automobile, finance, media, healthcare
12:42अगर आप अपने आपको इसमें upskill करना चाहते हैं
12:45और इस dynamic field में enter करना चाहते हो
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13:45अब अपने topic पर वापस आते हैं
13:46एक बड़े interesting सवाल यहाँ पर यह उठता है
13:48कि यह हमें कैसे पता चला कि
13:50Voyager 1 ने boundary cross करी
13:52यह हमें पता चला दोस्तों
13:53इसके plasma wave instrument से
13:569th April और 22 मई 2013 के बीच में
13:59एक powerful solar eruption record की गई
14:02Voyager 1 में
14:03इस eruption की वज़े से Voyager 1 के पास के
14:05electrons vibrate होने लगे
14:06और researcher से notice किया
14:08कि Voyager 1 के आसपास की जो electron density है
14:11अब वो heliosphere की तुला में बहुत ज्यादा हो गई है
14:13इसी से ही हमें पता चला
14:15कि ये interstellar space में पहुँच गया है
14:17आप सोचोगे लेकिन ये कैसे हो सकता है
14:19electron density solar system के बहार
14:21ज्यादा है solar system के अंदर के
14:23comparison में ऐसा इसलिए है क्योंकि
14:25heliopause का जो region था
14:26वहाँ पर solar wind में एक बहुत बड़ा dip महसूस होता है
14:29जब Voyager 1 heliopause के area में था
14:31तब वहाँ पर electron density बहुत कम हो गई थी
14:34और जैसे ही ये interstellar space में आया
14:37एक sudden spike देखने को मिली
14:38फर्क बस इतना है कि heliopause से पहले
14:41जो electron density में spike आई थी
14:43वो solar wind की बज़े से थी
14:44और heliopause के बाद जो spike आई
14:47electron density में ये
14:48interstellar wind की बज़े से थी
14:50ये सारी चीजे हमें पदा चल पा रही थी
14:53इस high gain antenna की मदद से
14:55सारी photos, सारे instruments की findings, सारे mission critical जानकारी
14:59सब की सब इस antenna के जरीए transmit हो रही थी
15:02और धरती पर receive की जा रही थी
15:05NASA के तीन deep space network stations के दुआरा
15:08ये deep space network stations भी अपने आप में बड़ी कमाल की चीज़े हैं
15:12धरती के तीन कोनों में ये मौझूद है
15:14California, Madrid और Australia में Canberra
15:17ये तीनों locations जैसा कि आप इस animation में देख सकते हो
15:20धरती का ज्यादा से ज्यादा area cover करती है
15:23अगर आप मेरे vlog channel को देखते हो
15:24तो शायद आपको याद हो
15:26मैंने Australia में मौझूद इस Deep Space Network Station का एक टूर कराया था
15:31इस वाले vlog में
15:32अगर आपने नहीं देखा इसका link नीचे description में
15:35जब researchers को ये सारा data मिला
15:37तो उन्होंने इसे backtrack किया
15:38और देखा कि Voyager 1 ने exactly कौन से दिन
15:40Interstellar Space में एंटर किया था
15:43और तब ये 25 August 2012 की date confirm हुई
15:46और इत्तिफाक की बात देखिए
15:47ये वही दिन था exactly
15:49जिस दिन चांद पर कदम रखने वाले पहले इंसान
15:52Neil Armstrong का दिहान थुआ
15:55अच्छा ये सारी बात तो हुई Voyager 1 की
16:03यहाँ पर Voyager 2 का क्या हुआ
16:04Voyager 2 ने भी Interstellar Space में
16:07एंटरी मारी करीब 6 साल बात
16:085 November 2018 में
16:10सिरफ दो Space Props जो आज के दिन तक ऐसा कर पाए है
16:14इन दोनों के अंदर मौजूद है
16:15Aliens के लिए कुछ संदेश
16:17अब भले ही इन दोनों Voyager Missions ने
16:21कई सारे रिकॉर्ड्स तोड़े हों
16:23लेकिन Aliens को संदेश भेजने के परयास में
16:25ये पहले Space Crafts नहीं थे
16:27इस से पहले Pioneer 10 और Pioneer 11 ने भी एक कोशिश करी थी
16:30Actually में जो messages Voyagers में भेजे गए है
16:33Aliens के लिए
16:34वही messages पहले Pioneer 10 और 11 में भेजे गए थे
16:37बस फर्क ये है कि Voyagers में
16:39नई टेकनोलजी का इस्तिमाल करके
16:41और और ज्यादा detailing के साथ
16:43उन messages को भीजा गया
16:45Pioneer Plague एक छोटी सी
16:46Gold Anodized Aluminium की Plate है
16:48जो Pioneers 10 और 11 के Space Craft पर लगाई गई थी
16:51इस पर लिखी गई चीजे
16:53Aliens को हमारी Planet Earth के बारे में बताती है
16:56NASA ने इसे Mark of Man कहा है
16:59ये Plate सिरफ 15 से 23 सेंटिमीटर की है
17:01लेकिन इस पर 5 engraved diagrams है
17:04एक galaxy में हमारी location के बारे में जानकारी देती है
17:07बीच में एक radial diagram है जो असल में एक map है
17:10इस map में हमारी सूरज की position को
17:1214 pulsers के relation में दिखाया गया है
17:15pulsers जो है वो degenerated stars होते हैं
17:17जो तेजी से घूमते हैं और regular pulses emit करते हैं
17:20basically इस नक्षे को समझने के लिए
17:22intelligence level इतना होना चीए कि
17:23यह सारी knowledge पहले से पता हो aliens को
17:25black के निचले हिस्से में solar system के planets को दिखाया गया है
17:29और सबसे left में सूरज है
17:30उसके बाद सारे planets आते हैं
17:32एक arrow बना हुआ है यहाँ जो तीसरे planet की तरफ point out करता है
17:36कि यह वो planet है जहां से spacecraft निकल कर आया है
17:39इसके middle right हिस्से में एक spacecraft का silhouette दिखाया गया है
17:43और साथी साथ यहाँ देख सकते हो एक drawing एक पुरुष और एक महिला की
17:47basically यह दिखाने की कोशिश करी गई है कि हम इनसान ऐसे दिखते हैं जिन्होंने इस spacecraft को बनाया है
17:54NASA ने कहा है यह Interstellar's Lab दर्शाता है कि मानव जाती के पास मानव विकास के युग की भौतिक समस्याओं से परे एक spiritual insight है
18:03मोटे मोटे तोर पर देखा जाये तो यह sheet काफी basic सी है
18:07ज्यादा कुछ पता नहीं चलेगा aliens को अगर इसे देखा तो
18:10इसलिए Voyager's missions में जो चीजे भेजी गई वो इससे कही ज्यादा detailed थी
18:15Voyager's के साथ भेजे गई messages असल में 12 इंच की gold-plated copper discs और phonograph records है
18:23इनमें आवाजे और images दोनों शामिल हैं
18:26ऐसे दो records है Voyager 1 और Voyager 2 दोनों पर भेजे गई हैं
18:29आये थोड़ा detail में देखते हैं कि इनमें क्या है
18:31phonograph जो है इसे gramophone भी कहा जाता है ये कुछ ऐसा दिखता है
18:35ये flat discs होती हैं जिनमें sounds को store किया जा सकता है
18:39ये एक जमाने में काफी popular हुआ करते थे
18:41और 1970s के जमाने में काफी popular होते थे जब Voyager's को बनाया जा रहा था
18:46इन discs पर grooves एक spiral pattern में arranged होते हैं जिनमें sound waves encoded होती हैं
18:52जब एक sui इन grooves के साथ लग कर चलाई जाती है तो vibrations निकलती हैं जो sound box तक पहुचती हैं
18:58यहाँ पर एक membrane होता है जिसके vibrate होने पर इन discs में record की गई sound waves दुबारा से आप सुन सकते हैं
19:04अक्सर इन sound waves को एक horn के जरीए और ज्यादा amplify किया जाता है ताकि loudly और clearly आवाज सुनाई जा सके
19:10आज के दिन हमारे पास turn tables और record players हैं जो इसी concert पर काम करते हैं लेकिन technology अलग है
19:16आज के दिन sui से होने वाली vibrations को electrical signals में पहले convert किया जाता है और फिर sound को amplify किया जाता है
19:23यहाँ पर ऐसा नहीं किया जाता है यह जो record इसमें भेजा गया है voyagers में इसे golden record का नाम दिया गया है
19:30इस record के contents को चार अलग-अलग sections में divide किया गया है पहला section है scenes from the earth
19:36115 images और diagrams जो हमारे planet और हमारे planets पर मौझूद species के बारे में बताते हैं
19:42इसमें basic mathematical, chemical और physical definitions भी मौझूद है
19:46दूसरी है greetings from the earth
19:48पचपन अलग-अलग भाशाओं में इंसानों के द्वारा बोली गई greetings
19:52साथ में printed message भी है जो American President Jimmy Carter और उस वक्त के United Nations के Secretary General Kurt Waldheim ने लिखा था
20:01वो अलग बात है कि इसे समझने के लिए aliens को English आनी जरूरी है
20:06तीसरा section है music from the earth
20:11musical selections हमारे धर्ती पर मौझूद अलग-अलग cultures और eras के
20:16इसमें 28 audio recordings है इस्टन और western classical music की
20:20और एक Indian गाना भी है based on राग भेरवी
20:23जात कहां हो जैसे गाया गया है सुर्श्री केसरबाई केर करने
20:28चौथा section है sounds of the earth जिसमें अलग-अलग natural sounds सुनाई गई हैं
20:33जिसमें 21 अलग-अलग human activities, machine की और natural phenomena की आवाजे हैं
20:38जो कुछ ऐसी है
20:39अब जाहिर सी बात है aliens को अगर यह आवाजे सुननी है तो उन्हें इस phonograph को operate करना आना चाहिए
20:52और इसी के लिए NASA के scientists ने instructions भी रखी है इन डब्बो के अंदर
20:56अब अच्छी ख़बर यह है कि उन्होंने इन instructions को किसी English या Hindi भाशा में नहीं लिखा
21:01क्योंकि obviously क्या chance है कि aliens को हमारी भाशा समझ में आईगी
21:04लेकिन बुरी खबर यह है कि उन्होंने इन instructions को diagrams के form में दर्शाया गया है
21:09और बुरी खबर मैं क्यों कह रहा हूँ क्योंकि जरा इस diagram को देखो आप
21:13aliens का तो भूली जाओ आप खुदी देखो इस diagram को और बताओ इन instructions को देखकर इन diagrams को देखकर क्या आप समझ पा रहे हो कि phonograph की machine को कैसे operate करना है
21:24मेरी राय में आज के दिन के 90% इनसान भी इन instructions को नहीं समझ पाएंगे तो हम कैसे expect कर सकते हैं कि aliens इन diagrams को देखकर समझ पाएं कैसे operate करना है इस machine को
21:35इन diagrams की थोड़ी English translation आप screen पर देख सकते हो कि actually में किस diagram का क्या मतलब है
21:41phonograph को operate करना वैसे कोई इतना मुश्किल काम नहीं है
21:44aliens को बस ये समझना होगा कि कैसे हम इस disc को लें, इस disc को यहाँ डालें और इसके उपर ये सूई लगा दे
21:50लेकिन सबसे मुश्किल काम होगा इन photos को actually में देख पाना
21:54यह सभी photos जो आपने अभी screen पर देखी इस golden record में मौझूद है
21:58साल 1977 में ऐसी कोई technology नहीं होती थी जो analog discs पर images को JPEG जैसे formats में store कर सके
22:06Voyager के computer systems सिरफ 69 kilobytes की जानकारी ही store कर सकते थे
22:1269 kilobytes होता है सिरफ 0.07 megabyte
22:15एक image के लिए भी यह बहुत कम पढ़ जाता है
22:18115 images तो बहुत दूर की बात है
22:20इसलिए NASA ने इन discs पर image data शामिल करने के लिए एक नया तरीका सोचा
22:25उन्होंने इन photos को एक screen पर project किया और एक television camera से record करके
22:30उन video signals को audio waveforms में बदल दिया
22:33और यह photos actually में audio के form में इन discs में stored है
22:36तो aliens अगर इन्हें देखना चाहते हैं
22:38तो उसके लिए reverse process करना होगा
22:40audio के form में जो data stored है
22:42उसे वापस image में बदलना होगा
22:44यह कैसे किया जाए
22:46instructions interstellar envelope पर दी गई है
22:48आप देखकर पढ़ सकते हैं
22:50यह technology अपने आप में इतनी technical और complicated है
22:53कि इसे समझाने में एक अलग video लग जाएगा
22:55तो decode करने का जहनजट छोड़िये
22:57मैं आपको अब screen पर दिखाता हूँ
22:59इस golden record में आखिर क्या मौझूद है
23:02115 तस्वीरों को जब decode किया जाएगा
23:04तो पहली तस्वीर यह सामने आएगी
23:06एक सफेध calibration circle
23:08एक simple black and white drawing
23:23फिर दो solar system parameters के diagram जाते हैं
23:26जो sun और तब के 9 planets को दिखाते हैं
23:29इस diagram के बाद solar system के कई सारे objects की individual photos दिखाई जाती है
23:34Mercury, Mars, Earth और Jupiter
23:36कुछ images में explanatory symbols जैसे की mathematical definitions या chemical formulas भी शामिल है
23:42उधारन के लिए यह photograph जिसका title है
23:44Egypt, Red Sea, Sinai Peninsula and the Nile
23:47Earth, atmosphere की composition बताई गई
23:50तस्वीर के ऊपर की ओर tag दिखता है की हमारी atmosphere में nitrogen 78%
23:55N2, 78, 100
23:57यहां कुछ chemical elements के models भी शामिल हैं
24:00जैसे की hydrogen, carbon, nitrogen, oxygen और phosphorus
24:03यह chemical elements, G1 के आधार, life के fundamental blocks को दर्शाते हैं
24:08DNA structures की भी दो तस्वीरे हैं
24:10genetic information के transmission को भी समझाती है
24:12एक ऐसी चीज जो सभी living things में मौझूद है
24:15एक तस्वीर microscopic details में cells और उनके division को भी दिखाती है
24:19इसके बाद की 20 images इंसानों की life को दर्शाती है
24:22या कुछ images ऐसी भी हैं जो इंसानों की काबिलियत को दर्शाती है
24:26कैसे मूग का इस्तिमाल चाटने, खाने और पीने के लिए किया जाता है
24:30साथी साथ एक photo यहाँ पर Great Wall of China और ताज महल की भी है
24:33interesting चीज यह है कि कोई भी तस्वीर यहाँ पर
24:36इंसानों के negative aspect को नहीं दर्शाती
24:39कोई conflict या world war या किसी भी war जैसी चीज़ का कोई जिकर नहीं किया गया है
24:43एक बहुत ही hopeful और positive side इंसानियत की दर्शाई गई है इन तस्वीरों में
24:48मानफता का एक ideal version जैसा काल सेगन ने 1978 की अपनी किताब
24:54Murmurs of Earth The Voyager Interstellar Record में explain किया
24:58सबसे बड़ा सवाल तो यहां पर यहीं उठता है कि क्या कोई भी Voyager spacecraft कभी किसी alien तक पहुँच पाएगा
25:05और अगर यह किसी alien species तक पहुँच भी गया
25:07क्या उस alien की species के पास इतना intelligence level होगा
25:11इस चीज़ को decode करने के लिए या नहीं होगा
25:14आपकी क्या राय है हाँ पर नीचे कॉमेंट्स में लिखकर बता सकते हैं
25:18अभी के लिए Voyager 1 का spacecraft 61,198 km per hour की स्पीड से तेज दोड़े जा रहा है
25:26धर्ती से लगभग 25 करोड किलो मिटर दूर इंटर स्टेलर स्पेस की गहराईयों में
25:32unfortunate चीज ये है कि ये ज्यादा दिन तक और चलने वाला नहीं है
25:37इसकी power supply धीरे धीरे खतम हो रही है
25:39और scientist का estimate है कि 2025 में ही इसकी power supply पूरी तरीके से खतम हो सकती है
25:46इससे हमारा communication जरूर खतम हो सकता है
25:49लेकिन इसके अंदर मौझूद golden record हमेशा के लिए शायद preserved रहेगा
25:54scalar का link नीचे description में मिल जाएगा और ये वीडियो अगर पसंद आया दोस्तों
25:58तो aliens पर मैंने एक और वीडियो बनाया है इससे पहले
26:01area 51 के उपर आखिर क्या राज है area 51 के पीछे
26:05यहां click करके देख सकते हैं बहुत बहुत धन्यवाद
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