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अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाज़ार है। आंकड़े बताते हैं कि वित्त वर्ष 2025 में भारत ने अमेरिका को लगभग 86.5 बिलियन डॉलर का निर्यात किया। लेकिन नई ड्यूटी लागू होने के बाद यह आंकड़ा घटकर सिर्फ 49.6 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी टैरिफ का असर भारत के अमेरिका को होने वाले कुल निर्यात के 66 फीसदी हिस्से पर पड़ेगा। यानि करीब 60.2 अरब डॉलर का माल अब महंगे टैरिफ की वजह से अमेरिकी बाज़ार में प्रतिस्पर्धा खो देगा। इन टैरिफ्स की सबसे ज्यादा चोट लगेगी टेक्सटाइल्स और गारमेंट्स, रत्न और आभूषण, झींगा कालीन और फर्नीचर उद्योग पर...इन पर अब 50 फीसदी शुल्क देना होगा। यानी पहले जो भारतीय प्रोडक्ट अमेरिका में सस्ते और लोकप्रिय थे, वे अब चीन और वियतनाम जैसे देशों की तुलना में महंगे पड़ जाएंगे। उदाहरण के तौर पर भारत का एक शर्ट अमेरिका में 20 डॉलर में बेचता था। 50% टैरिफ लगने के बाद वही शर्ट अब 30 डॉलर में पड़ेगी। वहीं, वियतनाम की शर्ट अब भी 20–22 डॉलर में बिकेगी। नतीजा साफ़ है—खरीदार किसे चुनेंगे?

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~ED.108~HT.408~GR.124~

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00:00अमेरिका ने भारत पर ऐसा टेरिफ लगाया है जिसने 86 अरब डॉलर के भारती निर्यात को सीधा खतरे में डाल दिया है
00:06सबसे बड़ी मार पड़ेगी उन सेक्टर्स पर जो भारत की पहचान रहे हैं
00:09मसलन गामिंट्स, जुल्री, जींगा, कालीन और फर्विचर
00:13और सबसे चौकानी वाली बात ये है कि संकट से सबसे बड़ा फाइदा उठाने के लिए तयार हैं चीन, पाकिस्तान और फियत नाव
00:20सवाल ये है क्या भारत की जीडीपी अब धीमी पड़ जाएगी और क्या लाखों नौकरिया दाव पर लग गई है
00:26सुमवारक अमेरकी डिपार्टमेंट आफ वर होमलेंड से क्योटी ने एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है
00:39इस नोटिफिकेशन में साफ लिखा है कि भारत से आने वाले उत्पादों पर अब 25 फिस्दी अतरिक्त टेरिफ लगाया जाएगा
00:46ये ड्यूटी उन सभी सामानों पर लागू होगी जो 27 अगस्त दोहजार पचीस पूर्वी डेलाइट समय उनसार रात 12 बजे के बाद अमेरिका में आयाद किये जाएंगे या वेयर हाउस से निकाले जाएंगे
00:57दरसल ये कदम राश्पती नॉलल टरम की पहले की कोशना का ही एक हिस्सा है उन्होंने साफ कर दिया था कि अमेरिकी बाजार में विदेशी सामान को अब आसानी से जगहें नहीं मिलेगी और अब भारत भी उस सखती की चपेट में आ गया है
01:10अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्याद बाजार है आकड़ी बताते हैं कि वित्वर्ष दोहजार पचीस में भारत ने अमेरिका को लगभग 86.5 बिलियन डॉलर का निर्याद किया लेकिन नई ड्यूटी लागू होने के बाद ये आकड़ा घटकर सिर्फ 49.6 बिलियन ड
01:40ये टैरिफ की वजए से अमेरिकी बाजार में प्रतिसपरधा खो देगा इन टैरिफ्स की सबसे ज़्यादा चोट लगेगी टेक्स्टाइल्स और गार्मेंट्स रतन और आभूशन जींगा कालीन और फरनीचर उद्योग पर इन पर अब 50.5 शुल्क देना होगा यानि कि �
02:10वही वियतनाम ये शर्ट अब भी 20-22 डॉलर में बेचेगा नतीजा साफ है खरीदार किसे चुनएगी इसका सीधा असर भारत के शरंग प्रधान सेक्टर पर पढ़ेगा हनुमान है कि निरियात वॉल्यूम 70 फीस्दी तक घट सकता है यानि अमेरिका को भेजे जाने वाले
02:40सबसे बड़ा फाइदा उठाएंगे चीन और वियतनाम, मैक्सको, तुर्की और पाकिस्तान यहां तक कि नेपाल, गौाटेमाला, केनिया भी जूटियार आई मानता है कि ये देश ना सिर्फ भारत की जगह लेंगे बलकि लंबे वक्त तक अमेर की बाजार पर कबज़ा ज
03:10गार्मेंट्स और होम टेकस्टाइल जैसे तॉलिये, बैटशीट, कॉटन कपड़े लेने लगेगा। पाकिस्तान को एक्सपोर्ट में बढ़ोतरी और डॉलर्स की आंधनी होगी जिससे उसकी कमजोर अर्थ विवस्ता को थोड़ी राहत मिलेगी। अगर अमेरकी कमपनिय
03:404,270 अरब डॉलर थी, सामाने हालत में फिनेंशल एलर 2,026 तक 6,5 फीस्दी की ग्रोथ मिलती और जीडीपी पहुंचती 4,547 अरब डॉलर था है। लेकिन अमेरका को नर्यात घटने से जीडीपी का बेसलाइन घटकर 4,233 अरब डॉलर रह गया, इस पर 6,5 फीस्दी ग्र
04:10जाएगी। साफ है कि भारत की ग्रोथ में 0.9 फीस्दी अंकी कमी, यहालाद भारत के लिए सिर्फ आर्थिक नहीं बलकि प्रॉनितिक चुनौती भी हैं। एक तरफ अमेरका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है, दूसरी तरफ भारत, मेकिन इंडिया और लोकल ट�
04:40प्रॉनिति बदल कर इस जटके को जेल पाएगा या फिर चीन और वियतनाम, पाकिस्तान जैसे देश भारती निर्यात की जगें हमेशा के लिए कब्जा कर लेंगे। भारत की आर्थिक ग्रोथ का रास्ता अब किस दिशा में मुड़ेगा, या आने वाला वक्त तै करेगा
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