00:00बिरुन से कुछ रापन। वचिति नंदरे मनों बिरुदा लेतु हो।
00:30आपने मुझे याद किया बाबुजी।
00:40हाँ महिश। अच्छे संसकार, नियती, धर्म, परुपकार इस सब वो जान गया है।
00:49लेकिन बाहर की दुनिया उतनी अच्छी नहीं है जितनी इस आश्रम में हैं।
00:54ये बात भी उससे जननी होगा। अब वक्त आगया कि वो दुनिया को समझे।
01:00दूसरे बच्चों की तरह कॉलेज में पढ़ना होगा उसे।
01:04शहर में रहने के तरीके सिखने होंगे उसे।
01:07आप हमारे साथ आएंगे न बाबुजी।
01:10नियती में हमें बांध रखा है।
01:12इसलिए हमें हमेशा साथ रहना होगा।
01:15अब हमें बना की शहर जाना होगा।
01:19Шथ अब्या होगा।
01:22आप है।
01:29स्केशप लगाई न एख ए हमें रहने याँ
01:34इसलिए हमें बाबुदी।
01:38इसलिए हमें आहर में रहने आप है
01:41इसलिए हमें रहने प्याँ
01:43गुछाने के बाईंगे श्रावा इसलिए
01:46के औрипूर दो यर बन्त को नो होगा को एप अ कमा झीड़, बन्त को कना पुपक हो laughs
02:16सब कुछ कितनी जल्दी होता है नानू
02:32एक तारा टूटता है और
02:34सौ नए तारे आजाते
02:37और जितने भी नए तारे होते हैं नानू
02:40सारे तारे अलग-अलग
02:42अपने अपने रास्ते चले जाते
02:44हाँ बेटे ये प्रकृती का नियम है बेटे
02:49इसे विदान कहते हैं और समय भी
02:53सब ताय है
02:56वही होगा जो दिखा क्या है
03:14और समय धुक्ती का नियुक्ती क्या जाल विदान किता क्या तो अविदान किता है
03:21मेरा ज़र करी आपकें के अछा है?
03:30आपकें मेरा जपे नसी नहीं जब शुका थैँ त्रुट्टरे के विए नहीं गुड़े, गुड़े, की कि अपकें हम अगया।
03:38मिने मेरा जबत तक सबस्तो हिए।
03:39ऐसे क्या बेख रहे हूं?
03:41और ऐसे भी यह काथ की पहले में ही रोकी थी
03:44और राइटार चे एंट्री गाला थी
03:46हाई ब्रणाव
03:49क्याश तुम मज़े कॉलिज छोड़ोगी या?
03:53मैं तो मैं छोड़ दू
03:54या तुम्हें कोई और प्लांस बनाया हाँ
03:59क्यों पहले हाँ
04:06छियू बेबी
04:12फ्यू बेच चम्पू
04:14करन है तू?
04:16वारस क्यों गूर था उसे हाँ
04:18चै निकल यासे
04:20निकल
04:21ॹ।
04:22ॹ।
04:32ॹ।
04:38ॹ।
04:42ॹ।
04:44ॹ॥।
04:47ॹ॥
04:50ॹ॥..
04:51कि तू लड़की बटाने के लिए
04:54क्या कर सकता है
04:55मैं सर
04:59मैं लड़किया
05:01अबे क्या में में कर रहा है
05:02बखरी का बच्चा है की प्रोफेसर का बच्चा है
05:05प्रोफेसर का है न
05:06तो चल वो गाना लगे सुना
05:07वो पापा कहे दे बड़ा नाम करेगा
05:09सर
05:10से
05:11सर मुझे गाना नहीं आता सर
05:14नाचना तो आता न
05:15चल बंजा नार कली चल
05:17सर मुझे नाचना भी नहीं आता सर
05:23इसे नाचना नहीं आता
05:28गाना नहीं आता
05:29इसे तो पनिश्मेंट देनी पड़े की भाई
05:31और वैसे भी इसका प्रोफेसर बाप बिल्कुल सही कहता है
05:36जब तक लड़कों को पनिश्मेंट ना दोना उन्हें कुछ समझ ही नहीं आता
05:41आप तुझे कुछ दिखाए तो दे नहीं गा
05:43हम सब में से कोई ताली बजाएगा
05:46तुझे सिर्फ इतना बताना है कि किसने ताली बजाएगा है
05:49त्री, टू, वान, जीरो
05:53जलत सर में
05:58जलत
05:59तेख बेचांपू
06:04ये तेरा फाइनल चांस
06:07अरे क्या करन इतना पसीना
06:11बुद मॉनिंग सर
06:14मॉनिंग सर
06:14ताली बाइनल च्केंज सर
06:30हाई
06:45तुलेंट्स, साइलेंट्स
06:54आज हम एक प्रसिद्ध कवी सूर्दास के दोहे पर चर्चा करने वाले हैं
07:01नेरो मन अनंत कहां सुखपावे
07:04जैसा उड़ी जहास को पंचील
07:07पुनी जहास पर आवे
07:09ये सूर्दास जी की कलपना थी
07:12जो अंधे होते हुए भी
07:14उन्होंने स्री कृष्टन भक्ती में
07:16ऐसे दोहे की रच्चा की
07:18मुनाल
07:21जी सार
07:24क्या इसका मतलब समझा सकती हो तुम
07:26जी सार वो
07:28मैं किसकी बात कर रहा हूँ
07:30यही बताईए
07:32माइकल जैक्सिन की बात होती
07:36तो जवाब रेड़ी होता
07:38भारतिये कवी है
07:42इसलिए तुमें कुछ लेना देना है नि
07:45करन
07:51तुम बताओ
07:53इस दोहे में सूर्दास कहते हैं की
07:57भगवान शी कृष्टन के प्रती
07:59उनकी सद्धा और निष्ठा
08:00उस पक्षी की विवश्ता की तरह है
08:03जो अनंद सागर के बद्ध
08:04एक नौका पे आत्रा कर रहा है
08:06वो पक्षी चाहे कितने भी उची उडान भर ले
08:09वापस उस नौका पे ही आना पड़ता है
08:11इसलिए भगवान शीकिष्ट वो नौका है
08:14और जीवन वो अनंद सागर
08:17वेरी गुड़ आत अच्छे बेढ़ जाओ
08:20नौनाल सिट
08:23तु मुझे बता देती तो क्या होता
08:28देखो मिनाल
08:33चीटिंग करने वाले दोश्ट तुमें बहुत ने जाए
08:35लेकिन मैं
08:39मैं ना चीटिंग करता हूँ
08:42ना भी मारी
08:43क्या है
09:13प्रूलोग – अप्रूलोग
09:18अच्छा हो भाच्छ, नच्छूरा दा
09:20हाँ
09:21इर, जिर अचे एर इर
09:24प्रूलोग
09:27कल
09:29कल
09:31कल
09:36कला, कला
09:39हाईो, इस
09:43जिजिक्स की पेपर्स, यह यही तुम ढूड़ रहे देखे, किभी नहीं हो ना?
09:50यह पेपर्स ने चेक्स है, रैंक चेक्स, इक एक कॉपी हजार हजार रुपे की निकलेगी, यह अपनकर है, जिसको भी इसकी जरुद होगी न, वो हजार हजार क्या, दोत हजार रुपे निकलेगी न,
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