00:00बेटे मैं अपनी बेटी को घर ले जाना चाहता हूं
00:05रिवाजों के मुताबिक ऐसे वक्त बेटी को अपने ही घर ले जाना पिता का कर्तब ये बनता है
00:15ठीक है बाबजी
00:17चलो बेटी
00:19अब रिवाजों के मुताबिक बेटी को माएके ले जाना था
00:25बच्चे की परवरिश करने थी
00:27घर तो देवदत बहुत पहले ही छोड़ चुके थे
00:31वो बेटी को अपने सा आश्रम में ले आए
00:34अरे देवदत ची आगे
00:52देवदत लौट तो आए थे
00:54मगर वो कौन सा खास मकसद था
00:57जिसके लिए उन्हें अपनी बेटी को आश्रम लाना होगा
01:00इस बात से वो अभी भी अंजान थे
01:03उधर प्रोफिसर कपूर अपने काम में उल्जे रहे
01:13अपनी पत्नी और होने वाले बच्चे से
01:16वो दूर तो थे लेकिन बच्चे का इंजार शायद सबसे ज़्यादा उन्हें उन्हें उन्हें अगले कुछ महीं में इस तरह गुजर गए
01:24पता है ज़्याद होने के कारण मैं उसको अपने में द्रग स्थिर्द नहीं देखता हूँ एई श्री कृशन ये चंचल मन बड़ा ही हती पहरा करने और द्रग है
01:37स्री कृशन जी बोले है महाभाव इसमें संदे नहीं कि मन अती चंचल है और इसे वश्च में करना बड़ाई कटिन तो भी है कुंती पुत्र अभ्यास ववेराग्य से इसे वश्च में किया जा सकता है
02:07जाईसे वश्च में किया जाईसे वश्च में किया वज़ाई एले करना है
02:37समय बीता गया और वो घड़ी आप पहुची जिसका बेउदत को बेसब्री से इंतिजार था
02:44अरे बेटी आज क्या दिन तो बड़ा शुब है
02:53साथ जुलाई उननीस सो सततर और साथ साथवा दिन साथवा महीना सततर वा साल यानी साथ साथ साथ
03:09साथ मकलत साथ रिश्ट तो ही मोट जो नहीं दिवाला
03:21साथ जान रहने जाए बेटा साथ जान रहना तुमारे ये बहुत बुरा होगा बहुत बुरा होगा
03:29ऐसे सितारे तो रोज आए और चले भी जब भगवान कुछ नहीं बिगार सकता तो ये ये तनी दूर से क्या कर लेंगे
03:51हुआ है
04:05है
04:07हैंए भी जाने रह हुआ हुआ है
04:11हई दवाली है
04:12स wins
04:15यह ओलेंगे, सब करेशितना?
04:45कि यह ओलेंगे, सब करेशितना?
05:15कि यह ओलेंगे, सब करेशितना?
05:23इनी का विदीने जिस सब कुछ पहले से ही देखा पका नहीं हम आज की बाद हम इन ख्रेहों की चाल कमारे करनों निसान के गड़ेगे
05:36मानम जाजु के दियास में एक नया पत्ना कोड़ा काई
05:52सर्मन में बादु का रस्ते माफले शूक अदाचन माकर मफल हे तुर्भू
05:59मादे संगो पकर्वणी सर्मन में बादिया रस्ते माफले शूक अदाचन
06:05मादे संगो पकर्वणी सर्मन मादे संगो पकर्वणी
06:09मुझे नाना बनने की बड़ी खुशी है यकि उससे भी जादा खुशी है कि इस बच्चे ने जर्म लिया
06:26इसका पालम पोश्टन मैं खुद करूंगा जी हा महीश
06:34बेटे देखने में ये बच्चा आम बच्चा लगता है लेकिन ऐसी बात नहीं है ये खास है ये पैदा नहीं हुआ है पही जा गया है इसलिए मेरे ही देखरेख में इसकी पढ़ाई होगी है
06:52वो सब तो ठीक है लेकिन तुम बिलकुर सिकर मत करें महीश हम इस बच्चे को हर वो शिक्षा देगी जिससे वो संपून इंसान बन सकी और तुम बिलकुर सिकर मत करना बेटी ये बच्चा एकीस साल तक मेरे पास में पलेगा
07:1021 साल तक मगर तब तक तो इसकी करियर बनाने की उमर ही निकल जाएगी
07:20मैंने 21 साल तक इसलिए कहा है कि जब ये बच्चा 20 साल का होगा तब इसके साथ में एक बहुत ही अनोखी घटना घटने वाज़ा है
07:29इताजी आपका मतलब कोई हाथसा मैंने दोल घटना नहीं था घटना का है और घटना तो किसी किसंती हो सकती
07:39और शुरू होती है करन की शिक्चा बीच्चा और परीच्चा
07:59मा की मौत का सद्मा
08:05पर करन ने होसला नहीं छोड़ा उसकी तैयारियां चलती रही आश्रम में रहकर उसने वेर पुरां योग के पाठ वखे तो स्कूल की पढ़ाई भी चलती रही
08:27करन नए पुरानी दोने दुनिया देख रहा था वक्त के साथ बदल रहा था इस बात से बेखबर ये एक दिन उसे वक्त को बदलना है
08:44करन को नहीं मालू कि करोडों में से पिस्मत में सिर्फ उसे चुना है इस दुनिया की खाते और इस खास मकसद के लिए
09:08करन दुनिया करन जा दुनिया इस बात से बतल नहीं में सिर्फ उसे खास में से अुछ येह
09:15जटाटाटाटाटाट्ण नमंधमनि भिंप दिजरि विमोदधाट्छि मल्लरिंपि राजमान भुथनि
09:36धड़धधधधद धड़श्वलंग लागपर्ट पावतिर्षूरचंप्रशेटरिंट्रदिम्कतिर्शरौनमा
09:45वरात रेक्र मंदिल विमाचा तन्ग वुद्धुरत
09:53सुरद कंस संत तिम्त प्रूदा अनमानत
09:57त्वात का सचुरत तिरुट जो तरापन
10:01वजक्त इंग्तर
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