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  • 1 year ago
होटल की लॉबी में शिकायतों की बौछार थी
Transcript
00:00होटल की लॉबी में शिकायतों की बोचार थी, कोई खाने को कोस रहा था, कोई टीवी की तस्वीर को, कोई एसी की ठंडक को
00:08मैनेजर सब की बातें नोट करता रहा, फिर एक कोने की मेज पर बैठी, रिया की और बढ़ा, वह खिड़की से बाहर जहांक रही थी, जैसे पहाडियों से कोई पुरानी बात कर रही हो
00:21मैडम, आपकी कोई शिकायत नहीं है, रिया ने मुस्कुरा कर सिर हिलाया, नहीं, सब ठीक है, आपको हमारा होटल कैसा लग रहा है, बहुत अच्छा, कमरे की बालकनी से जो द्रिश्य दिखते हैं, वो मन को सुकून देते है, आपका वित्री है या दार्षनिक, क्या प्रक
00:51और भी बहतर सेवा दूँ, रिया कुछ नहीं बोली, लेकिन भीतर कुछ गूंजने लगा, क्या सच्मुच वह बदल गई है, नई-नई शादी, मनाली की वादियां, आरव का साथ, सब कुछ एक सपने जैसा था, लेकिन उस सुभे, रिया जुंझलाई हुई थी, निक्की �
01:21फिर भी उसने तुम्हारे लिए सब किया, तुम धन्यवाद देने की बजाए शिकायत कर रही हो, रिया ने बात को हवा में उड़ा दिया, तीन दिन पंखो की तरह उड़ गए, लोटने का वक्त आया तो रिया का मन नहीं था, ऐसी भी क्या नौकरी, जो हमें इस जादू�
01:51रिया बेटे, कैसी हो, आपको फोन करना चाहिए था पापा, लगता है आप सब मुझे भूल गए हैं, पापा की आवाज में सनेह था, कैसी बातें कर रही हो बेटा, हम हर पल तुम्हें याद करते हैं, कुछ दिन के लिए घर आ जाओ, फोन रखते ही आरव ने कहा, तुम �
02:21प्रकृती को देख मुस्कुराती है, सेवा में सनेह ढूंटी है, रिष्टों में गहराई महसूस करती है, शायद आरव का धैर्य, पापा का प्यार और पहाडियों की शांती ने उसे बदल दिया है, अब वह जानती है, प्रेम केवल पाने का नाम नहीं, समझने और स्विक
02:51बस एक सच्चा मन था, तुम्हें हर किसी से बहुत ज्यादा अपेक्षा है, और जब वो पूरी नहीं होती, तो तुम्हें तकलीफ होती है, क्यों न तुम अपनी उम्मीदों को थोड़ा डील दो, इससे न तुम्हें चोट लगेगी, न औरों को बोच महसूस होगा, रिय
03:21आरव ने मुस्कुरा कर कहा, बिल्कुल सही, लेकिन प्यार में समझ भी तो होती है, जब हम किसी से ज्यादा उम्मीदें बांधते हैं, तो अंजाने में उन्हें अपराध बोथ दे बैठते हैं, जैसे तुम्हारे पापा ने महसूस किया होगा, या मैं, जब तुम्हारे �
03:51खाना चुपचाप खाया गया, और दोनों अपने-अपने कोनों में खो गए, अगली सुबह भी वही खामोशी, लेकिन दिलों में हलचल थी, आरव ने तै किया, आज शाम को रिया को ऑफिस से लेने जाएगा, रिया कार में बैठी, और जैसे दिल का बांध तूट गया, क
04:21कि सगाई की पार्टी थी, मान जी ने मुझे बताया तक नहीं, लगता है उन्हें पसंद नहीं कि मैं अपनी सहेलियों के संग कहीं जाओं, आरव ने कार रोक दी, उसका हाथ रिया के हाथ पर था, रिया, तुम्हारी भावनाएं बिलकुल जायज हैं, लेकिन कभी-कभी ल
04:51अब उसमें समझ की चमक भी थी, उस शाम दोनों ने एक लंबी वॉक की, कोई शिकायत नहीं, कोई तकरार नहीं, बस बातें थी, अपेक्षाओं की, समझ की और उस प्यार की जो हर रिष्टे को सहारा देता है, रिया ने आरव से कहा, शायद मुझे रिष्टों को थोड़
05:21खिलते हैं जब उनमें उम्मीदें नहीं, समझ होती है, और रिया की कहानी यही सिखाती है, कि प्यार सिर्फ पाने का नाम नहीं, महसूस करने का नाम है, रिया ने कुछ नहीं कहा, बस दर्वाजा खोला और भीतर चली गई, आरव ने मा से पूछा, मा, आपने रिया को नि
05:51नहीं हुई थी, माणजी ने याद करते हुए कहा, पार्टी की तो कोई बात नहीं हुई थी बेटा, आरव ने कमरे में आते हुई कहा, देखा न, मा की कोई गलती नहीं है, या तो तुम्हें ही दुबारा फॉन कर लेना चाहिए था, या उनसे बात कर लेनी चाहिए थी, �
06:21आरव ने गहरी सांस ली, मा तुम्हारी सेक्रेटरी नहीं है रिया, इस उम्र में वे जितना कर लेती हैं, वही बहुत है, हमें उनसे ज्यादा अपेक्षा नहीं रखनी चाहिए।
06:32रिया ने बड़बडाते हुए कहा, उफ, फिर वही अपेक्षा, अगली सुभे आरव ने आवाज लगाई, रिया, मेरी चार कमीजों में बटन नहीं है, अब मैं आफिस क्या पहनूँ।
06:44रिया ने ठक कर कहा, शाम को आकर लगा दूँगी, अभी कोई और पहन लीजिए।
06:50आरव ने चिड़ कर कहा, अजीब हो तुम भी, पती के कपड़े भी समय पर तयार नहीं कर सकती।
06:56रिया चुप रही, नीचे आरव नौकर पर चिला रहा था, यह क्या, सारे टोस्ट जला दिये, रिया, कल से मेरा नाश्ता तुम तयार करना।
07:05रिया की आँखों में थकान थी, लेकिन उसने कुछ नहीं कहा, शाम को रिया लौटी तो लौन में मांजी और मौसी सास बैठी थी।
07:14मांजी ने कहा, सर ढंक कर इनके पाव चुओ रिया, मौसी जी मुस्कुराई, जीती रहो बहरानी, आजकल की बहुएं अदब कायदे भूल जाती हैं, तुम तो सुसंस्कृत हो, मांजी ने आदेश दिया, जब तक मेरी बहन यहां है, तुम सवेरे जल्दी उठकर चायना�
07:44रिया कमरे में आई, तो आरवा राम से लेटा था, तुम आ गई रिया, जरा एक कप गरम चाय लादो, बहुत ठक गया हूँ, रिया कहना चाहती थी, वह भी तो ठकी है, लेकिन बात बढ़ेगी सोचकर, चुप चाप रसोई की ओर बढ़ गई, चाय की चुस्कियों के बी�
08:14क्या, क्यों, क्या हुआ, तुम्हें कोई परिशानी है उनसे, रिया ने धीरे से कहा, मान जी कह रही थी, कि उनके रहते मुझे ही सवेरे नहाद होकर, चाय नाशता तयार करना होगा, ऐसे तो मैं आफिस के लिए लेट हो जाऊंगी, तो डार्लिंग, सवेरे जल्दी उठ �
08:44प्लीज डियर, मेरा दूध नाशता भी तुम ही तयार कर देना, आखिर मेरा भी तो तुम पर कुछ अधिकार है ना, उसकी मीठी मुसकान ने, जैसे रिया के भीतर की थकान को और गहरा कर दिया, रिया ने कुछ नहीं कहा, सवेरे नहाद होकर, उसने सब के लिए चाय दू
09:14बहु, तुम नाशता कर लो, मैं आरव को सब दे देती हूँ, लेकिन मान जी ने उनका हाथ थाम लिया, तुम रहने दो, ये तो बहु को उपर बुलाने के लिए कर रहा है, मौसी ने एक अर्थपूर्ण मुसकान रिया पर डाली, और फिर बैट गई, रिया ने चुपचा
09:44स्टेशन पर आरव ने उसका हाथ थाम लिया, रिया तुम मुझसे नाराज होकर तो नहीं जा रही हो ना, रिया का दिल हुआ कह दे, परेशान होकर ही जा रही हूँ, लेकिन आरव की आँखों में भावुकता देख, उसका मन भराया, बिचड़ते हुए उसकी आँखें न
10:14के प्यार में खोई रहते थे, क्या उस प्यार की जड़ें इतनी कमजोर थी कि छह महीने में ही दूरी महसूस होने लगी, रिया सोचने लगी, बचपन से ही वह अपनों से अपेक्षाएं रखती आई है, पापा, मम्मी, बहन, और अब पती, सास, लेकिन जब वही लोग उस
10:44तो रिष्टे बोज नहीं लगते, क्या मानजी और आरव ने उसे यह समझाने के लिए ही यह सब किया, हर घटना उसकी आँखों के सामने घूम गई, और फिर उसके होटों पर मुसकान खिल उठी, बीस दिन बाद, मनाली की सुबह में उसने घर फोन मिलाया, हलो मानजी, मा
11:14से बुखार में हूँ, सब काम नौकरों से करवाना पड़ रहा है, ये सब करना तो तुम्हारा कर्तव्य है बहू, मानजी ने तुरंत फोन लिया, मौसी की बात का बुरा मत मानना बेटी, मैं सब संभाल रही हूँ, कोई परेशानी नहीं है, तुम आराम से काम पूरा करो,
11:44उन्हें कभी शिकायत का मौका नहीं दूंगी, उसने तुरंत आरव को ओफिस फोन मिलाया, हलो, उसके स्वर में अब शिकायत नहीं थी, सिर्फ स्नेह था, कभी-कभी रिष्टों को समझने के लिए थोड़ी दूरी जरूरी होती है, ताकि जब हम लोटें, तो सिर्फ अप
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