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00:00आपता जहां वह उती है, तरहम बातें करते हैं, हमाँ से खुश्पुआते हैं
00:14दूसरी महापद और इतनी गहरी बाते हैं
00:16महापद बले ही दूसरी हो
00:18लेकिन इश्क पहला है
00:22जशन मनाओ, आप अपनी पेटी के हाथों फिर लुट गए हो
00:27ये को एमाफी माँडरे नहीं आए प्रेटे की मशूगी को रिष्टे में बदलने आए हैं
00:31उस वक्त खियाल नहीं आये तुमें
00:33जब मैं जलत के समंदर में डुवा हुआ था
00:39उस वक्त कब इलकुल तुमे से खियाल नहीं
00:51बाबब
00:54तुमारा बाबा हो, मेरा दिल क्यामत तक बेहन करेगा तुमारी प्रेव पर
01:04वज्जर मर चुकी है
01:05और ऐसे मरी है कि आज के बाद इस घर से इसकी कबर पे भी कोई नही जाएगा
01:11मैं किसी को भी कंविंस करना नहीं चाहता हूँ
01:14और ये भी नहीं चाहता हूँ कि कोई दूसरा मुझे है कन्मेंस करे
01:16इस खांदान का वारस होने के नाते मैंने एक फैसला किया है
01:30मेरे दौाइं तुम्हारे साथ है
01:32तुम तुम जाके दुश्मनी खतम कर दो
01:35जाओ
01:44तुमीना खुदा के वास्ते बैठ जाओ तुम्हे देख देखे मुझे चक्कर आ रहे हैं अब
02:02तुम्हें को बाद वकात ऐसी जगह पर ले आती है
02:07जहाने इसकी खुबसूरती आहिस्ता आहिस्ता
02:13खत्म होती जाती है
02:43बार बार तुम्हें देखने को तुम से मिलने को करता है
02:55ये बेचानी बेता भी मेरी समझ से बाहर है
02:58अब तुम्हारे बारे मैं सोचता हूँ तुम दिल की धड़कर नितियस हो जाती है
03:03मुझे साफ साफ सुना ही देती है
03:05तुम्हें तु इस बात की भी खबर नहीं कि मैं
03:10तुम्हारे लिए कितना बेकरार
03:13मसब तु दिल की यही असरत है दूआ
03:30कि तुम से मिलके तुम्हें अपना बनाना है
03:37तुम्हें तुम्हें यही फीलिंग्स कभी पता नहीं हुग
03:39अगहें वो कहते हैं न
03:43कि अगर नियत तच्ची हो तो मकसद हासिल हो ही जाता है
03:48मैं तुम्हारा इंतिसार करूंगा
03:54अपिता कैसी सोचते हो
03:59जी रईस
04:00जहां बच्पन से बले बड़े सुना सीखा
04:05उससे कैसे फिर सकते हैं
04:09तुम्हारा बाप भी ऐसी ता
04:10जी रईस
04:12खुन तु फिर खुन पर ही जाता है न
04:14नहीं
04:16कोई कोई खुन
04:20दगा दे जाता है
04:22हेलो वीवर्ज
04:25इस रामसिल के अगाज में आप देखेंगे
04:27यह कहानी है महक की जो एक जहीन खुबसूरत और खुदार लड़की है
04:31महक एक नाम और वकील है
04:33जिसने अपनी महनत और काबियत से शेहर में नाम बनाया है
04:37लेकिन इसकी जिन्देगी में एक ऐसा जखम है जो नजर नहीं आता
04:41एक ऐसा जखम है जो उसे लबजों से मिला
04:44महक के शादी तीन साल पहले अरमान से हुई थी
04:47अरमान एक शायर हसास और खुबसूरत सोच रखने वाला इनसान था
04:52शुरों में सब कुछ खुआब जिसे लगता था
04:54अरमान की बातों में महबब ख्याला और जजबा था
04:57लेकिन वक्के साथ साथ महबब लबजों से जहर में बदलने लगी
05:02जब भी कोई बात अरमान की मर्जी के खिलाब जाती
05:06वो महबब को नीचा दिखाने के लिए लबजों के तलवार चला देता
05:10तुम औरत हो तुमें क्या फता असूल होते है
05:13मेरे इज़्जद को तुमने अपने गरूर से खाक में मिला दिया
05:17वो कभी हाथ नहीं उटाता लेगर उसके अलपाज वो रूती है
05:20तो खामोशी से सहती तो तनहाई में महब जो अदालत में सब के लिए इनसाब मांगती थी
05:26अपने लिए खामोश हो गई लोग कहते हैं कितने खुशनसीब है शोहर शायर है
05:32कोई ये नहीं जानता था कि उसके लबज महब के दिल पर जखम चोड़ते जा रहे है
05:37एक दिन महब का दालत में एक ऐसी खातून का कैस लड़ रही होती है
05:41जिसे उसके शोहर ने तलाग दी रही है
05:43सिरब इसलिए के जवाब देती थी
05:48महब कि उसी दिन की रात आईनी में खुद से पूचती है
05:52मैं दुसरे के हक के लिए लड़ती हूँ
05:54तो वो अपने लिए क्यों नहीं
05:56वो पेसला करती है
05:57खामुशी जुलम के हक में गवाही होती है
06:00महे करमान से अहलेहदगी का पेसला कर लेती है
06:04माश्रा शोर मचाता है
06:05लोग के तेक शायर से कौन तलाग लेता है
06:08जिरामसिल के हुआले से
06:10अपने राए के जाहर लाजमी कमेंट करें
06:12साथ में हमारा योटूब का चेनल सब्सक्राइब करना मत बूलिए
06:15तेंस पर वाचिंग अलाहाफिज
06:17हेलो वीवर्ज
06:18इस रामसिल के अगाज में आप देखेंगे
06:20ये कहानी है महे की जो एक जहीन
06:23खुबसूरत और खुदार लड़की है
06:24महे के नामवर वकील है
06:26जिसने अपनी महनत और काबिलियत से
06:29शेहर में नाम बनाया है
06:31लेकिन इसकी जिन्दगी में एक ऐसा जखम है
06:33जो नजर नहीं आता
06:34एक ऐसा जखम है जो उसे लबजों से मिला
06:37महे के शादी तीन साल पहले अर्मान से हुई थी
06:40अर्मान एक शायर हसास और खुबसूरत सोच रखने वला इनसां था
06:45शुरों में सब कुछ खुआब जी से लगता था
06:48अर्मान की बातों में महबबत ख्याला और जजबा था
06:51लेकिन वक्ते साथ साथ महबबत लबजों से जहर में बदलने लेगी
06:56जब भी कुई बात अर्मान की मर्जी के खिलाब जाती
06:59वो महे को नीचा दिकाने के लिए लबजों के तलवार चला देता
07:03तुम औरत हो तुमें क्या फता असूल होते है
07:07मेरे इज़त को तुम ने अपने गरूर से खाक में मिला दिया
07:10वो कभी हाथ नहीं उटाता लेगर उसके अलपाज वो रूती है
07:13तो खामोशी से सहती तो तनहाई में
07:17महेक जो अदालत में सब के लिए इनसाफ मांगती थी
07:20अपने लिए खामोश हो गई लोग केते हैं
07:23कितने खुशनसीब है शोहर शायर है
07:25कोई यह नहीं जानता तक कि उसके लपस महेक के दिल पर जखम चोड़ते जा रहे है
07:30एक दिन महेक अदालत में एक ऐसी खातून का कैस लड़ रही होती है
07:35जिसे उसके शोहर ने तलाक दी रही है
07:37सिरब इसलिए के जवाब देती थी
07:41महेक उसी दिन की रात आईनी में खुद से पूछती है
07:45मैं दुसरे के हक के लिए लड़ती हूँ
07:48तो वो अपने लिए क्यों नहीं
07:50वो पेसला करती है
07:51खामुशी जुलम के हक में गवाही होती है
07:54महेक अर्मान से अहलेहदगी का पेसला कर लेती है
07:57माश्रा शोर मचाता है
07:59लोग के तेक शायर से कौन तलाक लेता है
08:02जिरामसिल के हुआले से
08:03अपने राए के जहार लाजमी कमेंट करें
08:06साथ में हमारा यूटूब का चेनल सबस्क्राइब करना मत बूलिए
08:09तेंस पर वाचिंग अलाहाफिज
08:10हेलो वीवर्ज
08:12इस रामसिल के अगाज में आप देखेंगे
08:14ये कहानी है महेक की जो एक जहीन
08:16खुबसूरत और खुदार लड़की है
08:18महेक एक नामवर वकील है
08:20जिसने अपनी महनत और गाबिलियत से
08:23शेहर में नाम बनाया है
08:24लेकिन इसकी जिन्दगी में एक ऐसा जखम है
08:26जो नजर नहीं आता
08:28एक ऐसा जखम है जो उसे लबजों से मिला
08:31महेक के शादी तीन साल पहले अर्मान से हुई थी
08:34अर्मान एक शायर हसास और खुबसूरत सोच रखने वला इनसां था
08:39शोरों में सब कुछ खुआब जीसे लगता था
08:41अर्मान की बातों में महबब ख्याला और जजबा था
08:44लेकिन वक्ते साथ साथ महबब लबजों से जहर में बदलने लगी
08:49जब भी कोई बात अर्मान की मर्जी के खिलाब जाती
08:53वो महबब को नीचा दिखाने के लिए लबजों के तलवार चला देता
08:57तुम औरत हो तुमें क्या पता असूल होते है
09:00मेरे इज़ित को तुमने अपने गरूर से खाक में मिला दिया
09:04वो कभी हाथ नहीं उटाता लेगर उसके अलपाज वोरूती है
09:07तो खामोशी से सहती तो तनहाई में महब जो अदालत में सब के लिए इनसाब मांगती थी
09:13अपने लिए खामोश हो गई लोग केते हैं कितने खुश नसीब है शोहर शायर है
09:19कोई यह नहीं जानता था कि उसके लबस महब के दिल पर जखम चोड़ते जा रहे है
09:24एक दिन महब का अदालत में एक ऐसी खातुन का कैस लड़ रही होती है
09:28जिसे उसके शोहर ने तलाग दी रही है
09:30सिरब इसलिए के जवाब देती थी
09:35में किसी दिन की रात आईनी में खुद से पूचती है
09:39मैं दुसरे के हक लिए लड़ती हूँ
09:41तो वो अपने लिए क्यों नहीं
09:43वो पेसला करती है
09:44खामुशी जुलम के हक में गवाही होती है
09:47में करमान से अहलेहदगी का पेसला कर लेती है
09:51माशरा शोर मचाता है
09:53लोग के तेक शायर से कौन तलाक लेता है
09:55जुरामसिल के हुआले से
09:57अपने राए के ज़ार लाजमी कमेंट करें
09:59साथ में हमारा यूटूब का चेनल सबस्क्राइब करना मत बूलिए
10:02तेंस पर वाचिंग अला हाफिज
10:04हेलो वीवर्स
10:05इस रामसिल के अगाज में आप देखेंगे
10:08ये कहानी है महक की जो एक जहीन
10:10खुबसूरत और खुदार लड़की है
10:11महक एक नामवर वकील है
10:13जिसने अपनी महनत और गाबियत
10:16से शेहर में नाम बनाया है
10:18लेकिन इसकी जिन्दगी में एक ऐसा
10:19जखम है जो नजर नहीं आता
10:21एक ऐसा जखम है जो उसे लबजों से मिला
10:24महक के शादी तीन साल पहले अरमान से हुई थी
10:27अरमान एक शायर हसास और खुबसूरत सोच रखने वाला
10:31इनसां था शोरों में सब कुछ
10:34खुबस जिसे लगता था
10:35अरमान की बातों में महबत ख्याला और जज़वा था
10:38लेकिन वक के साथ साथ महबत लबजों से जहर में बदलने लगी
10:43जब भी कोई बात अरमान की मर्जी के खिलाब जाती
10:46वो महक को नीचा दिकाने के लिए लबजों के तलवार चला देता
10:50तुम आवरत हो तुमें किया फता असूल होते है
10:54मेरे इज़द को तुमने अपने गरूर से खाक में मिला दिया
10:57वो कभी हाथ नहीं उटाता लेगरें उसके अलपाज वरूती है
11:00तो खामोशी से सहती तो तनहाई में
11:04मेहिक जो अदालत में सब के लिए इनसाब मांगती थी
11:07अपने लिए खामोश हो गई लोग कहते है
11:09कितने खुशनसीब है शोहर शायर है
11:12कोई यह नहीं जानता तक कि उसके लबज मेहिक के दिल पर जखम चोड़ते जा रहे है
11:17एक दिन मेहिक अदालत में एक ऐसी खातून का केस लड़ रही होती है
11:22जिसे उसके शोहर ने तलाग दी रही है
11:24सिरब इसलिए के जवाब देती थी
11:28मेहिक उसी दिन की रात आईनी में खुद से पूचती है
11:32मैं दुसरे के हक के लिए लड़ती हूँ
11:35तो वो अपने लिए क्यों नहीं
11:37वो पेसला करती है
11:38खामुशी जुलम के हक में गवाही होती है
11:41मेह करमान से अहलेहदगी का पेसला कर लेती है
11:44माशरा शोर मचाता है
11:46लोग के तेक शायर से कौन तलाग लेता है
11:49जिरामसिल के हुआले से
11:50अपने राए के जहार लाजमी कमेंट करें
11:53साथ में हमारा योटूब का चेनल सबस्क्राइब करना मत बूलिए
11:56तेंस पर वाचिंग अलाहाफिज
11:57हेलो वीवर्ज
11:59इस रामसिल के अगाज में आप देखेंगे
12:01ये कहानी है मेह की जो एक जहीन
12:03खुबसूरत और खुदार लड़की है
12:05मेह की एक नामा और वकील है
12:07जिसने अपनी महनत और काबिलियत से
12:10शेहर में नाम बनाया है
12:11लेकिन इसकी जिन्दगी में एक ऐसा जखम है
12:13जो नजर नहीं आता
12:15एक ऐसा जखम है जो उसे लबजों से मिला
12:18महक के शादी ती इन साल पहले अर्मान से हुई थी
12:21अर्मान एक शायर हसास और खुबसूरत सो चरकने वला इनसां था
12:26शोरो में सब कुछ खुआब जिसे लगता था
12:28अर्मान की बातों में महबत ख्याला और जजबा था
12:31लेकिन वक के साथ साथ महबत लबजों से जहर में बदलने लेगी
12:36जब भी कोई बात अर्मान की मर्जी के खिलाब जाती
12:40वो महक को नीचा दिकाने के लिए लबजों के तलवार चला देता
12:44तुम औरत हो तुमें क्या पता असूल होते है
12:47मेरे इज़त को तुम ने अपने गरूर से खाक में मिला दिया
12:51वो कभी हाथ नहीं उटाता लेगरें उसके अलपाज वोरूती है
12:54तो खामोशी से सहती तो तनहाई में
12:57महक जो अदालत में सब के लिए इनसाफ मांगती थी
13:00अपने लिए खामोश हो गई लोग केते हैं
13:03कितने खुशनसीब है शोहर शायर है
13:06कोई यह नहीं जानता था कि उसके लपस महक के दिल पर जखम चोड़ते जा रहे है
13:11एक दिन महक अदालत में एक ऐसी खातून का कैस लड़ रही होती है
13:15जिसे उसके शोहर ने तलाक दी रही है
13:18सिरब इसलिए के जवाब देती थी
13:22महक उसी दिन की रात आईनी में खुद से पूचती है
13:26मैं दुसरे के हक लिए लड़ती हूँ
13:28तो वो अपने लिए क्यों नहीं
13:30वो पेसला करती है
13:31खामोशी जुलम के हक में गवाही होती है
13:34महक अर्मान से अहल उद्गी का पेसला कर लेती है
13:38माशरा शोर मचाता है
13:40लोग के तेक शायर से क्वोन तलाक लेता है
13:42जिरामस्तिल के हवाले से
13:44अपने राए के जाहर लाजमी कमेंट करें
13:46साथ में हमारा यूटूब का चेनल सब्सक्राइब करना मत बोलिए तेंस पर वाचिंग अला हाफिज
13:51हेलो वीवर्ज इस रामसिल के अगाज में आप देखेंगे ये कहानी है महक की जो एक जहीन खुबसूरत और खुदार लड़की है
13:58महक एक नामवर वकील है जिसने अपनी महनत और गाबिलियत से शेहर में नाम बनाया है
14:05लेकिन इसकी जिन्दगी में एक ऐसा जखम है जो नजर नहीं आता एक ऐसा जखम है जो उसे लबजों से मिला
14:11महक के शादी तीन साल पहले अर्मान से हुई थी
14:14अर्मान एक शायर हसास और खुबसूरत सोच रखने वाला इनसां था
14:19शुरों में सब कुछ खुआब जिसे लगता था
14:22अर्मान की बातों में महबत ख्याला और जजबा था
14:25लेकिन वक के साथ साथ महबत लबजों से जहर में बदलने लगी
14:30जब भी कोई बात अर्मान की मर्जी के खिलाब जाती
14:33वो महबत को नीचा दिकाने के लिए लबजों के तलवार चला देता
14:37तुम आवरत हो तुमें क्या फता उसूल होते है
14:41मेरे इज़त को तुमने अपने गरूर से खाक में मिला दिया
14:44वो कभी हाथ नहीं उटाता लेगर उसके अलपाज वोरूती है
14:48तो खामोशी से सहती तो तनहाई में महग जो अदालत में सब के लिए इनसाब मांगती थी
14:54अपने लिए खामोश हो गई लोग केते हैं कितने खुशनसीब है शोहर शायर है
14:59कोई ये नहीं जानता था कि उसके लबस महग के दिल पर जखम चोड़ते जा रहे है
15:04एक दिन महग अदालत में एक ऐसी खातुन का केस लड़ रही होती है
15:09जिसे उसके शोहर ने तलाग दी रही है
15:11सिरब इसलिए के जवाब देती थी
15:15मैं किसी दिन की रात आयनी में खुद से पूचती है
15:20मैं दुसरे के हक लिए लंटी हूँ
15:22तो वो अपने लिए क्यों नहीं
15:24वो पेसला करती है
15:25खामोशी जुलम के हक में गवाई होती है
15:28में करमान से अहले हदगी का पेसला कर लेती है
15:31माश्रा शोहर मचाता है
15:33लोग के थे एक शायर से कौन तलाक लेता है जिरामसिल के हुआले से
15:37अपने राए की जार लाजमी कमेंट करें
15:40साथ में हमारा योटूब का चेनल सबस्क्राइब करना मत बूलिए
15:43तेंस पर वाचिंग अला हाफिज
15:44हेलो वीवर्ज इस रामसिल के अगाज में आप देखेंगे
15:48ये कहानी है महक की जो एक जहीन खुबसूरत और खुदार लड़की है
15:52महक एक नाम और वकील है जिसने अपनी महनत और काबिलियत से
15:57शेहर में नाम बनाया है लेकिन इसकी जिन्दगी में एक ऐसा जखम है
16:01जो नजर नहीं आता एक ऐसा जखम है जो उसे लबजों से मिला
16:05महक के शादी तीन साल पहले अर्मान से हुई थी
16:08अर्मान एक शायर हसासा और खुबसूरत सोच रखने वाला इनसां था
16:13शुरों में सब कुछ खुआब जिसे लगता था
16:16अर्मान की बातों में महबत ख्याला और जजबा था
16:18लेकिन वक के साथ साथ महबत लबजों से जहर में बदलने लगी
16:23जब भी कोई बात अर्मान की मर्जी के खिलाब जाती
16:27वो महक को नीचा दिकाने के लिए लबजों के तलवार चला देता
16:31तुम आवरत हो तुमें क्या फता असूल होते है
16:34मेरे इज़त को तुमने अपने गरूर से खाक में मिला दिया
16:38वो कभी हाथ नहीं उटाता लेगरें उसके अलपाज वरूती है
16:41तो खामोशी से सहती तो तनहाई में
16:44मेहक जो अदालत में सब के लिए इनसाब मांगती थी
16:47अपने लिए खामोश हो गई लोग कहते हैं
16:50कितने खुशनसीब है शोहर शायर है
16:53कोई ये नहीं जानता था कि उसके लबज मेहक के दिल पर जखम चोड़ते जा रहे है
16:58एक दिन मेहक अदालत में एक ऐसी खातुन का केस लड़ रही होती है
17:02जिसे उसके शोहर ने तलाग दी रही है
17:05सिरब इसलिए के जवाब देती थी
17:09मेहक उसी दिन की रात आईनी में खुद से पूचती है
17:13में दुसरे के हक लिए लड़ती हूँ
17:15तो वो अपने लिए क्यों नहीं
17:17वो पेसला करती है
17:18खामुशी जुलम के हक में गवाही होती है
17:21महक अर्मान से अहले हदगी का पेसला कर लेती है
17:25माश्रा शोर मचाता है
17:27लोग के थे एक शायर से कौन तलाग लेता है
17:29जिरामसिल के हुआले से
17:31अपने राए के जहार लाजमी कमेंट करें
17:33साथ में हमारा योटूब का चेनल सब्सक्राइब करना मत बूलिए
17:36तेंस पर वाचिंग अलाहाफिज
17:38लो वीवर्ज इस रामसिल के अगाज में आप देखेंगे
17:42यह कहानी है महक की जो एक जहीन
17:44खुबसूरत और खुदार लड़की है
17:45महक एक नाम और वकील है
17:47जिसने अपनी महनत और काबिलियत से
17:50शेहर में नाम बनाया है
17:52लेकिन इसकी जिन्दगी में एक ऐसा जखम है
17:54जो नजर नहीं आता
17:55एक ऐसा जखम है जो उसे लफजों से मिला
17:58महक के शादी ती इन साल पहले अर्मान से हुई थी
18:01अर्मान एक शायर हसास और खुबसूरत सोच रखने वला इनसां था
18:06शुरों में सब कुछ खुआब जिसे लगता था
18:09अर्मान की बातों में महबत ख्याला और जजबा था
18:12लेकिन वक के साथ साथ महबत लफजों से जहर में बदलने लगी
18:17जब भी कोई बात अर्मान की मर्जी के खिलाब जाती
18:20वो महक को नीचा दिखाने के लिए लफजों के तलवार चला देता
18:24तुम आउरत हो तुमें क्या फता असूल होते है
18:28मेरे इज़त को तुम ने अपने गरूर से खाक में मिला दिया
18:31वो कभी हाथ नहीं उटाता लेगर उसके अलपाज वो रूती है
18:35तो खामोशी से सहती तो तनहाई में
18:38महक जो अदालत में सब के लिए इनसाब मांगती थी
18:41अपने लिए खामोश हो गई लोग केते हैं
18:44कितने खुशनसीब है शोहर शायर है
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18:51एक दिन महक अदालत में एक ऐसी खातून का कैस लड़ रही होती है
18:56जिसे उसके शोहर ने तलाक दी लिए
18:58सिरब इसलिए के जवाब देती थी
19:02महक उसी दिन की रात आईनी में खुद से पूछती है
19:07मैं दुसरे के हक के लिए लड़ती हूँ
19:09तो वो अपने लिए क्यों नहीं
19:11वो पेसला करती है
19:12खामोशी जुलम के हक में गवाही हुती है
19:15महेक अर्मान से अहल एहदगी का पेसला कर लेती है
19:18माश राश और मचाता है
19:20लोग के तेक शायर से कौन तलाक लेता है
19:23जिरामसिल के हवाले से
19:25अपने राए के जहार लाजमी केमेंट करे
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19:30तेंस पर वाचिंग अला हाफिस
19:31हेलो वीवर्ज इस रामसिल के अगाज में आप देखेंगे
19:35ये कहानी है महक की जो एक जहीन खुबसूरत और खुदार लड़की है
19:39महक एक नाम और वकील है
19:41जिसने अपनी महनत और गाबिलियत से शेहर में नाम बनाया है
19:45लेकिन इसकी जिन्दगी में एक ऐसा जखम है जो नजर नहीं आता
19:49एक ऐसा जखम है जो उसे लबजों से मिला
19:52महक के शादी तीन साल पहले अर्मान से हुई थी
19:55अर्मान एक शायर हसास और खुबसूरत सोच रखने वला इनसां था
20:00शुरों में सब कुछ खुआब जिसे लगता था
20:03अर्मान की बातों में महबब ख्याला और जजबा था
20:05लेकिन वक के साथ साथ महबब लबजों से जहर में बदलने लगी
20:11जब भी कोई बात अर्मान की मर्जी के खिलाब जाती
20:14वो महबब को नीचा दिकाने के लिए लबजों के तलवार चला देता
20:18तुम आवरत हो तुमें क्या पता असूल होते है
20:21मेरे इज़ित को तुमने अपने गरूर से खाक में मिला दिया
20:25वो कभी हाथ नहीं उटाता लेकर उसके अलपाज वोरूती है
20:28तो खामोशी से सहती तो तनहाई में महब जो अदालत में सब के लिए इनसाफ मांगती थी
20:34अपने लिए खामोश हो गई लोग कहते हैं कितने खुशनसीब है शोहर शायर है
20:40कोई यह नहीं जानता था कि उसके लबस महब के दिल पर जखम चोड़ते जा रहे है
20:45एक दिन महब का दालत में एक ऐसी खातुन का कैस लड़ रही होती है
20:49जिसे उसके शोहर ने तलाग दी रही है
20:52सिरब इसलिए के जवाब देती थी
20:56महिक उसी दिन की रात आईनी में खोड से पोचती है
21:00मैं दुसरे के हक के ले लबती हूँ
21:03तो वो अपने लिए क्यों नहीं
21:04वो पेसला करती है
21:05खामोशी जुलम के हक में गभा ही होती है
21:08में कर्मान से अहलेहदगी का पेसला कर लेती है
21:12माश राश राश और मचाता है
21:14लोग के तेक शायर से कौन तलाक लेता है
21:16इस रामसिल के हुआले से
21:18अपने राई की जाहर लाजमी केमेंट करें
21:20साथ में हमारा यूटूब का चेनल सबस्क्राइब करना मत बूलिए
21:23तेंस पर वाचिंग अला हाफिस
21:25हेलो वीवर्ज
21:27इस रामसिल के अगाज में आप देखेंगे
21:29यह कहानी है महक की जो एक जहीन
21:31खुबसूरत और खुदार लड़की है
21:32महक एक नामवर वकील है
21:34जिसने अपनी महनत और काबिलियत
21:37से शेहर में नाम बनाया है
21:39लेकिन इसकी जिन्देगी में एक ऐसा जखम है
21:41जो नजर नहीं आता
21:42एक ऐसा जखम है जो उसे लबजों से मिला
21:45महक के शादी तीन साल पहले अर्मान से हुई थी
21:48अर्मान एक शायर
21:50हसास और खुबसूरत सोच रखने वाला
21:52इनसां ता
21:53शोरों में सब कुछ
21:55खुआब जी से लगता था
21:56अर्मान की बातों में महबत ख्याला और जजबा था
21:59लेकिन वक्ते साथ साथ महबत लबजों से जहर में बदलने लगी
22:04जब भी कोई बात अर्मान की मर्जी के खिलाब जाती
22:07वो महबत को नीचा दिखाने के लिए लबजों के तलवार चला देता
22:11तुम आवरत हो तुमें क्या फता असूल होते है
22:15मेरे इज़त को तुमने अपने गरूर से खाक में मिला दिया
22:18वो कभी हाथ नहीं उटाता लिए उसके अलपा जोरूती है
22:22तो खामोशी से सहती तो तनहाई में महग जो अदालत में सब के लिए इनसाब मांगती थी
22:28अपने लिए खामोश हो गई लोग कहते हैं कितने खुशनसीब है शोहर शायर है
22:33कोई यह नहीं जानता था कि उसके लबज महग के दिल पर जखम चोड़ते जा रहे है
22:38एक दिन महग का दालत में एक ऐसी खातून का कैस लड़ रही होती है
22:43जिसे उसके शोहर ने तलाग दी रही है
22:45सिरब इसलिए के जवाब देती थी
22:49महग उसी दिन की रात आईनी में खुद से पूचती है
22:54मैं दुसरे के हक के लिए लड़ती हूँ
22:56तो वो अपने लिए क्यों नहीं
22:58वो पेसला करती है
22:59खामुशी जुलम के हक में गवाही होती है
23:02मह करमान से अहलेहदगी का पेसला कर लेती है
23:05माशरा शोर मचाता है
23:07लोग के तेक शायर से कौन तलाग लेता है
23:10जिरामसिल के हुआले से
23:12अपने राए के जाहर लाजमी कमेंट करें
23:14साथ में हमारा योटूब का चेनल सब्सक्राइब करना मत बूलिए
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23:20इस रामसिल के अगाज में आप देखेंगे
23:22ये कहानी है मह की जो एक जहीन
23:24खुबसूरत और खुदार लड़की है
23:26महक एक नामवर वकील है
23:28जिसने अपनी महनत और काबिलियत से
23:31शेहर में नाम बनाया है
23:32लेकिन इसकी जिन्दगी में एक ऐसा जखम है
23:35जो नजर नहीं आता
23:36एक ऐसा जखम है जो उसे लबजों से मिला
23:39महक के शादी तीन साल पहले अर्मान से हुई थी
23:42अर्मान एक शायर हसास और खुबसूरत सोच रखने वला इनसां था
23:47शुरों में सब कुछ खुआब जिसे लगता था
23:50अर्मान की बातों में महबत ख्याला और जजबा था
23:53लेकिन वक के साथ साथ महबत लबजों से जहर में बदलने लेगी
23:58जब भी कुई बात अर्मान की मर्जी के खिलाब जाती
24:01वो महक को नीचा दिकाने के लिए लबजों के तलवार चला देता
24:05तुम आउरत हो तुमें क्या फता असूल होते है
24:08मेरे इज़त को तुम ने अपने गरूर से खाक में मिला दिया
24:12वो कभी हाथ नहीं उटाता लेगरें उसके अलपाज वरूती है
24:15तो खामोशी से सहती तो तनहाई में
24:18महक जो अदालत में सब के लिए इनसाब मांगती थी
24:22अपने लिए खामोश हो गई लोग केते हैं
24:24कितने खुशनसीब है शोहर शायर है
24:27कोई यह नहीं जानता तक कि उसके लपस महक के दिल पर जखम चोड़ते जा रहे है
24:32एक दिन महक अदालत में एक ऐसी खातून का कैस लड़ रही होती है
24:36जिसे उसके शोहर ने तलाग दी रही है
24:39सिरब इसलिए के जवाब देती थी
24:43महक उसी दिन की रात आईनी में खुद से पूछती है
24:47मैं दुसरे के हक के लिए लड़ती हूँ
24:50तो वो अपने लिए क्यों नहीं
24:51वो पेसला करती है
24:52खामुशी जुलम के हक में गवाही होती है
24:55महक अर्मान से अहले हदगी का पेसला कर लेती है
24:59माशरा शोर मचाता है
25:01लोग के तेक शायर से कौन तलाग लेता है
25:03जिरामसिल के हुआले से
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25:12हेलो वीवर्ज
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25:20महक एक नामवर वकील है
25:21जिसने अपने महनत और टाबियत से शेहर में नाम बनाया है
25:26लेकिन इसकी जिनदगी में एक ऐसा जखम है जो नज़र नहीं आता
25:29एक ऐसा जखम है जो उसे लबजों से मिला
25:32महक के शादी तीन साल पहले अर्मान से हुई थी
25:35अर्मान एक शायर हसास और खुबसूरत सोच रखने वला इनसां था
25:40शुरों में सब कुछ खुआब जी से लगता था
25:43अर्मान की बातों में महबत ख्याला और जजबा था
25:46लेकिन वक्ते साथ साथ महबत लबजों से जहर में बदलने लेगी
25:51जब भी कोई बात अर्मान की मर्जी के खलाब जाती
25:54वो महबत को नीचा दिखाने के लिए लबजों के तलवार चला देता
25:58तुम औरत हो तुमें क्या पता असूल होते है
26:02मेरे इज़्जद को तुमने अपने गरूर से खाक में मिला दिया
26:06वो कभी हाथ नहीं उटाता लेगर उसके अलपाज वोरूती है
26:09तो खामोशी से सहती तो तनहाई में महब जो अदालत में सब के लिए इनसाब मांगती थी
26:15अपने लिए खामोश हो गई लोग कितने खुशनसीब है शोहर शायर है
26:21कोई यह नहीं जानता था कि उसके लपस महब के दिल पर जखम चोड़ते जा रहे है
26:26एक दिन महब का अदालत में एक ऐसी खातुन का कैस लड़ रही होती है
26:30जिसे उसके शोहर ने तलाग दी रही है
26:32सिरब इसलिए के जवाब देती थी
26:36में किसी दिन की रात आएनी में खुद से पूछती है
26:41मैं दुसरे के हाग के लिए लंटी हूँ
26:43तो वो अपने लिए क्यो नहीं वो पेसला करते है
26:46खमोशी जलम के हक में गवाई होती है
26:49में करमान से अहलेहडगी का पेसला कर लेती है
26:53माश्रा शोहर मचाता है
26:54लोग के थे एक शायर से कौन तलाक लेता है जिरामसिल के हुआले से अपने राए की जाहर लाजमी कमेंट करें
27:01साथ में हमारा यूटूब का चीनल सबस्क्राइब करना मत बूलिए ते इस पर वाचिंग अला हाफिस
27:05हेलो वीवर्ज इस रामसिल के अगाज में आप देखेंगे ये कहानी है महक की जो एक जहीन खुबसूरत और खुदार लड़की है
27:13महक एक नाम और वकील है जिसने अपनी महनत और काबिलियत से शेहर में नाम बनाया है
27:19लेकिन इसकी जिन्देगी में एक ऐसा जखम है जो नजर नहीं आता एक ऐसा जखम है जो उसे लबजों से मिला
27:26महक के शादी तीन साल पहले अर्मान से हुई थी अर्मान एक शायर हसास और खुबसूरत सो चरकने वाला इनसां ता
27:34शरो में सब कुछ खुआ �बज़िससे लगता था आर्मान की बातों में मह्बबत ख्याला और जजबाता लेकिन वक्ते साथ साथ महबत लबजों से जहर में बदलने लेगी
27:45जब भी कोई बात अर्मान की मर्जी के खिलाब जाती
27:48वो महक को नीचा दिकाने के लिए लबजों के तलवार चला देता
27:52तुम आवरत हो तुमें क्या पता असूल होते है
27:55मेरे इज़त को तुम ने अपने गरूर से खाक में मिला दिया
27:59वो कभी हाथ नहीं उटाता लेगर उसके अलपाज वरूती है
28:02तो खामोशी से सहती तो तनहाई में महक जो अदालत में सब के लिए इनसाब मांगती थी
28:09अपने लिए खामोश हो गई लोग केते हैं कितने खुशनसीब है शोहर शायर है
28:14कोई यह नहीं जानता था कि उसके लपस महक के दिल पर जखम चोड़ते जा रहे है
28:19एक दिन महक अदालत में एक ऐसी खातून का केस लड़ रही होती है
28:23जिसे उसके शोहर ने तलाग दी रही है
28:26सिरब इसलिए के जवाब देती थी
28:30में किसी दिन की रात आईनी में खुद से पूचती है
28:34मैं दुसरे के हक अले लड़ती हूँ
28:37तो वो अपने लिए क्यों नहीं
28:38वो पेसला करती है
28:39खामुशी जुलम के हक में गवाही होती है
28:42में करमान से अहलेहदगी का पेसला कर लेती है
28:46माश राश और मचाता है
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29:13लेकिन इसकी जिन्दगी में एक ऐसा
29:15जखम है जो नजर नहीं आता
29:16एक ऐसा जखम है जो उसे लबजों से मिला
29:19महक के शादी तीन साल पहले
29:21अर्मान से हुई थी
29:22अर्मान एक शायर
29:24हसास और खुबसूरत सोच रखने वाला
29:27इनसान था
29:28शोरों में सब कुछ खुआप जिसे लगता था
29:30अर्मान की बातों में महबत ख्याला और जजबा था
29:33लेकिन वक्ते साथ साथ महबत लबजों से जहर में बदलने लगी
29:38जब भी कोई बात अर्मान की मर्जी के खिलाब जाती
29:41वो महक को नीचा दिकाने के लिए लबजों के तलवार चला देता
29:45तुम आवरत हो तुमें क्या फता असूल होते है
29:49मेरे इज़त को तुम ने अपने गरूर से खाक में मिला दिया
29:53वो कभी हाथ नहीं उटाता लेगर उसके अलपाज वोरूती है
29:56तो खामोशी से सहती तो तनहाई में
29:59मेहिक जो अदालत में सब के लिए इनसाब मांगती थी
30:02अपने लिए खामोश हो गई लोग कहते है
30:04कितने खुशनसीब है शोहर शायर है
30:08कोई यह नहीं जानता था कि उसके लबज मेहिक के दिल पर जखम चोड़ते जा रहे है
30:13एक दिन मेहिक अदालत में एक ऐसी खातून का केस लड़ रही होती है
30:17जिसे उसके शोहर ने तलाग दी रही है
30:19सिरब इसलिए के जवाब देती थी
30:23मेहिक उसी दिन की रात आईनी में खुद से पूचती है
30:28मैं दुसरे के हक लिए लड़ती हूँ
30:30तो वो अपने लिए क्यों नहीं
30:32वो पेसला करती है
30:33खामुशी जुलम के हक में गवाही होती है
30:36मेह करमान से अहले हदगी का पेसला कर लेती है
30:40माश्रा शोर मचाता है
30:41लोग के थे एक शायर से कौन तलाग लेता है
30:44जिरामसिल के हुआले से
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30:52हेलो वीवर्ज
30:54इस रामसिल के अगाज में आप देखेंगे
30:56ये कहानी है मेह की जो एक जहीन
30:58खुबसूरत और खुदार लड़की है
31:00मेह की एक नाम और वकील है
31:02जिसने अपनी महनत और काबिलियत से
31:05शेहर में नाम बनाया है
31:06लेकिन इसकी जिन्दगी में एक ऐसा जखम है
31:09जो नजर नहीं आता
31:10एक ऐसा जखम है जो उसे लबजों से मिला
31:13महक के शादी ती इन साल पहले अर्मान से हुई थी
31:16अर्मान एक शायर हसास और खुबसूरत सो और चरकने वला इनसां था
31:21शुरों में सब कुछ खुआब जिसे लगता था
31:24अर्मान की बातों में महबबब ख्याला और जजबा था
31:27लेकिन वक के साथ साथ महबबब लबजों से जहर में बदलने लेगी
31:32जब भी कुई बात अर्मान की मर्जी के खिलाब जाती
31:35वो महक को नीचा दिकाने के लिए लबजों के तलवार चला देता
31:39तुम आवरत हो तुमें क्या फता असूल होते है
31:42मेरे इज़त को तुम ने अपने गरूर से खाक में मिला दिया
31:46वो कभी हाथ नहीं उटाता लेगर उसके अलपाज वोरूती है
31:49तो खामोशी से सहती तो तनहाई में
31:52महक जो अदालत में सब के लिए इनसाफ मांगती थी
31:56अपने लिए खामोश हो गई लोग कहते हैं
32:12सिर्ब इसलिए के जवाब देती थी
32:17मेरे कि उसी दिन की रात आईनी में खुद से पूचती है
32:21मैं दुसरे के हक लिए लड़ती हूँ
32:24तो वो अपने लिए क्यों नहीं
32:26वो पेसला करती है खामोशी जुलम के हक में गवाही होती है
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32:50यह कहानी है मेह की जो एक जहीन खुबसूरत और खुदार लड़की है
32:54मेह के नाम और वकील है
32:55जिसने अपनी महनत और काबिलियत से
32:58शेहर में नाम बनाया है
33:00लेकिन इसकी जिन्देगी में एक ऐसा जखम है जो नजर नहीं आता
33:04एक ऐसा जखम है जो उसे लबजों से मिला
33:06महक के शादी ती इन साल पहले अर्मान से हुई थी
33:09अर्मान एक शायर हसासा और खुबसूरत सोच रखने वाला इनसां ता
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33:17अर्मान की बातों में महबत ख्याला और जजबा था
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33:25जब भी कोई बात अर्मान की मर्जी के खिलाब जाती
33:28वो महबत को नीचा दिखाने के लिए लबजों के तलवार चला देता
33:32तुम आवरत हो तुमें क्या पता असूल होते है
33:36मेरे इज़त को तुमने अपने गरूर से खाक में मिला दिया
33:40वो कभी हाथ नहीं उटाता लेगर उसके अलपाज वोरूती है
33:43तो खामोशी से सहती तो तनहाई में महग जो अदालत में सब के लिए इनसाब मांगती थी
33:49अपने लिए खामोश हो गई लोग कहते हैं कितने खुशनसीब है शोहर शायर है
33:55कोई यह नहीं जानता था कि उसके लबज महग के दिल पर जखम चोड़ते जा रहे है
34:00एक दिन महग का दालत में एक ऐसी खातून का केस लड़ रही होती है
34:04जिसे उसके शोहर ने तलाग दी रही है
34:06सिरब इसलिए के जवाब देती थी
34:10महग उसी दिन की रात आईनी में खुद से पूचती है
34:15मैं दुसरे के हक लिए लड़ती हूँ
34:17तो वो अपने लिए क्यों नहीं
34:19वो पेसला करती है
34:20खामुशी जुलम के हक में गवाही होती है
34:23महे करमान से अहले हदगी का पेसला कर लेती है
34:27माश राश और मचाता है
34:28लोग के ते एक शायर से कौन तलाग लेता है
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34:33अपने राश के ज़ार लाजमी कमेंट करें
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34:38ते इस पर वाचिंग अलाँ हाफिज
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34:43ये कहानी है महे की जो एक जहीन
34:45खुबसूरत और खुदार लड़की है
34:47महे की नामा और वकील है
34:49जिसने अपनी महनत और गाबिलियत से
34:52शेहर में नाम बनाया है
34:53लेकिन इसकी जिन्दगी में एक ऐसा जखम है
34:56जो नजर नहीं आता
34:57एक ऐसा जखम है जो उसे लफजों से मिला
35:00महे के शादी तीन साल पहले अर्मान से हुई थी
35:03अर्मान एक शायर हस्तास और खुबसूरत सोच रखने वाला इनसां था
35:08शुरों में सब कुछ खुआब जिसे लगता था
35:11अर्मान की बातों में महबत ख्याला और जजबा था
35:14लेकिन वक के साथ साथ महबत लफजों से जहर में बदलने लेगी
35:19जब भी कोई बात अर्मान की मर्जी के खिलाब जाती
35:22वो महक को नीचा दिकाने के लिए लफजों के तलवार चला देता
35:26तुम आवरत हो तुमें क्या फता असूल होते है
35:29मेरे इज़त को तुम ने अपने गरूर से खाक में मिला दिया
35:33वो कभी हाथ नहीं उटाता लेगर उसके अलपाज वो रूती है
35:36तो खामोशी से सहती तो तनहाई में
35:40महक जो अदालत में सब के लिए इनसाफ मांगती थी
35:43अपने लिए खामोश हो गई लोग केते है
35:45कितने खुशनसीब है शोहर शायर है
35:48कोई ये नहीं जानता था कि उसके लबस महक के दिल पर जखम चोड़ते जा रहे है
35:53एक दिन महक अदालत में एक ऐसी खातून का कैस लड़ रही होती है
35:57जिसे उसके शोहर ने तलाक दी रही है
36:00सिरब इसलिए के जवाब देती थी
36:04महक उसी दिन की रात आईनी में खुद से पूछती है
36:08मैं दुसरे के हक के लिए लड़ती हूँ
36:11तो वो अपने लिए क्यों नहीं
36:12वो पेसला करती है
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36:16महक अर्मान से अहलेहदगी का पेसला कर लेती है
36:20माश्रा शोर मचाता है
36:22लोग के तेक शायर से कौन तलाक लेता है
36:25जिरामसिल के हुआले से
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36:41महक एक नाम और वकील है
36:42जिसने अपनी महनत और गाबिलियत से शेहर में नाम बनाया है
36:47लेकिन इसकी जिन्दगी में एक ऐसा जखम है जो नज़र नहीं आता
36:51एक ऐसा जखम है जो उसे लबजों से मिला
36:53महक के शादी तीन साल पहले अर्मान से हुई थी
36:57अर्मान एक शायर हसास और खुबसूरत सोच रखने वाला इनसां था
37:02शुरों में सब कुछ खुआब जिसे लगता था
37:04अर्मान की बातों में महबत ख्याला और जजबा था
37:07लेकिन वक के साथ साथ महबत लबजों से जहर में बदलने लगी
37:12जब भी कोई बात अर्मान की मर्जी के खिलाब जाती
37:15वो महबत को नीचा दिखाने के लिए लबजों के तलवार चला देता
37:19तुम औरत हो तुमें क्या फता असूल होते है
37:23मेरे इज़्जत को तुमने अपने गरूर से खाक में मिला दिया
37:27वो कभी हाथ नहीं उटाता लेगर उसके अलपाज वो रूती है
37:30तो खामोशी से सहती तो तनहाई में महग जो अदालत में सब के लिए इनसाब मांगती थी
37:36अपने लिए खामोश हो गई लोग कहते हैं कितने खुशनसीब है शोहर शायर है
37:42कोई यह नहीं जानता था कि उसके लबस महग के दिल पर जखम चोड़ते जा रहे है
37:47एक दिन महग अदालत में एक ऐसी खातुन का कैस लड़ रही होती है
37:51जिसे उसके शोहर ने तलाग दी रही है
37:53सिरब इसलिए के जवाब देती थी
37:58महक उसी दिन की रात आयनी में खुद से पूचती है
38:02मैं दुसरे के हक लिए लन्टी हूँ
38:04तो वो अपने लिए क्यों नहीं
38:06वो पेसला करती है
38:07खामुशी जुलम के हक में गवाही होती है
38:10महक अर्मान से अहलेहदगी का पेसला कर लेती है
38:14माश रा शौर मचाता है
38:15लोग के तेक शायर से कौन तलाक लेता है
38:18इस रामसिल के हुआले से
38:20अपने राय की जाहर लाजमी केमेंट करें
38:22साथ में हमारा यूटूब का चेनल सबस्क्राइब करना मत बूलिए
38:25तेंस पर वाचिंग अला हाफिज
38:27हेलो वीवर्ज
38:28इस रामसिल के अगाज में आप देखेंगे
38:30ये कहानी है महक की जो एक जहीन
38:32खुबसूरत और खुदार लड़की है
38:34महक एक नामवर वकील है
38:36जिसने अपनी महनत और गाबियत
38:39से शेहर में नाम बनाया है
38:40लेकिन इसकी जिन्दगी में एक ऐसा
38:42जखम है जो नजर नहीं आता
38:44एक ऐसा जखम है जो उसे
38:46लबजों से मिला महक के शादी
38:48तीन साल पहले अर्मान से हुई थी
38:50अर्मान एक शायर
38:51हसास और खुबसूरत सोचर्ट
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