Skip to playerSkip to main content
Sher​ #DanishTaimoor​ #SarahKhan​ #PakistaniDrama​​ #DramaSerial​ #NewDrama2025​ #FamilyFeud​ #LoveStory​ #RomanticDrama​ #ZanjabeelAsim​ #AehsunTalish​ #SherZaman​ #Fajar​ #pakistanitvdrama​#parwarish​
#ainaasif​ #samarjafri​ #naumaanijaz​ #saveranadeem​#arydigital​ #pakistanidrama​#RaazEDil#DramaReview#PakistaniDrama#RomanticMystey#IshqEMann#DramaReview#PakistaniDrama#RomanticDrama#PakistaniDrama #PakistaniNewDrama #LatestPakistaniDrama #FirstEpisode #Drama2025

Category

🗞
News
Transcript
00:01रेहा जो इस जजबात से ज़्यादा इज़ती नफस पर एकेन रिखती थी ये सब जानकर पीछे हट गी इसने नवकरी चूल दी नमबर बन कर दिया और खामोशी से अपने जिन्दगी को निया रुक दिया
00:12शेहर जिसके लिए सब कोना असान ना ता दिल में तरफ लिए बिरूनी मुल्ग चला गिया तीन साल बाद एक बिजनेस कानफरंस के दुरान दुबारा इनकी मुलाकात हुई
00:22रेहान अपनी कंपनी के मालिक बन चुकी थी और शेहर उसके सामी में बैटा था
00:30परहेरत पखर और पच्टावे के साथ कानफरंस के खिताम पर सब लोग मुबारक बात दे रहे थे शेहर यार चुप चाप रहा के करीब आया और बसीतना का तुम वो मुकाम हो जिस तक पहुंचने के लिए मुझे अपनी अना का सपर करना पदा रहा कि आंकों में नमी और
01:00आजमी के मन करें साथ में हमारे यूटूब का चेनल सबस्क्राइब करना मत बूलिए थैंक्स पर वाचिंग आला हाफिज
01:06हेलो बीवर्स रेहा एक पुरकशच जहीन और खुदा लड़की लाहूर के गरीब मगर ताली में अबता गराने से तालू करती थी
01:14वो अपने वालिद के वाहिद बेटी थी और इनके लिए पखर का बाइस भी अपनी जिन्दगी को बेहतर बनाने के खुआप लिए वो एक मल्टिनीशनल कंपनी में जाब करती थी और वही इसके मुलाकात शेहर यार से हुई
01:28एक संजीद मिजाज नरम गोव शरीब नुजवान जो का अपनी की सियो का बेटा था
01:34मगर गरूर से कुसुत दूर दोरों के पहले गुपतगव एक प्रॉजेक्ट मीटिंग के दवरान हुई
01:40जहार रिहा ने अपनी एतिमाद से शेहर यार को मतासिर कर लिया
01:44वत की साथ साथ वो एक दूसे के करीब आते गए
01:48शेहर को रिहा के खुददारी महजब रविया और उसूले से महबत हो गी
01:53जब कर रिहा शेहर की साथगी इज़त देने के अंदाज और नरमी से दिल हार बेटी
01:59दोनों ने एक दूसे से खामुश वादे किये
02:01बिना अलफास के बिना किसी रस्मी ज़ार के
02:04मगजब शेहर रियार ने रिहा के लिए रिश्टा बेजा तब कहानी का नियार रुख लिया
02:09शेहर के वालता से एक सखगी रुए थे और जो बराबरी के रिश्टे में यकीन रखती थी
02:15रिहा के खनदानी पस मनजर को लेकर सखट नाला हुई
02:19और इससे अपने बेटे के लाइक ना समझा
02:21शेहर यार ने मुजाहिमत की बहस की
02:24लेकिन मा की आसू और बाप की दबाव ने उसे एक मुश्किल दौरा हे पर लाकड़ा किया
02:30रिहा जो इस जजबात से जज़ादा इज़ती नफस पर एकेन रिक दिती ये सब जान कर पीछे हट गी
02:36इसने नवकरी चूल दी नंबर बन कर दिया और खामोशी से अपने जिन्दगी को निया रुक दिया
02:42शेहर जिसके लिए सब कोना असान ना था दिल में तरफ लिए बिरूनी मुल्ग चला गिया
02:47तीन साल बाद एक बिजनेस कानफरंस के दुरान दुबारा इनकी मुलाकात हुई
02:53रिहान अब अपनी कंपनी के मालिक बन चुकी थी और शेहर उसके सामी में बैटा था
03:00परहेरत पखर और पच्टावे के साथ कानफर्स की खिताम पर सब लोग मुबारक बात दे रहे थे
03:06शेहर यार चुप चाप रहा के करीब आया और बसीतना का तुम वो मुकाम हो जिस तक पहुंचने के लिए मुझे अपनी अना का सपर करना पड़ा
03:14रहा के आँकों में नमी और चेहरे पर मुझे रहा हाट थी जब बरसों की तक अनफ उतर गए हो और यहो वो मुझे जो वक्त मुखाली पदर पासलों में चुप गी थी फिर से जिन लहा हो गई इस बार मजबूत मुकमल और बेखाव
03:27प्रामसल की हवाले से अपने राय की जालाजमी केमन करें साथ में हमारे यूट्यूब का चेनल सब्सक्राइब करना मत बूलिए थैंस पर वाचिंग अलाहाफिज
03:36हेलो बीवर्ज रेहा एक फुरकशच जहीन और खुदा ललकी लाहूर के गरीब मगर ताली में अपता गराने से तालूक रखती थी
03:44वो अपने वालिद के वाहिद बेटी थी और इनके लिए पखर का बाइस भी अपनी जिन्दगी को बेहतर बनाने के खुआप लिए वो एक मल्टिनीशनल कंपनी में जाब करती थी और वही इसके मुलाकात शेयर्यार से हुई
03:59एक संजीद मिजाज नरम गोव शरीब में जोवान जो का अपनी की सियो का बेटा था
04:04मगर गरूर से कुसुत दूर दोनों के पहले गुट तक वो एक प्रॉजेक्ट मीटिंग के दवरान हुई
04:11जहारीहा ने अपनी एतिमाद से शेयर्यार को मतासिर कर लिया
04:15वत की साथ साथ वो एक दूसे के करीब आते गए
04:18शेयर्यार को रहा के खुद्दारी महजब रविया और उसूले से महबत हो गई
04:23जब कर रहा शेयर्यार की साथगी इज़त देने के अंदाज और नरमी से दिल हार बेटी
04:29दोनों ने एक दूसे से खामोश वादे किये बिना अलफास के बिना किसी रस्मी ज़ार के
04:34मगजब शेयर्यार ने रहा के लिए रिष्टा वेजा तब कहानी का निया रुख लिया
04:39शेयर्यार के वालत से एक सखगी रवाय थे और जो बराबरी के रिष्टे में यकीन रखती थी
04:45रहा के खानदानी पस मनजर को लेकर सखग नाला हुई और इससे अपने बेटे के लाइक ना समझा
04:51शेयर्यार ने मुजाहिमत की बहस की लेकिन मा की आसू और बाप की दबाव ने उसे एक मुश्किल दवरा हे पर लाकड़ा किया
05:00रहा जो इस जजबात से ज़्यादा इज़ती नफस पर एकेन रिखती थी ये सब जानकर पीछे हट गी
05:07इसने नवकरी चूल दी नंबर बन कर दिया और खामोशी से अपने जिन्दगी को निया रुक दिया
05:12शेयर्यार जिसके लिए सब कोना असान ना था दिल में तड़प लिए बिरूनी मुल्ट चला गिया
05:17तीन साल बाद एक बिजन्स कानफरंस के दुरान दुबारा इनकी मुलाकात हुई
05:23रिहान अपनी कंपनी का मालिक बन चुकी थी और शेयर्यार उसके सामी में बैटा था
05:30परहेरत पखर और पच्टावे के साथ कानफरंस के खिताम पर सब लोग मुबारक बात दे रहे थे
05:36शेयर्यार चुप चाप रहा के करीब आया और बसीतना का तुम वो मुकाम हो जिस तक पहुंचने के लिए मुझे अपनी अना का सपर करना पड़ा रहा कि आँकों में नमी और चेहरे पर मुस्कुराहत थी जब बरसों के तक अनफ उतर गए हो
05:50और यूँ वो मुखबत जो वक्त मुखालिप दर पासलों में चुप गी ती फिर से जिनला हो गए इस बार मजबूत मुकमल और बेखाओ
05:58प्रामसल के हवाले से अपने राए की जाह लाजमी केमें करें साथ में हमारा यूट्यूब का चेनल सब्सक्राइब करना मत बूलिए थैंस पर वाचिंग अला हाफिज
06:06हेलो बीवर जरेहा एक फुलकशच जहीन और खुदा लड़की लाहोर के गरीब मगर ताली में अपता गराने से तालू करकती थी
06:14वो अपने वालिद के वाहिद बेटी थी और इनके लिए पखर का बाइस भी अपनी जिन्दगी को बेहतर बनाने के खुआप लिए वो एक मल्टिनीशनल कमपनी में जाब करती थी और वही इसके मुलाकात शेहर यार से हुई
06:29एक संजीद मिजाज नरम गोव शरीब नौजवान जो का अपनी की सियो का बेटा था
06:34मगर गरूर से कुसुत दूर दोरों के पहले गुपतगव एक प्राजेक्ट मीटिन्ग के दवरान हुई
06:41जहार रिहा ने अपनी एतिमाद से शेहर यार को मतासिर कर लिया
06:45वत की साथ साथ वो एक दूसे के करीब आते गए
06:48शेहर को रिहा के खुददारी महजब रभीया और उसूले से महबत हो गई
06:53जब कर रिहा शेहर की साथगी इज़त देने के अंदाज और नरमी से दिल हार बेटी
06:59दोनों ने एक दूसे से खामुश वादे किये
07:01बिना अलफास के बिना किसी रस्मी ज़ार के
07:05मगजब शेहर यार ने रिहा के लिए रिश्टा वेजा तब कहानी का निया रुख लिया
07:09शेहर यार के वालत से एक सखगीर रवाय थे और जो बराबरी के रिश्टे में यकीन रखती थी
07:15रिहा के खानदानी पसमंजर को लेकर सखट नाला हुई और इससे अपने बेटे के लाइक ना समझा
07:22शेहर यार ने मुजाहिमत की बहस की लेकिन मा की आसू और बाप की दबाव ने उसे एक मुश्किल दवरा हे पर लाकड़ा किया
07:30रिहा जो इस जजबात से ज़्यादा इज़ती नफस पर एकेन रिखती थी ये सब जानकर पीचे हट गी इसने नवकरी चूल दी नमबर बन कर दिया और खामोशी से अपने जिन्दगी को निया रुक दिया
07:43शेहर जिसके लिए सब कोना असान ना था दिल में तड़प लिए बिरूनी मुल्क चला गिया तीन साल बाद एक बिजनेस कानफरंस के दुरान दुबारा इनके मुलाकाद हुई
07:53रिहान अपनी कामनी का मालिक बन चुकी थी और शेहर उसके सामी में बैटा था
08:00परहेरत पखर और पच्टावे के साथ कानफरंस के खिताम पर सब लोग मुबारक बात दे रहे थे शेहर यार चुप चाप रहा के करीब आया और बसीतना का तुम वो मुकाम हो जिस तक पहुंचने के लिए मुझे अपनी अना का सपर करना पदा रहा कि आंकों में नमी और
08:30लाजमी के मन करें साथ में हमारे योट्यूब का चेनल सबस्क्राइब करना मत बूलिए थैंस पर वाचिंग आला हाफिज
09:00मिजाज नरम गोव शरीब नुजवान जो का अपनी की सियो का बेटा था
09:04मगर गरूर से कुसुत दूर दोनों के पहले गुटगव एक प्राजेक्ट मीटिंग के दवरान हुई
09:11जहार रहा ने अपनी एतिमाद से शेहर यार को मतासिर कर लिया
09:15वत के साथ साथ वो एक दूसे के करीब आते गए
09:19शेहर यार को रहा के खुददारी महजब रविया और उसूले से महबत हो गई
09:24जब कर रहा शेहर यार की साथगी इज़त देने के अंदाज और नरमी से दिल हार बेटी
09:29दोनों ने एक दूसे से खामुश वादे किये बिना अलफास के बिना किसी रस्मी ज़ार के
09:35मगर जब शेहर यार ने रहा के लिए रिश्टा वेजा तब कहानी का निया रुख लिया
09:40शेहर यार के वालदा से एक सख़गी रुख थे और जो बराबरी के रिश्टे में यकीन रखती थी
09:45रहा के खनदानी पसमनजर को लेकर सख़ग नाला हुई और इससे अपने बेटे क्यों लाइक ना समझा
09:52शेहर यार ने मुजाहिमत की बहस की लेकिन मा की आसू और बाप की दबाव ने उसे एक मुश्किल दवरा हे पर लाकड़ा किया
10:01रहा जो इस जजबात से ज़्यादा इज़ती नफस पर एकें रिख दिती ये सब जानकर पीचे हट गी
10:07इसने नवकरी चूल दी नंबर बन कर दिया और खामोशी से अपने जिन्दगी को निया रुक दिया
10:13शेहर यार जिसके लिए सब कोना असान ना था दिल में तड़प लिए बिरूनी मुल्ट चला गिया
10:18तीन साल बाद एक बिजनेस कानफरंस के दुरान दुबारा इनकी मुलाकात हुई
10:23रेहान अपनी कंपनी का मालिक बन चुकी थी और शेहर यार उसके सामी में बैटा था
10:31परहेरत पखर और पच्टावे के साथ खानफरंस के खिताम पर सब लोग मुबारक बात दे रहे थे
10:36शेहर यार चुप चाप रहा के करीब आया और बसीतना का तुम वो मुकाम हो जिस तक पहुंचने के लिए मुझे अपनी अना का सपर करना पड़ा
10:45रहा के आँकों में नमी और चेहरे पर मस्कुराहत थी जब बरसों के तक अना पुतर गए हो और यहो वो मुझे जो वक्त मुखालिप दर पासलों में चुप गी थी फिर से जिल्हा हो गई इस बार मजबूत मुकमल और बेखाव
10:58बरामसल के हवाले से अपने राए की जालाजमी केमन करें साथ में हमारे योट्व का चेनल सब्सक्राइब करना मत भूली ने थैंक्स पर वाचिंग अलाहाफिज
11:07हेलो बीवर्ज रेहा एक पुरकशच जहीन और खुदा लड़की लाहूर के गरीब मगर ताली में अपता गराने से तालू करती थी
11:15वो अपने वालिद के वाहिद बेटी थी और इनके लिए पखर का बाइस भी अपनी जिन्दगी को बेहतर बनने के खुआप लिए वो एक मल्टिनीशनल कंपनी में जाब करती थी और वो ही इसके मुलाकात शेहर यार से हुई
11:29एक संजीद मिजाज नरम गो शरीब मुझवान जो का अपनी की सियो का बेटा था
11:35मगर गरूर से कुछ सुदूर दोरों के पहले गुपतग वो एक प्रॉजेक्ट मीटिंग के दवरान हुई
11:41जहार रिहा ने अपनी एतिमाद से शेहर यार को मतासिर कर लिया
11:45वत के साथ साथ वो एक दूसे के करीब आते गए
11:49शेहर को रिहा के खुद्दारी महजब रविया और उसूले से महबत हो गी
11:54जब कर रिहा शेहर की साथगी इज़त देने के अंदाज और नरमी से दिल हार बेटी
12:00दोनों ने एक दूसे से खामोश वादे किये
12:02बिना अलफास के बिना किसी रस्मी ज़ार के
12:05मगजब शेहर रियार ने रिहा के लिए रिष्टा वेज़त तब कहानी का नियारुख लिया
12:10शेहर के वालता से एक सख़गी रवाय थे और जो बराबरी के रिष्टे में यकीन रखती थी
12:16रिहा के खानदानी पस मनजर को लेकर सख़ नाला हुई
12:20और इससे अपने बेटे के लाइक ना समझा
12:22शेहर यार ने मुजाहिमत की बहस की लेकिन मा की आसू और बाप की दबाव ने उसे एक मुश्किल दवरा हे पर लाकड़ा किया
12:31रिहा जो इस जजबात से ज़्यादा इज़ती नफस पर एकेन रिक दिती ये सब जान कर पीछे हट गी
12:37इसने नवकरी चूल दी नमबर बन कर दिया और खामोशी से अपने जिन्दगी को निया रुक दिया
12:43शेहर जिसके लिए सब कोना असान ना था दिल में तड़प लिए बिरूनी मुल्ट चला गिया
12:48तीन साल बाद एक बिजनेस कानफरंस के दुरान दुबारा इनकी मुलाकात हुई
12:54रिहान अब अपनी कंपनी के मालिक बन चुकी थी और शेहर उसके सामी में बैटा था
13:01परहेरत पखर और पच्टावे के साथ कानफर्स की खिताम पर सब लोग मुबारक बात दे रहे थे
13:07शेहर यार चुप चाप रहा के करीब आया और बसीतना का तुम वो मुकाम हो जिस तक पहुँचने के लिए मुझे अपनी अना का सपर करना पड़ा
13:15रहा के आंकों में नमी और चेहरे पर मुझे रहा पर मुझे ती जब बरसों की तक अनफ उतर गए हो और यहो वो मुझे जो वक्त मुखालिप दर पासलों में चुप गई थी पिर से जिन लहा हो गई इस बार मजबूत मुकमल और बेखाव
13:28प्रामसल की हवाले से अपने राय की जालाजमी केमन करें साथ में हमारे यूट्यूब का चेनल सबस्क्राइब करना मत बूलिए थैंस पर वाचिंग अलाहाफिज
13:37हेलो वीवर्ज रेहा एक फुलकशच जहीन और खुदा ललकी लाहूर के गरीब मगर ताली में अपता गराने से तालूक रखती थी
13:45वो अपने वालिद के वाहिद बेटी थी और इनके लिए पकर का बाइस भी अपनी जिन्दगी को बेहतर बनाने के खुआप लिए वो एक मल्टिनीशनल कंपनी में जाब करती थी और वही इसके मुलाकात शेहर यार से हुई
14:00एक संजीद मिजाज नरम गोव शरीब में जोवान जो का अपनी की सियो का बेटा था
14:05मगर गरूर से कुसुत दूर दोरों के पहले गुट तक वो एक प्रॉजेक्ट मीटिंग के दवरान हुई
14:12जहार रिहा ने अपनी एतिमाद से शेहर यार को मतासिर कर लिया
14:16वत की साथ साथ वो एक दूसे के करीब आते गए
14:19शेहर को रिहा के खुद्दारी महजब रविया और रसूले से महबत हो गई
14:24जब कर रिहा शेहर की साथगी इज़त देने के अंदाज और नरमी से दिल हार बेटी
14:30दोनों ने एक दूसे से खामुश वादे किये
14:32बिना अलफास के बिना किसी रस्मी ज़ार के
14:35मगजब शेहर रियार ने रिहा के लिए रिश्टा वेजा तब कहानी का निया रुख लिया
14:40शेहर के वालदा से एक सख़गी रवाय थे और जो बराबरी के रिश्टे में यकीन रखती थी
14:46रिहा के खानदानी पसमंजर को लेकर सख़ नाला हुई
14:50और इससे अपने बेटे के लाइक ना समझा
14:52शेहर यार ने मुजाहिमत की बहस की लेकिन मा की आसू और बाप की दबाव ने उसे एक मुश्किल दौरा हे पर लाकड़ा किया
15:01रिहा जो इस जजबात से ज़्यादा इज़ती नफस पर एकेन रिखती थी ये सब जानकर पीछे हट गी
15:08इसने नवकरी चूल दी नंबर बन कर दिया और खामोशी से अपने जिन्दगी को निया रुख दिया
15:13शेहर जिसके लिए सब कोना असान ना था दिल में तड़प लिए बिरूनी मुल्ट चला गिया
15:18तीन साल बाद एक बिजन्स कानफरंस के दौरान दूबारा इनकी मुलाकात हुई
15:24रिहान अब अपनी कामनी का मालिक बन चुकी थी और शेहर उसके सामी में बैटा था
15:31परहेरत पखर और पच्टावे के साथ कानफरंस के खिताम पर सब लोग मुबारक बात दे रहे थे
15:37शेहर यार चुप चाप रहा के करीब आया और बसीतना का तुम वो मुकाम हो जिस तक पहुँचने के लिए मुझे अपनी अना का सपर करना पड़ा
15:46रहा के आँकों में नमी और चेहरे पर मुझे पर मुझे रहा हाट थी जब बरसों के तक अना पूतर गए हो और यू वो मुझे जो वक्त मुखालिप दर पासलों में चुप गी ती फिर से जिन्ला हो गई इस बार मजबूत मुकमल और बेखाओ
15:59बरामसल के हवाले से अपने राय की सहा लाजमी क्यमन करें साथ में हमारे यूटूब का चेनल सब्सक्राइब करना मत भूलें थैंस पर वाचिंग अला हाफिज
16:07हेलो वीवर्ज रेहा एक पुरकशच जहीन और खुदा लड़की लाहूर के गरीब मगर ताली में अपता गराने से तालूक रखती थी
16:15वो अपने वालिद के वाहिद बेटी थी और इनके लिए पखर का बाइस भी अपनी जिन्दगी को बेहतर बनने के खुआप लिए वो एक मल्डिनीशनल कंपनी में जाब करती थी और वही इसके मुलाकात शेहर यार से हुई
16:30एक संजीद मिजाज नरम गोव शरीब नौजवान जो का अपने की सियो का बेटा था
16:35मगर गरूर से कुसुत दूर दोनों के पहले गुपतगव एक प्राजेक्ट मीटिंग के दवरान हुई
16:42जहार रिहा ने अपनी एतिमाद से शेहर यार को मतासिर कर लिया
16:46वत की साथ साथ वो एक दूसे के करीब आते गए
16:49शेहर को रिहा के खुददारी महजब रविया और उसूले से महबत हो गई
16:54जब कर रिहा शेहर की साथगी इज़त देने के अंदाज और नरमी से दिल हार बेटी
17:00दोनों ने एक दूसे से खामोश वादे किये
17:03बिना अलफास के बिना किसी रस्मी ज़ार के
17:06मगजब शेहर रियार ने रिहा के लिए रिश्टा बेजा तब कहानी का निया रुख लिया
17:10शेहर के वालता से एक सखगीर रवाय थे और जो बराबरी के रिश्टे में यकीन रखती थी
17:16रिहा के खनदानी पस मनजर को लेकर सखग नाला हुई और इससे अपने बेटे के लाइक ना समझा
17:23शेहर यार ने मुजाहिमत की बहस की लेकिन मा की आसू और बाप की दबाव ने उसे एक मुश्किल दौरा हे पर लाकड़ा किया
17:31रिहा जो इस जजबात से ज़्यादा इज़ती नफस पर एकेन रिखती थी ये सब जान कर पीचे हट गी इसने नवकरी चूल दी नंबर बन कर दिया और खामोशी से अपने जिन्दगी को निया रुक दिया
17:44शेहर जिसके लिए सब कोना असान ना था दिल में तड़प लिए बिरूनी मुल्ट चला गिया तीन साल बाद एक बिजनेस कानफरंस के दौरान दूबरा इनके मुलाकाद हुई
17:54रिहान अपनी कामनी का मालिक बन चुकी थी और शेहर उसके सामी में बैटा था
18:01परहेरत पखर और पच्टावे के साथ कानफर्स की अख्तिताम पर सब लोग मुबारक बात दे रहे थे
18:07शेहर यार चुप चाप रहा के करीब आया और बसीतना का तुम वो मुकाम हो जिस तक पहुंचने के लिए मुझे अपनी अना का सपर करना पड़ा रहा कि आँकों में नमी और चेहरे पर मुश्कुराहत थी जब बरसों की तक अनफ उतर गए हो
18:21और यूँ वो मुखबच जो वक्त मुखाली पदर पासलों में चुप गी ती पिर से जिन लहुगे इस बार मजबूत मुकमल और बेखाव
18:29प्रामसल के हवाले से अपने राए की जालाजमी केमें करें साथ में हमारे यूट्यूब का चेनल सब्सक्राइब करना मत भूलिए थैंस पर वाचिंग अलाहाफिज
18:37हेलो बीवर जरेहा एक पुलकशच जहीन और खुदा लड़की लाहुर के गरीब मगर ताली में अपता गराने से तालू करकती थी
18:45वो अपने वालिद के वाहिद बेटी थी और इनके लिए पखर का बाइस भी अपनी जिन्दगी को बेहतर बनाने के खुआप लिए वो एक मल्टिनीशनल कमपनी में जाब करती थी और वही इसके मुलाकात शेयर यार से हुई
19:00एक संजीद मिजाज नरम गो शरीब मुझवान जो का अपनी की सियो का बेटा था
19:06मगर गरूर से कुसुत दूर दोरों के पहले गुपतगव एक प्रॉजेक्ट मीटिंग के दवरान हुई
19:12जहार रिहा ने अपनी एतिमाद से शेहर यार को मतासिर कर लिया
19:16वत की साथ साथ वो एक दूसे के करीब आते गए
19:20शेहर को रिहा के खुद्दारी महजब रविया और उसूले से महबत हो गई
19:25जब कर रिहा शेहर की साथगी इज़त देने के अंदाज और नरमी से दिल हार बेटी
19:30दोनों ने एक दूसे से खामुश वादे किये
19:33बिना अलफास के बिना किसी रस्मी ज़ार के
19:36मगजब शेहर यार ने रिहा के लिए रिश्टा वेजा तब कहानी का निया रुख लिया
19:41शेहर यार के वालता से एक सखगीर रवाय थे और जो बराबदी के रिश्टे में यकीन रखती थी
19:46रिहा के खानदानी पसमन्जर को लेकर सखग नाला हुई और इससे अपने बेटे के लाइक ना समझा
19:53शेहर यार ने मुजाहिमत की बहस की लेकिन मा की आसू और बाप की दबाव ने उसे एक मुश्किल दवरा है पर लाकड़ा किया
20:02रिहा जो इस जजबात से ज़्यादा इज़ती नफस पर एकेन रिखती थी ये सब जानकर पीचे हट गी इसने नवकरी चूल दी नंबर बन कर दिया और खामोशी से अपने जिन्दगी को निया रुक दिया
20:14शेहर जिसके लिए सब कोना असान ना था दिल में तड़प लिए बिरूनी मुल्ट चला गिया तीन साल बाद एक बिजनेस कानफरंस के दौरान दूबरा इनके मुलाकाथ हुई
20:24रिहान अपनी कामनी का मालिक बन चुकी थी और शेहर उसके सामी में बैटा था
20:32परहेरत पखर और पच्टावे के साथ कानफर्स की खिताम पर सब लोग मुबारक बात दे रहे थे
20:37शेहर यार चुप चाप रहा के करीब आया और बसीतना का तुम वो मुकाम हो जिस तक पहुंचने के लिए मुझे अपनी अना का सपर करना पड़ा रहा कि आंकों में नमी और चेहरे पर मुस्कुराहत थी जब बरसों के तक अनब उतर गए हो
20:52और यूँ वो मुखबत जो वक्त मुखालिप दर पासलों में चुप गी ती फिर से जिल्ला हो गई इस बार मजबूत मुकमल और बेखाओ ब्रामसल के हवाले से अपने राए की साहा लाजमी के मैंन करें साथ में हमारे यूट्यूब का चेनल सब्सक्राइब करना मत बूल
21:22यूट्यूगी को बेहतर बनने के खुआब लिए वो एक मल्टिनीशनल कंपणी में जाब करती थी और वही इसके मुलाकात शेहरियार से हुई
21:30एक संजीद मिजाज नरम गोव शरीब नौजवान जो अपने की सियो का बेटा था
21:36मगर गरूर से कुस्त दूर दोनों के पहले गुट तक वो एक प्राजेक्ट मीटिंग के दवरान हुई
21:42जहार रिहा ने अपनी एतिमाद से शेहरियार को मतासिर कर लिया
21:46वत के साथ साथ वो एक दुस्ते के करीब आते गए
21:50शेहरियार को रिहा के खुद्दारी महजब रभीया और उसूले से महबत हो गई
21:55जब कर रिहा शेहरियार की साथगी इज़त देने के अंदाज और नर्मी से दिल हार बेटी
22:01दोनों ने एक दुसी से खामुश वादे किये बिना अलफास के बिना किसी रस्मी जहार के
22:06मगे जब शेहरियार ने रिहा के लिए रिष्टा वेजा तब कहानी का निया रुख लिया
22:11शेहरियार के वालता से एक सख़गी रभायत ये और जो बराबरी के रिष्टे में यकीन रखती थी
22:17रिहा के खनदानी पस मंजर को लेकर सख़ग नाला हुई
22:21और इससे अपने बेटे के लाइक ना समझा
22:23शेहरियार ने मुझाहिमत की बहस की लेकिन मा की आसू और बाप की दबाव ने उसे एक मुश्किल दवरा हे पर लाकड़ा किया
22:32रिहा जो इस जजबात से ज़्यादा इज़ती नफस पर एकेन रिखती थी
22:36ये सब जान कर पीचे हट गी इसने नवकरी चूल दी नमबर बन कर दिया और खामोशी से अपने जिन्दगी को निया रुक दिया
22:44शेहरियार जिसके लिए सब कोना असान ना था दिल में तड़प लिए बिरूनी मुल्ग चला गिया
22:49तीन साल बाद एक बिजनेस कानफरंस के दुरान दुबारा इनकी मुलाकात हुई
22:55रेहान अपनी कंपनी का मालिक बन चुकी थी और शेहरियार उसके सामी में बैटा था
23:02परहेरत पखर और पच्टावे के साथ कानफरंस के खिताम पर सब लोग मुबारक बात दे रहे थे
23:08शेहरियार चुप चाप रहा के करीब आया और बसीतना का तुम वो मुकाम हो जिस तक पहुंचने के लिए मुझे अपनी अना का सपर करना पदा रहा कि आंकों में नमी
23:32लाजमी के मन करें साथ में हमारे योट्यूब का चेनल सबस्क्राइब करना मत बूलिए थैंस पर वाचिंग आला हाफिज
23:38हेलो वीवर्स रेहा एक पुरकशच जहीन और खुदा लड़की लाहूर के गरीब मगर ताली में अबता गराने से तालू करती थी
23:46वो अपने वालिद के वाहिद बेटी थी और इनके लिए पखर का बाइस भी अपनी जिन्दगी को बेहतर बनने के खुआप लिए वो एक मल्टिनीशनल कंपनी में जाब करती थी और वो ही इसके मुलाकात शेयर यार से हुई
24:01एक संजीद मिजाज नरम गोव शरीब नुचवान जो का अपनी की सियो का बेटा था
24:06मगर गरूर से कुछ सुदूर दोरों के पहले गुपतगव एक प्रॉजेक्ट मीटिंग के दवरान हुई
24:13जहार रीहा ने अपनी एतिमाद से शेहर यार को मतासर कर लिया
24:17वत की साथ साथ वो एक दूसे के करीब आते गए
24:20शेहर को रीहा के खुद्दारी महजब रविया और उसूले से महबत हो गी
24:25जब कर रीहा शेहर की साथगी इज़त देने के अंदाज और नरमी से दिल हार बेटी
24:31दोनों ने एक दूसे से खामुश वादे किये
24:33बिना अलफास के बिना किसी रस्मी ज़ार के
24:36मगजब शेहर यार ने रीहा के लिए रिश्टा वेजा तब कहानी का निया रुख लिया
24:41शेहर यार के वालदा से एक सख़गी रवायत या उरत जो बराबरी के रिश्टे में यकीन रखती थी
24:47रिहा के खनदानी पस मनजर को लेकर सख़गी नाला हुई और इससे अपने बेटे के लाइक ना समझा
24:53शेहर यार ने मुजाहिमत की बहस की लेकिन मा की आसू और बाप की दबाव ने उसे एक मुश्किल दवरा हे पर लाकड़ा किया
25:02रिहा जो इस जजबात से ज़्यादा इज़ती नफस पर एकेन रिक दिती ये सब जान कर पीछे हट गी इसने नवकरी चूल दी नंबर बन कर दिया और खामोशी से अपने जिन्दगी को निया रुक दिया
25:14शेहर जिसके लिए सब कोना असान ना था दिल में तरफ लिए बिरूनी मुल्ग चला गिया तीन साल बाद एक बिजनेस कानफरंस के दुरान दूबरा इनकी मुलाकात हुई
25:25रिहान अपनी कंपनी का मालिक बन चुकी थी और शेहर उसके सामी में बैटा था
25:32परहिरत पखर और पच्टावे के साथ कानफर्स की खिताम पर सब लोग मुबारक बात दे रहे थे
25:38शेहर यार चुप चाप रहा के करीब आया और बसीतना का तुम वो मुकाम हो जिस तक पहुंचने के लिए मुझे अपनी अना का सपर करना पड़ा
25:47रहा के आँकों में नमी और चेहरे पर मुझे रहा हाट थी जब बरसों की तक अनब उतर गए हो और यहो वो मुझे जो वक्त मुखाली पदर पासलों में चुप गी थी फिर से जिन लहा हो गई इस बार मजबूत मुकमल और बेखाओ
26:00बरामसल की हवाले से अपने राय की जालाजमी कैमन करें साथ में हमारे यूट्यूब का चेनल सब्सक्राइब करना मत भूलिए थैंस पर वाचिंग अलाहाफिज
26:08हेलो बीवर जरेहा एक फुलकशच जहीन और खुदा लड़की लाहूर के गरीब मगर ताली में अपता गराने से तालूक रखती थी
26:16वो अपने वालिद के वाहिद बेटी थी और इनके लिए पखर का बाइस भी अपनी जिन्दगी को बेहतर बनाने के खुआप लिए वो एक मल्टिनीशनल कंपनी में जाब करती थी और वही इसके मुलाकात शेहर यार से हुई
26:31एक संजीद मिजाज नरम गोव शरीब नौजवान जो का अपनी किसी ओ का बेटा था
26:36मगर गरूर से कुसुत दूर दोरों के पहले गुट तक वो एक प्रॉजेक्ट मीटिंग के दवरान हुई
26:43जहार रिहा ने अपनी एतिमाद से शेहर यार को मतासिर कर लिया
26:47वत की साथ साथ वो एक दूसे के करीब आते गए
26:51शेहर को रिहा के खुददारी महजब रविया और उसूले से महबत हो गई
26:55जब कर रिहा शेहर की साथगी इज़त देने के अंदाज और नरमी से दिल हार बेटी
27:01दोनों ने एक दूसे से खामुश वादे किये
27:04बिना अलफास के बिना किसी रस्मी ज़ार के
27:07मगजब शेहर रियार ने रिहा के लिए रिश्टा वेजा तब कहानी का निया रुख लिया
27:11शेहर के वालत से एक सख़गी रवाय थे और जो बराबरी के रिश्टे में यकीन रखती थी
27:17रिहा के खानदानी पस मनजर को लेकर सख़ नाला हुई
27:21और इससे अपने बेटे के लाइक ना समझा
27:24शेहर यार ने मुजाहिमत की बहस की
27:26लेकिन मा की आसू और बाप की दबाव ने उसे एक मुश्किल दौरा हे पर लाकड़ा किया
27:32रिहा जो इस जजबात से ज़्यादा इज़ती नफस पर एकेन रिखती थी
27:37ये सब जान कर पीछे हट गी
27:39इसने नवकरी चूल दी नमबर बन कर दिया
27:41और खामोशी से अपने जिन्दगी को निया रुक दिया
27:45शेहर यार जिसके लिए सब कोना असान ना था
27:47दिल में तरफ लिए बिरूनी मुल्ट चला गिया
27:50तीन साल बाद एक बिजनेस कानफरंस के दुरान दूबरा इनकी मुलाकात हुई
27:55रिहान अपनी कामनी का मालिक बन चुकी थी
28:00और शेहर यार उसके सामी में बैटा था
28:02परहेरत पखर और पच्टावे के साथ
28:05कानफरंस के खिताम पर सब लोग मुबारक बात दे रहे थे
28:08शेहर यार चुप चाप रहा के करीब आया
28:11और बसीतना का तुम वो मुकाम हो जिस तक पहुंचने के लिए
28:15मुझे अपनी अना का सपर करना पड़ा रहा
28:17क्या आँकों में नमी और चेहरे पर मुझे पर मुझे रहा थी जब बरसों के तक अब उतर गए हो
28:22और यू वो मुझे जो वक्त मुखालिप दर पासलों में चुप गी थी पिर से जिनला हो गई इस बार मजबूत
28:28मुकमल और बेखाव
28:30ग्रामसल के हवाले से अपने राय की जाह लाजमी क्यमन करें साथ में हमारे यूटूब का चेनल सब्सक्राइब करना मत भूलिए थैंस पर वाचिंग
28:37अला हाफिज
28:38हेलो वीवर्ज रेहा एक पुरकशच जहीन और खुदा ललकी लाहूर के गरीब मगर ताली में अपता गराने से तालूक रखती थी
28:46वो अपने वालिद के वाहिद बेटी थी और इनके लिए पकर का बाइस भी
28:51अपनी जिन्दगी को बेहतर बनने के खुआप लिए वो एक मल्टिनीशनल कंपणी में जाब करती थी
28:58और वही इसके मुलाकात शहर यार से हुई
29:01एक संजीद मिजाज नरम गो शरीब मुजवान जो का अपने की सियो का बेटा था
29:07मगर गरूर से कुस्त दूर दोनों के पहले गुटगवा एक प्राजेक्ट मीटिंग के दवरान हुई
29:13जहार रिहा ने अपनी एतिमाद से शेहर यार को मतासिर कर लिया
29:17वद्द के साथ साथ वो एक दुस्ते के करीब आते गए
29:21शेहर को रिहा के खुद्दारी महजब रविया और रसूले से महबत हो गई
29:26जब कर रिहा शेहर की साथगी इज़त देने के अंदाज और नर्मी से दिल हार बेटी
29:31दोनों ने एक दुस्ते से खामुश वादे किये
29:34बिना अलफास के बिना किसी रस्मी जहार के
29:37मगे जब शेहर रिहा के लिए रिश्टा बेजा तब कहानी का निया रुख लिया
29:42शेहर के वालता से एक सखगी रवायत या और जो बराबरी के रिश्टे में यकीन रखती थी
29:48रिहा के खनदानी पस मनजर को लेकर सखग नाला हुई
29:51और इसे अपने बेटे के लाइक ना समझा
29:54शेहर यार ने मुजाहिमत की बहस की लेकिन मा की आसू और बाप की दबाव ने उसे एक मुश्किल दवरा हे पर लाकड़ा किया
30:03रिहा जो इस जजबात से ज़्यादा इज़ती नफस पर एकेन रिखती थी
30:07ये सब जानकर पीचे हट इसने नवकरी चूल दी नंबर बन कर दिया और खामोशी से अपने जिन्दगी को निया रुक दिया
30:15शेहर यार जिसके लिए सब कोना असान ना था दिल में तरप लिए बिरूनी मुल्ट चला गिया
30:20तीन साल बाद एक बिजनेस कानफरंस के दुरान दूबारा इनके मुलाकात हुई
30:25रिहान अपनी कामनी का मालिक बन चुकी थी
30:30और शेहर यार उसके सामी में बैटा था
30:33परहेरत पखर और पच्चतावे के साथ
30:35कानफरंस के खिताम पर सब लोग मुबारक बात दे रहे थे
30:38शेहर यार चुप चाप रहा के करीब आया
30:41और बसीतना का तुम वो मुकाम हो जिस तक पहुंचने के लिए मुझे
30:45अपनी अना का सपर करना पड़ा रहा कि आँकों में नमी
30:49और चेहरे पर मश्कुराहत थी जब बरसों के तक अनब उतर गए हो
30:53और यूँ वो मुखबत जो वक्त मुखालिप दर पासलों में चुप गी थी
30:56फिर से जिल्दा हो गए इस बार मजबूत मुकमल और बेखाव
31:00प्रामसल के हवाले से अपने राए की जालाजमी केमन करें
31:04साथ में हमारे यूट्यूब का चेनल सब्सक्राइब करना मत भूले
31:07थैंस पर वाचिंग अलाहाफिज
31:09हेलो वीवर्ज रेहा एक पुरकशच जहीन और खुदा लड़की लाहूर के गरीब मगर ताली में अपता गराने से तालू करती थी
31:17वो अपने वालिद के वाहिद बेटी थी और इनके लिए पखर का बाइस भी
31:21अपनी जिन्दगी को बेहतर बनने के खुआप लिए वो एक मल्टिनेशनल कमपनी में जाब करती थी
31:28और वही इसके मुलाकात शेहर यार से हुई
31:31एक संजीद मिजाज नरम गोव शरीब मुजवान जो का अपने की सियो का बेटा था
31:37मगर गरूर से कुस्त दूर दोनों के पहले गुप तक हो एक प्राजेक्ट मीटिंग के दवरान हुई
31:43जहार रिहा ने अपनी एतिमाद से शेहर यार को मतासिर कर लिया
31:48वद्ध के साथ साथ वो एक दुस्ते के करीब आते गए
31:51शेहर को रिहा के खुद्दारी महजब रविया और उसूले से महबत हो गई
31:56जब कर रिहा शेहर की साथ की इज़त देने के अंदाज और नर्मी से दिल हार बेटी
32:02दोनों ने एक जुसी से खामुश वादे किये
32:04बिना अलफास के बिना किसी रस्मी जहार के
32:07मगर जब शेहर यार ने रिहा के लिए रिश्टा वेजा तब कहानी का निया रुख लिया
32:12शेहर के वालता से एक सक्गीर रवाय थे और जो बराबरी के रिश्टे में यकीन रखती थी
32:18रिहा के खनदानी पसमनजर को लेकर सक्ट नाला हुई
32:22और इससे अपने बेटे के लाइक ना समझा शेहर यार ने मुजाहिमत की बहस की
32:27लेकिन मा की आहसू और बाप की दबाव ने उसे एक मुश्किल दवरा हे पर लाकड़ा किया
32:33रिहा जो इस जजबात से ज़्यादा इज़ती नफस पर ये गेन रिक दिती
32:37ये सब जान कर पीचे हट की इसने नवकरी चूल दी नमबर बन कर दिया और खामोशी से अपने जिन्दगी को निया रुक दिया
32:45शेहर यार जिसके लिए
Comments

Recommended