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  • 8 months ago
आंध्र प्रदेश के ताडिपत्री का तालारिचेरुवु गांव के लोग घरों से जरुरी सामान ट्रैक्टर पर लाद रहे हैं. कोई मोटरसाइकिल पर सामान लेकर गांव छोड़ रहा है. यहां माघ चतुर्दशी के दिन अजीब सा सन्नाटा है. घरों पर ताले लटक रहे हैं. सड़कें लगभग खाली है. यहां तक कि जानवरों को भी लोग अपने साथ ले कर चले गए है. 24 घंटे के लिए किसी भी घर में लाइट और आग नहीं जलेगी. एक हजार की आबादी वाला ये गांव पूरा खाली हो गया है. इस सबके पीछे एक ब्राह्मण की हत्या और उसका श्राप है. गांव के बड़े बुजुर्ग इस श्राप से मुक्ति के लिए चंद्रगिरी गए. जहां ज्योतिषियों ने उन्हें माघ पूर्णिमा के दिन गांव में आग और दीये नहीं जलाने को कहा. तब से माघ चतुर्दशी की आधी रात से माघ पूर्णिमा की आधी रात तक गांव वाले ‘अग्गिपाडु’ नामक अनुष्ठान का पालन करते हुए बस्ती छोड़ देते हैं. जिसका शाब्दिक अर्थ है आग नहीं. इस दौरान वे पास के गांवों में रिश्तेदारों के साथ रहते हैं. पिकनिक मनाते हैं. सामुदायिक मेलजोल में हिस्सा लेते हैं.  पूर्णिमा के बाद फिर इस गांव में जिंदगी पटरी पर लौट आती है. सदियों पुरानी ये परंपरा रविवार को यहां एक बार फिर निभाई गई.

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00:00आंत्र प्रदेश के ताडी पत्री का ताला रिचेरू गाउं जहां लोग घरों से ज़रूरी सामान ट्रेक्टर पर लाद रहे हैं
00:11कोई मोटरसाइकल पर सामान लेकर गाउं छोड़ रहा है
00:14यहां माग चतुर्दसी के दिन अजीब सा सनाटा है
00:18घरों पर ताले लटक रहे हैं
00:22सडकें लगभग खाली हैं
00:24यहां तक की जानवरों को भी लोग अपने साथ लेकर चले गए
00:2724 घंटे के लिए किसी भी घर में लाइट और आग नहीं जलेगी
00:32एक हजार की अबादी वाला ये गाउं फूरा खाली हो गया है
00:36इस सब के पीछे एक ब्राह्मन की हत्या और उसका स्राप है
00:40इस परंपरा के शुरुआत लगभग 600 साल पहले हुई थी
00:46अस्थानिय मान्यता के अनुसार एक बार एक ब्राह्मन अपने अनुयाईयों के साथ गाउं में आया
00:51सोना और खेती की उपज लूटी और भागने की कोशिस की
00:55गाउं वालों ने उन्हें पकड़ लिया और उसके बाद हुई जड़प में ब्राह्मन और उसके अनुयाई मारे गए
01:01गाउं के बड़े बुजूर्ग इस्त्राप से मुक्ती के लिए चंदर गिरी गए
01:06जहां जोतिसियों ने उन्हें माग पुर्णिमा के दिन गाउं में आग और दिये नहीं जलाने को का
01:12ब्राह्मन ने भविश्य वाणी की थी कि गाउं को गंभीर फूखे और अकाल का सामना करना पड़ेगा
01:21और नौजात बच्चे जन्ब के तुरंत बाद मर जाएंगे
01:24ये दूर भागे कई साल तक सच हुए जिससे गाउं वालों में डर और निरासा फैल गए
01:28जोतिसियों ने गाउं को माग पुर्णिमा के दिन खाली करने को कहा
01:32और घरों में आग और दिये नहीं जलाने को कहा
01:35जिसके बाद से ऐसा किया गया और प्रभाव कम होगा
01:39तब से माग शतुर्दसी की आधी रात से माग पुर्णिमा की आधी रात तक
01:45गाउं वाले अगी पाडू नामक अनुष्ठान का पालन करते हुए बस्ती छोड़ देते हैं
01:50जिसका साब्दिक अर्थ है आग नहीं
01:53इस दोरान वे पास के गाउं में रिष्तेदारों के साथ रहते हैं
01:57पिकनिक मनाते हैं
01:59समुदाइक मेलजोल में हिस्सा लेते हैं
02:01पुर्णिमा के बाद फिर इस गाउं में जिन्दगी पट्री पर लौट आती है
02:04सदियों पुरानी ये परंपरा रवीवार को यहां एक बार फिर निभाई गई
02:09ब्यूरो रिपोर्ट एटीवी भारत
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