00:00एक छोटे से गा में एक परिवार रहता था, जिसमें रगु अपने माबाप के साथ रहता था
00:26रगु के माता पिता बहुत मेहनती थे, रगु के पिता के पास एक छोटा सा खेट था, जिसमें वह बहुत मेहनत करते थे
00:35रगु की मा घर का काम देखती थी, पर रगु का किसी काम में कोई मन नहीं लगता था, रगु हमेशा नाम जब करने में वक्त बिताता था
00:45नमह शिवाय, वह हर वक्त सिर्फ नाम जबता रहता था, उसे भगवान से इतना लगाव कि वह दूसरा कोई भी काम नहीं करता था, वह दिन रात बस भगवान का नाम जबता रहता था, और इसी वजह से माता पिता दोनों बहुत परेशान थे
01:03ओम नमह शिवाय, एक दिन जब रगु के पिता खेत की ओर जा रहे होते हैं, तभी उन्हें एक गाव वाला मिलता है, राम राम, अरे मोहन भाई, बहुत दुबले पतले लग रहे हो, क्या बात है, तबियत तो ठीक है ना
01:20अरे पिछले कुछ दिनों से तबियत ठीक नहीं लग रही, पर क्या करूं खेत नहीं जाओंगा, काम नहीं करूंगा तो घर कैसे चलेगा
01:30क्यों क्या हुआ, तुम्हारा लर्का तो बहुत बड़ा हो गया है ना, क्या, वह तुम्हें काम में हाथ नहीं बटाता, अपनी जगह उसे भेज दिया करो, अभी तुम्हारी उम्र आराम करने की है, काम काज अब उसे करने दो
01:45अरे भाई, तुम्हें क्या बताओ, मेरा लर्का तो निकम्मा है, उसे किसी काम में कोई दिल्पस्पी नहीं एं, वह कोई काम करना ही नहीं चाहता
01:57मैंने बहुत कोशिश की, उसे कुछ ना कुछ काम में लगाने की, उसे शेहर में अच्छी नौकरी लगवा दी थी, पर वह वहां से भी भागाया, एक बार तो जमीनदार के, यहां बहुत अच्छी तन्खवाह पर काम दिलाया था, वह भी छोड़ दिया, मैं तो थक गया हू
02:27तुम्हे एक काम करो, उसकी शादी करवा दो, जब पत्नी आ जाएगी, जिम्मेदारी आ जाएगी, तब अपने आप सुधर जाएगा, और तुम खेत का काम छोड़ कर, अपनी पत्नी को लेकर तीर्थ पर निकल जाओ, फिर देखना वह कैसे काम पर जाता है, मजबूर होक
02:57करना पड़ेगा, तुम्हे दूसरा उपाई नहीं है, तुम्हारे पास, हाँ भाई, मेरे दिमाग में यह बात कैसे नहीं आई, अभी मैं उसकी शादी जल्द से जल्द करवा दूंगा, अगर तुम्हारी नजर में कोई लर्की हो, तो मुझे बताओ, मैं जल्द से जल्द
03:27काज में भी बहुत अच्छी है, तुम्हारे घर का सारा काम संभाल लेगी और मैंने सुना है, ये राधा बहुत मेहनती भी है, कोई भी काम करवा सकते हो, कभी मना नहीं करेगी, और वह लड़की तुम्हारे बेटे को सुधार कर ही रहेगी, अरे यह तो बहुत अच्छी �
03:57नजर में एक लर्की है, जो बहुत अच्छी है, बहुत मेंती भी है और दिखने में भी सुन्दर है, तो मैं सोच रहा था कि क्यों ना हमारे रगु की शादी उससे करवा दें।
04:27मैं भी यही सोच रहा हूं, ना सुधरेगा, तो क्या करेगा, काम नहीं करेगा तो खाएगा क्या, अपनी पत्नी को क्या खिलाएगा और कल बच्चे हो गए, तो उनको क्या खिलाएगा, मजबूर होकर उसे काम तो करना ही परेगा।
04:43रगु के माता पिता रगु की शादी एक लड़की से करवा देते है, घर में बहु आ जाती है, और कुछ दिन बाद रगु के पिता बोलते है,
04:51रगु, अब हमारी जिम्मेदारी खत्म हो गई, अब यह घर और खेट तुम्हे संभालना है, हम दोनों तो जा रहे है, तीर थियात्रा पर, कब लोटेंगे यह नहीं पता, जब हमारा मन होगा तब लोट आएंगे, बेटा अपनी जिम्मेदारी अच्छे से निभाना, हम स
05:21फिर कुछ दिन बीच जाते हैं, लेकिन रगु की आत्तों में कोई फर्क नहीं पड़ता, रगु पहले की तरह भक्ती में ही लगा रहता है, नमशिवाय, फिर एक दिन उसकी पत्नी सोचती है,
05:34मैं कितनी भाग्यशाली हूँ, मुझे इतना अच्छा पती मिला है, जो हमेशा भगवान की भक्ती में लीन रहता है, जिन्हें किसी बात का कोई व्यसन नहीं, सिर्फ प्रभु की भक्ती में लगे रहते हैं, मैं बहुत भाग्यशाली हूँ,
05:52सब कुछ अच्छा चल रहा होता है, और ऐसे ही कुछ दिन बीच जाते हैं, फिर भी रगु की आतों में कोई फर्क नहीं पड़ता, रगु जैसा का वैसा ही होता है, ऐसे ही दिन गुजरते जाते हैं, तो घर का अनाज खत्म होने लगता है, राधा अपने पती से बोलती है
06:22देखो, तब घर पर ही पड़े रहते हो, और हमेशा यह भक्ती करते रहते हो, मैं मानती हूँ, भक्ती करना अच्छी बात है, लेकिन कर्म भी करना होता है, अगर आप कुछ काम ही नहीं करोगे, तो हम भूखे मर जाएंगे, आपको कोई ना कोई काम धून लेना चाहिए, �
06:52और एक पेर के नीचे जाकर बैठ चाता है, और सोचने लगता है, मुझे लगता है, राधा ठीक कह रही है, मुझे कुछ करना ही पड़ेगा, ऐसे नहीं चलने वाला, पर कैसे करूँ, मेरा तो काम में मन ही नहीं लगता, पिताजी होते, तो वह सारा काम संभाल लेते, पर �
07:22जाता हूं, थोड़े से पैसे जमादार से ब्याज पर ले लेता हूं, फसल होने के बाद मैं उसे लोटा दूंगा, यह सोच कर, रगु जमीनदार के यहाँ पैसे मांगने चला जाता है, सेट जी, थोड़े से पैसे चाहिए थे, ठीक है, पर याद रखो, जब तक तुम य
07:52तुम्हें वापस दे दूंगा।
08:22जंगली जानवर का खेत खराब कर देते हैं, उसे पता ही नहीं चलता, फिर अगली सुबह जब वह देखता है, तो सारी फसल खराब हो चुकी होती है, वह सोचता है।
08:52यही सोचते सोचते वह घर पहुंच जाता है, घर जाकर राधा से कहता है।
08:58राधा हमारे खेत की सारी फसल जंगली जानवरों ने खराब कर दी।
09:04इतनी फसल खराब होने तक आप क्या कर रहे थे।
09:08दरसल मुझे पता ही नहीं चला कि उन्होंने यह सब कब कर दिया।
09:14मुझे सब पता है यह कैसे हुआ होगा।
09:18आप अपने नाम जप में इतने व्यस्त हो गए होंगे कि आपने ध्यान ही नहीं दिया होगा।
09:24इसी वज़ह से यह सब हुआ है।
09:27कुछ तो शर्म करो। मैंने बहुत से लोगों को भक्ती करते देखा है।
09:31पर ऐसी भक्ती जिसकी वज़ह से इंसान खुद का नुकसान करवाले, क्या काम की बात करते हो, सब कुछ इस भक्ती की वज़ह से हुआ है।
09:42आपकी इस भक्ती की वज़ह से आज हम इतनी मुसीबत में ए और आप पूरी तरह से पागल हो गए हो।
09:50ऐसे ही कुछ दिन बीच जाते और घर का अनाज पूरी तरह से खत्म हो जाता है।
09:57राधा रगु की आतों से बहुत परेशान हो जाती है। रगु फिर भी घर ही बैठा रहता है। कोई काम नहीं करता। तब राधा सोचती है।
10:08अब यह तो कुछ नहीं करेंगे। मुझे ही कुछ करना पड़ेगा मेरी तो किस्मत ही फूट गई इस आदमी से शादी करके। मैंने क्या सोचा था और क्या हो गया।
10:19जब मैं शादी करके आई थी मुझे लगा मुझे बहुत अच्छा पती मिला है जो भगवान की भक्ती करता है और आज बता चला एक दिन यही भक्ती हमें ले डूबेगी।
10:32आज उनकी भक्ती की वजह से ही घर में खाने को एक दाना नहीं है अब मुझे कुछ करना पड़ेगा इन्हें कितना भी समझा लो यह कुछ नहीं करेगा यह खुद भी भूखा मरेगा और हमें भी भूखा मारेगा मैं काम करती हूँ कहीं खाना बनाने का काम धून लेती ह�
11:02और जैसे तैसे अपने घर का गुजारा करती है
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