00:01जैसी राम हरर महाद्य मित्रों पूज सी गुर्देव सी राजेंदाजी महाराज पूज गुर्देव सिवानन जी महाराज पूज गुर्देव प्रेमानन जी
00:11महाराज पूज गुर्देव स्री भाय जी अन्मान पसाद पोदार और अनसभी सिद्ध महात्माव के चरणों में
00:18कोड़ कोड़ कर नाम तो चलिए सुरू करते हैं आज को टापिक कि जब एक गुरुभक्त संत को हुए भगवान
00:27जुष्णू के साथ शार दर्शन तो आईए जानते हैं क्या है रोचक गटना
00:33सी इस गटना के बारे में सीराजेंदार जी महाराज बताते हैं कि ये गटना राजस्थान के जुनजनु जिले के एक
00:43ब्रहमचारी जी की है जो की ब्रहमचारी जी के नाम से वहाँ पर प्रचलित थे वहाँ पर जाने जाते थे
00:53तो ये गटना उन ब्रहमचारी जी की है
00:57जो की जिलिय में एक बहुत बड़ा वो आस्रम चलाते थे
01:05और गायों की वो सेवा प्रद्दिन स्वेम ही करते थे गाउवालों के साथ मिलकर
01:11और उसमें अन्य किसी लोगों का हस्तचेव नहीं था केवल गाउवाले ही जो उन्हें सपोर्ट करते थे
01:19जो भी उन्हें देते थे उसी से गायों की वो सेवा करते थे और गाउवालों के साथ मिलकर ही गायों
01:27की सेवा करते थे
01:28वहाँ पर ब्रह्मचारी जी बताते हैं कि उनके बारे में ये घटना है
01:40उनके बारे में कहा जाता है कि वो ब्रह्मचारी जी बहुत ही गुरु भक्त थे
01:46और एक बार जब वो अपने गुरुदेव से मिलने बुलंसर गए
01:51बुलंसर में उनके गुरु महराज विराजमान थे
01:54तो जब वो उनके गुरुदेव ने कहा और वहां पर पहुँचकर उन्होंने अपने गुरुदेव की बहुत सेवा की
02:03जैसा की आपको पहले ही मैं बता चुका हूँ कि वो बहुत गुरुदेव जो आग्यां करते थे
02:09वो उसका अच्छर सा क्वालन करते थे अता उन्होंने अपने गुरुदेव की वहां पहुँचकर खुब सेवा करी
02:15तो उनकी सेवा से प्रसंद होकर एक बार जब उनके गुरुदेव के पास बंडारे के लिए आमंतरण आया निमंतरण आया
02:25तो उन्होंने वो निमंतरण की चुठी वो अपने उनी भ्रमचारी जी जो उनके सिस्टे उन्हें दी और कहा कि अब
02:32तुम वहां पर जाओ जो इस
02:45तुम्हें कोई सी प्रकार का कोई कश्ट नहीं होगा तो अपने गुरुदेव की यह बात सुनकर उन्होंने ब्रमचारी जी ने
02:53अपने गुरुदेव से कहा कि हे गुरुदेव आपकी आग्या सराकों पर आप जो कहेंगे वही होगा किन्त गुरुदेव मैं आपके
03:01चड़
03:14करूंगा तो उनकी यह बात सुनकर उनके गुर्दे बहुत प्रसंद हुए उन्होंने का कि तुम वाकई में मेरे प्रीज इस्यो
03:23अथा तुम अब समीब के वहीं बुलंग सहर में जाऊं उनका इस्थान था उन्होंने का या समीब में जंगल है
03:31वहां पर जंगल में एक जाड
03:34का पेड़ था कहते हुए उसके नीचे जाकर भगवान जुष्णू की साथना करो निश्ची थी तुमारी भगवान जुष्णू को जरसन
03:41करने की मनोकामना सीग राती सीग उर्ण होगी तो फिर वह अपने गुर्देव की आगया पाकर समीब के जंगल में
03:50गए और वहां ज
04:03पासे उन्हें मात्रे 6-7 महिनों में ही अपने 6-7 महिनों में ही भगवान जुष्णू के साथ चाथ दरसन
04:11हुए और जब उन्हें भगवान जुष्णू के साथ चाथ दरसन हुए तब भगवान जुष्णू के साथ दरसन हुए तब भगवान
04:28जुष्णू के साथ दरसन ह�
04:29आए अब मुझे कोई विकार सेस नहीं है मेरे जीवन का परम लच्छता आपका दर्शन करना वह हो चुका है
04:36अब आप जो कहे हुआ मैं करूंगा तो बिश्म बगवान ने कहा कि यदे भी तुम्हारी कोई भी इच्छा नहीं
04:43है तदा भी तुम्हारा कुछ कर्म अभी सेस है �
04:49तुम अभी संसार में ही रहो और जब तक जीवित रहो तब तक यहां के जो भी लोग आए जाएं
04:56उन सब को क्या नाम है कि बगवान मेरे नाम का किर्शन करवाओ यही तुम्हारे जीवन का परम लच्छ होना
05:05साथ है और उसके बाद जीवन समाप्त होने के बाद तुम्हें
05:09मेरे ही स्री भाधुन धाम की प्राक्ति होगी और ऐसा करकर भगवान अंतरठ्यान हो गए तो उसके पर स्री प्रमचारी
05:17जी फिर वहीं रहे बुलनसर में ही रहे और उन्होंने अपना कोई आस्रम आस्रम नहीं बदवाया वहीं पर उन्होंने अपना
05:24एक कुटी बना कर अ�
05:30कोम से वह पानी पीते ते और जो गांवाले एक पास कंवाले उन्हों दे जाते ते वहीव खाते पीते थे
05:36और सब को
05:38बगवान के नामजब की महिमा बताते थे और उन सबसे जो भी उनके पास आता था उनसे नामजब करवाते थे
05:48यह तब ही काहँवालों ने उनसे अन्रोद भी किया कि महाराज आपको यहां पर बगवान विश्णु के दरसन हुए यहां
05:54पर मट बनवा दिया जाए या मंदिर �
05:56पनवा किये जाए तो फक्कड किसम के साधू थे अन्होंने यह सब बना बनवाना सुप्राया है क्योंकि अगर यह सब
06:17राम नाम की और हरी नाम की दिच्छा दी, सब को राम नाम काजाब करने और हरी नाम काजाब करने
06:25में लगाया, भगवान के नाम जब भगवान के कुरित्र में लगाया और मृत्य के पस्चाथ भगवान के सी बैकुन धाम
06:32को प्राक्त हुए, धन्यवाद.
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