00:01जैसी राम हरर महादेव मित्रों, पूझ सीगुर्देव, राजिन दाज जी महाराच, पूझ सीगुर्देव, पूझ सीगुर्देव, पूझ सीगुर्देव, पूझ सीगुर्देव, सिवानन
00:12जी महाराच, पूझ सीगुर्देव, मसरी भाई जी, अन्मान पसात पोद्दा
00:18और सभी सिद्ध मात्माओं के चड़ों में कोड़ कोड़ परणाम चलिए शुरू करते हैं आज का टॉपिक आत्म साथचातकार का
00:28सबसे सरल तरीका तो आईए जानते हैं कि आत्म साथचातकार का सबसे सरल तरीका क्या होता है इस विसाय में
00:38जो पूज सिद्ध मात्मा है वो क
00:42क्या बताते हैं और पूज गुरुजन है उन्होंने इस विसय में क्या बताया है तैंड़ चलिए जानते है aún।
00:53पूज गुरुदव और सिद्ध मात्मा जो बताते हैं कि आत्म साठ्षाथकार का सबसे सरल तोरीका और सबसे पहला तरीका जो
01:04है।
01:04वो है गीता का अध्यन और इसकी जो विद्य है वो इस प्रकार है जो भी व्यक्ति आत्म साथ चाहतकार
01:17करना चाहता है उसे गीता का अध्यन हवत से कड़ना चाहिए और गीता का अध्यन किस प्रकार करें उसकी विद्य
01:24इस प्रकार है जैसा कि आप सभी लोग जानते हैं कि आ
01:34अगर आप उन राइन पढ़ेंगे
01:35तो इस में आपको जो
01:38दिव्य अनुबूती गीता को
01:42गीता को पढ़ने में होती है
01:44वो अनुबूती आपको नहीं होगी
01:46क्योंकि इसकी पूरी एक विदी है
01:49इस विदी को जानते हैं
01:50तो चलिए शुरू करते हैं
01:52इसके लिए आपको जो गीता बाजार में उकलब्द होती है
01:59मतलब गीता की जो किताब होती है
02:01वो किताब आपको पढ़नी है
02:02ना की ऑनलाइन
02:03इस बात का विसे ध्यान रखते है
02:05सबसे पहले आप
02:09आपके पास गीता होनी चाहिए
02:11जो की मतलब गीता जो पुस्तक है जो गोरखपूर प्रेस में छपी होती है जिसके संस्पापक स्री अन्मान प्रसाद पुद्दार
02:23स्री भाई जी थे वो आली गीता आपको पढ़नी है और उस गीता को सबसे पहले नहां दो के किसी
02:34आसन पर विराजमान करें और फिर उस गीत
02:44गीता को पढ़ने से पहले सबसे पहले पर जीसरी को सुद्द करें और उसके बाद गीता को किसी सच आसन
02:53पर विराजमान करें और उसमें गीता को रखकर भग्राम को तरुण
02:59केहन भगवान को अरजुन जी को भक्त और भगवान सभी को और जो भी आपके इस देव हैं उन सभी
03:06भगवानों को सबसे पहले प्रणाम करें अपने जो पूज गुर्देव हैं सिद्मात्माजन हैं उन सबको प्रणाम करें और गीता का
03:14अध्यन प्रारम करें और इसकी विद
03:18इस पकार है कि गीता का अध्यान किस पकार करें अगर हो सके तो शुरुवास से गीता का अध्यान प्यारम
03:25करें मतलब सबसे पहले गीता का महात्म और उसके बाद गीता का अध्याय जैसे कि आगर आप पहला अध्याय शुरू
03:34करते हैं तो सबसे पहले उस अध्याय का महात्म �
03:38सबसे पहले गीता के प्रतम अध्याय का महात्म और उसके बाद गीता का प्रतम अध्याय
03:44मतलब आप कोई भी अध्याय पढ़ें तो सबसे पहले उसका महात्म वस्पढ़ें इसकी इसी पेकार है
03:51तो आपको क्या करना है सबसे पहले महात्म पढ़ना है और फिर एक अध्याय पढ़ना है
03:57मतलब एक दिन में आपको एक अध्याय कम्प्लीट करना है
04:02मतलब आप पहले महात्म पढ़ेंगे उस अध्याय का जो अध्याय आप पढ़ने जाने हैं जैसे मान लीजिए आप पहले अध्याय
04:09पढ़ने जाने हैं तो सबसे पहले उस अध्याय का महात्म पढ़ें और फिर उस अध्याय को पढ़ें और एक बार
04:17में एक अध्याय अवस्य
04:19complete करें
04:22इससे क्या होगा
04:24वो मैं आपको बताना चाहता हूँ
04:26जैसा कि सभी
04:27पूज गुरुओं ने बताया है
04:28सिद्ध संतों ने बताया है
04:30और भगवान ने सोयम भी
04:32गीता में कहा है
04:33यदि कोई व्यक्ति सच्चे मन से
04:36सुद्ध हदै से
04:37सरीर को पवित्र करके
04:39और सुद्ध हदै से
04:41सच्चे मन से भगवान की
04:43के गीता
04:48भगवान की जो गीता है
04:49उसे पढ़ता है
04:50तो भगवान ग्यान यद्धिद्वारा
04:52पूजित होते हैं
04:54मतलब वो एक तरह से
04:55भगवान की पूजा ही करता है
04:58गीता का अधिन स्वयम एक बगवान की पूजा है और इसमें आपको दिव अन्भूतियां होती है किस प्रकार की दिव
05:05अन्भूति होती है वो भी बताना चाहता हूं इसमें सबसे पहले आपको ज्यान प्राप्त होता है और ज्यान प्राप्त होने
05:14के साथ साथ आपको दिव अ
05:27इतनी सांती मिलेगी जिसकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते हैं और आध्यात्मिक आत्यन्थिक सुख जो होता है आत्मिक सुख
05:35वह आपको मिलेगा आप इस प्रकार से जैसी भी मैंने आपको बताई कि नहांद होके पूर्ण सद्धा के साथ किसी
05:43पवित्र आसन पर गीता को वि
05:56पढ़ना चाहते हैं और यदि आप एक ही अध्याय पढ़ना चाहते हैं तो महात्म सही पढ़ें और अगर हो सके
06:03तो पूरी गीता पढ़ें एक एक अध्याय करके लेकिन पढ़ें इसी प्रकार सबसे पहले गीता का उस अध्याय का महात्म
06:12जैसे अगर आप प्रतम अध्याय
06:14से शुरू कर रहे हैं तो प्रतम अध्याय का महात्म और फिर उस पूरे अध्याय को एक ही बार में
06:19complete करें इस प्रकाड़ से आप जब
06:22नहा दोंके गीता का अध्यान करें एक एक अध्याय Kूरा पड़ा 9 10 आपको अवस्य होगी और
06:31हम साथ आर्फ मसाचार का की कि ए еще की यह पहली सीडि आपको आप UP email का अगर आप
06:52कोई जरूरी नहीं है कि नहीं आपको डेली पड़ना है लेकिन आप जब भी आपका मन करें आप प्रेम पूर्वक्त
06:58नहाद होके पवित्थ होके आप गीता का अध्यन करें महात्म सहित निश्चत रूप से आपको दिव अन्भूतिया होनी प्यारम हो
07:08जाएंगी और आपको �
07:09ज्ञान भी होगा और आपनिक सुध्धी प्यांत्य भी मिलेगी जैसी राम हरर महादेव म जाएंगी मम्म पूझ सी गुर्देव सी
07:23राजेंदास जी माराज पूझ सी गुर्देव सिवानन जी माराज
07:27पूछ सी गुर्देव पदेशानन जी महाराज, पूछ सी गुर्देव स्रीबाई जी सी हनमान प्रसाद पोद्दार
07:34और अन्य सभी सिद्ध मात्माओं के चड़ों में कोट कोट प्रणाम
07:39तो चलिए सुरू करते हैं आज का टॉपिक की कबीर दाज जी को गुरू की प्राप्ति कैसे हुई जबकि वे
07:48मुस्लिम थे
07:49तो आईए जानते हैं इस प्रस्न का उत्तर पूछ गुर्देव सी राजेन दाज जी महाराज देते हैं
07:57स्री गुर्देव राजियन दाज जी माराज बताते हैं कि इस विसाय में एक बहुती रोचक घटना है
08:08बताया जाता है कि जब कभीर दाज जी बालक थे छोटे बच्चे थे उस समय उन्हें आकास वानी हुई
08:18कि तुम गंगा जी के घाट पर जो रोच इस समय कासी के सबसे बड़े गुरू है स्री रामानन जी
08:29माराज
08:36वो रोच गंगा जी में चार बजे इसनान करने जाते हैं
08:43तो तूम गंगा जी के घाट पर जो सीडियां होती है तुम तीन बजे जा कर उन सी डियों पर
08:50लेड़ आना और जब गुरू जी
08:53उस रस्ते पर आएंगे भानान जी उस रस्ते में आएंगे शीडियों से उतरेंगे
08:58और उनका पैर जब तुम्हारे सीने पर पड़ेगा तब वो जो भी बोलें तुम उसे गुर्धिच्छा मान लेना तुम उसे
09:09गुर्मन्त मान लेना और उसी मंत का जब करते रहना
09:14तो यह जानकर कभीरदाजी को बहुत ही प्रसंता हुई कभीरदाजी ने वैसा ही किया अगले दिन वैसा ही किया जैसा
09:26कि आकास वाड़ी में उन्होंने सुना था वो अगले दिन सुबह तीन बजे
09:34सुरी रात के तीन बजे यह गंगा जी के घाट पर सीडियों पर जाकर लेड़ गए और जैसे ही गुरुदेव
09:40रामनन जी महराज
09:45सीनियों से उतरने लगे
09:46वैसे ही उनका पैर
09:48कबीर दाजी के सीने पर पड़ा
09:51और जैसे ही कबीर दाजी
09:53जो बालक थे उनके सीने पर
09:55जैसे ही गुरू जी का पैर पड़ा
09:57गुरू जी बोल उठे
09:59बालक राम राम कहो
10:01राम राम कहो
10:02और इतना कहकर
10:03वो गंगाना आने को चले गए
10:05और उसके बस चाथ
10:07यह गटना हुई कि कवीरदाज जी ने
10:10उसी मंत को
10:12राम नाम लूपी मंत को
10:14अपना लिया और उसी को अपना
10:15गुरुमंत मान लिया और उसी का
10:17नाम जब कारम कर दिया
10:19और अगले दिन
10:20कबीर दाज जी तिलक इलक लगा कर वेशनव वेश धारण करके अपना अपना जो बाजार था बाजार के चोराहे पर
10:32जाकर बैड़ गए और जो भी वेशनव आता जो भी सादू संत आते उन सब को पणाम करके कहते कि
10:39ए गुरु भाई नमस्कार तो इतना सुनकर जो वो साद�
10:45जनते वो बहुत प्रोदित हुए कि ये जुला है कि पुत्थ तू तो मुसल्मान है और तू हमारा गुरु भाई
10:53कब से हो गया तब उन्हों ने पूचा कि तुमारे गुरु कौन है तब कभीर दाजी ने बताया कि मेरे
11:02गुरु विस गुरु रामा नेंजी महाराज है जो क
11:16रामनन जी के पास पहुँचे और क्योंकि वह जानते थे कि रामनन जी केवल रामनों के बालकों को दिच्छा देते
11:25हैं और उन्हें से भी जो बहुत योग गोता है उन्हीं को दिच्छा देते हैं सब को दिच्छा भी नहीं
11:30देते हैं
11:30तो उन्होंने इस मुस्लिम कुल के बालग को किस पकार से दीच्छा दी या जानने के लिए वह रामा निन
11:42जी के पाथ मेंचे और उन्होंने यही प्रस्न दोराया
11:45तो जब उन्होंने वो प्रस्म दोराया
11:48तो रामा निंजी को भी प्रोदाया कि मैंने तो ऐसा कुछ भी नहीं किया
11:52मैंने तो ऐसी किसी को भी दिच्छा नहीं दी
11:57तब उन्होंने उस बालक को बलवाया
11:59तो जैसे ही कबीर दाज जी रामा नंजी की कुटी के सामने पहुँचे तो उनों ने कुटी के बाहर से
12:07ही उनकी कुटीया के बाहर से ही रामा नंजी को अपने गुरुदेव को प्रणाम किया
12:14और रामा नंजी ने कुटिया के अंदर से ही कुटिया में दरवाजे पर परदा पड़ा हुआ था उसके अंदर से
12:23ही
12:23रामा नंजी ने उसे पूछा कवीर दाजी से पूछा कि ए बालग बताओ मैंने तुम्हें कब दिच्छा दी
12:31तब कवीर दाजी ने पूरी घटना कैस सुनाई कि किस पकार रात में जब सीडियों से उतर रहे थे दंगा
12:40इसनान करने जब वो जा रहे थे
12:42और सीडियों से उतर रहे थे तब उनका पर कवीर दाजी के सीने पर पड़ा था और उन्होंने राम राम
12:49बोलने को कहा था
12:51तो गुरु मन्त भी यही होता है कि जो गुरुदेव अपनी भाणि से कहते हैं, वही गुरु मन्त होता है
12:59जो सिस्फ्के लिए
13:01तो उन्होंने का इस पकार से, तबीडार जी ने का इस पकार से अब आप मेरे गुरु है
13:07तो रामा निंजी ने टवीरदार जी से कहा
13:12कि अच्छा यदि तुम्हारी राम नाम में इतनी प्रीति है
13:15इतना विस्वास है तो तुम सिद्ध करके दिखाओ
13:18कि तुम वाकई मेरे सिस बनने योग हो कि नहीं
13:22तो उन्होंने कहा गुर्देव जो आगे हैं
13:24आप जो कहेंगे मैं वही करूँगा
13:27और तब रामा निंजी ने कहा
13:31कि तुम मुझे यसिद्ध करके दिखाओ कि तुम्हें
13:35तुम्हें राम नाम में बहुत प्रीति है
13:37तब कभीरदार जी ने कुटिया का जो एक तिनका था
13:44उसे चुआ और जैसे ही उन्होंने कुटिया के चपर के तिनकों को चुआ
13:49वैसे ही कुटिया के चपर के सभी तिनकों में से राम नाम की आबाद आने लगी
13:54और पूरी कुटिया से पूरे वाइमंडल में लाकों राम नाम की धुनी निकलने लगी
14:01यह देखकर यह सुनकर
14:03रामानन जी बहुत प्रसंद हुए
14:05और उन्होंने तुरंट अपना पड़दा अटाया
14:07और बाहर आकर कबीरदा जी को गले लगाया
14:10क्योंकि रामानन जी
14:12कबीरदा जी की महिमा जानते थे
14:15वो जानते थे
14:16कि यह योगिसिस है
14:17लेकिन यह सब उन्होंने
14:19दुनिया को दिखाने के लिए किया था
14:21कि ताकि जातिपात और धर्म
14:23का कोई भी बंदन ना रहे
14:26क्योंकि भगवान एक है
14:27इसवर अल्ला सब एक है
14:29और रामानन जी और कबीरदा जी
14:32यह पूरे जगत
14:34को यही दिखाना चाहते थे
14:35कि इसवर में और अल्ला में
14:37बेद नहीं हैं सब एक ही है
14:40इस पकार से
14:43कबीरदा जी को
14:44उनके गुर्देव की
14:46प्राप्ती हुई
14:47और इसी पकार और फिर
14:49कबीरदा जी राम नाम का जब करते हुए
14:52सिद्ध संत हुए
14:53जो कि आप सबको विदित है
14:55आप सबको पता है
14:56यह थी कबीरदा जी से
14:59जुड़ी हुई रोचक घटना
15:02धन्यवाद
Comments