00:00पिछले एपिसोड में आपने देखा कि हातिम ताई ने पहला सवाल हल करके कैसे आगे बढ़े? अब देखिए आगे एपिसोड दो.
00:09पातिम ताई अपनी जिन्दगी के सबसे अनोखे सफर पर निकल चुके थे. जब वह अपने महल से निकले तो नक्षे की रोशनी उन्हें एक अजीब जगा की ओर ले गई.
00:23यमन की हरी भरी वादियों को पीछे छोड़ते हुए, वे एक ऐसी जगह पहुँचे जहां चारो तरफ रेद के तूफान थे और दूर तक भूल भूल या जैसी जगह दिख रही थी. यह जगह ना तो यमन की आम जमीन जैसी थी और ना ही दुनिया की किसी और जगह जैसी
00:53और पुरानी भाषा में लिखा एक सवाल चमकने लगा, वह क्या है जो सुभह चार पैरों पर, दुपहर में दो पैरों पर और शाम को तीन पैरों पर चलता है? आतेम जो अपनी बुद्धी और हाजिर जवावी के लिए जाने जाते थे, सवाल के जवाब पर सोचने लगे
01:23होता है, और बुढ़ापे में छड़ी का साहरा लेता है, जैसे ही हातिन ने जवाब दिया, दरवाजा तेज आवाज के साथ खुल गया, लेकिन तभी दरवाजे के पीछे से एक काला और डरावना साया दिखाई दिया, वह साया तेज हवा के साथ हिल रहा था, और ऐसा ल�
01:53मौजूदगी डर पैदा करने के लिए काफी थी, हातिम ने अपनी बहादुरी और समझदारी के साथ उस साय का सामना किया, वे जानते थे कि यह सिर्फ ताकत का नहीं, बलकि उनके धैरे और सैयम का भी इंतिहान है, साया बार बार हमला करता, लेकिन हातिम अपनी जगह मज
02:23हातिम ने एक बड़ा हॉल देखा, जिसकी बीच में एक पत्थर की मेज पर दूसरा सवाल चमक रहा था, तुमारे पास न्याय का तराजू है और दो चीजें है, एक सच्चाई और एक जूट, तुम कैसे न्याय करोगे कि दोनों को सही स्थान मिले, हातिम ने सोचा कि यह स
02:53कहान साफ का तकाजा है कि सच्चाई को इसकी रोशनी के साथ सामने रखा जाए और जोट को इसकी हकीकत के मताबक बे नकाब किया जाए, हातिम ने गौर किया कि यह महज अलफाज का खेल नहीं, बलकि एक गहरा फलसफियाना सवाल था, वो जानते थे कि सच्चाई हमेशा �
03:23दर्वाजा खुल गया, लेकिन इस बार दर्वाजे के पीछे एक संकरा रास्ता था जो बहुत गहराई तक जाता था, हातिम ने रास्ते पर कदम रखा और उन्हें पता था कि यह तो बस शुरुआत है, आगे न जाने कितने सवाल, मुश्किले और राज उनका इंतजार कर
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