00:00पूरे देश में आज गुरु पूर्णिमा का पर्व बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है।
00:08इस देन सभी लोग अपने गुरु की पूछा करते हैं।
00:11लेकिन क्या आप जानते हैं कि हर एक इनसान के जीवन में उसके शिक्षकों को ही उनका पहला गुरु माना जाता है।
00:18पर आएए आज की इस वीडियो में जानेगे कि आखिर शिक्षक दिवस और गुरु पूर्णिमा के बीच में अंतर क्या होता है।
00:26नमस्कार मैं हूँ आप सभी के साथ कृतिका और आप देख रही हैं बोल्ड स्काय।
00:30सबसे पहले जानते हैं कि गुरु पूर्णिमा आखिर होती क्या है।
00:33गुरु पूर्णिमा हिंदू पंचांग के अनुसार आशान मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है।
00:37ये दिन विशेश रूप से गुरु को समर्पित होता है, चाहे वो आध्यात में गुरु हो या जीवन के मार्क दर्खशक।
00:44ये परंपरा महर्शी वेद व्यास को समर्पित है, जिन्होंने वेदु का संकलन और महाभारत की रचना की।
00:50इसी कारण इसे व्यास पूर्णे मा भी कहा जाता है।
01:20की रूप में मनाए, तब सही 5 सतंबर को शिक्षकों के योगदान और सम्मान के लिए इस दिवस को बनाया जाता है।
01:27आई, अब दोनों के अंतर को समझते हैं।
01:30गुरु पॉर्णे मा आशान पॉर्णे मा यानि की जलाई महीनी में मनाई जाती है, वहीं शिक्षक दिवस 5 सतंबर को सलिब्रेट किया जाता है।
01:37गुरु पॉर्णे मा आध्यात में गुरु को सम्मान देनी के लिए मनाया जाता है।
01:54गुरु पॉर्णे मा के विधी पूजा, भक्ति और आशिरवात लेना होता है।
01:58साथ ही शिक्षक दिवस की विधी, कारिक्रम, भाषन और सम्मान समार हो है।
02:03वैसे दोनों में कई अंतर हैं।
02:05लेकिन दोनों दिन हमें ये सिखाते हैं कि चाहे जीवन के किसी भी क्षेत्र में हो।
02:09गुरु और शिक्षक का स्थान सर्वोच्छ होता है।
02:12गुरु पॉर्णिमा हमें हमारे आध्यात में एक मार्ग दर्शकों की याद दिलाती है।
02:17वहीं शिक्षक दिवस शिक्षा विवस्था के नायकों को सम्मान देता है।
02:21कि इस वीडियो में इतना ही और भी ऐसी स्टोरीज को देखने के लिए आप जुड़ रहे हमारे साथ।
02:25तब तक के लिए नमस्कार।
02:51पर भाई आप द्वा्ग के लिए नमस्कार।
02:56प्रॉप्ट में प्रॉप्ट
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