00:00आप देख रहे हैं ड्रामा नमा बाई अली अन्सुमी जहां हम लाते हैं आपके लिए हर ड्रामा का असली जज़बाती सफर उन लम्हों के साथ जो दिल को छूजाते हैं
00:20आज हम लेकर आए हैं एक इंटेंसली इमोशनल रिव्यू ड्रामा सीरियल शेर के एपिसोड 15 का एक ऐसा एपिसोड जहां दर्ध, साइकोलोजिकल टेंशन और उनसुनी चीखे मिलकर एक ऐसी कहानी बनते हैं जो देखने वालाई को अंदर टक हिला देती हैं
00:36तो चलिए चलते हैं उन लम्हों की तरफ जहां शेर का क्यारेक्टर फिर से एक नई जंग लड़ता है लेकिन इस बार अपने दिमाग से एपिसोड की शुरुआत होती है एक पागल खानाई के अंधेरे से जहां हर चहरा किसी पुरानी कहानी का गवाह लगता है
00:52शेर जो कभी एक पावफुल और बागी इनसान था अब एक टूटे यूशाक्स की तस्वीर बन गया है लेकिन ये तस्वीर सिर्फ वीकनेस नहीं ये अंदर की फटकार, गिल्ट और सवालों से भरी हुई है
01:06एक सीन में जब शेर कहते है, मेन राजा था, अब बस यादे रह गई है, तो ये डायलॉग सिर्फ लफज नहीं
01:14ये एक पुरी जिन्दगी का खुलासा बन जाता है
01:18उसके जजबात, उसकी तनहाई, उसका टूट जाना, सब कुछ एक सीन में समझा जाता है
01:24डॉक्टर फजर का रोल इस एपिसोड में और गहरा होता है
01:29जब वो कहती है, तुम पागल नहीं हो, सिर्फ तकलीफ में हो, तु ऐसा लगता है जैसे किसी ने शेर के जहमों पे मरहम रखा हो, या कम अज कम उसका दर्द समझने की कोशिश की हो
01:40एक और emotional scene टैब होता है, जब शेर अपने हाथ दिखाता है, जखमी, खुद से लड़े हुए, वो कहता है
01:49ये लोग मुझे गुसा डाइलिट है, लेकिन मैं किसी को नहीं मारता, में पागल नहीं हूँ
01:55ये डायलॉग इंसानी mental health और emotional trauma को इस तरह बाया करता है, जो अकसर dramas में नहीं दिखाते
02:02समरा का जिक्र भी इस episode में बार-बार होता है
02:06जब शेर चीखता है, समरा
02:09समरा, तुवो सिर्फ नाम नहीं होता, वो एक आवाज होती है उसकी guilt की, उसकी यादों की, उसके पच्टावे की
02:18audience के लिए ये लमहे choking है
02:21क्योंकि वो समझ जाते है कि शेर का दर्द सिर्फ दिमाग का नहीं, दिल का भी है
02:27एक सीन में डॉक्टर और नर्स की conversation होती है, जहां वो कहते हैं कि शेर का treatment किसी result तक नहीं पोहुच रहा
02:35रिपोर्ट्स रिपीट हो रही है, condition सेम है
02:39लेकिन सबसे बड़ी बात ये है कि शेर सब कुछ याद रखता है, वो भूलता नहीं
02:44और यहीं यादाशत उससे पाल-पाल तोड रही होती है
02:48अजरा आंटी का character भी निकल कराता है
02:52वो कहती है, हमारी बेटी का वक्त गुजरता जा रहा है, हमें अब फैसला लेना होगा
02:58ये dialogues हर उसमा की आवाज है, जो अपनी बेटी के future को लेकर परेशान होती है
03:04और वो डिमांड करती है, हमें लाइन से मिलवाया जाए
03:08यहां, शेर एक metaphor band जाता है, एक इनसान जो कभी ताकातवार था, अब confined है, misunderstood है
03:17लेकिन अंदर से अब भी जिन्दा है
03:19direction की अगर बात करें, तो कमल था
03:22scenes में noise कम और जज़बाद ज़्यादा था
03:26background music light था, लेकिन शेर के चीखने, उसकी आँखों का दर्द, और उसकी बेचनी इतनी realistic थी के आप उसे मेसूस किये बगहर रह नहीं सकते
03:36अगर rating की बात की जाए, तो ये episode deserve करता है 9.3 out of 10
03:43थोड़ी और depth मिलती शेर और समरा के connection में, तो हो सकता ये 10 टक चला जाता
03:49लेकिन फिर भी, ये episode दिल और जहां दोनों को छूग गया, तो दोस्टों, ये था शेर के episode 15 का review, सिर्फ आपके अपने
03:59चैनल ड्रामा नम्द बाई अली एंड सुमी पर, अगर आपको ये review पसंद आया हो तो वीडियो को like करें, चैनल को subscribe करें, और bell icon जरूर दबाए ताके आप हमारे अगली reviews
04:11मिस ना करें, और हां, comments में ये जरूर बताए, small orange diamond आपके लिए सबसे emotional scene कौन सा था, small orange diamond क्या share सच में पागल है या सिर्फ तूटा हुआ इंसान, small orange diamond अगर आप डॉक्टर फजर की जगह होताई, तो क्या उसे आजादी देते, आपके comments हमारे लिए बहुत एहमियत रखते ह
04:41तब टक के लिए अपना खयाल रखेगा, अला हाफिज
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