00:00राधिका इतनी गमगीन थी कि आसू की जगह उसके नयन से सीधे गर्म-गर्म नूडल्स टपक पड़े। जितना ज्यादा वह फूट-फूट कर रोती उतनी ही लंबी चौडी नूडल्स की धार निकलती। बस फिर क्या था? कल तक जिसके घर में ताले जहंकार जैसी कंगाल
00:30अगली सुबह वह लोकल बाजार में खिल-खिलाता नूडल्स टॉल लेकर पहुच गई। पहली ही ग्राहक ने तारीफों के पुल बांध दी। बिका बिकाया खत्म तो राधिका किसी सुनसान गली में गई। दिल खोलकर रोई, बाल्टी भर नूडल्स निकाली और धड�
01:00बाजार दाधी की मुस्कुराती फोटो पर पड़ी, याद आया दौलत के पीछे भागते भागते दाधी को भी अनाथा श्रम छोड़ाई थी, अपराध बोध फूटा और राधिका फूट पड़ी, इस बार आंसू नहीं बलकि जरनोसी नूडल्स बरस पड़ी, बाजार
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