00:00आज है पांच महर्रम अलहराम
00:02कर्बला की जमीन पर जल्म की अंधिरी रातें गहरी हो रही है
00:06हर दिन के साथ इमाम हिसी और उनके वफादार असहाब पर मसीबतें बढ़ती जा रही है
00:12इस दिन अबैदुलाबन जियाद ने अमर बिन साथ को हुक्म भेजा
00:16हुसेन के खेमों का महासरा तन कर दो
00:19पानी का एक गत्रा भी उन तक न पहुँचने पाए
00:23और फिर शमर मलून के साथ मजीब चार हजार सिपाही कर्बला के मैदान में आ पहुचे
00:30अब कर्बला में यजीदी लशकर की तादाद बीस हजार से भी ज्यादा हो चुकी थी
00:35प्यास का आलम बढ़ रहा था
00:37छोटे छोटे बच्चे
00:40लबों पर अल अतिश अल अतिश ही कहते हुए मा की आवोश में सिसकने लगे
00:45हजरत अली असगर तड़प रहे थे
00:47बीबी सकीना की आँखों में प्यास के साए गहरे हो रहे थी
00:51क्या हुसेन ने किसी का हक मारा था
00:54क्या ये वही नवासा रसूल नहीं जिसे नबी अपनी जबान चाह कर पानी देते थी
01:00फिर क्यों
01:01उम्मत मुहम्म्द हुसेन को प्यासा मारने पर ताल गई थी
01:05आच मुहरम हमें याद दिलाता है
01:08कि मजलूम की तादाद कभी ज्यादा नहीं होती
01:11इसकी सच्चाई ही इसका हथियार होती है
01:14सलाम हो उन प्यासों पर मीम
01:17सलाम हो हुसेन पर जिन्होंने जल्म के खिलाफ सरापा एहतिजाज बन कर कुर्बानी दी