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  • 1 year ago
self made movies
Transcript
00:00रासमई हवेली और शापित रानी
00:02सालों पहले राजस्थान की वीरान जमीनों पर बसी थी एक बेहत भवव्य और रहसमई हवेली
00:07राजगण की हवेली
00:09इस हवेली के राजा थे राजा विकरम सिंग
00:11जो अपनी बहादुरी और कठोर फैसलों के लिए पूरे इलाके में प्रसिद्ध थे
00:16परंतु जितने शक्तिशाली वो थे
00:20उतनी ही रहसिमई थी उनकी रानी
00:22रानी पदमावती
00:24रानी पदमावती बहुत सुन्दर थी
00:27उनकी आँखों में एक अजीब सी उदासी
00:30और कोई अनकहा राज छिपा था
00:32कहते हैं हवेली में उनकी शादी के बाद से ही अजीब घटनाएं घटने लगी थी
00:37खंभों में खून की बूंदे दिखाई देती
00:40हवेली के नौकर अचानक गायब हो जाते
00:43और हर अमावस्या की रात
00:45कोई औरत के रोने की आवाज हवेली के गलियारों में गूंज थी
00:49राजा विक्रम ने इन घटनाओं को डर कर नहीं
00:53गुस्से से देखा
00:54उन्होंने एक दिन पुजारी को बुलवाया
00:57पुजारी ने कहा
00:58महराज इस हवेली पर एक प्राचीन श्राप है
01:02जब तक इसकी सच्चाई उजागर नहीं होती
01:05तब तक ये हवेली और इसका शासक
01:08कभी सुखी नहीं रह सकते
01:10राजा ने इन बातों को
01:12अंध विश्वास मानते हुए अंसुना कर दिया
01:15परंतु उसी रात एक ऐसा हादसा हुआ
01:18जिसने सब कुछ बदल दिया
01:20अमावस्या की रात
01:22अमावस्या की उस रात
01:24हवेली के सैनिकों ने देखा
01:27कि रानी पदमावती
01:28अपने कम्रे से बाहर निकली
01:30उनका चहरा रक्तवरण हो चुका था
01:34उनकी आखें सुर्ख आग जैसी जल रही थी
01:37वो हवेली के पुराने तहखाने की और बढ़ रही थी
01:41तहखाना जहां दशकों से किसी को जाने की अनुमती नहीं थी
01:45राजा विक्रम सिंग ने उनका पीछा किया
01:49जब वो तहखाने के पास पहुँचे तो उन्होंने देखा
01:53राजा चुपचा पीछे पहुचे और जैसे ही उन्होंने राणी को टोका
02:04राणी पल्टी और उनकी आँखे जलने लगी
02:07एक करकश औरत की आवाज में राणी बोली
02:10अब बहुत देर हो चुकी है विक्रम
02:13तुमने उस औरत की चीखे नहीं सुनी
02:16जब उसे जिन्दा इस हवेली में दफना दिया था
02:19वो औरत मैं थी
02:20राणी नहीं वो आत्मा हूँ जिसे तुमने अपने लालच में कुर्बान कर दिया था
02:26राजा स्तब्ध रह गए
02:28तब ही अचानक एक तेज हवा चली
02:31और तेहखाने का दर्वाजा अपने आब बंध हो गया
02:34अंदर की दीवारों से खून टपकने लगा
02:37पूरा तेहखाना चीखों और रुदन से गूंज उठा
02:40रहस सच्चाई ये थी कि राणी पदमावती असली राणी नहीं थी
02:46सालों पहले राजा विक्रम ने एक जादूगर्नी को धोका दे कर
02:55उसकी बहन को जिन्दा तेहखाने में दफना दिया था
02:58वो लड़की अब आत्मा बन चुकी थी
03:01जिसने राणी पदमावती के शरीर में प्रवेश किया था
03:05उसने वर्षों तक सबर किया
03:11लेकिन अब वो दिन आ गया था जब हवेली का श्राप पूरा हो रहा था
03:16अंतिम प्रहर हवेली की दिवारे कांपने लगी
03:19राजा की चीखे हवेली के हर कोने में गूंजने लगी
03:23अगले दिन सूरज निकला तो हवेली विरान थी
03:27राजा गायब थे, रानी भी नहीं दिखी
03:31लोग कहते हैं कि राजगर की हवेली अब सुनसान है
03:35मगर हर अमावस्या की रात हवेली से एक महिला की हसी और किसी आदमी की चीखें आती है
03:42कहते हैं रानी की आत्मा अब भी तैखाने में राज करती है
03:47अपने राजा को हर राद जिन्दा मारती है बार बार प्रशन आपके लिए
03:53क्या आप कभी किसी ऐसी हवेली गए हैं जहां इतिहास प्रेम और बदले की भूकी आत्मा का बसे रहो
04:00कमेंट करें और बताईए और कहानी पसंद आई हो तो लाइक सबस्क्राइब और शेर जरूर करें
04:06राजगर की हवेली अब वीरान थी
04:08चारों और सूखा जाडियां और दीवारों पर जमी सियाह काई
04:13हवेली में कोई नहीं रहता था पर वहां की हवाओं में अब भी रानी पदमावती की सिस्कियां
04:19और राजा विक्रम की चीखें तैरती थी
04:21गाउं वालों ने हवेली के पास जाना छोड़ दिया था
04:25दिन में भी कोई उस ओर नहीं देखता था
04:28पर एक दिन एक इतिहासकार डॉक्टर रुदराक्ष शर्मा दिल्ली से वहां पहुँचा
04:33उसने सुना था कि ये हवेली प्राचीन तांत्रिक शास्त्रों और अद्रिश्य शक्तियों का घर रही है
04:40वह सुबूत इखठा करना चाहता था
04:42उसके साथ थी उसकी रिसर्च असिस्टेंट अनामिका जो रहस्यमई चीजों से बच्पन से ही आकर शित रही थी
04:50डॉक्टर रुदराक्ष और अनामिका ने हवेली में एक तंबू लगाया और अपने उपकरनों के साथ रिसर्च शुरू की
04:56दिन भर सब शान्त रहा लेकिन जैसे ही रात हुई हवेली की फिजा बदलने लगी
05:02धर्वाजे अपने आप चर्मराने लगे हवा थम गई पर दर्वाजे खर खड़ाने लगे
05:07अनामिका को लगा किसी ने उसके कान में धीमे से कुछ कहा
05:12वो अभी भी यहीं है अनामिका ने कापते हुए डॉक्टर को सब बताया
05:16पर उन्होंने कहा ये तुम्हारा ब्रह्म है ये हवेली बस पुरानी है और कुछ नहीं
05:24लेकिन कुछ ही पलों में उनका कैमरा अपने आप आउन हो गया
05:28और स्क्रीन पर जो दिखा उसने दोनों की सांसे रोग दी तैखाने की दीवारों पर खून से लिखा एक नाम विक्रम और एक और नाम पदमावती
05:40फिर अचानक एक औरत की भटी हुई दर्दनाक चीख पूरे तंबू में गून जुठी
05:48रात का रहस्य डॉक्टर उद्राक्ष ने तै किया कि अगली सुबह हवेली के तैखाने की जाच करेंगे
05:56पर अनामिका बेचैन थी उसे उस रात नींद नहीं आई
06:00जब उसने आखे बंद की तो उसे एक सपना आया एक औरत लाल लेंगे में
06:06जले हुए चेहरे के साथ हाथों में पाइले पहने धीरे धीरे तैखाने की सीड़ियां उतर रही थी
06:13जैसे ही वो औरत ने पलट कर देखा उसकी आखे काली थी और मूसे खून बह रहा था
06:20अनामिका चिला उठी वो रानी है वो जिन्दा है
06:25सुबह की शुरुवात और तैखाने का रहस सुबह दोनों तैखाने की ओर बढ़े
06:31दर्वाजा जंग लगा था लेकिन खुला नीचे सीड़ियां धूल और जाले से डंकी थी
06:38तैखाने में पहुँचते ही एक ठंडी हवा चली और अचानक दिवार पर किसी अद्रिश्य हाथ से खरोंच कर लिखा गया
06:45अब तुम भी यहीं रहोगे
06:48डॉक्टर रुद्राक्ष को कुछ अजीब सा महसूस हुआ
06:53उन्होंने पुरानी दिवारों को हथोड़े से तोड़ना शुरू किया
06:56एक जगह से मिट्टी हटी और वहां एक सड़ा गला कंकाल लिकला
07:02हाथों में सोने की चुड़ियां और पाइलें अब भी चमक रही थी
07:07अन्हामे का काम करी तब ही पीछे से एक औरत की धीमी हसी सुनाई दी
07:12वही लाल लहंगे वाली औरत अब उसके बाल जमीन तक गिसट रहे थे
07:18चेहरा आधा जला था और उसकी आँखों से आग बरस रही थी
07:23आत्मा की अंतिम चाहत उसने कहा तो मैं पता है मैं कौन हूँ
07:28मैं वही औरत हूँ जिसे हवेली की दीवारों में जिन्दा गाड़ा गया था
07:35मैं पद्मा रानी बनने से पहले विक्रम की पहली प्रेमिका
07:42उसने मुझे दोखा दिया रानी से शादी की और मुझे चुप चाप दफना दिया
07:51पर अब मेरी आत्मा को मुक्ती चाहिए तुम मुझे बाहर निकालो
07:56मेरे अस्थियों को गंगा में प्रवाहित करो
07:59डॉक्टर रुद्राक्ष और अनामिका अब समझ चुके थे कि वो आत्मा सिर्फ बदला नहीं चाहती थी
08:06वो मुक्ती चाहती थी
08:08उन्होंने कापते हातों से अस्थियां एक मटकी में भड़ी और गाओं के पुजारी की मदद से
08:14उन्हें हरे द्वार ले गए
08:16मुक्ती या दोखा
08:18जैसे ही अस्थियां गंगा में प्रवाहित की गई
08:22हवा एकदम शांत हो गई
08:24अनामिका ने राहत की सांस ली
08:26लेकिन डॉक्टर रुद्राक्ष अब भी बेचैन थे
08:30उस रात होटल में जब अनामिका ने आईने में खुद को देखा
08:35वो चौक गई
08:36उसकी आँखे काली हो चुकी थी
08:39होट फट चुके थे
08:41और चेहरे पर वो ही दाग थे जो आत्मा के थे
08:44आईने में अब वो नहीं पदमा थी
08:48पदमा मुस्कराई और बोली
08:50धन्यवाद तुमने मुझे हवेली से बाहर निकाल दिया
08:55अब मैं आजाद हूँ
08:57और तुम
08:58तुम अब मेरी जगा हो
09:01अंतिम द्रिश्य
09:03राजगर की हवेली आज भी वहीं खड़ी है
09:07तूटी, वीरान
09:09लेकिन अब वो रानी नहीं
09:12अनामिका की आत्मा वहां राज करती है
09:14कहते हैं
09:17जो भी उस हवेली में जाता है
09:18वो वापस नहीं लोटता
09:20हर अमावस्या की राज हवेली के तहखाने से
09:24अब भी पाईले छणकती है
09:27और एक मीठी पर डरावनी हसी गूंजती है

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