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  • 1 year ago
self made movies
Transcript
00:00चायाओ का बंगला, भाग एक, सौंदरे का शाप
00:04शिमला की पहाडियों के किनारे एक सुनसान और ठंडी वादियों के बीच महरा परिवार ने अपना नया बंगला बनवाया था
00:15ये बंगला दूर से देखने में बेहत सुन्दर था
00:19तीन मंजिल का आली शान घर, लकडी और पत्थरों से बना, कांच की बड़ी बड़ी खिडकियों वाला
00:26चारों और घने देवदार के पेड़ थे, जिनके बीच ठंडी हवा, हमेशा एक रहस्य मैसी फुस्पुसा हट करती रहती थी
00:35राघव महरा, उनकी पत्नी सविता, बेटा आदित्य और बेई आरोही, एक खुशहाल परिवार, जो दिल्ली की भिडभार से दूर शान्ती की तलाश में यहां आबसे थे
00:49उन्हें ये नहीं पता था, कि जिस बंगले में वो शान्ती की तलाश में आएं हैं, वही उनका सबसे डरावना सपना बन जाएगा
00:58आरोही महज 22 साल की थी, उसकी सुन्दरता का हर कोई दीवाना था
01:04बड़ी बड़ी चमकती आँखें, रेशमी बाल, दूद सी सफेदी लिये चहरा और पतली लंबी काया
01:13जब वो चलती थी, तो लगता था जैसे हवा भी रुक कर उसे निहारे
01:17लेकिन उसकी ये खुबसूरती ही उसकी सबसे बड़ी सजा बन जाएगी
01:22ये किसी ने सोचा भी नहीं था
01:25शुरुवात में सब कुछ ठीक था, परिवार को बंगला बहुत पसंद आया
01:29लेकिन पहले ही हफते से कुछ अजीब घटनाएं शुरू हो गई
01:33पहली रात आरोही की नींद अचानक खुली
01:37उसे लगा जैसे कोई उसके कमरे में है
01:40कमरे में हलका नीला सा प्रकाश था
01:43और खिड की धीरे धीरे अपने आप हिल रही थी
01:47उसने सोचा हवा चल रही होगी
01:49पर तभी उसे लगा जैसे कोई उसके कान में कुछ फुस फुसा रहा हो
01:55एक ठंडी सांस, एक असपश्ट सी आवाज
01:58तू मेरी है
02:00अब हमेशा के लिए
02:02वो चीकते हुए उठ बैठी
02:04पर कमरे में कोई नहीं था
02:06मापिता ने समझाया
02:08नई जगा है थोड़ा समय लगेगा
02:11लेकिन उन्हें नहीं पता था
02:14कि ये महज शुरुवात थी
02:15अगले कुछ दिनों में आरोही का व्यवहार
02:18पूरी तरह बदल गया
02:20वो कम बोलने लगी थी
02:22आँखों में अजीब सी चमक रहने लगी
02:24और कई बार उसे आधी रात को
02:27अकेले बंगले के बाहर घुमते देखा गया
02:29सबसे खतगनाक बात ये थी
02:31कि वो दिन में तो सामाने रहती थी
02:33पर रात के वक्त उसकी आँखें काली पड़ जाती
02:36उसकी आवाज बदल जाती
02:38और वो अजीब अजीब बातें करने लगती
02:41राघव ने एक रात देखा
02:43कि आरोही अपने कमरे में शीशे के सामने खड़ी थी
02:46और खुद से बुदबुदा रही थी
02:48मुझे एक रात आरोही के भाई आदित्य ने उसे जंगल की ओर जाते देखा
02:53और पीछे पीछे गया
02:54वहाँ उसने देखा कि आरोही एक युवक के सामने खड़ी थी
02:58उसकी आँखे काली थी
02:59और उसका शरीर अधनंगा
03:01जैसे किसी रीतिकाल की प्रेतात्मा
03:03वह युवक दर के मारे कांप रहा था
03:05तभी आदित्य ने तंत्र मंतर की एक माला फैंकी
03:08जिससे आरोही जोर से चिलाई और बेहोश हो गई
03:11उसे घर लाया गया
03:12पर ये बस एक अस्थाई उपाय था
03:15अब क्या होगा
03:16परिवार को समझ आ गया था
03:18कि अब वक्त है उस आत्मा की सच्चाई से पूरी तरह टकराने का
03:21उन्होंने निर्ने लिया कि वो बंगले के रहस्से की गहराई में जाएंगे
03:25पर क्या वो उस आत्मा से लड़ पाएंगे
03:27क्या आरोही को बचाया जा सकेगा
03:29या फिर ये सुन्दर लड़की
03:31हमेशा के लिए उस वास्ना भरी आत्मा की बंदी बन जाएगी
03:34चायाओं का बंगला
03:35भाग दो
03:37आत्मा का अंत
03:40आरोही की हालत दिन बदिन बिगरती जा रही थी
03:43अब वो केवल रात को ही नहीं
03:45बलकी दिन के उजाले में भी
03:47अजीब बरताव करने लगी थी
03:49उसकी आँखों में अंधेरा उतर आया था
03:53उसका चेहरा एक रहस्य मई मुसकान से सजा रहता था
03:57और वह अकसर दिवारों से बाते करती
03:59मानो कोई अद्रिश्य शक्ती उसे नियंतरित कर रही हो
04:03उस रात बंगले के अंदर एक डरावनी चीख कुंजी
04:07आदित्य जब बेहन के कमरे में भागा
04:09तो देखा कि आरोही दिवार पर उल्टी लटक रही थी
04:12उसका मुह पूरी तरह काला हो गया था
04:15और वो किसी अग्यात भाशा में मंत्र जप रही थी
04:18कमरे का तापमान बेहत ठंडा हो गया था
04:21और फर्श पर काले धुएं की तरह कुछ फैल रहा था
04:24वो अबारोही नहीं थी
04:26वो अब वो बन चुकी थी
04:28वो आत्मा जो सिर्फ भटकती थी
04:30जलती थी
04:31और अपनी अधूरी च्छाओं को पूरा करने के लिए
04:34जिन्दा शरीर की तलाश में रहती थी
04:36पंडित रमा कांथ
04:37जो तंतर विद्या में पारंगत थे
04:40उको बुलाया गया
04:41उन्होंने बंगले में प्रवेश करते ही माथा पकर लिया
04:43ये कोई आम आत्मा नहीं है
04:45ये मधुकंता है
04:47एक प्राचीन वेश्या की आत्मा
04:49जिसे गाउवालों ने बली दे कर जिन्दा जला दिया था
04:52और उसने बदले की आग में सौंदर्य को शाब बना दिया
04:55अब वह हर सुंदर करन्या में समा जाती है
04:58और अपनी वासना की प्यास बुझाने के लिए जवान पुरुशों की आत्मा चूसती है
05:03और अब वह पूरी तरह आरोही के शरीर को अपना बना चुकी है
05:06पंडित की आँखों में चिंता थी
05:08राघव और सविता अब तूट चुके थे
05:11पर अपने बच्चों को बचाने के लिए वो कुछ भी करने को तयार थे
05:14पंडित रमाकांत ने साथ दिन का अनुष्ठान निर्धारित किया
05:18हर दिन बंगले के हर कोने में मंत्रों की द्वनी गुंजने लगी
05:21दिवारें कापती, खिड़कियां खुद बखुद खुलती और बंध हो जाती
05:26आरोही को कमरे में बांध कर रखा गया
05:28उसके चारों और यंत्र और राख की रेखाएं बनाई गई
05:32पर आत्मा हर बार एक नया रूप लेकर निकलने की कोशिश कर दी
05:36तीसरे दिन आत्मा ने आरोही की आवाज में राघव से कहा
05:41पिता, मुझे बचालो, मुझे इस आख से निकालो
05:46परजे पर वो चल थी
05:49जैसे ही राघव ने उसकी और कदम बढ़ाया
05:52आरोही की आँखे लाल हो गई
05:54और वो उचल कर दिवार से चिपक गई
05:56उसका शरीर जमीन से दो फीट उपर तैर रहा था
06:00पंडित रमाकांत ने बताया
06:02कि आत्मा को मुक्त करने का एक ही तरीका है
06:04उसकी अधूरी कहानी को पूरा करना
06:07मधुकंता की आत्मा को जब जिन्दा जलाया गई
06:10लेकिन तू अब किसी और की आत्मा को नहीं चुएगी
06:13तब ही यग्ये की अगनी भड़क उठी
06:15आरोही जोर से चीक पड़ी
06:17उसका शरीर कापने लगा
06:19और एक घना काला धुआ उसके शरीर से निकल कर हवा में गायब हो गया
06:25कमरे में एक सन्नाटा च्छा गया
06:28फिर एक मीठी सी सुगंध हवा में फैल गई
06:30पंडिंडित ने कहा
06:32वो चली गई
06:34हमेशा के लिए
06:35अब वो आत्मा मुक्त हो गई है
06:38पुनर जनम की ओर आरोही की आँखे खोली
06:42उसने आदित्ति को देखा और फूट फूट कर रोने लगी
06:45भाईया मुझे माफ कर दो
06:48मैं मैं कहां थी
06:50राघव सविता और पूरा परिवार उसे गले लगा कर रो पड़ा
06:56बंगले में अब सन्नाटा नहीं था
06:58बलकि शान्ती थी
07:00समाप्ती
07:02बंगला शान्त हुआ
07:04पर क्या आत्मा मुक्त हुई
07:06एक हफ़ते बाद परिवार ने वो बंगला छोड़ दिया
07:11उन्होंने शहर में एक छोटा सा घर किराय पर लिया
07:15और साधरन जीवन जीने लगे
07:18लेकिन बंगला अब वीरान पड़ा है
07:22कोई नहीं जानता कि आत्मा सच में मुक्त हुई
07:26या बस कुछ समय के लिए शान्त
07:28रात के अंधेरे में कभी कभी
07:32उस बंगले की खिड़की से एक सुन्दर सी लड़की की परच्छाई
07:36आज भी दिखाई देती है
07:38क्या वो फिर लौएगी
07:40क्या कोई और उसकी अगली वाहक बनेगी
07:44आपका क्या मानना है
07:46क्या आत्मा पूरी तरह से मुक्त हुई
07:49या बस चुप हो गई है
07:50कमेंट में बताएं
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