00:00नमस्कार आप देख रहे हैं One India और मैं हूँ श्रिवेंद्र गौग
00:02मौका है वक्रीद का
00:05तो लिहाज हमने सोचा क्यों ना इस विसे पर थोड़ी सी गहन बारता की जाए और किन से की जाए
00:11जो इस विसे के जानकार हैं जो इसलाम के गहराई से समझा सकते हैं इसलाम को
00:30जो कि काफी जाने वाने इसलामी स्कॉलर हैं उन्हीं के तरफ रूबरू होंगा सबसे पहले तो आप सभी लोगों को बखरीद की बढ़ाई
00:37मैं एडवांस में दे रहा हूँ हलांकि कल है पुलाना साहब सबसे पहले बड़ी लोग चुकिये अब पूरे मुल्क में कई तरे से हर त्युहार पे चाहँ हिंदू का त्यार हो चाहें मुस्लिम का त्युहार हो अलग-अलग दिंग के लोग अलग-अलग सोसल मीडिया से �
01:07लोगों को, इसलाम में भी बहुत से लोग ऐसे होंगे जो इनको मौका ना मिल पाता होगा, इस अब देखने सुनने का, कि ये कुरवानी क्यों दी जाती है, कैसे शुरू हुई, इसके पीछे एक्चुली कहानी क्या है?
01:18इसके अब अपने दो बात मालुम किया है, कुरवानी के तालुक से, कि खुरूबानी की शुरूवात की संदाज से हुई है, और एक बात आपने ये एक तालुक से तरह तरह की बात तहवार के मौकशब के क्यूं आती है? जीदू बात ऐका हो आता है, तो खुरूभानी के हि�
01:48आपको समर्पित कर देता है उसके इसके तो उस जमाने में पहले कुछ लोग पहले पहाड़ों पर कोई समान रख दिया करते थे तो एक पहचान होती थी जो पहले की तारीख में कि वो एक आग आती थी और वो आकर जलाके चलिया आती थी एक बतलब एक आस्था की तरफ पर �
02:18प्यासी के पैदा करना वाला, पूरी दुन्या के पैदा करना वाले का विख लॉग्षॉ Moo Trot Raphael के सबसे इस उस पर्णिया के बाढ़ेको भिख लोगद है तो उनके सामने कोई चीज़ नहीं है ज stal पर जिए पर अपनया वग्षान का डिया कि उसको उसको उसको भीक झाल्
02:48अब्रहिम जो फिलिस्तीन में रहे एलाग में बैदा हुए फिलिस्तीन में रहे और वही उनका फूरे सिलस्था खांदान है उकर से ही सही खांदान है उनका पार्वेसियो के रित लिए उस्की उसी अगे हुआन
03:02तो हदरत अबराहीम अलिएसलाम पर बहुत सारी आदमेशा ही.
03:07तिनुकृरान में भी फर्माय गया, कि हमने इबराहीम के बहुत सारे इम्तिहान लिए हैं, लेकिन वो हर इम्तिहान में काम्याब हुए.
03:13वो उनको आगमर डाला गया, उस वक्त के बाश्यान उनको आगमर डाला, वो आगमर से खुदर उनको जिन्दा निकाला, अच्छा, फिर उसके इलावा और भी जिए घर से बाहर वो निकाले गए, फिर वहाँ अलग अपने जगह बसाई, फिर इसी तरह उनको हुआ हुआ हु
03:43तो ये एक तरह से कई आजमाईशे आपके साथ होगी है छोड़ के जाना चोड़े बच्चे को और ऐसी सूरत के अंदर तो उस वक्त शेतान नहीं बात कही थी अल्ला ताला से जो शेतान के आप ये कहते हैं कि खलील या इबराहीम अलिएसलाम का एक लगब है खलील खलील कहत
04:13कि खुदा के सामने इस तरह इस अंदाज से पेशिया था तो आप अल्ला ताला नहीं फरमाया कि नहीं ये मेरा सच्चा बंदा है और अपनी बात पर इसने हमेशा अपना आपको कुर्बान किया है और यही वज़ए है कि आज यहुदी समाज हो यहुदी समाज हो मुस्लिम
04:43तो अल्ला ताला ने फरमाया कि यह कुर्बानी कराना मकसद नहीं है यह आपके जजबे को देखना था इसलिए अल्ला ताला ने उनकी जगह पे जब उन्होंने देखा कि जिए मैं बेटे को कुर्बान कर रहा हूं तो वहां देखा कि एक तुमबा यह भीड़ की शकल में �
05:13दुमबा उड़का परिच्छा लेनी थी अधीया लेना था लेना था वो ले ली तो उन्हों है कि अब आप आप आप की अपके दिल में अक्छली है च्ट्री है क्या अव।। concepts है
05:43लेकिन जो कर सकता है वो करे अन्वार है क्या
05:46अन्वार के मसला यह है कि इसमे एक सिस्टम बताएगा इसलाम के अंदर
05:51कि कुर्वानी उस पर जरूरी है जिस पर जो है साड़े बावन तोला चांदी
05:57या साड़े, साथ, तोला, सोना उसके पास मौजूद हो या इसके रकम उसके पास मौजूद हो
06:02तब नमाम जिजरव्याद estás से फारिख करने क वार्द कपड़े, खाना, घर गेर, लाशन, फर जजर जरूरी
06:06साथ भूरूर होने के बाद इतनी रकम उसके पास मुझूद हो यह उन्य यह कर्स सिस्टम मनाए गया है अगर इसके पास इतनी रकम है यह उस पर कुरवान
06:17जरूरी है अब फर्ज है ऐसे बोल सकते हैं वाजिब कह सकते हैं एक चीज और सवाल थी लोगों के मैं लिखकर भी लयाओं के लोगों के मैं लोगों कि क्या होना चाहिए तो यह सिर्फ आपने बताया दुम्बा तो भी से मैं समझ गया कि बकरा के अलावा भी दूसरा जानव
06:47बहस बगयरा एक सवाल है क्या महलाओं को कुर्वाणी यह ज़त है सब बरावर है हक्म है इसलाम को जो हकम है इस लिए चीज चाहिए बार तो कि लोगों समसल मेडिया इदर दुनिया बढ़े की चीज चलती रहती है दूसरा में आपने एक मेरा दूसरा सवाल ता कि यह जो
07:17तो यह जवाब ऐसा है, कि यह सिर्फ आलिम का जवाब नहीं है, यह तो एक तरह से सोसाइटी का जवाब है, एक पूरा समाज का जवाब है, हम लोग यह कहते हैं, कि जिस देश में हैं, तो यहां एक तरह से अलग अलग समाज धर्म के लोग रहते हैं, सब को पता है, सब के अ
07:47मेरे साथ इतने दोस्त हैं यो हिंदु भाई सालोग रखते हैं। वोनका कैना है कि ऩई हमार हमारी बख्रीज में हमारी दावत कीज जहाए हमा
08:06पुछना है कि आपके कि दोस्ते होंगे जो दूसरे मजब्सक्राइब करते हैं और समाज के हुआ हो बहुत ज्यादा पावरफुल हो गया है
08:36कुरवानी करते समय की तस्मीरें डालना इसलाम के नजरिये से आपके नजरिये से सही है या कोई फरक नहीं है मतलब यह जो आपने बात किये वह अची बात किये ताकिए शोर से बीडिया के जरीए और आपके जरीए और यह संदेश पहुंच जाये लोगों तब हमारे इमाम स
09:06जिस चीज से आपको कुर्वानी देनी है वो यानि जो जो हतिहार है जो का जाये जो भी मतलब वह भी बकर के सामने नहीं होना सी है
09:12जानी कि सोसल मेडिया पे डालने को एक तरिया आपकी राय मानी जाए तो कुर्वानी तस्मीर डालना बलो अच्छी बात नहीं है अच्छी बात बोल ले है बिल्कुल शरीयत के साब से भी अगर कहेंगे हाँ हर इत्वास ता गलत है
09:23इस एक काट दिया हमने इस पर डालना है तो यह हमारे इमान समय लोग इसको मेसिश देते हैं हर मजज़ित से यह पेगाम जाता है और एक खास बात यह हर छेतर में
09:33अगर बेस प्रज़ित के साब अपने हाँ मिटिंग कराते हैं और मुस्लमानों को बुलाकर कराते हैं तो उस मौके पर यह पेगाम तरह से परशासरिक की तरफ से भी पेगाम जाता है लेकिन शरी तोड़ पर मुसलमान कुद हमारे इमाम ओर माय वो खुद इसको जारी करते
10:03जो उससे फिर विवानी फेलने खत्र है रहता है, सख्त मना है. परियावन को जोड़ कर भी इससे बात कर रहा है. एक चीज़ और होती है, जब यह चीज़ आती है, चुकि देश में अलग-लग बाते हो रही है, तो लोग कहते हैं, पश्यों के हकी भी बात हो रही है, उनके हक
10:33लेकिन में आपके मुझे उसका महत तलग होगा, और मेरे मुझे अलग होगा. जो गोर्मेंट खुद सप्लाई करती है, यह कंपनियों की थुरू आज दूसरे तमाम जितने कंट्री कंदर यहां से, मैडिन इंडिया, वो चाने वाले ही पसू है, तो तो पूरे साल का मामला
11:03तो यह मौलाना जावेज सिद्धी की कासमी साब ते जिन्होंने बहुत भेतरी से उस चीज को समझाया, कि आपको कैसे करके समझना है, क्योंकि जो पशू भोजन के लिए इस्तेमाल की जा रहा है, उसी की कुरवानी हो रही है, जो जायज है, जिनका वाकाइदा लैसेंस भ
11:33लाना साब की बात करूं, तो वो इस्लाम के नजरिये से ठीक नहीं है, बलकि उन्होंने तो यह भी कहा है, कि वो जो औजार है काटने का वो बकरे के सामने भी नहीं होना चाहिए, और उसका मक्सद क्या है, एक चीज और मेरे सवाल था दिमाख में, कि यह तो आपने बता द
12:03उन्हें जब उस उस वकरे से, उस परसू से आपको इतना प्यार हो जाओ, उसे बच्पन से पाला हो, बोले ऐसे हमने पाला बच्चों को प्यार हो गया, हमारी पत्नी को प्यार हो गया, आप हम उसे काट नहीं पा रहा है, मला हम उसको दर्द है उतना, कि जह हम काटने जा �
12:33जब आप उसे काड़ भी नपा और यहां दिल्ली शहर है या कोई भी शहर है वह जगर कम होती है तो वह बजार से मंडी से ला करके वही है ना असल जद्बा कुर्वानी गोश्ट खाना मकसद नहीं है यह खुदा के सामने अपनी महबत की चीज़ को कुर्बान करना यानि उन
13:03बकरा जिसकी कुर्वानी दी है उससे छोटे से पाला है और उससे पूरे परवार को महबत हो गई है हम उसे काट नहीं पा रहे हैं वहां पे परीच्छा है वहां पर कुर्वानी है यही तो आपने परीच्छा है अपनी जान के कुर्वानी हो रही है यानि अपना एक अंग
13:33इस तरीके से कहते हैं मुझला सोसल मीडिया पर तमाम जे जंग चुकि भारत में तो कई धर्म है सब के तोहर आते हैं और जिसका मुखा मिलता वो एक दूसरे पर तंज कसता रहता है तुम्हारी रिवाज अच्छे नहीं है तुम परियाबन को नुकसान पहुचा रहो होता है
14:03तो मैं पूरी बात को ऐसे कुछ कहना चाहते हैं हाजी साब तो आप यही आप से है इसके अलावा जो मेरा का आते है कोई आपके दिल्ली जैसे करेंगा ग्रामीड चेथ में तो आते हैं इस तरह की कुर्वानी की बास्तम में जिसमें उसको कुर्वानी देने का हिम्मत चाह
14:33कुर्वानी आपको देखिए मौली साब ने बता दिया अची तरह वाज़ कर दिया है कि कुर्वानी जो है शेहरों में तो इस तरह की नहीं होती कि जानवर को रखे है उसको पाले तो उससे महबत हो जाती है यहां रहने के लिए लोगों को जगा नहीं तो जानवर कहा रख
15:03वो कोई भी धरम हो, सबसे बड़ा उना है, अब इसमें आप कुर्बानी ले लीजिए, होली ले ले लीजिए, दिवाली ले ले लीजिए, एद ले ले लीजिए, अगर इन तहवारों पे हम किसी को अपनी तरफ से कोई तकलीव पहुचाते हैं, तो हम अच्छा कामून करते ह
15:33हम जानते नहीं, सचा ही यह है कि हम अगर मैं कहूं तो मैं आज मौलाना साथ आप से बात करके इसको समझ पाया, मेरे कुछ मुस्लिम मित्र जीवन में सिक्षा के समय पे या रूम पार्टनर होस्टल में ऐसे रहे हैं तो उनसे मैं कुछ समझ पाया, तो कुल मिला के मुलान
16:03चाहते हैं तो मैं इस बात को हिंपर यही पर मौलाना साप हम किसी को तखलीग देना निगा हैं
16:21सभी है Although में प्रयावान को यहां में ऐसे साथ है यही पर मौलाना साहब ब� 색 जो संदेश था वह दिया, तो तो त्योहार को आप समझें
16:33उसके पीछे की कहानी क्या है, उसके पीछे खुदा की इवादत करने के लिए कुछ पीजे करी गई हैं, उसकी आस्था से जुड़ी चीजे हैं, तो उनको ले करके ये पूरा जो भी संस्किर्ती होती है, जो भी समाज होता है, जिस भी धर्म के लोग होते हैं, वो उस पर अ�
17:03उस खुदा के आस्ता की तहट उसको परंपरा को जितना वो निभा सकते हैं उतना निभाते हैं और इन नियमों का पालन कर लिया जाए जो मौलाना जाबेश सहाब ने बताया तो ये समाज में बहुत भेतरी से अच्छा सा खुशनमा तरीकिस प्यार मनेगा आप सभी को बकरी
17:33कर दो
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