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  • 11 months ago
Part- 01 चिपको आंदोलन, ताड़ी विरोधी आंदोलन, दलित आंदोलन, किसान आंदोल (POL--स्वतंत्र भारत में राजनीति--8--नए सामाजिक आंदोलनों का उदय )

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00:00नमस्कार विद्यार्थियों, मैं सुरेज बाटी आप सभी का आज की इस क्लास में एक बाल फिट से हार्दिक स्वागत और अभिनंदन करता हूँ
00:07स्टूरेंट्स आज का हमारा एक नया चैप्टर है जन आंदोलन का उदे
00:11इस चैप्टर के अंदर चर्चा की जाएगी इस प्रकार के आंदोलनों की जो की जनता के आंदोलन है
00:17यानि की दो प्रकार के आंदोलन होते हैं एक होते हैं राजनितिक दलों से प्रेरित आंदोलन एक होते हैं गयर राजनितिक आंदोलन
00:24हम इस शेप्टर में उनहीं गयर राजनितिक आंदोलनों की चर्चा करने जा रहे हैं
00:29जिनका संबन डारेक्ट किसी भी राजनितिक गल से नहीं था
00:33जैसे कि हम कह सकते हैं
00:36चिपको आंदोलन जो की उत्राखंड में हुआ था परियावन को बचाने के लिए था
00:40दलित आंदोलन जिसका संबन महारास्ट्र से था दलित युवाओं से था
00:44ये दलित लोगों पर होने वाले अत्याचारों के खिलाफ आंदोलन था
00:48ताड़ी विरोधी आंदोलन, तो महिलाओं ने ताड़ी यानि किशराब की विरोध में आंदोलन किया था अंदरपरदेश में, यह आंदोलन भी किसी राजनिती से प्रेरित नहीं था, नर्वधा बचाओ आंदोलन, यह भी परियावरन प्रीमी जो थे, उनका एक आंदोलन �
01:18उनकी अर्थ व्यवस्ता पर बुरा असर पड़ सकता है, इसलिए उनको ने आंदोलन किया, तो यह सभी आंदोलन जो हम इस चेप्टर में पढ़ने जा रहे हैं, यह सारे के सारे आंदोलन, राजनिती से प्रेरित नहीं है, गैर राजनितिक आंदोलन है, तो जन आंदोलन ह
01:48तराप्रदेश के बाद करें प्रमें और वहा की सरकार को लगा कि नहीं यह तो गलत हुआ है
02:10पेड़ों की कड़ाई कादेश गलत दिया गया है आदेश वापस लेना पड़ा ठीकिसी प्रकार से ताड़ी विरोती आंदोलन के अंतरगत महिलाओं ने शराब विक्री की विक्री पर रोक होनी चीए इसके एक पक्षमा आंदोलन किया
02:22यह आंदोलन आगे चल करके महिलाओं के हितका आंदोलन बन गया पूरे भारत में महिलाओं ने अपनी आवाज उठा इस आंदोलन के मांदियों से
02:29खी, किसी परकार से अगर हम बात करते हैं दलिट आन्दोलन की
02:35तो दलित आंदोलन ने सरकार की आँखे खोली कि केवल समिधान के अंदर इतना लिख दिया जाए
02:40कि दलित जो है वो अस्प्रश्यता का सिकार नहीं होगा तो क्या वास्तों में अस्प्रश्यता नहीं होगी
02:47महरास्टर में चुवाचूद बहुत बड़े प्यामाने पर थी वहाँ की महिलाएं वहाँ के युवा इस चुवाचूद से बहुत पिड़ित थे
02:53इसलिए उन्गोंने अंदुलन करके प्पूरे भारत को बताया इए कि क्या हो रहा है उन दलितों के साथ जिनको समांता कादिकार दिया गया इसमीदान के अंतरगत
03:02तो यह वो आंदोलन है जिन्होंने सच्चाई को सरकार के सामने पेश किया
03:06हम उन्हीं आंदोरुनों की चर्चा यहां पर करने जा रहे हैं
03:09अब आप देखिए यहां पर सबसे पहले हम चिपको आंदोलन की बात करें
03:13इस आंधूरणिन का समऻंद कहा से है इस अंधूरणिन का समऻंद है उत्राखंड से उस समय उत्राखंड उत्रप्रदेश घ्रोल ईच समय जनभ गया है
03:25बहुतराखंड का जन्म हुआ है और यह घटना जो है उभाट्र तरह तर्ण के दशक की है तो इसका मतलब उस समय उत्र पर देश हुआ करता था वरतमान में ये उत्राखंड है उत्राखंड के गाउं के लोगों ने खेती बाड़ी के उजार बनाने के लिए गाउं के लोग �
03:55की कलाने के लिए अंगू के व्रक्ष काटने की परमीशन मांग आगे तो उन्म पर परमीशन नहीं दी उन्हें
04:03यह कहा गया कि आप पेड़ों की �iéदिकार की काला व्यां नहीं कर सकते जबकि इन ही पेड़ों की कट
04:11थी यह वो खेल वी निर्माता कंपनी जिसको यह अधिकार दे दिया गया कि आप प्रेडिकार सकते हैं तो यह तो सरकार का एक तरह से अभ्यदभाव कुन व्यवार हुआ
04:22आप जनता को तो मना कर रहे हैं जिनके आजी विका आसपास के वनों पर निर्भर थी और आप किवल अपने फाइदे के लिए कि हासा खेल विनिर्माता कंपनी को यह काम मिलेगा तो सरकार को इससे मुनाफ़ा होगा आपने उसको यह पर्मिशन दे दी
04:40ग्रामीन लोगों ने पेड की कटाई को रोकने के लिए पेड़ों से चिपक गए इसलिए इस आंदोलन को चिपको आंदोलन कहते हैं
04:471973 यह आंदोलन सुन्दरलाल बहुपुणा के नित्रत्व में चलाए गया था
04:52प्रस्टन आपसे एक्जाम में स्यू टीम पूचा जा सकता है
04:56चिपको आंदोलन का संबंध किस राज्य से है?, उत्रा ख़री से
05:00इस आंद路न का नेतरत्व तो किस ने किया?, सुन्दरलाल बहुपुणा ने किया
05:04आंदोलन का संबंध किस से है?, परियावण बचाओ
05:08यह आंदोलन परियावरम को बचाने के लिए था, आंदोलन की प्रमुक मांगे क्या है, ये भी देखिए आप, एक्जामे प्रस्न इससे सम्द्रित भी बन सकता है, कि निमलेखित मैंसे चिपको आंदोलन में, चिपको आंदोलन की मांग नहीं या नहीं थी, तो आप देखि�
05:38जमीन, यह तीन चीज़े जो है इन पर इस्थानिय लोगों का नेंतरण होता है, इस्थानिय लोगों का अधिकार होता है, क्योंकि वो उनके ही हैं, जहां वो जन्मे हैं, वहां का जल, वहां का जन्गल, वहां के जमीन, इन पर उल्ही का अधिकार होता है, सरकार लगूत यो�
06:08जिनको हम ग्रह उद्योग कहते हैं या लगू द्योग जो कि एक गाउं के लोग मिलकर चलाते हैं अगर उस उद्योग को चलाने के लिए जो सामगरी चाहिए वो महंगी होगी तो ग्रामिडों दिक्कत आएगी लेकिन अगर वही कम कीमत पर मिल जाए तो वो द्योग दंदे �
06:38विकास क्या करते हुए प्रियावारम को कम से कम नुक्सान पहुंचे कुछ इस प्रकार के विकास आत्म कारेगरा कारम हीरा वूमि हीन जनकरमरी यो को सब्सक्रेक smo किया करते हैं एक करने वा लोग एक नियुता मजदूरी
06:59पर काम करने की जाता है लेकिन नियुंताम मजदूरी तैय होनी चाहिए उसकी मजबूरी है कि उसे रोजगार मिरे और उसकी मजबूरी का लाभ उठाकर रोजगार देने वाला उसको कम कीमत पर काम करवा लेता है
07:21तो कम से कम एक नियुंताम मजदूरी तो तैह होनी चाहिए जिसमें कि वो काम करें इस आंदोलन में महिलाओं ने बढ़ चड़ कर भाग लिया जंगल कटाई के ठेके दोरा दोरा सराब किया पूर्ती से सेत्र में पुरुस नशे का सिकार हो रहे थे अता महिलाओं ने आंदो
07:51कि तो साथ साथ में इसमान को भी एड़ कर दिया गया कि यहां जो शराब विक्री होती है वो भी बंद होनी चाहिए क्योंकि इससे पुरुष सराब पीते हैं सराब पीनी की वज़े से काफी खर्च हो जाता है कमाते कम हैं कर्च जादा हो जाता है और उनके स्वास्ते पर �
08:21हिमाले की तलहती है सरकार ने 15 साल तक के लिए कि जब तक यहां पर वन पूरी तरह से वापस नहीं हो जाते जब तक यहां पर प्रेडों की कटाई नहीं होगी तो यह बहुत अच्छा डिसीजन था यह जब स्टैप उठा तभी तो यह डिसीजन सामना है अगर जंता ने व
08:51तो यह तो था पहला आपका चिपको अंदोलन है जिनकी हम एक एक करके चर्चा करेंगे दल आधारित आंदोलन क्या होते हैं थोड़ा सा इसको भी समझ लीजिए क्योंकि हम यहां पर बात कर रहे हैं दो परकार के आंदोलनों की एक जो दल आधारित होते हैं एक वो जिनका
09:21के विरुद्ध की नीती को अपना है आंद्रप्रदेश के तैलंगाना नंगे अंद्रप्रदेश के टैलंगाना खितर के किसान
09:28कम्यूनिस्ट पाइटिव के नेतर्तों में लामब्ण्द हूए थे हैं कौन किसान कौन सी क्रबद Pick
09:36कव्बश्पार्टी है तो क्या इसके के विचार्धारा है पुन्जिवाद का फिघत विरोद्ट
09:52पुझी वाद का विरोत, वर्ग विभेद का विरोत. WAV विभेद का विरोत, मतलोग WAV होना ही नहीं चाहिे. अमीरवलगरीब के बीच में वेध
10:22आर्थिक स्मानता का समर्थन।
10:31तो ऐसे द्रस्टिकोन को रखने वाले एचर धारा को हम कमिनिस पालिटीज कहते हैं तो कमिनिस पालिटीज ने जो तेलंगाना के किसान थे उन किसानों का समर्थन किया,
10:41इनके नित्रतों में किसान लावबद हुए तथा कास्तकारों के भी जमीन के पुनर वित्रण की मांग की देखिए यहां पर एक घटना आपको याद करनी चाहिए यह है 1948 की 1948 में हैधराबाद को याद कीजिए हैधराबाद हैधराबाद उस समय भारत का अंग नहीं था हैधर
11:11के तेलंगाना ख्षित्र में हम इसी तेलंगाना की बात कर रहे हैं है कि निजाम की ताना सहिग के खिलाफ आंदोलन किया तो शंदोलन कानेट्रतस किशि番 करनी के लिए
11:38और हिदराबाद को भारत का अंग बनाया गया भारतीय संग में सामिल किया गया तो यह वही तेलंगाना है जहां पर किसानों के हित में कम्यूनिस्ट पालिटियों ने अंदोलन किया और मान क्या थी जमीनों के पुनर वित्रन की जमीनों के पुनर वित्रन का मतलब यह है जो �
12:08मेहनत मजदूरी करते हैं किसान जो स्वैम खेती करेगा उसे कास्तकार करते हैं एक तो वह किसान होता है जो अपना आपको किसान कहता है गुवी का मालिक होता है
12:34और खुद खेती ना करके अपने आपने पर काम कोढ़ने के लिए लोगों को रख लेता है.
12:37एक वो, जो कि महनत मजदुर इसमाइम कर रहा है खेती बाड़ी कर रहा है, उसीको कास्तकार कहते हैं.
12:44110
12:51कि जमिन पर काम करते हैं वास्तिप मालिक वही है और उन्हीं को खेट-खलिहाँ मिलने चाहिए जमिन के वही मालिक
12:57हो ने चीची करने के लिए आंदोलन वुए थे इनका नेटरति वो कम्यूनिस्ट पाइटियों ने किया अब आती की वा
13:05यहां वरत्वान में भी जारी जिसे नक्षलवादी अंदोर्म कहा जाता है
13:30जब पुर्षिम भंगाल के नक्षलवाडी क्लाई शेत्र में
13:33में चारू मजुंदार जो की CPI ML के नेता थे
13:39Communist Party of India माक्षवादी लेनिनवादी के नेता थे
13:43उसके नित्रत्व में यहां एक अंदोलन सुरू हुआ
13:47जिसे हम नक्षलबाडी अंदोलन या नक्षरवादी अंदोलन कहते हैं
13:51इस नक्षरवादी अंदोलन ने जो यहां के मजदूर थे यहां के किसान थे
13:56उन किसानों की आवाज को बुलंद किया और आज भी यहां अंदोलन चल रहा है
14:02यह अंदोलन समाप्त नहीं हुआ तो कहां से सुरुआत हुई पर्शिम मंगाल से
14:06फिर हम बात करते हैं राजनतिक दलों से सुतंत्र आंदोलन की यह तो वो आंदोलन थी जो की राजनतिक दलों के द्वारा चलाए गए थे
14:15यह वो आंदोलन है जिनको राजनतिक दलों ने नेतरत्पर प्रदान नहीं किया
14:21की 1970 की 1970 के दशक में लोगों का राजनितीक से मोह भंग होने लगा
14:30मुवर्यों का मुख राजनिती से प्योब अधिश्च선 काकूइ जानते हैं
14:42कि 1947 में हम आजाद हुए और हम बात कर रहे हैं
14:481947 से 80 के दशब कि
14:52यानि कि कितने वर्स हो गए होगे लगब 20 से 30 वर्स होगे होगे
14:5720 से 30 वर्स
15:0120 से 30 वर्स का जो टाइम पीरिड था
15:04इस टाइम पीरिड में भारत के लोगों ने महसूस किया
15:08कि कोई भी political party हो
15:10जो गरीब लोग हैं उनके हित में कोई काम नहीं कर पा रही है बड़ी-बड़ी बाते करती है वह चायब ली कुद किसानों के नेता हो और वह चायब ली कॉंग्रेस हो वह चायब ली समाजबादी पाइटी हो सारी पाइटी आप सबी जानते कि समय जो पाइटां थी मुखे �
15:40वाजवादी पालिटियां तो इसके अलावा बारतिय जंसंग और अन्य लिजी ये वो पॉलिटिकल पालिटीज है जो कि उसमें अस्तित्व में थी लेकिन इन पॉलिटिकल पालिटी से लोगों का मौ इसलिए भंग हो गया कि दो पंचपर्ची योजनाय लागू कर दी गई
16:10लेकिन जो गरीब किसान थे और मजदूर थे उनकी स्तिति दाइनिय थी हम ये कह सकते हैं गरीबी बेरोजगारी गरीबी बेरोजगारी असिक्षा
16:29सामाजिक असमानता यानि कि जो पहले से बेदभाव चले आ रहे थे वो जोंके त्यों थे सामाजिक असमानता
16:45ये वो चीजें थी जिनको लेकर के लोगों का ये मानना था कि सैद आजादी के बाद खतम होगी बट ये आजादी के बाद समात नहीं हो पाई लगाता है ये बेद इसी प्रकार का बना रहा है
17:02साथ ही साथ हम कह सकते हैं जो भरत का ग्रामीन किसान था यही कारण था कि लोगों का राजनितिक दलों से मोह भंग हो गया था
17:25इसका तत्कालिक कारण गेर कॉंग्रेसवात का सफल नहीं होना था देखे आप सभी जानते हैं कि गेर कॉंग्रेसवात की आप बात कर लीजिए यह 9जी जिन में गेर कॉंग्रेसी सरकारे बनी थी
17:51लौ राज्जियों में गैर कंग्रेसी सरकार्य बनी थी
17:59और यह सबी राज्जिये जो थे यह सोच करके कंग्रेस को छोड़कर गैर कंग्रेसी
18:07दूसरे राजनेतिक दलों के साथ में आये इन्हें लगा कि सायद कुछ नया लेकर की आये
18:12सायद कुछ विकास हो, सायद हमाजी अर्थ्य ववस्ता में कुछ सुधार हो,
18:17कुछ इस प्रकार के द्रस्टी कौन से लोगों ने वोट दिये थे
18:201964 के चौथे आम चुनाओं में, लेकिन चौथे आम चुनाओं में
18:25इन पाइटियों के जीतने के बावजूद भी उन राज्यों की अर्थ्य ववस्ता नों कोई विशेस फर्क नहीं पड़ा,
18:32इन राज्यों की जो पहले की विवस्ता थी, उससे बच से बत्तर विवस्ताएं हुती चली गए,
18:38अब लोगों को लगा कि ना तो वो कॉंग्रेस जिससे हमें उम्मीद थी,
18:43वो हमारे अकांक्शाओं पर खरी उतरी है, वो हमारे सपने पूरा कर पा रही है,
18:48और ना ही ये पॉलिटिकल पाइटीज जिनको हमने कॉंग्रेस के अगेस जाकर चुना,
18:52वो भी हमारी उम्मीदों को पूरा नहीं कर पा रही है,
18:55तो इसका मतलब दलकत राजनिती से लोगों का मुग बंध हो गया,
19:01इसका एक अन्य कारण सरकार की नियोजित विकास की राजनिती का सफल होना भी था,
19:05आप सभी जानते हैं कि भारत में आजाधी के बाद जो राजनिती अपनाई गई थी,
19:11वो राजनिती कैसी थी? नियोजित विकास,
19:14जो कि हमने सोवित संग से प्रहर किया था, जिस मॉडल को,
19:17हमने पंचवर्षी योजनाओं के माध्यम से विकास की जो प्रक्रिया प्रारम की थी,
19:23उससे कुछ विशेश फर्क नहीं पड़ा,
19:26हम जो सोच रहे थे, इससे हम विकास के मारव पर आगे बढ़ पाएंगे, हम नहीं बढ़ पाएंगे,
19:32सरकार ने पंचवर्षी योजनाओं के माध्यम से विकास की, प्रक्रिया प्रारम की,
19:36लेकिन 20 सालों में अर्थ विवस्ता में कोई विशेश सुधार नहीं आया,
19:41जाती तथा लिउख भेट जैसी असमानता हैं अभी भी समाप्त नहीं हो पाई थी,
19:45मैंने भी जो आपको सामाजिक भीद की बात कही थी,
19:48अभी भी जियों कीतियों थी, पूरे भारत में कहीं भी चले जाहिए,
19:52अभी भी जातीगत भीद थे, अभी भी महिलाओं के साथ सामाजिक असमानता बढ़ती जाती थी,
19:59इन दौनों के बीच में जो खाई थी वो अभी भी काफी गहरी थी जिसे नाम दिया गया था
20:09सहर बनाम गाउं जिसे आप कह सकते हैं सहर बनाम गाउं या क्रशी
20:23यह आप कह सकते हैं उद्योग बनाम क्रशी इसका मतलब क्या हुआ इसका मतलब यह हुआ कि सहर में उद्योग होते हैं गाउं में क्रशी होती है अभी भी क्रशी फिश्री भी थी उद्योग दंदों का विकास निश्चित रूप से मोरा था
20:48तो इसका मतलब यह था कि यह वे उतना ही गहरा था शिक्षित युवावर्ग ने राजनिती से अलग होकर स्वेम सेवक संगत्नों के रूप में
21:17स्वेम सेवक संगत्न यानि कि किसी सरकार की तरफ से बनाये गए संगत्न नहीं बलकि अपने आप निर्मित संगत्नों उसे स्वेम सेवी संगत्नों के रूप में दलितों तथा आदिवासियों को लामबंद करना प्रादम दिखिया
21:36गांव के लोगों को पुछ रोजगार उपनब्द करवाना
22:03इसको कहता रचनात्मकारेक्रप अब जब तक आप गाउं में जाओगे नहीं, लोगों की समस्यां नहीं जानोगे, लोग क्या रोजगार कर सकते हैं उनसे नहीं पूछाओगे, वहां कि क्या प्रकृति प्राइपन करती हैं, वहां क्या चीजें हैं, जो वहां के लोगों के �
22:33कुछ लोग थे जो सिख्षित थे कुछ लोग थे जो कि राजनिती से दूर थे कुछ लोग ऐसे जो कि वास्तों में सुधार लाना चाहते थे
22:41जिनको अपने व्यक्तिकत लाग से कोई सरुकार नहीं था जो समाज के लिए जीना चाहते थे
22:49वो लोग गाओं में पहुचे, गाओं के लोगों से मिले, गाओं के लोगों को एकजुट किया, गाओं के लोगों की समस्यें सुनी, वहां कैसे रोजगार डवलप किया जा सकता है, उस पर काम किया, कुछ ऐसे कारिक्रम चलाए, जिसे ग्रामी लोगों को रोजगार मिल सके,
23:19में कारियरत लोग राजनिती में जाना चाहते थे लेकिन उन्होंने राजनितिक दलों के असफलता को देखते हुए देखे यह लोग जो स्वैमसेनी शगतनों में काम कर रहे थे मनी मन में इच्छा तो इनकी भी थी कि यह भी जब जनता के बीच इतने लोग प्रिय हो गए है
23:49यह लेकिन अगर्वान चुनाओं जीत करके विधायक बन जाते हैं सांसत बन जाते हैं तो हो सकता है कि हम इंसमस्याओं का ज्याधा बैटर तरीका दोच सके तो लोग चाहते थे राजनिति में जाना लेकिन राजनिति की और सफलता को देख जाने की बजाय इस्थानिय ना
24:19लेकिन वरत्माय समय में इनको विदेशी एजेंसी आर्थिक सहीयोग पुरदान करती है इसलिए ऐसे संगठन अपने उद्देशे से बटग दैए हैं
24:27देखें बहुत सारे ऐसे एंजियोज हैं जो कि इंडिया में काम कर रहे हैं लेकिन इनको बाहर से
24:36कुछ देशों के द्वारा कुछ लोगों के द्वारा फंडिंग की जाती है धन दिया जाता है गलत इस्तमाल होता है इनका सरकार के खिलाफ इस्तमाल होता है इनका विकासात्म गनेतियों के खिलाफ इस्तमाल होता है इनका देश में धर्म के नाम पर लड़ाने के नाम पर इस
25:06बुष्ता चला गया है अब इस प्रकार के संगठन अधिक सक्रिय नहीं दिखाई देते हैं अब देखें हम जो आंदोलन जो की राजनेती से प्रेजित नहीं है जो दल आधारित आंदोलन नहीं है उनकी एक एकर करके चल्चा करते हैं सबसे पहला आंदोलन आपके सामने है व
25:36दलितों के अधिकारों को संद्रक्षित करने के उद्देश्य से संगठन का गठन किया था यानि कि संगठन जो गठित हुआ था वो कब हुआ था 1972 में किसने किया था दलित युवाओं ने कहां ये संगठन स्थापित हुआ था महाराश्प्र में क्यों हुआ था दलित लो�
26:06तो भेद मिटाने के लिए हमारे समिधान के अंतरगत ही जो बॉलिव अधिकारों का भाग है जिसके अंतरगत अनुचेत 17 जो है आर्टिकल 17 अनुचेत 17 जिसमें अस्प्रश्यता को अस्प्रश्यता को
26:23अस्प्रश्यता निशयत किया गया है यानी कि कोई किसी के साथ चुवा चूत नहीं कर सकता और इस प्रश्यता जिसको कहा जाता है जिसको जातीकत भेद कहा जाता है यह तो हमारा अरjung 17 जब समीधान बनाता उसी समय क्लिल कर चुका था
26:44किसी भी व्यक्ति के साथ जातिगत भेथ गयर कानूनी होगा, अनुछेत सवत्सत्रा इसको समाप्त करता है भेथ को, लेकिन क्या वास्तों में जातिगत भेथ समाप्त हो पाया था?
26:55नहीं, महरास्तर की युवाओं ने यही तो कहा, जब संगठन बनाया दलित पैंथर्स, कि आज भी जब कोई दलित किसी रोजगार के क्षेत्र में रोजगार प्राप्ति के रिए निकलता है, उसे इसलिए रोजगार नहीं मिलता है, कि वो दलित है, उसे अचूत समझा जाता
27:25सामना करना पड़ता है, इसी को लेकर के दलित युवाओं ने विरोध किया था, अपना एक संगठन बनाया था, आप देख सकते हैं कि दलित जातियों को अनेक प्रकार के अन्याय तथा अत्याचारों का सामना करना पड़ रहा था महरास्त्र में, दलित पैंतर्स ने दलित
27:55के प्रयासों से ही एक कानून भी बना था, 1989, 1990, और ये कानून जो था, वो था चुवाचूत निशेद अधिमिया, यानि कि कोई भी किसी के साथ चुवाचूत नहीं कर सकता, किसी के साथ अन्टचेबिलिती का बरताव नहीं कर सकता, जिसे हम SC, ST, ACT कहकर खुकारते हैं, या
28:25के जिसको पुकारा जाता है, ये तिन्यम, 1989 में पारित किया गया था, जिसके माधियम से, अगर कोई व्यक्ति किसी के साथ चुवाचूत पूर्ण बरताव करेगा, वो गैर कानूनी होगा, और करने वाले के किलाफ सक्त कानूनी कारेवाई की जाएगी, ये कानून इसलिए
28:55पारण अधिनियम पारित किया गया, जिसे अनुसुचित जाती, जन जाती अधिनियम भी कहा जाता है, आगे चलकर दलित पैंथर्स ने रिपॉब्लिकन पालिटी ओफ इंडिया को सही ओग दिया, किसको सही ओग दिया, रिपॉब्लिकन पालिटी ओफ इंडिया को, पैंथ
29:25पाइटी रिपबिलिकर पाइटी इंडिया यह दॉक्तर बीयार अमबेटकर के द्वारा बनाई नहीं थी दॉक्तर बीयार अमबेटकर
29:52के इसी पाइटी को दलित-पैंथा ने अपना सपोर्ट दिया क्योंकि दलित-पैंथर्स प्लेडिकल पाइटी तो थी दलित-पैंथर्स एक सामाजिक संगठन था इसलिए इनॅने रिपप्लिज्इन पारटी ऑफ इंडिया को छोना जो कि कही नकाई आगे चल करके
30:09इस संगेठन के हित में इन जातियों के हित में काम कर सकती थी यहां पाइटी अधिक सफलता पर आप नहीं कर सकती अतहर दलित पैंथर्स दीरे-दीरे विगटन की और अग्रसर हो गया
30:22जब इस पाइटी का आगे फ्यूशल ठीक नहीं था सक्सेस्फुल नहीं हो पा रही थी तो दलित पैंथर्स भी अपनी राह भेटकने लगा क्यों किसको सपोर्ट करें बैकवाड एंड माइनोरिटी एंप्रोईस फेडरेशन जिसे बामसेफ कहते हैं इन्हें दलित पैंथर्
30:52यह बामसेफ जो है यह गठित था B.A.M.C.E.F. यह 1978 में गठित किया गया था काशी राम के द्वारा काशी राम वही काशी राम दिनों आगे चलकर B.S.P. को जन्द दिया था बहुजन समाजबादी पारिटी को उन्होंने ही बैकवाड एंड माइनरिटी एंप्रोईस फे
31:22सेफ मेया अब आती बात भारतिय खिशान यूनियन की है भारतिय किशान यूनियन पाश्य म उत्तरप्रदेश त merch tarhar म की जो का इक संगठन था
31:33तंधा किसका संगठन था प्रष्चीम उत्तरपर देश ज हरियरा और पंजाब द्वारतिय यूनियन की सअग को का आते हैश
31:52पश्रीमी उत्तरप्रदेश, हरियाना और पंजाब। पीश्रा कौन सा राज्य है? पंजाब। इन किसानों को लेकरके ये संगठन बना था।
32:04नियोजित विकास की राजनिती के अंतरगत, प्रथम पंचवर्शी योजना में गरीब किसानों को आर्थिक सईयोग तता रियायती दरोपर क्रसी से संबंदे द्वस्थ में उपलब्द करवाने की सरकार की निती की असफल था।
32:16खाधियान की पैदावार में ब्रद्धी नहीं के परिणाम शुरूप सरकार ने उनिस्ट साथ के दशक में हरियाना पंजाग और पश्चीम उत्तरप्रदेश के मध्यम वर्गे किशानों को आर्थिक सईयोग देने की निती अपनाई जिससे खाधियान में तीवर ब्रद्
32:46इस समय जो सरकार ने प्लान बनाया था सरकार की योजना ये योजना बदली गई थी किशान को लेकर खेती को लेकर एक तो नई किश्म के केट नाशक दवाएं बीज सबी चीज़ें लाई गई थी
33:06में और दूसरा जो भी ये योजना थे वह योजना गरीब मेंट के नहीं हो करके यह योजना किसके लिए थी यह योजना थी
33:17पस्तिमी उत्तरप्रदेश हरियाना और पंजाब with क्योंकि यह
33:28प्रयाद साधन उपलब्द है तो जहां साधन उपलब्द है वहीं पर आप थेति को बढ़ावर दीजिए
33:53सरकार ने अपने जो पुरानी नीती थी गरीब किशानों को मदद करने की उस नीती को बदलते हुए इन किशानों को मदद की गई जिससे कि यहां कौन से इन तीन राज्यों में किशानों का एक सम्रद्ध वर गुभर करके सामने आया इस हरित क्रांती के पश्चाथ इन ही कि�
34:23परिणा है उत्तरप्रदेश का एक शहर है मेरट जहां पर लगभग 20,000 किसान जमा हुए तथा सरकार द्वारा बिजली की दरों में की गई बड़ोतरी का विरोत किया
34:36किशानों को सस्ती दरों में बड़ोतरी कर रही थी तो किसानों नहींखटा होकर मेरट में एक आंदोलं किया है है किat अक उらい बात रखी गई कि किसानों को सस्ती दर पर बिजली मिलनी चाहिए
34:51परिणाम स्वरूप सरकार को यह बड़ोती समप्त करने पड़ी यह सफलता थी किसकी भागती किसान यूनियम की उन्होंने मांग रखी सरकार मांग के सामने जुग गई
35:051980 के दशक के उतरार्द में भारत सरकार ने उदारीकरण की नीतियों को अपनाने के प्रयास किये
35:13नहीं कहकर के हम कह सकते हैं आंसिक उदारीकरण उननी सो अंसी
35:221985 के पशचात आंसिक उदारीकरण और यह जो आंसिक उदारीकरण
35:39राजिउ गांदी की सरकार के द्वारा
35:41जब राजियो गांदी प्रधानमंत्री थे तो रिफॉर्म्स लाना चाहते थे वो सुधार लाना चाहते थे तो राजियो गांदी सरकार ने आंसिक उदारीकरण लानी की कोशिस की अब आप सोच रोंगे यह आंसिक उदारीकरण क्या है उदारीकरण का मतलब तो यह है कि हमा
36:11अंशीक उदारीकरन नाम दिया गया तो अंशीक उदारीकरन की जो नीटी अपनाई गई
36:24इससे प्रयाज जो किया थे इसके परिणाम सुरूप नकदी फसल के बाजार पर संकटमर्णा ने लगा था
36:31परिणाम सुरूप भारत्य किसान यूनियन ने सरकार से कुछ मांगे रखे
36:35देंगे नगदी फसल नगदी फसल वो फसल होती है
36:41नगदी फसल जिसके कीमत फसल खड़ी होती है तम ही मिल जाती है
36:48जिसको कैश कहते है नगदी फसल जो कटाई नहीं होती है
36:58खड़ी फसल की कीमत जिसको की मिलती है, खड़ी फसल की कीमत, एक दियोपती सीधा आप तक आएगा, आपकी फसल देखेगा, कीमत देकर चला जाएगा, वो फसल उसकी हुगे, इसको कहते हैं नगदी फसल, तो नगदी फसल पर थोड़ा खत्रामंडरा ने लगा था, जब ऐ
37:28आपको इस बात को समझना चीए, जिस हम उदारी करण की बात कर रहे हैं, इस उदारी करण से क्या होगा, इस उदारी करण से, सरकार द्वारा, सरकार द्वारा, किसानों, सरकार द्वारा किसानों को, मिलने वाला लाब,
37:54कि मिलने वाला लाब क्या हो जाएगा समाप्त हो जाएगा लाब समाप्त हो जाएगा क्योंकि अब मार्केट अपना डिसिजन खुद लेगा मार्केट में आपको ओपन जाना पड़ेगा आपको मार्केट में कॉंपटिशन करना पड़ेगा अब संकार की तरफ से मिलने वाले
38:24या एक्जामना कोशन पूछा जा सकता है कि भारती किसान यूरियन की आंसिक उतारी करण के वुरुथ खीवी प्रमुख मांगों में सामिल है या सामिल नहीं है तो गैहूं और गैहूं की सरकारी खरीद फसल में बढ़ाउतरी करना यह पहली मांग देखें यह नगदी फसल �
38:54हूं 25 रुपए किलों में खरीदती है तो सरकार उसे 30 रुपए में खरीदे यानि कि सरकार जिस मुले में खरीदती है उसकी कीमत को बढ़ाया जाए यह किसानों का कहना था क्रशी उतपादों के अंदर अंतर राज्य आवाजाही पर लगी पाबंदियों को समाप्त करना य
39:24बिहार भेंकर सुखे का सुखे की चपेट माया था उनिसो साट के दशक्रा हाला कि भारत को भी सुखे का सामना करना पड़ा बट बिहार के लोगों की स्थती यह हो गई थी कि उन्हें पंजाब के लोगों की अपिक्षा दुगनी कीमतों पर चावल और यहू खरीद कर खा
39:54प्रति दिन चाहिए होती है बारासु केलोरी पर आगये थे बिहार के लोगों को पोर्शन का सिकार हो रहे थे केवल और केवल जॉनिंग प्रणाली की वज़े से इसी का गिरोध हुआ था यानि कि पंजाब चाहे तो डारेक्ट राजस्तान को खरीद सकता है बेच सकता है �
40:24समुचित दर पर गारंटी सुधा बिजली आपोती करना गारंटी सुधा बिजली का मतलब यह है कि किसान को बिजली मिलनी चाहिए गारंटेट बिजली मिलनी चाहिए किसान को किसानों के बगया कर्च को माफ करना जो भी कर्च किसानों के ओपर चड़ा है उस कर्च को सरका
40:54परदीब किसान की श्रीणी में आता है उसके लिए पैंशन होनी चाहिए माली जी किसान बुड़ा हो जाता है अब वो जब कमा करके नहीं खा पा रहा है महनत मज़ूर नहीं कर पा रहा है आगे का जीवन रद्धावस्ता में कैसे गुजलेगा तो उसके लिए सरकार क्या करे
41:24प्रदर्शन जेल भरो जैसे अभ्यान का सहरा लिया यह सब वो तरीके थे जो कि अंग्रेजों के काल में महत्मा गांधी और भारतिय लोगों के द्वारा अपनाए जाते थे यह आंदोलन उत्तरप्रदेश तथा दिल्ली तक फैला इस आंदोलन में जातिकत जुड़ाओं
41:54कि 1990 का दशक वह दशक जिसे हम उदारवाद का दसक कहते हैं किसका दसक कहते हैं उदारवाद का 1990 1990 का दशक और इस 1990 के दशक में भारत ने प्रदान मंत्री
42:18भारत ने प्रदान मंत्री नर्शीम हाराव गौर वित्मंत्री
42:33डॉक्टर मनमोहन सिंग के नेत्रत्व में उदारी करण
42:51उदारी करण को अपनाया यह वो दौर है जिसे हम लिब्रलाइजिशन का दौर कहते हैं अब भारत ने उदारवाद के दर जा रहा था अला कि प्रक्रिया तो राजियो गांधी के काल में शुरू हो गई ती जिसे आंसिक उदारी करण कहा गया था बट वो दीमा उदारी कर
43:21कंपनियों को वो सारे काम सोंपना चाहते थे जो कि अभी तक अमेरिका और उसके आसपास के पुंजिवादी देशों में चल रहा था तो इस समय जो है आंदोलन की मांग मानी गई और आंदोलन को सांथ होना वानदोलन सांथ हुआ अब आका है नेस्नल फिश्वरकर्स आं�
43:51वर्सों में आंसिक उदारीकरण की नीती के की शुरुवात हुई तो बात दिये होकर मचुवारों के इस्थानी संगठरों ने अपना एक राश्वर्य मंच बनाया इसका नाम क्या रखा गया नेस्नल फिश्वरकर्स फॉरम देखें आप सभी जानते हैं मचली पालन एक ब
44:21जो माशाहरी भूजन करते हैं और विश्यस रूप से जो भारत के समुद्री तटों पर बसे हुए लोग हैं उनके आहार उनके भूजन का एक प्रमुक तत्व जो है वो मचली है
44:33हम उसी मचली पालन की बात कर रहे हैं जो कि समुद्र तटी इलाकों पर मचली पकड़कर अपना पेट भरते थे उन लोगों ने अचानक क्यों विरोध किया क्यों वह आंदोलन की रहा पर गए इसके पीछे कारण था उदारी करण उनीसों पिचैसी के बाद भारत सरकार ज
45:03और उन्होंने एक फोरम गठित किया जिसे नैशनल फिश वरकर्स फोरम यानि की एन एफ एफ कहकर कुकारा जाता है एन एफ एफ नेशनल फिश वरकर्स फोरम ने 1997 के केंद्र सरकार के साथ अपनी पहली कानुनी लड़ाई लड़ी और इसे सफलता भी मिले कब 1997
45:27एन एफफ ने बारत की जो केंदर सरकार थी उसके खिलाफ कानुन इसके खिलाफ कोट में गया एन एफफ और ये कहा कि सरकार की इस नीती से जो सरकार अब उदारी करण के नीतिया अपना रही है हमारी आजीविका हमसे शिन जाएगे
45:46सरकार अब बड़ी बड़ी कंपनियों को मचली पकड़ने के आदेश दे रही थी या उनको अधिकार दे रही थी किसाब आप लीजिए यह आपका एरिया है आप यहां से मचली पकड़ी बेचिए पैसा कमाईए और हमारा जो भी एक परसिंटेज है गवर्मेंट का वो हमें �
46:16इसे सरकार को करोड़ों का मुनाफ़ा होना था सरकार ने इसका जब निर्ने लिया तो तकलीफ हो गई छोटे मचवारों को कि अगर बड़ी-बड़ी कंपनिया आ गई विदेशों से जिनोंने बड़ी भारी मशीनरी का प्रियोग करते हुए मश्री पकड़ने का काम सुर�
46:46ग्यावसाइक जहाजो को गहरे समुद्र में मचली मारने के जाज़त दे दी गई गहरे समुद्र का मतलब है आप पूरे समुद्र में कहीं भी जा सकते हैं और वहां से मचली पकड़ सकते हैं अब भारत के जो मचवारे हैं बो तो जो हमारे किनारे हैं वहीं पर मचली पक�
47:16अब जब बीच में मचली पकड नेकले जाएंगे, तो किनारे पर तो मचली अपना भी खतम हो जाएगी,
47:20क्योंकि किनारे पर तो वही मचली रहती है, जो कि बीच में नहीं रहती है,
47:25अब बीच में खाली होगी तो इनका गमन बीच में होना सुरू हो जाएगा,
47:31तो सारी मचली तो यही पकड़ ले जाएंगे फिर हमें क्या मिलेगा इसलिए इनका विरोध जायस था
47:36सन 2002 के जुलाई में NFF ने एक राश्टर वे अप्री हर्ताल का अवान किया
47:42हर्ताल का यहावान विदेशी कंपनियों को सरकार द्वारा मचली मालने के लाइसेंस जारी करने के विरोध में किया गया था
47:49तो NFF क्या है? पहला प्रस्टन तो इस पर बनता है National Fish Workers Forum
47:55पहली कानूनी लड़ाई 12 सरकार के साथ NFF ने कब लड़ी? तो होगा 1997
48:02NFF ने राष्टर व्यापी हर्ताल का आहवान कब किया? तो सन 2002 जुलाई में किया
48:10NFF ने क्यों राष्टर व्यापी हर्ताल का आहवान किया? क्योंकि सरकार ने विवसाईक जहाजों को गहरे समूदर में मचली मारने के इजाजत जारी कर दी थी
48:22लाईसेंस दे दिया था जिससे इनके आज़िवी का छिंद सकते थी इसलिए आ हाने इसका विरोध करते हुए
48:28राश्ट्र व跟你 आंदोलंका सहाख लिया 911 लिया मंगि कड़ी कर लेंगे थाणी की वीडैर थी अंदोलन सर्
48:38तो आप देखेंगे अंदरप्रदेश का नेलोड जिला जहां से इस अंदोलन की शुरुवात हुई और बड़े ही इंट्रस्टिंग तरीके से हुई कैसे देखेगा जिरा भारत में जिस समय पश्चीम उत्रप्रदेश था दिल्ली भारतिक किसान यूनियन का अंदोलन चल र
49:08अंदरप्रदेश के नेलोड जिले के अंदर यह आंदोलन दिखाई दे रहा था जो कि ताड़ी विरोधी आंदोलन था यहां आप देखेंगे सितब अक्टूबर 1992 की बात है तेलुगू प्रेस में आए दिन सराप विक्री के विरोध के आंदोलन के समाचार सबते थे
49:25सभी खबरों में कठना एक जैसी होती थी केवल गाउं के नाम बदल जाते थे यानि कि यह आंदोलन जगय जगय पर चल रहे थे इस आंदोलन में लगबग 500 गाउं की महिलाएं सामिल थी कितनी 5000 और 500 5000 गाउं की महिलाएं सामिल थी आंदरप्रदेश के नेलोड जिले के द�
49:55महिला प्रावड सिक्षा कारिक्रम चलाएं गया था 1990 में महिला प्रावड सिक्षा कारिक्रम जिसका मतलब होता है जो महिलाएं अपनी पढ़ाई की उम्रों में पढ़ाई नहीं कर पाई अब उनको पढ़ाने यानिकि सिक्षित करने का काम तो महिलाएं अपने सारा काम करक
50:25तो एक दिन एक महिला ने घर की बाद छेड़ दी होगी कुछ इस प्रकार से कि हमारे तो घर के अंदर आए दिन लड़ाई जगड़े होते हैं मार्कृत होती है हमारे तो घर के पुरुष जो है वह आए दिन सराप के नसे में दूत रहते हैं बहुत सारा पैसा सराप पर कर्�
50:55वह रहते थे वहां पर बड़ी भारी सराप की विक्री हुआ करती थी और जहां वहां जहां पुरुष काम करते थे इनहीं महिलाओं के उनको जो ठेकेदार पैसे देता था वो खुद ही इनको नशेकादी बनाता था नशेकादी इसलिए नसा विकेगा पैसा कमाएंगे और
51:25इनका सीधा संबंध होता था आपस में साथकाट होती थी तो ऐसी इस्तिती में जो है वो यहां की महिलाओं ने एक आंदोलन करने का निश्चे किया तो कुछ मिर्टों के बाद लोटता हूं पानी पीकर के तिर करते हैं मागे की क्लास को इस्टाइट
51:55तो प्रौण सिक्षा के अंदर पर सभी महिलाएं आपसी बादचित में ताड़ी की बिक्री वह उससे होने वाली समस्यों पर बादचित करती थी यही से ताड़ी विरोधी आंदोरंग का जन्व हुआ
52:16शराब के नसे में पुरुस मांसीक वसारी गूप से कमजोर हो रहे थे घराओं में आर्थी किस्तिती दिन प्रते दिन कमजोर होती जा रही थी फिर मारपीट बगरन अगरी ती घर में जगड़े मारपीट जैसी एक ठतित हो हरे थी ऐसे हालात में पिडित महिलाओं ने एक
52:46होती थी जिसमें दुकान के विक्रिताओं को अधिकार दिया जाता था कि आप तादी बेच सकते हैं इस विक्री को ही इस निलामी को ही
52:55सत्रा बार रोका गया इस विरोत की वज़े से एक नारा जो इस आंदोलन में बुलंद हुआ था वो था ताडी की विक्रीप बंद करो
53:02सरकार को ताडी से बहुत बड़ा राजस्व लाब था मुनाफा था और सरकार नहीं चाहती थी कि इस मुनाफे को खोया जाए
53:12राजनीती था अपराज जगत का संबंद काफी गयरा हो चुका था राजनीती मतलब नेता लोग जो थे वो इन सराब माफियाओं से जुड़े हुए थे वो नहीं चाहते थे कि सराब बंद हो सराब की विक्रीप बंद हो नेलोग ताडी विरोती आंदोलन की गूंच पूर
53:42तो सभी जगों से महिलाओं ने प्रतिक्रिया व्यक्त की किया हालात तो भारत के कई हिस्सों में कई जगों पर मौझूद हैं इस आंदोलन के माध्यम से समाज में महिला उत्पीडन के विरोत के स्वर गूंजने लगे गरेलु हिंसा दहेज प्रथा ये देखे सब जगों �
54:12संगठनों द्वारा उठाई गई कि वह दौर था जब पूरे भारत से अलगलग संगठन जो थे महिलाओं के पक्ष में यह आवाज उठा रहे थे कि यह गचनाय महिलाओं के साथ बहुत कुछ बयान करती है कि महिलाओं के राजनितिक प्रतनेधित्यों की मांग की जाने व
54:42मिलेगा तब तक ऐसे कुछ कानून नहीं बन पाएंगे जो महिलाओं के हित में हो यह मांग उठी और जब यह मांग उठी तो इसका परिणान भी कुछ शकरात्मक आया आप देख सकते हैं 73 और 74 समिधान संसोदन जो हुआ था उस 73 और 74 समिधान संसोदन के माध्यम से इस्�
55:12और महिला आरक्षण के इतना कम से तंधम एक तिहाई सीट जो है वो इस्थानिय सासन में महिलाओं के लिए अरक्षित होगी यहां इस आंदोलन के माध्यम से मिला जो इस आंदोलन की सफलता की कहानी बयान करता है लोकशवा तथा राज्यों के विधान सभाओं में महिला �
55:42के दशक में आंदरप्रदेश के नेलोड जिले से हुई जहां महिलाओं ने सराग की विक्री को रोकने के लिए अंदोलन सुरू किया और वह अंदोलन धीरे-धीरे भारत के सभी हिस्सों में फैला और जो महिला अंदोलन या महिला संगठन जो चला रहे थे उन्होंने महिला�
56:12यौन उत्पिडन इस प्रकार की घटनाएं काफी जादा हुआ करती थी इसकी तरफ दियान ले जाया गया संदोलन के दोरान और इसका परिणाम क्या मिला परिणाम ये मिला कि 1992-1993 में जब इस्तानिय सासन के लिए एक संसोधन किया गया जिसे हम 73 और 74 समिधान संसोधन कहत
56:42Amer कि अब हम बात करेंगे नर्मदां बचाऊ रवां पर नम्हान बचाऊ बचातों ऀयर में किसका अंधुदन है नदी परिअवर परियावरन की जैसे हम अम बहुक्तरrotella के पर ऊखे चन यह ईंजर प्रकरती एक समान नहीं थी दिन वरила नोरा से जूड़ा हुआ था
57:08जिसमें मजदूर किशान आंदोलन भी उए
57:15सबस्टन कर चुक हैं कि यह कि आंदोलन अर्थिक सुरक्ष्षा को लेकर गजू अब 한
57:23हब है जелиलों पर अधारित आंदोलन रिपीट हुआ है जिसकी हम बात कर सकते हैं कि यह आंदोलन आफ सभी जानते हैं कि
57:31एक समय में 1987 के दशक में हुए थे जब राजमितिक दलों ने
57:40उनीसो सतरसी से भी पहले की बात कर सकते हैं यह 1960 के आसपास की बात है जैसे कि नक्सलबादी अंदोलन था जैसे कि हैदराबाद में तेलंगाना के किशानों को लेकर के
57:50वहां की Communist Party ने आंदोलन किया था ऐसे आंदोलन भी हुए थे जो राजमितिक दलों पर आधारित थे फिर दलित पैंथर सामाजिक भेद पर आधारित आंदोलन था तो हम यहां उन आंदोलनों की चर्चा कर रहे हैं जो की अलगलग प्रकार से हुए है भारतिय किसान यूनियन
58:20तो हम इस सर्चा को continuous नहीं कर पाएंगे नर्मदा बचाओ अंदोलन क्या था बात्चीत होगी हमारी अगली ग्लास में इस पर साथ ही हम आगे चल करके इसी चैप्टर के multiple choice questions की भी बात्चीत करेंगे और मुलाकात जारी रहेगी तक तक के लिए आप सभी स्वस्त रहें मस्
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