00:00जब रजिया सुल्ताना दिल्ली की शासक बनी, तो वो हिंदुस्तान की पहली मुस्लिम महिला शासिका बनी, लेकिन वो सिर्फ एक बहादुर रानी नहीं थी। उनके दिल में अपनी प्रजा के लिए गहरी दया और ममता थी। एक दिन, जब वो महल के बाग में टहल रही थी
00:30अम्मा, आप क्यों रो रही हैं? बूरी औरत ने कहा, मेरा बेटा बेगुना है, फिर भी उसे जेल में डाल दिया गया है, और मेरे पास कोई ताकत नहीं, कोई मदद नहीं।
00:43रजिया सुल्ताना की आखों में आसु आग, उन्होंने तुरंट अपने वजीर अदल को बुलवाया और गहराई से जाच का आदेश दिया। जब सक्चाई सामने आई, तो उस बेगुना नौजवान को रिहा कर दिया गया।
00:57मगर रजिया सुल्ताना यहीं नहीं रुकी, उन्होंने उस बूरी माँ और उसके बेटे को मदद भी दी, खाना और पैसे दिये और उन्हें इज़ित के साथ घर भेजे। उस दिन के बाद, लोग उन्हें सिर्फ रानी नहीं कहते थे, वो उन्हें दया की माँ कहने लगे�
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