00:00मा ये सिर्फ एक शब्द नहीं बल्कि एक अहसास है
00:09ये दिन पूरी दुनिया में धुमधाम से मनाया जाता है
00:12हर साल मई का दूसरा रविबार दुनिया भर के माताओं के नाम कर दिया जाता है
00:17इसे हम मॉदर्स डेक की तुरह बनाते हैं
00:19इस दिन बच्चे अपनी मा को स्पेशल फील कराने के लिए प्यार उन्हें गिफ्ट्स और अलग-अलग तरह की चीज़े ट्राइ करते हैं
00:26संतान चाहें कितने भी बड़ी क्यों ना हो जाए
00:28अपनी मा के लिए वो छोटा सा बच्चा ही होता है
00:31ऐसे में बच्चों को भी चाहिए कि वो अपनी मा को प्यार और समान दे
00:35इस दिन उनके लिए कुछ खास प्लानिंग करें
00:37कोई गिफ्ट दे कर कोई कार्ट बना कर तो कोई खास शब्दों में
00:40मा को थैंक्यू कहकर उन्हें स्पेशल फील करवाया जा सकता है
00:44इन सब के बाद भी क्या आपने कभी सोचा है कि मदर्स डे माई के दूसरे रविवार को ही क्यों मनाया जाता है
00:50क्या ये दिन यूँ ही तै कर दिया गया या इसके पीछे कोई खास वज़ा है
00:55आज हम आपको अपने इस वीडियो में बताएंगे कि आखिर मदर्स डे क्यों मनाया जाता है
01:00और इसे माई के दूसरे रविवार को ही क्यों मनाया जाता है
01:04इस साल आपको बतादें 11 माई को मदर्स डे मनाया जाए
01:07इस दिन को खास बनाने के लिए आप कोई सर्प्राइस प्लान कर सकते हैं
01:11आप चाहें तो मा के साथ कोई ट्रिप प्लान कर सकते हैं
01:14उसी शहर में रहते हुए भी कहीं डिनर या फिर मा को मूवी दिखाने लेकर जा सकते हैं
01:19इससे उन्हें भी लगेगा कि आप उनकी कितनी परवा करते हैं
01:23तो आपको बताते हैं इस दिन को मनाने की शुरुवात एनी रीव्ज जॉर्विस ने की थी
01:27कहा जाता है कि इस दिन के जरिये एनी अपनी मा एन रीव्ज जॉर्विस को ट्रिब्यूट देना चाहती थी
01:33उनकी मा ग्रह युद के वक्त एक एक एक्टिविस की तरह काम करती थी
01:37जब 1904 में उनका निधन हुआ तो उनकी याद में पहली पूर्णे थी पर
01:41वेस्ट वर्जीनिया में ट्रिब्यूट सभा का आयोजन हुआ यानि प्रार्थना सभा का आयोजन हुआ
01:47इसमें कई महिलाएं भी शामिल हुई जो महिलाएं मा बन चुकी थी उन्हें 500 से ज्यादा वॉइट कॉर्णेशन फूल दिये गए
01:54ये उनकी मा का पसंदीदा फूल हुआ करता था इसके बाद उन्होंने फैसला किया कि हर साल मदर्स डे मनाया जाना चाहिए
02:001914 में अमेरिका के राष्ट पती वुडरो विल्सन ने ओफीशिली माई के दूसरे रविवार को मदर्स डे अनाउंस कर दिया
02:08दरसल एना की मा का निधन माई में हुआ था उन्होंने अपनी मा को ट्रिब्यूट देने के लिए माई के दूसरे रविवार को ही शरधांजली सभा का आयोजन किया था
02:18इस तारीख को चुनने की वज़ा ये थी कि रविवार के दिन हर किसी की चुटी होती है
02:21इसलिए वो अपने परिवार और खासकर मा के साथ समय पता सके
02:51झाल झाल
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