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जाति जनगणना पर बोलते हुए लेखक एवं वेदांत दार्शनिक आचार्य प्रशांत ने कहा कि इससे बस डेटा ही आएगा। ये सब गंदगी धर्म के नाम पर हुई है और सफाई भी आकर धर्म ही करेगा। आगे क्या कहा सुनिए।
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00:00इससे बस डेटा आएगा, सूचना, इससे पता चलेगा आपको कि 1931 के बाद से आज तक लगबग 100 सालों में कौन सा जातिगत समू हो, संख्या में कितना बढ़ा है, किस क्षेत्र में कितना बढ़ा है, जिनको रिजर्वेशन जा रहा है, वो कोई एक होमोजीनियस समुदाय �
00:30भी भारतिय समाज में एक living reality है, तो जो चीज सच मुझ है, एक fact है, ground पर, उसको जानना तो पड़ेगा न, कि ये सब जो शोशन हुआ है, और भेदवा हुआ है, ये सब हुआ तो धर्म के नाम पर ये न, तो इसको खत्म भी वहीं जाकर करना पड़ेगा, जहां से शुरू ह
01:00कराना भारत के लिए आवे बढ़ने का कदर है, ये और कीछी में कर जाएगा.
01:30क्या हाल है, और बहुत सारी और बाते हैं जो हाँ पूछी जाएंगी, भई आपने कितनी चीजे हैं जो ओन कर रखी हैं, आपके पास लैंड है कि नहीं, आपके पास मोबिलिटी, वेहिकल्स, ये सब हैं कि नहीं हैं, बहुत सारी बाते हैं से पूछी जाएंगी, ये अपन
02:00जो वहां लोग रहते हैं, वो एक particular कास्ट डूप को बिलॉंग करते हैं, वहां पर, और आपने देख लिया है कि इन जनरल जहां भी ऐसे लोग रहते हैं, वहां पर किसी चीज की कमी पाई जाती है, मालीजे को पोशन है, या मालीजे अस्पतालों की, स्कूलों की कमी है, या स
02:30की welfare schemes चलाती है, जिसमें distributive measures भी होते हैं, affirmative measures भी होते हैं, मैं कोई भी scheme कैसे चलाओंगा, अगर मुझे को पता ही नहीं होगा, कि data क्या है, फिर तो एक अंधी scheme हो गई न, मैं किसी जगह को बहुत सारा राशन भेज रहा हूं, या कोई और संसाधन भेज रहा हूं, जबकि �
03:00दिनों से ये affirmative schemes तेल रही थी, जिसमें reservation भी शामिल है, तो इन affirmative schemes का फाइदा किसको हुआ है, अब जिनको reservation जा रहा है, वो कोई एक होमोजीनियस समुदाए नहीं है, अबिसीज हैं, उनमें भी हजारों तरीके के वर्ग हैं, भेद हैं, उसके बाद S.C.S.T. आते हैं, उनम
03:30उपारा, कौन अभी भी बंचित रह जा रहा है, ये सब जानकारी होनी चाहिए न, तो अगर data का इस्तमाल ये सब जानकारी पा करके, उसका सही इस्तेमाल करने के लिए हो रहा है, ताकि जनता की भला ही हो सके, तब तो इस data में कोई बुरा ही नहीं है, लेकिन आप उस data का �
04:00नहीं नहीं, वहाँ के लोगों को भणकाया जा सकता है, यहाँ के लोगों की बात करके, और यहाँ के लोग तो मुझे वैसे भी वोट नहीं देते, तो मैं वहाँ के लोगों को भणका दूँग, जो मुझे पता चल गया है, कि उस constituency में वो लोग 55 प्रतिशत पाये जाते है
04:30देखिए, अगर हमारा विजन ये है कि जो समाज का वंचित वर्ग रहा है, जो हमारे शोशित भाई बहन रहे हैं, उन तक हमें शिक्षा पहुचानी है, उनको हमें समाजिक नयाय दिलाना है, हम चाहते हैं कि वो भी आगे आएं कंधे से कंधा मिला कर राष्ट की तरक्षी
05:00उसके बारे में डेटा एकठा करना चाहते हो कि नहीं, यहां तक कि आप कपड़े भी धुलने के लिए देते हो, लॉंड्री में तो आप लिख लेते हो, कि इतनी ये, इतनी चीज़, इतनी ये, इतनी ये, तो आप उसको टैबुलेट करते हो, हैंना, तो जो चीज जितनी �
05:30उसकी गिंती करी जाएगी, वरना वो ज़रूरी नहीं है, फिर हम बस मुह से बोल रहे हैं, ज़रूरी हैं, ज़रूरी मानते नहीं, तो चाहे वो डॉक्टर अमेडिकर का विजन हो, या महात्मा फुले का विजन हो, उसको रियलाइज करने के लिए व्यावहरिक रूप से, य
06:00अगर एक लिविंग रियालिटी है, तो हमें उसको गिनना भी पड़ेगा ना, या तो जाते कर भेदभाव भारतिय समाथ से मिट गया होता, तो उसके बाद अगर कोई जाकर गड़े मुर्दे उखड़ता, कि जाती से कोई चीज है तो है नहीं बिलकुल, ना तो कोई जात
06:30रहे हो caste census, तो हम कहते हैं कि फिजूल का खर्चा है, यह बिलकुल बेकार की बात है, पर caste अभी भी भारतिय समाज में एक लिविंग रियालिटी है, तो जो चीज सच मुझ है, एक fact है, ground पर, उसको जानना तो पड़ेगा ना, नहीं तो हम असलियत से बस आखें चुरा रहे
07:00गई है, वो अभी भी सांस ले रही है, धड़क ले रही है, तो यह बहुत जान बाकी है, तो यह कहना कि कास्ट गिनने से कास्ट आइटिफिकेशन बढ़ जाएगा, यह गलत बात है, चुकि कास्ट आइटिफिकेशन है, पहले से है, इसलिए हमें कास्ट गिननी पड़ रह
07:30किसे इंशार की लगाएगा पूरी कोशिश करतो रहे हैं पूरा जो जो हमारा जीता का कारिकरम है शैक्षनिक वो इसी लिए तो है आज भी यहां आया तो मैंने बात यही करी कि यह सब जो शोशन हुआ है और भेदवा हुआ है यह सब हुआ तो धर्म के नाम पर यह न तो इस
08:00तब तक धर्म के नाम पर जो कचड़ा फैला हुआ है वो कचड़ा कुछ जान रखेगा और लोगों की जिंदगी खराब करता चलेगा तो यह सब गंदगी धर्म के नाम पर हुई है और सफाई भी आकर के धर्म ही करेगा तो धर्म की असलियत जो है वही धर्म के नाम पर ज
08:30झाल, झाल, झाल, झाल
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