00:00तेकि भारत का सम्विधान तीन स्तम्भों को संतुलन और समन्वे के साथ परसपर सहयों की अपेक्षा करते हुए चाये वो न्यायपाली का हो, कारेपाली का हो या विधाई का हो
00:21और यह पेक्षा हैं सम्विधान ने माताओं ने इसकी रचना के समय ही की थी
00:30कई बार कुछ प्रसंग उभरते हैं लेकिन जर्यतादली उनाइटेट का जहां तक सवाल है
00:39हम आजम तोर पर न्यायपाली का से जुड़े प्रस्टों पर उनके आपजरविसंस पर उनके निर्देसों पर कोई टिपनी नहीं करते रहे हैं
00:51अब सब कुछ नैपाली का के समक्ष है और जो भी उनके निर्देस होंगे जो फैसले होंगे
01:02He has something to say that he has something to say.
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