00:00बहुत समय पहले की बात है, फूलपूर नामक गाउं में किर्षना नाम की एक बूड़ी काकी रहा करती थी.
00:11किर्षना का एक बेटा था जिसका नाम था मोहन, जिसकी शैर में बड़ी कंपनी में नोखी लग गई थी और वे फिर शैर में ही रहने लगा था.
00:21मोहन के गाउं से जाने के बाद किर्षना बेचारी अकेली ही गाउं में रहा करती थी. अब किर्षना बहुत ही जादा बूड़ी हो चली थी, इसलिए उससे घर का काम करना बहुत ही जादा मुश्किल हो चला था. फिर एक दिन,
00:36अरे एक महीना बेच गया, नाही मोहन बेटे का कोई फून आया और नाही उसने पैसे भेजे, पता नहीं क्या हो गया है मेरे बेटे को, शहर जाकर वह बहुत ही जादा बदल गया है, यहां मैं इतनी बूड़ी होती जा रही हूँ कि मेरे बस की कोई भी घर का काम नहीं रह
01:06मैं फोन करके ही पूछ लेती हूँ कि वह गाउं में मुझसे मिलने कब आएगा
01:12फिर क्रिशना अपने बेटे को फून लगाती है पर उसका बेटा अपनी मा का फून ही नहीं उठाता
01:19अरे ये मा को भी चैन नहीं है बिलकुल जब उन्हें पता है कि इस वक्त मैं अपने ओफिस में होता हूँ फिर भी फून पर फून करे जा रही है
01:27हाँ एक तो यह शहर की इतनी टैंशन है और उपर से मा है जो इतनी टैंशन देती है जरूर पैसे ही मांग रही होगी
01:35हाँ नहीं उठाता आज फून बजने दे फून को वही दूसी तरफ कृष्णा बेटे का फून ना उठाने के कारण बहुत ही जादा दुखी और परिशान हो जाती है और परिशान होकर अपने घर से बाहर चली जाती है
01:50अरे अरे काकी तू यहां इतनी परिशान घर के बाहर धूप में क्यों खड़ी है क्या हुआ ?
01:57क्या करो बेटा जब से मोहन शहर चला गया है तब से मेरा तो घर में बन ही नहीं लगता अब कुछ दिन से तो उस ते मेरा फून ही उठाना बंद कर दिया है
02:11अरे अरे काकी मोहन को गए तो दो साल हो गए है उसे तेरी अब कोई फिकर नहीं भला ऐसा भी कोई बेटा होता है जो अपनी मा को ही भूल जाये एक साल पहले वै गाउं आया था भला ऐसा भी क्या काम जो अपनी मा को ही भूला दे ? काकी मुझे उसके लक्षन ठीक नहीं र
02:41तू उससे एक बार बात कर और फोन पर उससे यहाँ अपने घर बुला ले
02:48वै मेरा फोन तो उठाता नहीं है शायद तेरा फोन ही उठा ले तू मेरे लिए उससे बात करेगा न बेटा
02:57काकी भलाई इसी में है कि तू अपने बेटे को भूल जा उसे तो शहर की हावा लग गई है
03:04लेकिन तू कहती है तो मैं एक बार उसे फोन करके जरूर बता दूँगा
03:09ऐसा कहकर शम्भू वहाँ से चला जाता है फिर शाम को शम्भू मोहन को फोन करता है
03:16अरे मोहन कैसा है तू
03:18हाँ भाई शम्भू अरे भाई तूने तो हद ही कर दी यार अपनी मा तक का फोन नहीं उठाता
03:25भाई तू इतना कैसे बदल गया पता है तेरी मा तुझे लेकर कितनी परिशान है
03:31जरा उस बुड़ी मा के बारे में भी तो सोच तुझे उस से मिले कितने दिन हो गये पता है आज वे बेचारी रो रही थी
03:39भाई मुझे पता है पैसे की चरूरत हम सब को है लेकिन पैसे के लालच में हमें इतना भी अंधा नहीं हो जाना चाहिए कि हम अपने माबाब को ही भूल जाएं
03:49भाई देख मैं तुझे से समझा ही सकता हूँ मेरी माने तो तू कल ही काउं आजा
03:55हाँ भाई मैं कल ही काउं आजाता हूँ अच्छा भाई राम राम ये मां भी है ना एक बार फोन क्या नहीं उठाया पूरे गाउं में ही धिन्दोरा पीट दिया
04:07अरे किसी इंसान को कुछ जरूरी काम भी तो हो सकता है अब कल ही काउं जाना पड़ेगा
04:12हाँ मतानी छुट्टी भी मिलेगी या नहीं मेरी छुट्टी और खराब हो जाएगी
04:17ऐसा केखर मोहन्ट सो जाता है और फिर अगली सूबा ही अपने गाउं की तरफ चला जाता है और फिर अपने गाउं में पहुँच जाता है
04:26मां ओ मां मां
04:29अरे बेटा अरे मेरा बेटा
04:32मोहन्ट मेरे लाल मेरे बेटा तू आ गया
04:37मुझे बूरा विश्वास था कि तू अपनी बूड़ी मां से मिलने चरूर आएगा
04:46बेटा बहुत दिन हो गये थे तुझे देखे
04:50देख तेरी मां की चा हालत हो गयी है बेटा
04:54मुझे अब इस गाउं में नहीं रहना
04:57तू एक काम कर मुझे भी अपने साथ शहर ले चल बेटा
05:02मेरे से अब ये काम नहीं होता
05:05मैं बहुत ज़्यादा बूड़ी हो चली हूँ
05:08मा तु क्या कह रही है ये
05:10मैं तुझे शहर में नहीं ले जा सकता
05:13और वैसे भी कल से मुझे बहुत ज़्यादा गुस्ता आ रहा है
05:17मा तुझे पूरे गाउं में ये सब बताने की क्या जरूरत थी
05:21कि मेरा बेटा मेरा फोन नहीं उठाता
05:23मेरा ख्याल नहीं रखता
05:25पूरे गाउं में मेरी बेस्ती करा दी
05:27कोई इंसान अगर शहर में गया है तो उसे कितनी टैंचन होगी पता है तुझे
05:32मेरी अपनी समस्या ही कम है क्या
05:34जो अब पूरे गाउं में मेरी बेस्ती करा दी
05:37एक बार पैसे देने में क्या देरी हो गई
05:39तुने तो पूरे गाउं को ही सर पे चड़ा लिया
05:43बेटे के इतने कड़वे वचन सुनकर किरिशना तो जैसे मर ही जाती है
05:47फिर भी वह बेटे के प्यार में पागल होकर कहती है
06:12मैं बड़ा हो चुका हुआ अब मेरी चिंता करना छोड़ दो
06:22मा तुझे पैसे चाहिए थे न लो ये इस महिने के पैसे लो
06:27सारे रख लो और मैं जा रहा हूँ यहाँ से मुझे बहुत काम है
06:31मेरे पास फालतू टाइम नहीं है कि मैं यहाँ गाउं में बैटकर अपना समय वरबाद करू
06:36ऐसा कहकर मोहन घर से चला जाता है और कृष्णा अपने बेटे को अवाज लगाती ही रह जाती है
06:43मोहन मोहन बेटा ये क्या हो गया है मेरे बेटे को
06:50मोहन बेटा तू वापज आजा ऐसे ना जा बेटा ये पैसे ये पैसे मेरे किसी काम के नहीं बेटा
06:59जब तू ही नहीं मेरे साथ तो ये पैसे किस काम के बेटा तुझे मैंने इसलिए ही इतना बड़ा नहीं किया था
07:08कि तू ये दिन मुझे दिखाए ए वगवार ये कौन सा दिन दिखा रहा है तू माभाब अपने बच्चो को इसलिए ही बड़ा नहीं करते कि बच्चे बड़े होकर उने ऐसे छोड़के चले जाए
07:22क्या इस दिन के लिए ही जंदा थी मैं मोहन बेटा मुझे तेरे पैसे नहीं चाहिए
07:29फिर शाम तक कृष्णा को बहुत तेज बुखार हो जाता है जब ये बात चम्मू को पढ़ा चलती है तो वे जल्दी से डोक्टर के साथ कृष्णा काकी के घर पहुंसता है
07:40देखिए मैंने माजी का चेक अप कर लिया है इन्हें किसी बात का बहुत बड़ा सद्मा लगा है जो ये शहर जहरी नहीं पाएंगी मुझे नहीं लगता कि ये सुबह तक बच भी पाएंगी आप एक काम कीजिए इनके बेटे को बुला लीजिये ताकि वे इनसे मिल सके
07:58बेटा मोहन तु कहां चला गया मैंने तुझे पाल पोस कर इतना बड़ा किया था तुने मुझे ऐसे ही छोड़ दिया बेटा मेरे से ऐसे क्या गलती हो गई जिसकी तुने इतनी बड़ी सजा दी
08:18यह सब सुनकर शम्बू तुरंद ही मोहन को फोन मिला देता है पर मोहन उसका फोन नहीं उठाता पर शम्बू बार-बार मोहन को फोन करता ही रहता है
08:30हा हा शम्बू हा भाई मोहन तु तु तु एक काम कर तु जल्दी से गाउं में आ जा तेरी मा की तब्यात बहुत चादा खराब हो गई है
08:40क्या अरे भाई शम्बू मेरी मा का तो ये रोज-रोज का ड्रामा हो गया है वे सुबए तक बिलकुल ठीक हो जाएगी उसकी इतनी जदा फिकर करने की जरूरत नहीं है हा और तु भी यार मुझे रोज-रोज फोन करके परिशान मत करा गर
08:53फिर शम्बू उसे फोन पर ही सारी बात समझाता है और डॉक्टर से भी उसकी बात कराता है तब जाओकर मोहन को विश्वास होता है और फिर उसके पैरों के नीचे से जमीन ही किसक जाती है वे रात में ही तुरंत गाँप के लिए निकल जाता है पर होनी को तो कौन रोख स
09:23बावा उसे सारी ज़िन्दिगी रहता है हमें कभी भी अपने मुक से ऐसे वचन नहीं बोलने चाहिए जिससे कि दूसरे इनसान को बहुत जाधा दुखो
09:34मोहन ने अपने मुक से बोले हुए वचनों की वज़से ही अपनी मा को हमेशा हमेशा के लिए खो दिया
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