00:00अप तक आपने भाग चार में देखा गाओ में आदमखोर भेडिये का आतंग बढता ही चला जा रहा होता है।
00:17आदमखोर भेडिये से बचने के लिए गाओं के लोग मिलकर सर्पंजी के पास चाते हैं।
00:23सर्पंजी गाओं के लोगों को यह बताते हैं कि प्राचीन पुस्तक में यह लिखा है कि भेडिये से बचने के लिए हमें एक विशाल पिंजरा बनाना पड़ेगा।
00:34फिर सब गाओं वाले मिलकर एक बड़ा पिंजरा तयार कर लेते हैं।
00:39अब देखिए आगे।
00:41सर्पंजी सर्पंजी आपके कहने के अनुसार हम सब ने मिलकर लोहे का विशाल पिंजरा तयार कर लिया है और शाम भी हो गई है।
00:51सर्पंजी अब आप ही हमें बताईए कि आगे हमें क्या करना होगा।
00:56हाँ बेटा नमण तुम सबने मिलकर बहुत अचा कारे कीआ है...बेटा अब हम सब को मिलकर ही उस भेडिये को इस पिंजरे में किसी तरہ ख्याद करना होगा।
01:08पस शर्पंजी ऐसा कैसे वैं भेडिया इस पिंजरे में आयेगा।
01:13इस के लिए हम सब लोको को एक रन-नीती बनानई होगे
01:18क्या रन-नीती ?
01:22हां बेटा!!
01:23हमें उस भेडे को इस पिंचरे में लाने के लिए
01:27लालश देना होगा
01:29और इस कारे को करने के लिए
01:31हम सब में से किसी एक को पेंचरे के नीचे
01:34निचे खड़ा होना पड़ेगा
01:36हम इस पिंजरे को पेड़ पर रसी से बान देङेंगे
01:39और फिर हम में से कोई एक इंसान उस पिंजरे के निचे खड़ा हो जाएगा
01:44जिसे देखकर भेड़िया जैसे ही लालच में इंसान को مाने के लिए आएगा
01:49वे तुरंथ ही पिंजरे में फस जायेगा
01:53पर सरपन जी हम सब में से यह भाधुरी भरा कारय कोन करेगा
01:59उस बेड़ीये को देखकर तो पेरे पहले ही प्राण निकल जाते हैं
02:06तो कोन है हम सब में से इतना भाधुर जो ये कारय करेगा
02:14सरपन जी ये कारे करने के लिए मैं जाओंगा वहां
02:19मैं इस गाउं को बचाने के लिए अपनी जान जोखिन में डाल दूँगा
02:25पर बेटा नमन तुम सोच लो
02:28हाँ सरपन जी मैंने सब सोच लिया है
02:33आखिर कार मेरे भाई के शरीर में ही उस बेडिये की आत्मा आय हुई है
02:38अगर मैं मर भी गया तो मुझे अपने भाई के हातों से मरने में कोई अफसोस नहीं होगा
02:45सरपन जी आप मुझे भेजिये इस कारे को पूरा करने के लिए
02:49तो ठीक है नमन बेटा अब वैसे भी रात होने वाली है हमें और वक्त खराब नहीं करना चाहिए
02:56हम सबको मिलके अब जंगल में चलना चाहिए
02:59फिर वैसब गाँवाले अंधेरे जंगल की तरफ चल पड़ते हैं
03:05रात में जंगल और भी ज़ाधा घना और डरावना होने लगता है
03:10भैस उनसान जंगल और जंगली जानवरों के रोने की आवास
03:15गाँव की सभी लोगों को डराने लगती है
03:19तो दोस्तो मेरे हिसाब से यह बिर्कुल सही जंगल रहेगी पिंजरे को पेड़ पर लटकाने के लिए
03:26हम सब ऐसा करते हैं
03:28सब लोग रसी की साहिता से पिंजरे को पेड़ पर बान देंगे
03:32और फिर सब इनी जाडियों में जाकर छिप जाएंगे
03:37फिर वे फटाफट सब मिलकर पिंजरे को सर्पंजी के बताय अनूसार पेड़ पर लटका देते हैं
03:44और सब दूर दूर जाडियों में जाकर छिप जाते हैं
03:47पिंजरे की रसी लाखा पगड लेता हैं
03:51और नमन जाकर पिंजरे के नीचे खड़ा हो जाता है
03:56फिर थोड़ी देर बाद पूरे जंगल में शान्ती हो जाती है
04:01और वै आदमखोर भेडिया
04:03अपने श्रिकार के लिये जंगल में निकल पड़ता है
04:09अरे आरे आरे आरे
04:11वै आ गया
04:15ओरे भेडिये
04:16ओ भेड़ी
04:19बहां कहा जाता है
04:20यहां दे
04:21यहाँ हूँ मैं
04:24तुझे इंसानों को ही तो मार कर खाना है ना
04:28ले तो मैं यहाँ ख़ड़ा हूँ तुझे मार
04:31तबी उस आदमखोर भेड़िये की नजर नमन पर पड़ती है
04:35और वे उसके पास आने लगता है
04:39सभी गाँवाले बहुत ज़यदा डर जाती है
04:42और नमन भिम्मत के साथ वहाँ ख़ड़ा रहता है
04:47भेड़िया जैसे ही नमन पर चपट्टा मारता है
04:51नमन तुरंत ही वहाँ से अटकर दूख़ड़ा हो जाता है
04:56तबी जल्दी से लाखा पिंजरे से भंधी रस्ती को छोड़ देता है
05:01और फिंद्रा तेजी से भेड़िये के उपर जा गिरता है
05:06भेड़िया उस विशाल पिंजरे में गैन हो जाता है
05:10फिर सभी गाँवाले जल्दी से जाड़ियों से बाहर निकल जाती है
05:15वा वा वा नमन बेटा तुमने तो कमाल ही कर दिया
05:20हा हा हा सर्पन जी और अब आप जल्दी से प्राचीन पुस्तक को निकाल कर
05:27मैं सारे मंत्र पढ़ लीजिये और इस भेड़िये से हमें छुटकारा दिलवाईये
05:32हा हा बेटा मैं अभी पुस्तक को निकाल के सारे मंत्र पढ़ लेता हूँ
05:35फिर सर्पन जी पुस्तक में दिये उठे सभी मंत्रों को पढ़ने लगते हैं
05:41मंत्रों को पढ़ते पढ़ते अचानक से पिंजरे में एक तेज रोशनी होती है
05:47और वे आदमखोर भेड़िये की आत्मा नमन के बड़े भाई हीरालाल से निकल जाती है
05:52और पिंजरा और आदमखोर भेड़िये दोनों ही गायब हो जाती है
05:57हीरालाल सेट वही जमिन पर बिहोशी की हालत में पढ़ा हुआ मिलता है
06:02भाईया भाईया आप ठीक है ना भाईया
06:05हा हा हा नमन पर यह सब क्या हुआ मुझे कुछ याद नहीं
06:15हा हा हा भाईया आप घर चलिये मैं घर जाकर आपको सब कुछ बताता हूँ
06:22आप बज़ गए मेरे लिए इस से अच्छी और कोई बात नहीं
06:28हा नमन बेटा तुमारी हिम्मत और भाधुरी की वज़े से आज हम सब गाँवालों की जान बच पाई है
06:34और तुमारी वज़े से ही हम सब को उस आदमखोर भेडिये से मुक्ति मिल पाई है
06:41फिर सब गाँवाले खुशी खुशी बिना डर के गाँव में रहने लगते हैं
06:45बहुत समय पहले की बात है फूलपूर नामक गाउ में कृष्णा नाम की एक बूढी काकी रहा करती थी
06:58कृष्णा का एक बेटा था जिसका नाम था मोहन इसकी शैर में बड़ी कंपनी में नोखी लग गई थी और वे फिर शैर में ही रहने लगा था
07:07मोहन के गाउ से जाने के बाद कृष्णा बेचारी अकेली ही गाउ में रहा करती थी तब कृष्णा बहुती जादा बूढी हो चली थी इसलिए उससे घर का काम करना बहुती जादा मुश्किल हो चला था फिर एक दिन
07:22अरे एक महीना बीच गया नाहीं मोहन बेटे का कोई फून आया और नाहीं उसने पैसे भेजे पता नहीं क्या हो गया है मेरे बेटे को शहर जाकर वह बहुती जादा बदल गया है यहां मैं इतनी बूढी होती जा रही हूँ कि मेरे बस के कोई भी घर का काम नहीं रहा
07:52मैं उससे फोन करके ही पूछ लेती हूँ कि फिर गाउं में मुझसे मिलने कब आएगा
07:58फिर कृष्णा अपने बेटे को फून लगाती है पर उसका बेटा अपनी मा का फून ही नहीं उठाता
08:06यह मा को भी चैन नहीं है विल्कुल जब उन्हें पता है कि इस वक्त मैं अपने ओफिस में होता हूँ फिर भी फोन पर फोन करे जा रही है
08:14हाँ एक तो यह शहर की इतनी टैंशन है और उपर से मा है जो इतनी टैंशन देती है जरूर पैसे ही मांग रही होगी
08:22हाँ नहीं उठाता आज फोन बजने दे फोन को वही दूसी तरफ किर्षना बेटे का फोन ना उठाने के कारण बहुत यह ज़्यादा दुखी और परिशान हो जाती है और परिशान होकर अपने घर से बाहर चली जाती है
08:37अरे अरे काकी तू यहां इतनी परिशान घर के बाहर धूप में क्यों खड़ी है क्या हुआ?
08:43क्या करों बेटा जब से मोहन शहर चला गया है तब से मेरा तो घर में मन ही नहीं लगता अब कुछ दिन से तो उस ते मेरा फोन ही उठाना बद गर दिया है
08:58अरे अरे काकी मोहन को गए तो दो साल हो गए है उसे तेरी अब कोई फिकर नहीं भला ऐसा भी कोई बेटा होता है जो अपनी मा को ही भूल जाए? एक साल पहले वै गाउं आया था भला ऐसा भी क्या काम जो अपनी मा को ही भूला दे? काकी मुझे उसके लक्षन ठीक नहीं �
09:28तू उससे एक बार बात कर और फोन पे उसे यहाँ अपने घर बुला ले
09:35वें मेरा फोन तो उठाता नहीं है शायद तेरा फोन ही उठा ले तू मेरे लिए उससे बात करेगा न बेटा?
09:43काकी भलाई इसी में है कि तू अपने बेटे को भूल जा उसे तो शहर की हवा लग गई है लेकिन तू कहती है तो मैं एक बार उसे फोन करके जरूर बता दूँगा
09:55ऐसा कहकर शम्भू वहाँ से चला जाता है फिर शाम को शम्भू मोहन को फोन करता है
10:02अरे मोहन कैसा है तू?
10:04हाँ भाई शम्भू
10:06अरे भाई तूने तो हद ही कर दी यार अपनी मा तक का फोन नहीं उठाता
10:12भाई तू इतना कैसे बदल गया? पता है तेरी मा तुझे लेकर कितनी परिशान है
10:17जरा उस बूड़ी मा के बारे में भी तो सोच तुझे उससे मिले कितने दिन हो गये
10:23पता है आज वे बेचारी रो रही थी
10:25भाई मुझे पता है पैसे की चरूरत हम सब को है
10:29लेकिन पैसे के लालच में हमें इतना भी अंधा नहीं हो जाना चाहिए
10:33कि हम अपने माबाब को ही भूल जाएं
10:35भाई देख मैं तुझे सिर्फ समझा ही सकता हूँ
10:38मेरी माने तो तु कल ही काउं आजा
10:41हाँ भाई मैं कल ही काउं आजाता हूँ
10:45अच्छा भाई राम राम
10:47हाँ ये मां भी है ना
10:50एक बार फोन क्या नहीं उठाया
10:52पूरे गाउं में ही धिंदोरा बीड़ दिया
10:54अरे किसी इंसान को कुछ जरूरी काम भी तो हो सकता है
10:57अब कल ही काउं जाना पड़ेगा
10:59हाँ पतानी चुट्टी भी मिलेगी या नहीं
11:02मेरी चुट्टी और खराब हो जाएगी
11:04ऐसा कहकर मोहन सो जाता है
11:06और फिर अगली सूबा ही अपने गाउं की तरफ चला जाता है
11:10और फिर अपने गाउं में पहुँच जाता है
11:13मां ओ मां
11:15मां
11:15अरे बेटा
11:17अरे मेरा बेटा
11:19मोहन
11:20मेरे लाल
11:21मेरे बेटा तू आ गया
11:23मुझसे मिलने
11:24मेरा बेटा मैं कब से तिरा इतिजार कर रही थी
11:28मुझे बूरा विश्वास था
11:30कि तू अपनी बोड़ी मां से मिलने चरूर आएगा
11:33बेटा
11:34बहुत दिन हो गए थे तुझे देखे
11:37देख
11:37तेरी मां की
11:39क्या हालत हो गई है बेटा
11:41मुझे
11:41मुझे अब इस काउ में नहीं रहना
11:44तू एक काम गर
11:46मुझे भी अपने साथ
11:47शहर ले चल बेटा
11:49मेरे से अब ये काम नहीं होता
11:52मैं बहुत ज़्यादा बोड़ी हो चली हूँ
11:55मा
11:56तु क्या कह रही है ये
11:57मैं
11:58तुझे शहर में नहीं ले जा सकता
12:00और वैसे भी
12:01कल से मुझे
12:02बहुत ज़्यादा गुस्ता आ रहा है
12:03मा
12:04तुझे पूरे गाउ में
12:05यह सब बताने की
12:07क्या जरूरत थी
12:07कि मेरा बेटा
12:08मेरा फोन नहीं उठाता
12:10मेरा ख्याल नहीं रखता
12:11पूरे गाउ में मेरी बेसती करा दी
12:14कौनी इंसां
12:15अगर शहर में गया था
12:16तो उसे कित्ली
12:17टेंचन होगी
12:18पता है तुझे
12:19मेरी अपनी समस्याहی कम है क्या
12:21जो अब पूरे गाउं में मेरी बेस्ती करा दी, एक बार पैसे देने में क्या देरी हो गई, तुने तो पूरे गाउं को ही सरपे चड़ा लिया।
12:29बेटे के इतने कड़वे वचन सुनकर कृष्णा तो जैसे मर ही जाती है, फिर भी वे बेटे के प्यार में पागल होकर कहती है,
12:37ना बेटा मैं ऐसा कुछ नहीं चाहती, बेटा मैं तो बहुत खुश हूँ कि तू मुझसे मिलने के लिए आया, बेटा तू ही तो मेरा एक इकलोता बेटा है, मैं तुझे ही फोन नहीं करूँगी तो किसे करूँगी बला, और जब तु मेरे फोन नहीं उठाता, तो मुझ
13:07मेरी चिंता करना छोड़ दो, मा तुझे पैसे चाहिए थे न, लो ये इस महीने के पैसे लो, सारे रख लो, और मैं जा रहा हूँ यहाँ से, मुझे बहुत काम है, मेरे पास फाल्तू टाइम नहीं है कि मैं यहाँ गाओं में बैटकर अपना समय वरबाद करूँ, ऐसा कहक
13:37मोहन बेटा तू वापस आजा, ऐसे ना जा बेटा, यह पैसे, यह पैसे मेरे किसी काम के नहीं बेटा, जब तू ही नहीं मेरे साथ, तो यह पैसे किस काम के, बेटा, तुझे मैंने इसलिए ही इतना बड़ा नहीं किया था, कि तू यह दिन मुझे दिखाए, ए वगवान,
14:07उन्हें ऐसे छोड़ के चले जाए, क्या इस दिन के लिए ही जिन्दा थी मैं, मोहन बेटा, मुझे तेरे पैसे नहीं चाहिए।
14:16फिर शाम तक कृष्णा को बहुत तेज पुखार हो जाता है, जब यह बात शमू को पढ़ा चलती है, तो वे जल्दी से डॉक्टर के साथ कृष्णा काकी के घर पहुंसता है।
14:27देखिये, मैंने माजी का चेक अप कर लिया है, इन्ने किसी बात का बहुत बड़ा सद्मा लगा है, जो ये शहर जहरी नहीं पाएंगी, मुझे नहीं लगता कि ये सुबह तक बच भी पाएंगी। आप एक काम कीजिए, इनके बेटे को बुला लीजिये, ताकि वे इनसे म
14:57चाटा मेरे से ऐसे क्या गलती हो गई, जिसकी तुने इतनी बड़ी सजा दी।
15:06ये सब सुनकर शम्भू तुरंधी मोहन को फोन मिला देता है, पर मोहन उसका फोन नहीं उठाता, पर शम्भू बार-बार मोहन को फोन करता ही रहता है।
15:17हाँ शम्भू, हाँ भाई मोहन, तु एक काम कर तु जल्दी से गाउं में आजा, तेरी माँ की तब्यत बहुत चादा खराब हो गई है।
15:27क्या? अरे भाई शम्भू, मेरी माँ का तो ये रोज-रोज का ड्रामा हो गया है, वे सुबह तक बिल्कुल ठीक हो जाएगी, उसकी इतनी ज़्यादा फिकर करने की जरूरत नहीं है।
15:36हाँ और तू भी यार मुझे रोज-रोज फोन करके परिशान मत करा गर।
15:40फिर शम्भू उसे पॉन पर ही सारी बात समझाता है और डॉक्टर से भी उसकी बात कराता है। तब जाओकर मोहन को विश्वास होता है और फिर उसके पैरों के नीचे से जमीन ही किसक जाती है। वे रात में ही तुरंत गाँ के लिए निकल जाता है पर होनी को तो कौन रो
16:10उसे सारी जिन्दी रहता है। हमें कभी भी अपने मुख से ऐसे वचन नहीं बोलने चाहिए जिससे
16:18कि दूसरे इंसान को बहुत जादा दुख हो। मोहन ने अपने मुख से बोले हुए वचनों की वज़से ही अपनी मा को
16:25हमेशा हमेशा के लिए खो दिया। तो गाईज आपको ये वीडियो कैसे लगी है हमें कमेंट करके भाई जरूर बताना और साथ ही साथ ये बताना कि बाई इस वीडियो का सबसे बैस पार्ट जो है आपको कौन सा लगा भाई ये स्टोरी जो है ना मैंने लिखी है अपने �
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