00:0023 मार्च 1931 वो रात जब देश ने अपने तीन सपूतों को खो दिया, अदालत ने भगत सिहन को धारा 139, 302 एवं विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धारा 4 तथा 6F एवं भारतीय दंड संहिता की धारा 120 के तहथ अपराधी ठहराया
00:15एवं 7 अक्टूबर, 1930 को भगत सिहन, सुखदेव था पर शिवराम राजगुरू को मृत्यू दंड देने का निर्नाय लिया गया
00:21भगत सिहन और उनके साथियों के खिलाफ गवाही देने वालों में एक शोभा सिहन और दुसरे थे शादीलाल
00:26इनको वतन से की गई इस गद्धारी की सजा नहीं बलकी इनाम मिला था
00:29अदालत के आदेश के मुताबिक फांसी 24 मार्च को होनी थी, सुभा करीब 8 बजे
00:34लेकिन भारत के इन तीन सपूतों को पहले ही 23 मार्च देर शाम करीब 7 बजे फांसी देदी गई और शव रिष्ठेदारों को नहीं दिये गए
00:40बलकी रातों रात व्यास नदी के किनारे जला दिये गए
00:43अंग्रेजों ने ऐसा भगत सिंघ और अन्य क्रांतिकारियों की बढ़ती लोकप्रियता और विद्रोह के डर से किया
00:48अंग्रेजों ने भले ही भगत सिंघ, सुक्देव और राज गुरु की जान ले ली हो लेकिन उनके विचारों को मिटा नहीं पाए जो देश की आजाधी का आधार बने
00:55आज भी इनका नाम क्रांति और साहस की पहचान है जो हर भारतिये के दिल में जिन्दा है
Comments