00:00अमर शहीद भगत सिंह जी के साथ असिमबली में बम फेंकने वाले बतुकेशवर दत्त को भी फांसी हो गई होती तो ज्यादा अच्छा होता।
00:071947 में आजादी के पश्चाद बतुकेशवर को रहाई मिली।
00:11लेकिन इस वीर सपूत को वो दरजा कभी नहीं मिला जो हमारी सरकार और भारत वासियों से इन्हें मिलना चाहिए था।
00:17आजाद भारत में बतुकेशवर ने कभी सबजी बेची तो कभी टूरिस्ट गाइड का काम करके पेट पाला।
00:22कभी बिसकिट बनाने का काम शुरू किया लेकिन सब में असफल रहे।
00:26कहा जाता है कि एक बार पटना में बसों के लिए पर्मिट मिल रहे थे। उसके लिए बतुकेशवर दत ने भी आवेदन किया।
00:32पर्मिट के लिए जब पटना के कमिशनर के सामने इस कुरुष की पेशी हुई तो उनसे कहा गया कि वे स्वतंतरता सेनानी होने का प्रमाण पत्र लेकर आएं।
00:39भगत के साथी की इतनी बड़ी बेइजज़ती भारत में ही संभव है।
00:42हालां कि बाद में राज्ट्रपती राजेंद्र प्रसाद को जब यह बात पता चली तो कमिशनर ने बटुकेशवर से माफी माँगी थी।
00:481963 में उन्हें विधान परिशत का सदस्य बना दिया गया।
00:52लेकिन इसके बाद वो राजनीती की चका चौंध से दूर गुमनामी में जीवन बिताते रहे, सरकारों ने कोई सुध नहीं ली।
00:58अगले पार्ट के लिए हमें कॉमेंट जरूर करें।
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