00:00रावन जब लंका पहुंचा, तो देखा कि जितना नक्षा मिटा था उतनी ही लंका ध्वस्थ हो जुकी थी।
00:04यह देखकर वह चिंतित हो गया और समझ गया कि राजा रघु से युद्ध करना विनाशकारी हो सकता है।
00:10अपनी शंका को दूर करने के लिए रावन ने एक प्रसिद्ध महात्मा को बहुत सारा धन देकर यह जानने का प्रयास किया।
00:16आखिर राजा रघु में इतनी अद्विती शक्ती और बल का स्रोत क्या है। महात्मा ने उत्तर दिया।
00:20राजा रघु के असाधारन बल का रहस्य उनकी पतिवृता पतनी का तप और धर्म में है। रावन ने रघु महाराज का रूप धारन किया और महल में प्रवेश किया।
00:28लेकिन रघु की धर्म पतनी ने उसे पहचान लिया। रघु महाराज की आदत थी कि वे भूमी को प्रणाम करते थे जिस से उनकी माथे पर मिट्टी लग जाती थी। लेकिन रावन के माथे पर मिट्टी नहीं थी। तभी राजा रघु की पतनी ने उसे बंदी बना लि
00:58करें और चैनल को सब्सक्राइब करना न भूले।
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