परमात्मा शब्द दो शब्दों 'परम' तथा `आत्मा' की सन्धि से बना है। परम का अर्थ सर्वोच्च एवं आत्मा से अभिप्राय है चेतना, जिसे प्राण शक्ति भी कहा जाता है।
सर्वव्यापी परमात्मा कौन है? परमात्मा कहा है
नैतिक शिक्षा वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से लोग दूसरों में नैतिक मूल्यों का संचार करते हैं। यह कार्य घर, विद्यालय, मन्दिर, जेल, मंच या किसी सामाजिक स्थान (जैसे पंचायत भवन) में किया जा सकता है|
अधिक सूक्ष्म आकाश तत्व है. उसी प्रकार, वह परमात्मा भी, मुझसे अधिकतम सूक्ष्म और शक्तिशाली होगा. और मैं आत्मा हूँ, जो जन्म दर जन्म, पार्थिव शरीर को धारण कर कुछ समय रहता है, फिर शरीर मृत्यु को प्राप्त करता है. ध्यान रहे कि, मैं मृत्यु को प्राप्त नहीं करता, बल्कि मेरा शरीर मरता है. नैतिक शिक्षा
class iv ds lesson 5 in hindi परमात्मा कहा है प्रश्नोत्तर नैतिक शिक्षा
तो जब मैं खुद को शरीर अर्थात ज़ड रूप मे नही मानता, तो किस प्रकार, मैं परमात्मा को एक रूप मे बाधित कर देख पाउंगा. मैं आत्मा हूं, जिसका कोई रूप नहीं, आकार नहीं तो, निश्चय ही वो परमात्मा मुझसे कई गुना श्रेष्ठ, सूक्ष्म और शक्तिशाली होगा. अर्थात मैं किसी रूप में बाधित कर, उस महान परमात्मा को किस प्रकार बाधित कर, मात्र एक ज़ड वस्तु के रूप मे देख पाउंगा. तो वो परमात्मा निश्चित ही, आत्मा से श्रेष्ठ अर्थात आत्मा से अत्यंत सूक्ष्म और कम से कम, बिना रूप, रंग व आकार का होगा और उसे मानव जीवन में आँखों, कानो, इन्द्रियों इत्यादि से देखा व सुना नहीं जा सकता.
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वेद, गीता उपनिषद इत्यादि ग्रंथ आपको बताते है कि आप शरीर नहीं है, वरन् आत्मा है. गीता का द्वितीय अध्याय आपको आत्मा की शक्ति, रूप, रंग व अमरता को बताता है. तो अगर आप आत्मा पर और उसकी शक्ति पर विश्वास करते हो तो अगर आप अपने परमात्मा को किसी रूप से बाँध रहे हो, तो आप उसकी शक्तियों को ज़ड रूप दे कर स्वयं ही आत्मा से उसे कम आंक रहे हो. परमात्मा इतना सूक्ष्म शक्ति संपन्न अवश्य ही होगा कि वो प्रत्येक आत्मा के होने का भी आधार होगा. तब उस ईश्वर को देखा नहीं जा सकेगा, पाया भी नहीं जा सकेगा, क्योंकि वो तो हर आत्मा का आधार बन स्वयं आपकी आत्मा मे ही उपस्थित है.
प्रश्नोत्तर
हिंदू धर्म में मोक्ष सबसे उच्च अवस्था मानी जाती है, जो स्वर्ग, नरक, दूसरे अन्य लोक की प्राप्ति से भी अधिक उच्च अवस्था है. जिस अवस्था को प्राप्त कर, आत्मा फिर ज़ड को अर्थात पुनर्जन्म को अर्थात किसी शरीर को प्राप्त नहीं होती, वरन् ईश्वर से एकाकार हो, अपने स्वतंत्र अस्तित्व का नाश कर लेती है, और ये अवस्था उसी प्रकार है, जैसे एक जल की बूंद समुद्र में मिलकर समुद्र का ही रूप ले लेती है, फिर उस बूंद का अपना स्वतंत्र अस्तित्व समाप्त हो जाता है. आत्मा और परमात्मा की ये स्थिति ही आत्मा का परमात्मा से साक्षात्कार करना कहलाती है.
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नैतिक शिक्षा वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से लोग दूसरों में नैतिक मूल्यों का संचार करते हैं। यह कार्य घर, विद्यालय, मन्दिर, जेल, मंच या किसी सामाजिक स्थान (जैसे पंचायत भवन) में किया जा सकता है|
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