लॉक डाउन के वक्त जिन विषयों पर सबसे अधिक चर्चा है....उसमें शराब अव्वल है । पीने वाले पगलाए पड़े हैं तो सरकार भी अपनी बंद कमाई को लेकर तड़प रही है..हालांकि पिलाने वाले पैमाना सजाने को तैयार ही नही ।
यहाँ शिव बाबु ने आनन फानन में मधुशालाओं को रोशन करने का फैसला ले लिया । सरकार को अपना खज़ाना भरने से मतलब वाकी का पीने वाले और पिलाने वाले जाने ।
यह देखिए हालात...हालांकि यह नजारा देश की राजधानी का है लेकिन प्रदेश में भी सुरा प्रेमियों की भीड़ कम न होगी । ज़ाहिर है ऐसे में सोशल डिस्टसिंग सहित अन्य निर्देशो का पालन होना...सम्भव न होगा ।
बढ़ते सरकारी दबाब के चलते भोपाल में शराब कारोबारी जमा हुए । विचार मंथन हुआ और और दो टूक कहा दिया ...भैया हम तो सहमत नही है अभी दुकानें खोली जाएं ।
बाईट -
यहां शराब कारोबारीयों की परेशानी है कि वह सरकारी अनुबंध में बंधे हैं । ऐसे में उन्हें आदेशानुसार दुकान खोलनी पड़ेगी । साथ ही इन व्यवसायियों को पुराना अनुबंध भी अब रास नही आ रहा ।
उफ्फ़ मदिरा से बैर रखने वाले शिव बाबु मधुशाला खुलवाने के लिए मानो मचल रहे हैं ।लेकिन साहब खज़ाना भरना अपनी जगह .है...। यदि स्थितियों को ध्यान में रखते हुए फैसला नही लिया तो कही प्रदेश में हालात बेकाबू न हो जाएं
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