*बेटियों पर तो बहुत कविताएं सुनी है,लेकिन एक सास द्वारा रचित अपनी बहू पर यह कविता बहुत ही प्यारी व निराली हैं*--- "मेरी बेटी"
एक बेटी मेरे घर में भी आई है |
उसके लिये भी आसान नहीं था, पिता का आँगन छोड़ना, पर मेरे बेटे के.साथ अपने सपने सजाने आई है, मैं खुश हूँ ,एक बेटी जाकर अपना घर बसा रही, एक यहाँ अपना संसार बसाने आई है.
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