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  • 18 minutes ago
काशी में दीपावली के पावन अवसर पर गंगा-जमुनी तहजीब की एक अनूठी मिसाल देखने को मिली। वाराणसी के लमही स्थित सुभाष भवन में मुस्लिम महिलाओं ने पूरे श्रद्धाभाव से प्रभु श्रीराम की आरती उतारी और दीप जलाकर रोशनी का पर्व मनाया। नाजनीन अंसारी के नेतृत्व में मुस्लिम महिला फाउंडेशन से जुड़ी महिलाओं ने उर्दू में श्रीराम आरती गाई और हनुमान चालीसा का पाठ भी किया। खास बात ये है कि साल 2006 से चली आ रही ये परंपरा पिछले 20 वर्षों से लगातार कायम है। विशाल भारत संस्थान और मुस्लिम महिला फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों की महिलाओं ने हिस्सा लिया।

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00:28।
00:35वारानसी के लंभी स्थित सुभाश भवन में दिपावली के मौके पर विशाल भारत, संस्थान और मुस्लिम महिला फाउंडेशन की तरफ
00:45से विशेश कारिक्रम आयोजित किया गया जिसमें सैक्रो महिलाओं ने हिस्सा लिया
00:50मुस्लिम महिलाओं ने सजावटी थालियों में दीप सजाए, प्रभुश्री राम की आरती उतारी और उर्दु में लिखी राम आरती का
01:00गायन किया
01:01इतना ही नहीं महिलाओं ने हनुमान चालिसा का पाठ भी किया
01:11मुस्लिम महिलाओं पिछले करीब 20 सालों से दिपावली और राम नवमी पर प्रभुश्री राम की पूजा अर्चना करती आ रही
01:19है
01:19साल 2006 में शुरू हुई ये पहल आज काशी की पहचान और साजह संस्कृती का प्रतीग बन शुकी है
01:30हर साल नवे कि अदने संस्क्राण और संदेज करतों समय टोको हो सुप analog त्यागं और परिवार को प्रिवार को
01:45बांदधी रखने वाला जो एकता और संती
01:48का संदेज दिखाता है अाज के दिन प्रभुवल शूरी राम स् मुईत के जीट करक्या वांप थाह
01:55We all have a great idea of the Hindu Muslim people who have been living here, and we all have
02:12a great idea of the Hindu Muslim people.
02:23is
02:25is
02:28that
02:32is
02:34important
02:34to
02:34what
02:34is
02:35is
02:35and
02:41is
02:43वारानासी से आई ये तस्वीरे बताती हैं कि मजहब अलग हो सकते हैं, इबादत के तरीके अलग हो सकते हैं,
02:51लेकिन महबत की भाषा एक ही होती है
02:53काशी के इस दिवाली ने फिर बता दिया कि नफरत के अंधेरों को मिटाने के लिए सिर्फ एक दीब काफी
03:00है
03:00और जब ये दीब भाईचारे के नाम पर जलता है तो उसकी रोशनी सरहदो और मजहबों से कहीं आगे तक
03:08जाती है

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