- 13 minutes ago
त्योहारों पर भी देश की सुरक्षा में तैनात सुरक्षाबल, देखें खाकी के वीरों के साथ दिवाली का जश्न
Category
🗞
NewsTranscript
00:21कि ये मत समझना कि हमको रोशनी से प्यार कम है हमारे दिलों में अपनों का त्योहार कम है
00:33मगर कुछ दीप ऐसे हैं जिवे जलते रहना होगा किसी के घर की दीवाली के लिए किसी और को तो
00:42चलना होगा
00:50कि तुम बस अपनी दीप की लौ में हमारा भी उजाला रखना रंगोली के रंगों में एक रंग हमारा रखना
01:02तुम अपने घर में खुशियों के दीप असंख्य जलाना
01:09हम है न यहां पहरे पर तुम अपनी दीवाली मन भर मनाना
01:29नमस्कार बेहुश्वेता सिंग दीपावली के पर्व की धेरों शुब कामना है आपको
01:33अमावस की रात के अंधेरे को एक टिम्टिमाता अकेला दिया नहीं हरा सकता है
01:38बलकि असंख्य ऐसे दीपों की रोशनी अमावस के उस अंधेरे को दूर करती है
01:43जिस तरीके से हमारे देश की सुरक्षा सरहद पर सेना भीतर अलग-अलग मोर्चों पर
01:49कहीं नकसल के विरुद्द C.A.P.F. को आप देखते हैं
01:51कहीं पर आप सरहद में B.S.F. को देखते हैं
01:55तो आंतरिक सुरक्षा के मोर्चे पर आप अपने अपने राज्य की पुलीस को देखते हैं
02:00आज हम दिल्ली पुलीस के साथ हैं जो अपने घरों के उस दिपावली की पूजा को छोड़कर उन मिठाईयों को
02:05छोड़कर उस उत्सव को छोड़कर उस रंगीन पहनावे को छोड़कर अपनी वर्दी में आम आवस की इस रात को भी
02:12ड्यूटी निभा रहे हैं ताकि आप स�
02:26त्योहार की पूरी रौनक आपको दिखाएंगे क्योंकि ये वर्दी है वर्दी की ताकत आपको दिखती है पर उस वर्दी की
02:32समवेदन शीलता इन त्योहारों पर कहीं नजर आती है
02:48रौनक्त्योहारूं की कुछ और सजा लेना
02:50घर के आंगन में दीपों की कतार लगा लेना
02:56अपनों के संग खुशियों के पल बिता लेना
02:59लक्ष्मी पूजन करना नए सपने सजा लेना
03:03हम यहाँ पहरे पर में तुम दीवाली मना दें
03:10जब आप इस वर्दी को पहनते हैं और पुलीस की नौकरी में आते हैं
03:13तो आपकी जो प्रायोरिटीज है वो थूड़ी शिफ्ट हो जाती है
03:17तब आप अपने आपको और अपने परिवार को समाज के पीछे रखते हैं
03:23हम जब इवर्दी पहनते हैं तो अपने आप हमें लगने लगता है कि काम है
03:28और काम और उसके साथ संतुलन हम अपनी जिन्दिक में बना के चलते हैं
03:45जिस दिन त्योहर होता है हम अपने जूटी में और गश्ट में हम लगे रहे हैं हमारी वजह से ही
03:49सब लोग अपने त्योहर को अच्छे से मनाते हैं और हम किवल उनके त्योहर बनाने में प्रफुलित हो जाते हुए
04:03कि अच्छे हमारे भी करते हैं मां कब घर आओगी फोन पर मुस्कुरा कर बस इतना समझा देना तुम मेरी
04:13राह न देखना अपने दीप जला लेना मैं यहां पहरे पर मूंगी तुम दीवाली मना लेना
04:22गर से फोन आते हैं वीडियो फोल आते हैं कि आजाओ वेटा सब लोग सब के बच्चे आ रहे हैं
04:26तुम भी आजाओ
04:27कई बार थोड़े से भावुक हो जाते हैं फैमिली मेंबर्स तो वो थोड़ा सा उनको लगता है कि ममा दिवाली
04:33पे कहां जा दी जब ड्यूटी पे तैनात होते हैं तो हम घरवालों के साथ नहीं रह परते हैं लेकिन
04:37हमारी जो दूसरी फैमिली है जो कि हमारे पुलिस टे�
04:40पुनियुष्यन को स्टाफ हैहा तो उनके साथ हम सेलेट करते हैं कि समिष भी करते हैं देख देखे पर्ष करते
04:45हैं लुक मालूम है कि पुलिस की नोगरी है और यहां का फर्स है तुिस के हौने और आप ज
04:52wholeनेगा प्यली से लिफ़ाल को पैसे ल्रवावा टरा लेकिन वह क
05:10मुश्किले कितनी भी आएं फर्ज निभाते हैं।
05:13तुम चैन से अपने घर में त्योहार मना लेना, हम सरहदों पर हैं, तुम दीवाली मना लेना।
05:22आप सभी लोग अपस में मिलकर दीवाली मना हैं, हम आपकी सुरच्छा के लिए हमेशा तक पर हैं।
05:49दीवाली में हमारा भी तो हिस्सा है, वर्दी के मतवालों का ऐसा ही कुछ तिस्सा है।
05:57तुम अपने जीवन में रोश्नी कभी कम नहोने देना, हम फर्ज का दिया जलाएंगे, तुम दीवाली मना लेना।
06:12अच्छा दीवाली के दिन सबके घर पर पूजा होती है, आपके घर पर पूजा कौन करता है, कौन कौन है
06:17घर पर?
06:18घर पर मम्मी, पापा, वैसे जोइंट फेमिली है, मम्मी, पापा, भाई, भाई, बाई, चाचा ताओ, सब एक साती से लिवरें।
06:31आपके घर में कौन करता है पूजा है, मैं मदर इनलो हैं, फादर इनलो हैं, एंड हस्बेंड हैं, बच्चे हैं,
06:39हाँ जी
06:39घर की लक्ष्मी कहा जाता है, है न, दिवाली पर तो लक्ष्मी गणेश जी की पूजा होती है, तो लक्ष्मी
06:45जी हैं यहाँ पर?
06:46लक्ष्मी जी मैम कहीं ना कहीं अपने देश की सेवा कर रही है ताकि और बाकी घरों की लक्ष्मी आराम
06:52से पूजा कर सके तो तोड़ी सी चीज यह भी रहती है
06:58कि अगला दिन जो है वो घर पे मना लें जिस दिन जिस दिन मिल जाए उस दिन दिवाई जी
07:02जी बिलकुल होता है माम कर सकते हैं फैमली सपोर्ट करती है यह चीजे होती है
07:07जब दिपावली के रोज बच्चे इंतजार करते होंगे सोचते तो होंगे कि सब के घर में हैं पापा ममी सब
07:15दिख रहे हैं लेकिन आप यहां पर ड्यूटी पर रहेंगे
07:18जी मैड़म ये बच्चे को मॉलूम हो जाता है कि पापा नहीं आ सकते हैं ऐसे वक्त में क्यूंकि हर
07:24तिवार में ऐद पे दिवाली पे जो भी तिवार होते हैं उनको पता है कि पापा की डूडी है तो
07:29काप्रेट करते हैं
07:30और उनकी ममी उनको समझा देती है कि पापा देर साहेंगे या इस तरह की बात है मैडम
07:36और देखिए हमारे जो हमने कसम खाई है और वर्दी पहनी है तो हमारा देश की सुरक्षा अपने शेतर वासियों
07:42की सुरक्षा
07:43शानती सी तेवार मने सब के घर दिये जलें तो हमें बहुत खुशी होती है इसकी हमें बहुत अच्छा लगता
07:48है मैडम
07:48आपके घर में कौन पूजा करता है अमें सास है बड़ी इसमें और आपको सब मिस करती है तो उस
07:56समय क्या वीडियो कॉल करके फुड़ा बहुत देख लेते हैं बात करते बच्चों से यहां ड्यूटी करते हैं यहां भी
08:02अच्छा लगता थोड़ा सा अब अपने सेवा करें
08:04अच्छा एच हवा नहीं तेज चल रही है लेकिन आप लोग तो तेज हवा में भी दिया जला लेते हैं
08:08चला देते हैं मेरा हम फुलीस है ना पहुत इंपोर्टेंट फेस्टिवल है दिवा इस साल आपको हो गया ड्यूटी करते
08:15हैं बुजी में आठ साल हो गई आठ साल हो �
08:19कितने त्योभा घर पर मनें19 में जाद देवार गहां रहें दिली मी मनाति हैं अएक दिन सब प्योग निकल जाता
08:27है उचके दूसरे दिन जाकर मिना लेते हैं द्ली बुलेस के साते मनता हैं � réakject हैं सावी थेुवार आगी
08:33कभी-कभी मुका लग जाता है जapse के यहीं रहते ह
08:38तो यहीं पिसले जाते हैं श्याम को
08:59कभी सख्ट कभी नरौब
09:03कभी कानून के लिए चटान की तरह
09:05कभी किसी बेबस की ताकत
09:09कभी अपराधियों के लिए खौफ
09:11तो कभी किसी पीडित के लिए उम्मीद
09:16कभी भीड को काबू में करती हुई
09:18तो कभी किसी भटके हुए को रास्ता दिखाती हुई
09:24हमें ड्यूटीज भी करनी होती हैं
09:26क्योंकि इस टाइम पे फेस्टिबल के टाइम पे
09:28माजारों में, रोड्स पर, मार्केट में सम्में बहुत भीड हो जाती है, जिसमें हमें सुरक्षा के लिए तैनात किया जाता
09:35है, उनकी सेफटी के लिए सबसे पहले हमें देखा जाता है कि हम उनको सेफटी दे.
09:57वर्दी का मतलब सिर्फ रॉब नहीं जिम्मेदारी भी है, सिर्फ अधिकार नहीं सम्वेदना भी है, कानून की हिफाज़त के लिए
10:04सखती जरूरी है और इंसानियत की हिफाज़त के लिए नर्मी.
10:10तेवारों पेक भीड बहुत ज्यादा होती है, तो हमें हम फीमेल कॉंस्टेबल होने गनाते हैं, हमें देखना पड़ता है कि
10:15महिलाओ के और बच्चों की सुरुक्षा का अक्स्टा ध्यान रखना पड़ता है, हमें पेस पेसेंटली और एक्स्टा केरफुली रहना पड़
10:24पर देखना पड़ता है, और इसमें मेंली काम होता है, टीम वर्क का, अगर कुछ भी अन्यूजोल होता है, तो
10:28हम अपने सीनियर्स को इन्फर्म करते हैं, और तुरंट एक्स्टा निते हैं, तो बरती होने से पहले ही हमने सोच
10:33लिया था और ये वर्दी जब हम पहले देख
10:47दिखा होगा कि पुलिस एक दो दिन आगे बीशे मना लेती है, अपर पुलिस के लिए लाखों लोगों की आवा
11:06जाही और हजारों बाजारों की हलचल भी है, और इस रौनक के पीछे एक बड़ा इंतजाम है, भीड को संभालना,
11:15ट्रैफिक को चलाना, संदिक्ध गती वि�
11:17पर नजर रखना, सुरक्षा करना, आपात स्थिती में तुरंत पहुंचना और किसी भी अन्होनी को रोकना
11:27दीपावली का त्योहार धरसल हर उस व्यक्ति के लिए अगर महत्वपूर्ण है, जो घर में बैठकर दिये जला रहा है,
11:33पटाखे चला रहा है, मिठाईयां खा रहा है
11:36लेकिन क्रितग्यता का भाव हर उस व्यक्ति के लिए होना चाहिए, जो उस समय उनकी सुरक्षा का खयाल रख रहे
11:43हैं, चाहे वो देश की सरहत पर हो या आंतरिक सुरक्षा हो
11:46और यहाँ पर दो यंग ACP's दिल्ली पुलीस की मेरे साथ हैं, और एके करके दोनों से हम उनका परिचा
11:52लेते हैं पहले
11:53माम, आप, आपकी जिम्मेदारिया
11:56हलो माम, मेरा नाम कीरती है, मैं ACP CR पार्क का चार्ज देख रही हूँ हम भी दिल्ली पुलीस में
12:03और चार्ज हो हमारा यह है कि जब तक हर इंसान को यहाँ सुरक्षित फील नहीं होगा दिल्ली पुलीस में
12:07वही हमारा काम है
12:11मैरा नाम यूगिता शर्मा है, मैं ACP महरौली हूँ
12:14और मैं सब डिविजन महरौली समाल रही हूँ जैसा कि माडम ने अभी बताया
12:17कि चार्ज हमारा होई है, जब तक सब लुक्ष तुरक्षित ना महसूस करें
12:25आपको न केवल अपनी ड्यूटी देखनी है, बलकि छुटियां भी बहुत सारी आती होंगी
12:30और दिल पर पत्थर रखकर मना करना होता होगा कि नहीं, ड्यूटी पर ही रहना है
12:33देखे, मुश्किल तो है, नो डाउट, पर मुझे लगता है कि दिल्ली पुलिस इतनी प्रोफेशनल है
12:38कि जब मेरा हर स्टाफ या हम जब ये वर्दी पहनते हैं, तो अपने आप हमें लगने लगता है कि
12:44काम है
12:45और काम और उसके साथ संतुलन हम अपनी जिन्दीक में बना के चलते हैं
12:48तो स्टाफ जितना मेरा छोटा एक्स्पिरियंस में उसमें मैंने देखा है
12:52कि तब ही छुटी मांगता है जब उसको एकदम नैसेसरी लगता है
12:55अभी जहां पर देखेंगे इतना स्टाफ हमारा खड़ा हुआ है
12:57इन्हें मालूम है कि दिवाली पर इनकी प्रेजन्स एरिया में बहुत जरूरी है
13:01तो इस तरह से हम आपस में एक परिवार की तरह हैं
13:04बातचीत करके खुद ही बता देते हैं कि माम इस बार ये चले जाएंगे इस बार वो चले जाएंगे
13:08मुश्किल है घर से दूर है बड़ हम कोशिश करते हैं कि मुश्किल कम फील हो
13:12त्योहार पर तो आक्चुली और ज्यादा जम्मेदारी हो जाती है
13:15बिल्कुल बिल्कुल दिवाली एक ऐसा त्योहार है जिसमें कानून व्यवस्ता और सुरक्षा को बनाई रखने की जिम्मेदारी हमारी बढ़ जाती
13:24है
13:26मार्केट्स इसमें छोटे-छोटे दुकाने लगती हैं लोग खरीदारी करते हैं ट्राफिक होता है फुटफॉल जादा होता है
13:33तो हमारी कई सारे चालेंजिस आते हैं जिसकी वज़े से हमारी जिम्मेदारी बढ़ती है
13:38अंटाइटरर मेशर्स भी हम लोगों को लेने पड़ते हैं तो बिल्कुल जिम्मेदारी हमारी बढ़ती है
13:43लेकिन हम उसके लिए तैयारियां करते हैं और डेटिकेशन और सिंसेरिटी के साथ हमारा स्टाफ वो निभाता भी है
13:48आपकी कितनी सर्विस हुई है?
13:51मेरे ये पहला ही टेन्यॉर है मैं 24 बैच IPS ऑफिसर हूँ
13:55तो मैं भी स्टाफ ही मुझे सब सिखा रहा है तो मैं जनुरिल यही बताऊंगी कि अगर मेरे मन में
14:00भी आशंका आती है
14:01तो मुझे उनका उत्साह देखके वो दूर हो जाती है
14:04मतलब आपने सोचा था कि मतलब मैं ऐसी नौकरी करूँगी जिसमें मैं हर त्योहार पर घर से बाहर रहूँगी
14:09मेरे पिता एर फोर्स में थे तो मैं फॉजी फैमिली से हूँ तो मैं कहूंगी कि मैं फिर भी मेंटली
14:14प्रपेरड आती हूँ थोड़ा बहुत
14:15मेरे हस्बेंड बहुत सपोर्टिव है फैमिली यहां पर बहुत सपोर्टिव है तो हम कोशिशे ही करते हैं जैसे कि मारे
14:20माता पिता ने भी समझाया कि अगर यह परिवार की तरह अगर स्टाफ रहेगा तो उन्हें भी कम फील होता
14:26है और हमें भी कम फील होता है और एक जू
14:40जो मुझे लगता है सभी और। अपने घर पर अपने प्रभार के साथ
14:45मनाना चाहता है। अप डिली पुलीस भी हमारा पर्यवार है
14:49तो हम वो जो हमारी दिद्मेदारिय और करतव हैं वहा है। जो
14:54हम कोशिश करते हैं जो एपने ये जो दिली पॉलीस का
14:57परिबारे इसके साथ यह त्योहार मनाएं हम लोग आपस में मिठाईयां बाटके शुपकामनाएं साजा करके हम यहां पर मनाते हैं
15:03और अच्छे से मनाते हैं मतलब अब वो हमें सेंस ओव रिस्पॉंसिबिलिटी है कि यह अब ही अमारा पार्ट ओव
15:09ड्यूटी है तो यह हमे
15:14करना है हाल के समय में हर और होते प्रदर्शनों के बीच दिल्ली पुलिस की महिलाएं और उनकी ड्यूटी चर्चा
15:20में रही बल और संयम फर्ज और अनुशासन के दाइरों में
15:26हमारी टीम है पूरी और हमें पता है कि हमें क्राउड कंट्रोल किस तरीके से करना है तो हमने किया
15:31भी है बहुत अच्छे लेवल से किया है अच्छे तरीके से भी किया है बट कहीं बारी कुछ होता है
15:36बीड का कुछ ऐसे तत्व होते हैं समाजिक तत्व जो रहते हैं वो कही
15:41इस चीज़ का फाइदा उठाने की कोशिश करते हैं।
15:43हमें ट्रेनिंग में भी सिखाया जाता है कि अगर इस तरह से अंग क्राउड आ जाए
15:47तो आपको कैसे पेशनली उनको हैंडल करना हैं, उनके साथ कैसे बात करना हैं,
15:52आपको एगरेशन नहीं दिखाना, आपको उनको बिल्कुल पेशनली सुनना हैं, उनके साथ अच्छे से बात करनी हैं,
15:58ताकि वो उनका गुस्सा कामडाउन हो जाए, ताकि वो ज़ादा एगरेशन ना दिखाना है।
16:11वर्दी जो कड़क होता है, वर्दी की ताकत सब देखते हैं, लेकिन वर्दी की समवेधन शीलता जो है, वो हम
16:17आपको दिखाएंगे, तो देखिए, उसका ही एक नमूना है यहाँ पे, लोग डरते हैं, पुलिस से इस बात को तो
16:23मानेंगे हैं।
16:25हम यहीं चाहते हैं कि लोग हमसे डरें नहीं, अब राधी हैं वो डरें, वो डरें, पब्लिक न डरें, क्योंकि
16:30हम उन्हीं के लिए हैं, यहाँ पर पॉइंट हुए हैं, उन्हीं की सेवा के लिए हैं।
16:33आप लोग अपने घर की सारी
16:36फेस्टिवल को आप और दियूटी पर रहते हैं
16:42दिल्ली प्लीस यह हमारा परिवार है दिल्ली प्रिवार के साथ है तियूलिक है है
16:48चार फोली से से इवाली मना सके यह अमारे संकल्ई थे अब के विव � Notice
16:57पे ख cocon coloss यह
17:03करना है क्योंकि दिल्ली की हवा भी स्वच रहे ये बड़ी चीज है पर उसके बीच में आप लोग संदेश
17:09क्या देते हैं लोगों को दिल्ली पली संदेश देती है जो भी पटा के बगर दिन से
17:14पॉलिशन फेलता है वो उन चीजों को ना जलाए ना खरी दे अगर कहीं कोई दुकानदार बेच रहे तो फुलीस
17:20को इनफॉर्म करें उसके बारे में
17:23गरीन करेकर जलाए अक्चली पटाकों की जो आवाज होती है गोलियों की जो आवाज होती है मतब जिन चीजों से
17:29आप लोगों को बचाना है उसके बीच में पटाकों की आवाज में वो सुन पाने हो भी बड़ा मुश्किल होता
17:34होगा लेकिन आप लोग अलर्ट रहते हैं �
17:37जानते हैं उस बारी उसके थोड़ा आवाज को पैचार ना होता है बाकी ज्यादा कुछ पटा के भी इसी तरह
17:43की आवाज करते हैं जिसे गोली बंटे फ्रेंस हमें मालूम है क्योंकि हर साल ट्रेंग में शूटिंग में जाते हैं
17:50उस दोरान हमें मालूम है कि कौन सी सूट की �
17:53गोल आवाज है एंड कौन सी फटा के वाज है अब जाता है
18:22हालात पर काबू पाना उन्हें नियंतरण से बाहर होने से रोकना और मुस्तेदी से डटे रहने के लिए देश के
18:29सुरक्षा बलों को अलग अलग तरह की ट्रेनिंग की जरूरत होती है
18:33दिल्ली पुलिस की ऐसी ही ट्रेनिंग देखने के लिए हम पहुंचे नजफ गढ़ में स्थित दिल्ली पुलिस ट्रेनिंग अकैडमी
18:51और बने इनको कोई पुछ की टास्क मिल जाए कैसी भी सिचोशन आ जाए तो उस सिचोशन को ये औरकम
19:03कर सकते है
19:22यहां दिल्ली पुलिस के जवानों को हत्यारों की बनावट और इस्तिमाल की जानकारी दी जाती
19:36पुलिस कर्मी आँखों पर पट्टी बांध कर भी हत्यारों को असेंबल करने का अभ्यास करते हैं
19:43इस ड्रिल में महिला और पुरुष दोनों पुलिस कर्मी हिस्सा लेते हैं
19:48हत्यार को खोल के और फिर इसके बाद उसको जोड़ देना फिर बंदाखों से
19:53इसके लिए इसलिए जुरूरिये टैने में कि जवान को कॉन्फिडेंस आ जाए कि मैं अगर किसी भी विश्म परिस्तिती में
20:00फायरिंग के दोरान
20:01किसी परकार के ऐसी कोई एंसिडेंट हो जाए जिससे की मेरा वैपन रुख जाए तो मैं उसको बहुत जल्दी से
20:08ठीक करके और अपना फायर जारी रखू जिससे की सामने वाले को अंगेज करने में फायदा हूँ
20:19सिर्फ हत्यार ही नहीं अगर अपराधी को हाथों से पकड़ना हो या उससे गुत्थम गुत्था की लड़ाई हो जाए तो
20:25उस केस में शारीरिक मुकाबले की तैयारी भी ट्रेनिंग का हिस्सा है
20:48इसके बाद बारी आती है बस इंटरवेंशन अगर कोई ऐसी स्थिती सामने आ जाए जिसमें एक पूरी की पूरी बस
20:54को ही बंधक बना लिया जाए तो उस केस में ये ड्रिल बंधकों को छुडाने में काम आती है
21:09कि अगर कि अगर किसी कमरे में आतंकी हो या फिर वो लोगों को बंधक बना ले तो रूम इंटरवेंशन
21:21के जरिये आतंकी को निउट्रलाइज करके बंधकों को छुडाया जा सके
21:33कि ट्रेनिंग में वाल क्लाइंबिंग और रैपलिंग की भी प्रैक्टिस कर आई जाती है
21:41दिवाली के दौरान इस ट्रेनिंग का एक अलग मकसद भी है त्योहार के समय दिल्ली के बाजारों सार्वजनिक स्थानों और
21:48भीडभाड वाले इलाकों में लोगों की आवाजा ही बढ़ जाती है ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस
21:55को किसी भ
22:02आपर यहां पर यह लाइबरी है यह लाइबरी यह पुरी अंडर प्रिविलिष्ट बच्चे है यहां पर औल द चिल्रन जितने
22:09भी रिसॉर्स जिनके पास नहीं है यहां पर डेली पुलिस प्रवाइड करती है इंको
22:27यहां पर आप लोग मतलब जो स्टूडंस है उनकी मदद के लिए यह लाइबरी यह मेड़ा मारा ग्रेटर क्लास प्लिशेशन
22:35से पिछले तीन सालों से बच्चों के लिए एक काम करता है
22:38और हम ही सभी बच्चों को अपने सारा एक अच्छा एसी वाले महूल में भी बुक्स परवाइड कराते हैं, कोचिंग
22:44कराते हैं, लैप टॉप, वाइफाइ, सारी सुबदाएं देते हैं
22:47और इनको समय समय पे जो कोचिंग की जुरुत पढ़ती हैं, उनकी भी सुबदाएं उनको अपलब्द कराते हैं
22:51जो बच्चे यहाँ पर लंच की फैसिलिटी चाते हैं, हमने उनको अपनी तरफ से फिरी लंच भी उपलब्द करवाते हैं
22:57हमारा एक ही दह है कि जातर बच्चे इसमें गरीब घरों से आते हैं, उनको इसकार में कई सारी समस्या
23:02होती हैं
23:02लेकिन जब वो इस अच्छे एटमोस्पेर पर आते हैं, पढ़ते हैं और जब उनका रियल्ट हम देख भी रहें
23:06पिछले दो सालों से एक अच्छा रियल्ट भी आ रहा है, गौवर्मनी जॉपस में इनका सेलेक्शन भी हो रहा है
23:11तो देखके बहुत खुशी होती है कि हम कम से कम किसी बच्चे की जीवन से अंदकार को दूर करके
23:16रोशनी ला रहें
23:17तो हमारा और यही परियास है कि हम और जासे बच्चों को जोड़ें, ऐसी और लाइबरी बनाएं ताकि और ज्यादा
23:22बच्चे आगे बढ़ें और रोशनी की तरफ बढ़ें
23:25हम लोग कॉंपिटीशन की तियारी कर रहे हैं, कुछ बत्ते नीट की तियारी कर रहे हैं, जैई की तियारी कर
23:30रहे हैं, या SSC या UPSC, इन सभी एक्जाम्स के लिए हम मैनत करते हैं.
23:34और कब से यहां पर आप लोग इस लाइबरी में हैं? दो साल. दो साल हुगा है? मिझे भी एक
23:40साल हुआ है, भी फिलार. तो हर तरह की किताब और हल्प मिलता है? कोई चीज नहीं होती है, तो
23:46वो रिक्वेस्ट है? तो हम मैम से रिक्वेस्ट करते हैं, फिर मैम आगे बताती है
23:50और फिर हमें प्रवाइड करवाती है. कहा जाते हैं कि दिल्ली पुलीस ते टकराओ है, बच्चों का, यंग्स्टर्स का. जो
23:57बच्चे आगे आना चाते हैं, मेंती हैं, पढ़ना चाते हैं, हम उनको एक अच्छा एटमस्फिर प्रवाइड कराते हैं. नीट की
24:17तैयारी कित
24:19करते हैं, उसके पीछे यही मोटिव है, कि मतलब हम सब जैसे ही तयोहार आता है, हम सब अपनी तैयारिया
24:24करते हैं. और एक और वर्ग है, जो तैयारिया करता है, लेकिन विशेश रूप में, सुरक्षा की तैयारियां. तो तैयारियां
24:30हम दोनों ही कर रहे हैं, लेकिन यह ल
24:49मतलब तो
25:02उत्तर प्रदेश
25:03जहां दिवाली का अपना अलग रंग है
25:06अलग रवायत है और अलग रौनक
25:15काशी के घाटों पर रोश्नी का उत्सव हो
25:18मतुरा वरिंदावन में कृष्ण की नगरी की दिवाली हो
25:23या अयोध्या में राम की नगरी का दीपोटसव
25:26हर जगह उमडता है आस्था का सैलाब
25:35और इस सैलाब के बीच कुछ कदम ऐसे भी हैं जो लगातार चलते हैं
25:41कुछ आँखें ऐसी हैं जो हर हलचल पर नजर रखती हैं
25:46कुछ कंधे ऐसे हैं जिन पर इस पूरे आयोजन की सुरक्षा का जिम्मा होता है
25:54जब आप इस वर्दी को पेहनतेर और पुलीस की नौava जाते हैं तो आपकी जो प्रियोरिटी उसे वह थोड़ी स्ट
26:00हो जाती है
26:00तब आप अपने आपको और अपने परिवार को समाज के तीछे रखते हैं
26:06तो आपकी प्राइटी तब यह हो जाती ही कि बाकी सब की जो दिवाली का तेओहार है वो बहुत ही
26:13खुशाली से बीते हैं और इसके लिए हमारा ड्यूटी पे होना जरूरी है हमारा सड़क पे होना जरूरी है
26:35महिला हो या पुरुष सिपाही हो या अफसर वर्दी सब की एक है और जिम्मेदारी भी एक
26:45हमारी सारी पोस जो है पेट्रोलिंग पर रहती है या अलग अलग जगे पर चेक्पॉइंट लगा के चेकिंग कर रही
26:51होती है
26:52इसी भी तरीके की कोई प्रॉब्लम्स ना हो सब लोग सेफ रहे सुरक्षित रहे ट्राफिक व्यवस्ता बनी रहे कोई आक्सिदेंस
27:00वगरे की समस्या ना हो
27:01दिवाली पर सब लोग हमारी वज़े से ही सब लोग एकदम बिल्कुल प्रफॉलित रहते हैं और अपना सीक्योर महसूस करते
27:06हैं अपने आपको और अपने तियोहार को अच्छे से मनाते हैं और हम केवल उनके तियोहार मनाने में ही प्रफॉलित
27:12हो जाते हैं
27:24वर्दी की जिम्मेदारी है ये सुनिष्चित करना की आस्था का हर उत्सम अमन और सुकून के साथ पूरा हूँ
27:31आगा और जम्मेदारी है ये सब्रस्वचित करती ही लेकिन दोनों में आजता गया के लिए केवल इरजस्टमेंट ही अपने परवार
27:59को समया दिते हैं
28:12अपने घर में तो सब खुशियां मनाते हैं, दूसरों के घर रोशन रहे, ये दायत्व बड़ा है, लेकिन देश के
28:19सबसे बड़े त्योहार में वर्दी की सादगी के साथ रंगोली के रंगों से अपने कर्मजधल को सजाना एक अलग ही
28:26अहसास है
28:30ये खाकी के उत्साह और उमंग की अनूठी तस्वीर है
29:00पुलिस की डूटी में थोड़ा सा ज्यादा लॉंग आर्स होते हैं और फेस्टिबल्स पे लोगों के लिए देखना होता है
29:07हमें, लोग अपने त्योहार अच्छे से मना सकें
29:11त्योहारों में पुलिस की चुनोतियों को आंकड़ों में समझे
29:15पिछले साल दिवाली के दौरान यूपी पुलिस के 112 हल्प लाइन ने 2,47,987 आपात घटनाओं पर कार्रवाई की
29:25इसमें 1,98,460 पुलिस सहायता से जुड़ी कॉल थी, 42,183 मेडिकल इमर्जेंसी थी और 7,344 आग से
29:37जुड़ी घटनाएं थी
29:40इस पूरे सुरक्षा इंतजाम में महिला पुलिस कर्मियों की भूमिका भी बेहद एहम है
29:47बाजारों में महिलाओं की सुरक्षा, भीडभार वाले इलाकों में पेट्रोलिंग, महिलाओं की शिकायतें सुनना और जरूरत पढ़ने पर तुरंत मदद
29:56पहुचाना
29:57यूपी में महिला सुरक्षा के लिए अलग-अलग स्तर पर व्यवस्था बनाई गई
30:01जिन में महिला बीट कॉंस्टेबल्स, एंटी रोमियो स्क्वार्ड्स और मिशन शक्ति के तहत महिला पुलिस कर्मियों की पिंक पट्रोल भी
30:08मौजूद है
30:10यह उप्तर परतेश सरकार दौरा महिलाव को सासक्त व्यात्मिर्बन बनाने के लिए हर थाने पर एक मिशन सक्ति केंटी स्थापना
30:17की गई है
30:17ताकि जो महिलाए आएं वो अपनी समस्तियाएं बेज जग एक अलग जगा पर बता सके है
30:21एसा होता था कि महिलाए अपनी समस्तियाएं सबके सामने नहीं बता पाते थी
30:25तो उसके लिए थाने पर हर थाने पर मिशन सक्ति के इनकी स्थापना की गई है
30:29ताकि पर उपनी समस्तियाव को बता सके उनकी काउंसलिंग की जा सके
30:32उनको आत्मिर्वर्ण बनाया जा सके और उनके क्या अधिकार है उनके बारे में भी जगरुख किया जा सके
30:42दीपावली के पर्वपर पुलिस के साथ बिताए पलों में हमारी नजर एक बेहद खुबसूरत तस्वीर पर पड़ी
30:49वर्दी के फर्ज और मां के दुलार की
30:55यह तस्वीर जो बता रही थी कि फर्ज के आगे कोई मजबूरी नहीं होती
31:12रोशनी के सेलाब में चौकसी की मशाल जलाए इन रखवालों पर शायद हमारा ध्यान भी नहीं जाता
31:18घर पहुँचने की हडबडी में भूल जाते हैं कि कोई सुरक्षा के लिए अपने घर से दूर अडिक खड़ा है
31:25खुशियों की रफ्तार बनाए रखने के लिए अपनी रफ्तार थामे खड़ा है
31:30राहे आसान करने को मुश्किल मोड पर मुस्तैद हैं
31:33कोई दिवाली मनाए कोई संभाले खड़ा है
31:53तो यूपी एसी जई नीट एंडिये एससी क्लाट और सौरी लाइबरी में शांती रहती है
32:02लेकिन दिवाली में कहां कहीं शांती होती है आप किसकी तैयारी कर रहा है
32:07मैसेल विकास कुमार सिंग एंड प्रिपेरिंग फोर एससी सी एचसल
32:12इससी के लिए आप यसमारा कोई सब्सक्राइबरी में इस दिन हमारे सीपी सर भी आते हैं
32:31सारे सीनियर ऑफिसर्स हर स्टाफ मिठाई लेके निकलता है हम एक दूसरे में खुशिया बाटते हो जाते हैं
32:36ऐसा नहीं कि जो सीनियर है वो क्यों है मैं तो दिवाली मना रहा हूं मैं नहीं नहीं बिलकुल हम
32:40लोग सब मिलते बाटते हो जितनी पिकेट्स हैं
32:42हम लोग सब आते हैं दूसरे के थानों में जाके विजिट करते हैं इन फैक्ट अभी कुछ देर बाद कमिश्टर
32:47साहब भी आते हैं पुलिस के वो हर डिस्ट्रिक को विजिट करके जाते हैं तो यह
32:53चेटी साल हो गहें इसलिए मैंने सबसे पूचा था कि कित्ती दिवालिया घर पर रहे हैं लगबगश्य साल इंदी यहीं
33:01पर डूटी पर रहे हैं इक दो एक दो एक दो ठीक से याद भी नहीं है जाट एक से
33:07याद चोटी खुश्या बहुत बढ़ा मिठास घोल देती हैं �
33:12जीवन में और ये चीज़ें हम सीख सकते हैं अपने देश के वर्दिधारियों से
33:29घरों से दूर अपनों से दूर जीवन के रंगों से दूर
33:33एलोसी के अंधेरों में जिम्मेदारी का दिया जलाते ये हैं हमारी सेना के जवान देश के प्रहरी और इन्हीं दियों
33:41की रोशनी से रोशन है हमारा देश
34:00देश की दिवाली शुभ रहे इसके लिए इनके चेहरों की मुस्कुराहट ही काफी है
34:11इनके लिए देश रक्षा ही त्योहार है देश रक्षा का संकल्प ही पूजन और कर्तव्य ही उत्सव
34:21यह एक जीवन शैली है और जब हम यह उनिफॉर्म पहनते हैं तो इसके साथ एक वचन लेते हैं
34:26कि सबसे पहले देश बाकी सब बाद में इसलिए जब डिपावली जैसा तेवार आता है तो ज़्यादा तर लोग अपने
34:32गरों पर रहते हैं
34:33और हम में से ही कई लोग ड्यूटी पे होते हैं और सच कहूं तो इस बात का हमें अफसोस
34:38भी नहीं होता क्योंकि यह यूनिटी हमारा सबसे बड़ा परिवार है
34:44चुनौतियां चारों तरफ हैं खतरनाक मनसूबों का एहसास बारूद की गंद की तरफ फिजा में फैला है
34:54लेकिन जो देश की संस्कृती है उसे भी तो निभाना है
35:12एलोसी पर माभारती के ये सपूत 24 घंटे देश की सुरक्षा में तैनात है
35:17त्योहार आएंगे जाएंगे लेकिन इनके होसले कभी नहीं डिगेंगे
35:30सबसे बड़े त्योहार पर भी परिवार से पहले देश है
35:34देश के लोग हैं घरों से दूर हैं लेकिन भारत वासियों के दिलों के करीब हैं यही तो है भारती
35:42असेना
35:42देश वासियों की जिंदगियों को रोशन बनाते हुए खौफ के काले साय को सुरक्षा के उज्याले से चमकाते हुए
35:49उम्मीदों की लौ को जलाते हुए नाउमीदी के अंधकार को दूर करते हुए
35:58जब देश में है दिवाली तो देश के ये प्रहरी भारत की सुरक्षा में तैनाथ होकर कह रहे हैं
36:04आओ मिलकर दिया जलाए
36:14अपने देशवासियों के उत्सव के लिए अपने उत्सव की आहुती देने से भी कोई गुरेज नहीं
36:20फिर भी वर्दी में हर एक व्यक्ति को यहाँ पर आप मुस्कुराते हुए ही देखेंगे
36:25और दिल से पूरे देश को ये कहते हुए कि हापी दिवाली
36:30अभी के लिए इतना ही देश और दुनिया के बाकी खबरों के लिए आप देखते रहें आज तक
Comments