00:05बिहुर के मिट्टी का हुनर अब साथ समंदर पार धूम मचा रहा है।
00:30उनकी अच्छी आमदनी हो रही है।
00:32इसका आइडिया एरितुराज को कैसी आया उनहीं से चानते हैं।
01:00कुमहारों के लिए कुछ अच्छा कर सकते हैं।
01:03उनके चीजों को प्रेजिंटेबल बना के मार्केट में ला सकते हैं।
01:07तो दिमांड बढ़ेगी।
01:08और साथी साथ अगर ग्रामी इलाके के महिलाओं को इसकी ट्रेनिंग दी जाएगी।
01:14तो जिस तरह से आज हमारे हां मितला पेंटिंग है, किरूद की सुजनी आर्ट है।
01:20उसी तरह से हम इस आर्ट को भी अगर गवर्मेंट हमको थोड़ा भी सपोर्ट करती हैं।
01:24तो हम इसको बढ़ा सकते हैं।
01:27मुशरी, काटी, रामबाग, चौरी और मस्जित, चौक समेट आसपास के इलाकों के परिवार इस पहल से जुड़कर काम कर रहे
01:35हैं।
01:35तैयार उत्पादों का हर महिने करीब एक से सवा लाख रुपे तक का कारोबार हो रहा है।
01:41कुमहार के बनाए बरतनों को कैसे दुनिया भर में पहच्चान मिली है, रितुराज से चानते हैं।
01:49कुमहार का भी भला होगा। उनकी जो चीजें हैं जो सौ रुपे में बेशते हैं।
01:54बारासु रुपे, चौदर सौ रुपे परशते हैं।
01:56कुमहार के बनाए गए बरतनों पर अब किस तरीके का आट करते हैं।
01:59कौन-कौन सा आट होता है।
02:00इस पर हम मितला प्रिंटिंग करते हैं।
02:03फिर देकोरेटिव जैसे आप देख सकते हैं।
02:06छोटे-छोटे यह हैं सीसा है ग्लास है।
02:09तो इन सब उनको लेकर सजाते हैं।
02:11और तब जाके इस पर जो है सो मतब एक आर्ट फोम आता है।
02:24सबसे पहले तो हम इसे सुरुवात अपने स्टेट में ही करे थे हैं।
02:29दिल्ली को टच किया।
02:33दिल्ली में हमारे कुछ रिलेटिपस ने मुझे सपोर्ट किया।
02:36और उनके तुरू जो हैंड क्राफ्ट इंडिया में बने होते हैं।
02:41तो ऐसे में आस्ट्रेलिया स्टेन वेगर सारी जगा ये गई और खासतोर से वह लोग वेडिंग में इसको काफी यूज
02:50करने हैं।
02:51क्रिस्चन होने के कारण वहां कैंडिल का बहुत ज्यादा परचलन होता है।
02:56तो वह इंडियन काइंटिल्स जो लोग भी इंडियन मूलके हैं वो लोग ले रहे हैं।
03:05आप सुने तक किस तरीके से कुमार काला को अधमी डक्टर वितु राज किस तरीके सा आगे बढ़ा रही हैं।
03:12इनके साथ दूस है करो लोग जूरे हुए हैं।
03:14और कुमार काला को लगतार विदेश के मंचों तक यह पहुंचा रही है।
03:18विबेक कुमार ETV बारत मुझे परपूर।