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Why Children Violent? बच्चों में हिंसक सोच और आपराधिक प्रवृति किन कारणों से बन रही है? मनोचिकित्सक ने बताई वजह.

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00:00पंचकुला में आपने हाल ही में देखा होगा कैसे 8 साल के एक बच्चे ने 6 साल की बच्ची को
00:05यानि कि स्कूली छात्रा को एक खाली क्लासरूम में ले जाकर उस पर जानलेवा हमला किया
00:10कि इंट से कहीं बार सिर पर भी हमला किया जिस वज़े से खून का रिसाव इतना हुआ और चोटिल
00:16जो है छोटी बच्ची इस कदर हो गई कि उसे चंडिगड स्थित पीजेई में भरती कराया गया
00:21इतनी छोटी उमर में इतनी हिंसक सोज बच्चों में कैसे आ जाती है कि किसी की जान लेने पर उतारू
00:27हो जाएं किसी पर ऐसा खतरना खमला कर दें कि किसी की जान जा सकती हो जबकि उमर केवल आठ
00:33वर्श
00:33इसी सवाल को लेकर के आज हम चंडिगड के सेक्टर सोला गवर्मेंट मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल जी एमेचेस मेड साइकेटरिस्ट डॉक्टर
00:41के पास पहुचे हैं डॉक्टर विजे हमारे साथ है उनसे बात करेंगे कि ऐसे क्या कारण है बच्चों में जो
00:46हिंसक
00:46सोज हिंसक परवर्ती के बच्चे हो जाते हैं और समय रहते उनके इस बदलाव को कैसे समझा जाए ताकि किसी
00:53बड़े नुकसान से बचा जा सके सिधा जोड़ते हैं साइकेटरिस्ट डॉक्टर विजे जी से सर एटीवी भारत में आपका बहुत
00:59-बहुत स्वागत है सबसे
01:00पहले तो यह कहना चाहूंगा कि आप इस टॉपिक को उठा रहे हैं और पबलिक तक यह बात पहुंचा रहे
01:08हैं इसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद जब मैंने यह वीडियो देखा तो वाक्य में ही एक ट्रॉमेटाइजिंग वीडियो था यह
01:16हमने ऐसे साइकेटरिस्
01:20पिछले कुछ समय में ट्रेंड्स बदल रहे हैं पहले यही वाईलेंस जो है वो बच्चों में 13, 14, 15, 16
01:28साल की एज में दिखती थी यानिकि 8, 9, 10th onwards 11, 12th onwards दिखती थी पर अभी जो यह
01:34है ना ट्रेंड चेंज हो रहा है और अभी आपको 7 years, 8 years, 9, 10, 11 years की एज
01:41में भी यह दे
01:48अनुभव से patients के बारे में देखते हुए जानता भी हूँ कि कुछ factors है जो कि हमें discuss करने
01:55चाहिए सबसे पहला factor है घर का environment, वातावरन, scientific research यह कहते है कि जहां भी घर में adverse
02:05childhood experiences है यहनि कि बुरे अनुभव हैं बच्चों के बहुत यंग एज से, बुरे अनुभव से मेरा मतलब
02:13यह है कि घर में लड़ाई, जगड़े, मारपीट का atmosphere है उनके माता-पिता के बीच में या उनके caregivers
02:20हैं जो significant others हैं दादा, दादी, नाना, नानी, चाचा, ताया जो साथ में रह रहे हैं और वहां मारपीट
02:28का माहूल है, गाली गलोच का माहूल है तो बच्चे यंग एज में �
02:31यह violence pick-up कर जाते हैं दूसरा अगर घर में कोई mental health, serious mental health issue है जैसे
02:38schizophrenia है, bipolar affective disorder है, substance abuse disorder यानि कि बहुत घर में नशा पता है और उसकी वज़ा
02:47से घर में एक कलेश का माहूल बना रहता है, conflict चलते रहते हैं तो वहां पर भी बच्चे यह
02:53pick-up कर जाते हैं
02:54कहीं पर जैसे parents इतने busy हैं कि बच्चे के उपर कोई control नहीं है, कोई boundaries setting नहीं है,
03:01कोई उनके साथ बैठा कर उन्हें समझाना, उनको discipline करना, वो वला part नहीं है, वहां पर भी बच्चे यह
03:08pick-up कर जाते हैं
03:09अब यह चीज में इस तरफ भी लेकर आ रही हैं कि मीडिया का बहुत यंग एज में 2-2
03:15साल, 3-3 साल, 1-1 साल की उमर में exposure हैं
03:18और reels continuous देखना, ऐसे games जो की violence से भरे हुए हैं, उन में घंटों घंटों बैठे रहना, unchecked,
03:28उनके ओपर कोई चेक नहीं है
03:29और YouTube देखना इस तरही के से, यह social media और चीज़ बड़ी जल्दी, violence का exposure, sexuality का exposure
03:38और drug abuse का exposure, बड़े यंग एज में बच्चों को वेपिंग, smoking और आजकल के जो serious substance use
03:50हैं, वो सब देखना, यह भी एक बहुत चिंता का विशह है
03:54दूसरा है, कई पर school का atmosphere भी ऐसा होता है, school में bullying है, unchecked violence है, senior junior
04:01को abuse कर रहा है
04:02या group बना के एक बच्चे को बहुत परतारित किया जा रहा है, किसी एक बच्चे को लेबरी लगा दिया
04:08जाता है
04:09कि तुम पागल हो या तुम ऐसे हो, मतलब उसका एक तरीके से बहिशकार हो जाता है, social
04:14बड़ी यंग एज में भी psychiatric disorders देखने को मिलते हैं, for example, undiagnosed ADHD, attention deficit and hyperactivity disorders
04:22है
04:22या conduct related disorder है, conduct related disorder का मतलब है कि रूल मानने ही नहीं है, बच्चे नहीं
04:30और rules की, school के discipline की, घर के discipline की कोई परवा नहीं है, बच्चा जिद्धी है, abusive है,
04:38चोरी करने लगा है, animals को hit करने लगा है, fire setting करने लगा है, आग लगाने लगा है
04:45या फिर sharp objects अपने पास रखने लगा है, जैसे परकार हो गई और जैसे cutters हो गई, इस तरीके
04:52की चीज़े चोरी चुपे, या फिर कुछ lighters हो गई, fire setting के equipment हो गई, वो अपने पास रखने
04:59लगा है
04:59तो ये सब आते हैं psychiatric disorders, luckily Tri-City के area में खास बात ये है कि बहुत सारी
05:08psychiatric help available है, पंचकुला में भी है, चंदिगर में भी अब लगभग हर hospital के अंदर है, government hospital
05:15में, मोहाली में भी, तो बहुत अच्छा वो है कि अगर हम timely चीज़ों को diagnose कर लेते हैं और
05:23timely intervention कर देते हैं, चाहे वो medicines के
05:27तो बड़ी जल्दी ये जो emotional disorders है, anxiety disorders है, depressive disorders है, या फिर ये oppositional defined disorders
05:35है, conduct disorders है, ADHD disorders है, ये diagnosable भी है और ये treatable भी है, इस तरीके के, सिर्फ
05:42और सिर्फ brain mapping test ऐसा नहीं है, जिससे हम diagnose करेंगे, हमारा जो तरीका होता है, वो है कि
05:47हर जगा से information को collect करना, बच्चे के school से information जो भी प्रा
05:57पेरेंट से information, school teacher से information, जो भी प्राप्त हो रही है, उस सब को systematically record किया जाता
06:03है, जिसको history of illness बोला जाता है, फिर बच्चे को observe किया जाता है, उसका mental state examination किया
06:09जाता है, जो की observation का है, और उसमें कई पहलों पर ध्यान दिया जाता है, फिर उसके अलावा, उसके
06:16neuropsychological evaluations होते हैं, क�
06:25उसकी अंदर की मानसिक प्रवरती हमारे सामने आती है, फिर जहां पर ज़रूरत है, easy हो गया, CT scan हो
06:31गया, brain mapping हो गया, to understand की brain के अंदर किस type का disorder develop हो रहा है, ताकि
06:36उसे के इसाब से हम उसका treatment start कर सके हैं, यह हमारे साथ psychiatrist Dr. Vijay जी जुड़े थे,
06:41हाला कि पुरे देश के लिए र
06:55बहुत से aspects होते हैं, जिनका ध्यान रखना सबसे पहले, स्कूल के शिक्षकों के साथ साथ परिवार की मुखे जिम्मेदारी
07:00होती है, बच्चे में रूटीन में आ रहे बदलावों को समझना, उसके वेवार में आ रहे परिवरतन को देखना, वो
07:06अपने बैग में किस तरह क
07:07चीजे रखता है, उसके पूरे दिन में उसका जो behavior है, वो कैसे sudden change हो रहा है, mood swing
07:13जिसे कहते हैं, वो भी हो रहा हो, हर चीज़ को बड़ी बारिकी से समझा जाता है, क्योंकि इन सभी
07:17चीज़ों को जब देखा जाएगा, समझा जाएगा, तो निश्यत तोर पर बच्चों को �
07:22गल्द track पर जाने से रोका जा सकता है, मैं विनाश शर्मा, ETV भारत, चंडिगर्ण
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