सवाईमाधोपुर. खेती के साथ पशुपालन ग्रामीण परिवारों की आजीविका का बड़ा आधार है। ऐसे में पशुओं की बीमारी या अचानक मौत केवल पशुधन का नुकसान नहीं होती, बल्कि कई परिवारों की सालभर की कमाई पर भी संकट खड़ा कर देती है। इसी आर्थिक जोखिम से पशुपालकों को बचाने के लिए शुरू की गई मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना जिले में राहत का माध्यम बन रही है। योजना के तहत अब तक जिले के पशुपालकों को 168.77 लाख रुपए यानी करीब 1.69 करोड़ रुपए की बीमा राशि का भुगतान किया जा चुका है।
अब तक 26 हजार 278 से अधिक पशुपालकों ने अपने 61 हजार 500 से ज्यादा पशुओं का पंजीकरण कराया है। इनमें से 48 हजार 107 से अधिक पशुओं को स्वास्थ्य प्रमाण पत्र जारी किए जा चुके हैं, जबकि 43 हजार 132 पशुओं की बीमा पॉलिसी भी जारी हो चुकी हैं। इस तरह बड़ी संख्या में पशुधन को बीमा सुरक्षा के दायरे में लाया गया है।
मुसीबत के वक्त आर्थिक नुकसान से मिलेगी राहत
ग्रामीण क्षेत्रों में गाय, भैंस सहित अन्य पशु परिवारों की संपत्ति के साथ नियमित आय का जरिया भी होते हैं। कई बार संक्रामक बीमारी, प्राकृतिक आपदा या अन्य कारणों से पशुओं की अचानक मौत हो जाती है। ऐसे में पशुपालकों को हजारों रुपए का नुकसान उठाना पड़ता है। खासकर छोटे और सीमांत पशुपालकों के लिए एक पशु का नुकसान भी आर्थिक स्थिति बिगाड़ सकता है। मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना इसी जोखिम को कम करने और पशुपालकों को मुश्किल समय में आर्थिक सहारा देने की पहल है।
बीमा भुगतान से बढ़ा योजना पर भरोसा
जिले में अब तक 168.77 लाख रुपए की बीमा राशि का भुगतान होना इस बात का संकेत है कि योजना का लाभ पशुपालकों तक पहुंच रहा है। बीमा सुरक्षा मिलने से पशुपालकों को पशुधन के नुकसान की स्थिति में आर्थिक सहायता का भरोसा मिल रहा है। इससे पशुपालन को सुरक्षित आजीविका के रूप में आगे बढ़ाने में भी मदद मिल रही है।
इनका कहना है...
योजना के प्रति जिले के पशुपालकों में लगातार रुचि बढ़ रही है। जिले के पशुपालकों से इस योजना में अधिकाधिक संख्या में उठाना चाहिए। पशुओं का बीमा कराने के लिए पशुपालक अपने नजदीकी पशु चिकित्सा संस्थान में संपर्क कर सकते हैं।
डॉ. राजीव गर्ग, संयुक्त निदेशक, पशुपालन विभाग सवाईमाधोपुर