00:00दिवाली आने वाली है, बाजारों में रौनक है, घरों में सजावट की तयारियां चल रहे हैं और हर कोई अपने
00:06घर को रोशनी से सजाने की तयारी में जुटा है।
00:09लेकिन एहमदाबाद में कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो सिर्फ अपने घरों के लिए नहीं, बलकि दूसरों की दिवाली रोशन
00:15करने के लिए भी महनत कर रहे हैं।
00:39हर दिये के पीछे महनत है, अभ्यास है और कुछ नया करने का जजबा है।
00:45यहां तयार हो रहे दिये सिर्फ दिवाली की सजावट का समान नहीं हैं, बलकि उन लोगों की काबलियत और आत्म
00:53निर्भरता की एक जहलग भी हैं।
00:55अकसर दिव्यांग जनों की बात होती है तो समाज का ध्यान उनकी चुनोतियों पर चला जाता है।
01:00लेकिन इस पहल की खासियत यह है कि यहां चर्चा उनकी क्षमता, हुनर और काम करने के अफसरों की हो
01:08रही है।
01:08दिये बनाने जैसे काम में धैर्य, अभ्यास और बारीकी की जरूरत होती है।
01:14यहां कारिगर अपने कौशल के जरिये इस काम को अंजाम दे रहे हैं।
01:18इस तरह की वोकेशनल गतिविधियां दिव्यांग जनों को केवल एक कला सीखने का मौका नहीं देती, बलकि उन्हें अपनी मेहनत
01:25के जरिये आजजीवी का कमाने और आर्थिक रूप से मजबूत बनने की दिशा भी दिखाती हैं।
01:31इस पहल से जुड़ी BPA Vocational की Coordinator दीपा जोशी भी इस काम को लेकर मौजूद है।
02:01थाकर जोशा के जरूद में अलग-अलग उनकी स्किल होती है।
02:03तो उनकी जो अच्छी स्किल है, उसको हम पहले देखते हैं।
02:06और उसके अकॉर्डइंगली हम उनको काम देते हैं।
02:10जैसे आपने देखा होगा कि DA बनाते हैं, कोई पैंटिंग करता है, कोई पैकिंग करता है, जैसे यह सब DA
02:17बनाते हैं, तो हम उसको सेल भी करते हैं, तो सेल करने में हम अलग-अलग जो कमपनियां होती है,
02:22वहाँ पे as a exhibition में हम जाते हैं, हमारे यहाँ magic finger है, तो magic finger करके एक श�
02:32जाते हैं दूसरा यह जो एक्जिबिशन होता है वहाँ पे भी हम as a staff के साथ ये दिव्यांग जन
02:39जाते हैं ताकि क्या होता है कि society को भी पता चले कि ये लोग भी कुछ कर सकते हैं
02:44और ये लोग भी जो common society उनके साथ घुल मिल सकते हैं और दूसरा है कि ये जो आते
02:50हैं तो दि�
03:01और बोज रूप भी नहीं होते हैं और उनको खुद काम करके जो वो कमाते हैं उससे उनका एक confidence
03:07भी बढ़ता है और ये जो दिए हैं वो जैसे बहुत सारे दिए बहार से आते हैं जो हम use
03:16करते हैं उसके बजाए अगर हम अपने ही दिव्यांग जन अपने ही देश के दिव्य
03:22अगर हम उसको अपने ही दिव्यांग जन ने बनाए हुए दिए को हम यूज करके अगर हम दिवाली सेलिबरेट करें
03:33तो वो एक और अलग ही रहती है और जैसे प्रधन मंत्री श्री ने बोला है कि स्वदेश ये अपना
03:39हो या तो अपने जो अपने देश में जो चीजे होत
03:52जनों को केवल सहानु भूती नहीं बलकि समान, अफसर, प्रशिक्षन और अपने हुनर को दिखाने के लिए सही मंच भी
03:59चाहिए जब किसी व्यक्ति को अपनी क्षमता के मुताबिक काम करने का अफसर मिलता है तो वो अपने पैरों पर
04:05खड़े होने की दिशा में आगे ब�
04:22पोशनी के इस्तियोहार का जश्न मनाते हैं लेकिन जरा सूचिये जिस दिए को हम कुछ रुप्यों में खरीदते हैं उसे
04:28तयार करने की पीछे किसी की कितनी महनत और लगन लगी होती है एहमदाबाद के अंदजन मंडल में तयार हो
04:35रहे ये दिए हमें उसी महनत की याद द
04:37लाते हैं ये बताते हैं कि हुनर किसी व्यक्ति या वर्ग तक सीमित नहीं होता जरूरत होती है तो बस
04:46उसे पहचानने निखारने और आगे बढ़ने का अफसर देने की इस दिवाली अगर हम ऐसे कारीगरों के बनाएं उतपादों को
04:54भी अपनी खरीदारी में जगह दें त
05:06आत्म निर्भरता तब मजबूत होती है जब महनत करने वाले हाथों को काम मिले उनके उतपादों को बाजार मिले और
05:13उनकी पहचान उनके हुनर से बने एहमदाबाद के अंधजन मंडल की ये तस्वीरें इसी सोच को सामने लाती हैं तो
05:21इस दिवाली जब आपके घर में द
05:35श्वास और आत्म निर्भरता आने से भी फैलती है