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Karwa Chauth 2026 Puja Muhurat & Moonrise Time! सुहागिन महिलाओं के पावन पर्व करवा चौथ पर जानिए आज पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त, दिल्ली समेत आपके शहर में चांद निकलने का सटीक समय और व्रत खोलने के जरूरी नियम।
कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष चतुर्थी को मनाया जाने वाला करवा चौथ का पावन व्रत आज देशभर में पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ रखा जा रहा है। सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, सुखी दांपत्य जीवन और अच्छे स्वास्थ्य की कामना के लिए दिनभर निर्जला व्रत रखती हैं। पंचांग के अनुसार, करवा चौथ की पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 38 मिनट से शाम 6 बजकर 56 मिनट तक रहेगा। इस दौरान माता पार्वती, भगवान शिव, श्री गणेश और कार्तिकेय जी के साथ करवा माता की विधिवत आराधना की जाती है।

ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस साल करवा चौथ पर 5 अत्यंत शुभ योगों का निर्माण हो रहा है, जिनमें लक्ष्मी नारायण योग, बुधादित्य योग, त्रिग्रही योग, परिघ योग और गुरुवार का संयोग शामिल है। मान्यता है कि इन योगों में पूजा-अर्चना करने से वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि और प्रेम में प्रगाढ़ता आती है। शाम को कथा सुनने के बाद महिलाएं रात में चंद्रमा के दर्शन और अर्घ्य देकर अपने पति के हाथों जल ग्रहण कर व्रत का पारण करेंगी।

चंद्रोदय के समय की बात करें तो नई दिल्ली में रात लगभग 8 बजकर 17 मिनट पर चांद निकलने का अनुमान जताया गया है, जबकि अन्य शहरों में स्थानीय पंचांग के अनुसार समय में थोड़ा अंतर हो सकता है। पूजा में छलनी से चंद्रमा और फिर पति के दर्शन करने का विशेष महत्व है, जो नकारात्मकता को दूर रखकर रिश्तों में विश्वास और समर्पण को दर्शाता है।

About the Story:
Karwa Chauth 2026 is being celebrated across India as married women observe a strict day-long fast for the longevity and prosperity of their husbands. This video covers the auspicious puja muhurat between 5:38 PM and 6:56 PM, city-wise moonrise timings including Delhi at 8:17 PM, five auspicious astrological yogas, traditional Vrat Katha of Veeravati, and step-by-step rituals.


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Transcript
00:06करवा चौत का वरत सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास माना जाता है
00:10सुभ़ सरगी खाने से शुरू होने वाला वरत रात में चंद्रमा के दर्शन, अर्ग्य और पती के हाथों जल ग्रहन
00:17करने के बाद पूरा होता है
00:19दिन भर निर्जला वरत रखने वाली महिलाओं को अब सबसे जादा इंतिजार चांद निकलने का है
00:25ऐसे में सवाल है कि आज पूजा का शुब महुर्थ क्या है?
00:29चांद कब दिखाई देगा? छलनी से चंद्रमा और पती को देखने की परंपरा क्यों है? और करवा चौत की वरत
00:35कथा क्या है?
00:36ध्यान दीजे चंद्रमा निकलने का समय शहर के हिसाब से अलग-अलग हो सकता है इसलिए अपनी शहर के स्थानिय
00:42पंचांग या विश्वस्निय धार्मिक कैलेंडर से चंद्रोदय का समय जरूर जांच लें
00:48करवा चौत की पूजा का शुब महुर्थ
00:50आपके दिये गए पंचांग विवरन के अनुसार करवा चौत पर ब्रम्ह मुहूर्थ सुभ़ चार बचकर 48 मिनट से 5 बचकर
00:5849 मिनट तक बताया गया है
00:59इसी दौरान स्नान के बाद सर्गी ग्रहन करके वरत का संकल्प लिया जा सकता है
01:04वही करवा चौत की पूजा का शुब समय शाम 5 बचकर 38 मिनट से 6 बचकर 56 मिनट तक बताया
01:10गया है
01:11इस दौरान भगवान शिव, माता पारवती, भगवान गणेश और भगवान कार्तिकय की पूजा की जाती है
01:17महिलाएं करवा माता की आराधना करती है और अपने पती की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थय तथा दामपत्य जीवन में सुख
01:24शांती की कामना करती है
01:25निशीथा मुहूर्थ रात 11 बचकर 49 मिनट से देर रात 12 बचकर 31 मिनट तक बताया गया है
01:32हालाकि करवा चौध की मुख्य पूजा और व्रत खोलने का समय चंद्रोदय से जुड़ा होता है
01:37इसलिए निशीथा मुहूर्थ को चांद निकलने के समय से न जोड़े
01:45करवा चौध की पूजा में चलनी का विशेश महत्व माना जाता है
01:49परंपरा के अनुसार महिलाए पहले चलनी से चंद्रमा के दर्शन करती है
01:53और फिर उसी चलनी से अपने पती को देखती है
01:55इसके बाद पती उन्हे पानी पिला कर व्रत खुलवाते है
01:59धार्मिक मान्यताओं में चलनी को प्रतीकात्मक रूप से नकारात्मक्ता को दूर रखने और रिष्टों में अच्छाई बनाये रखने से जोड़ा
02:06जाता है
02:06चंद्रमा को मन की शांती और शीतलता का प्रतीक माना जाता है
02:10यही वज़ा है कि चंद्रमा के दर्शन के बाद पती की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और वैवाहिक जीवन में प्रेम
02:16की कामना की जाती है
02:17हालाकि छलनी से देखने की परंपरा का अर्थ केवल धार्मिक रस्म तक सीमित नहीं है
02:22कई परिवारों में इसे आपसी विश्वास, समर्पन और साथ निभाने के भाव से भी जोड़ा जाता है
02:29करवा चौथ पर बन रहे हैं पांच शुब संयोग
02:33जोतिशी ये मान्यताओं के अनुसार इस बार करवा चौथ पर पांच शुब संयोगों की चर्चा की जा रही है
02:38पहला है लक्ष्मी नारायन योग जिसे तुला राशी में बुध और शुक्र की युती से बनने वाला बताया गया है
02:44जोतिश में इस योग को सुख सम्रिध्धी और दामपत्य जीवन में खुशाली से जोड़ा जाता है
02:49दूसरा है परेगी योग जिसका प्रभाव 29 अक्तूबर को देर रात 12 बचकर 6 मिनिट तक बताया गया है
02:55धार्मिक मान्यताओं में इस योग का विशेश महत्व माना जाता है
02:59तीसरा सैयोग गुरुवार का है गुरुवार को भगवान विश्णू और माता लक्ष्मी की पूजा के लिए शुब माना जाता है
03:05इस दिन उनकी आराधना करके परिवार में सुख, शान्ती और सम्रिध्धी की कामना की जाती है
03:10चोथा है बुधा दित्य योग जो सूर्य और बुध की यूती से बनने वाला बताया गया है
03:15जोतिशिय मान्यताओं में इसे बुध्धी, मान सम्मान और कार्यक्षेत्र में उन्नती से जोड़ा जाता है
03:21पांचवा है त्रिग्रही योग जो तुला राशे में सूर्य बुध और शुक्र की मौजूदगी से बनने का दावा किया जा
03:27रहा है
03:27इसे सुक्सुविधाओं, सम्रिध्धी और रिष्टों में मधूर्ता का प्रतीक माना जाता है
03:32ध्यान रहे कि ये जोतिशिय मान्यताए हैं
03:35इनके आधार पर जीवन में किसी खास परिणाम की वैज्ञानिक गयारिंटी नहीं दी जा सकती
03:41करवाचौत की व्रत कथा, वीरावती की कहाने
03:44करवाचौत की कथा सुनने की परंपरा इस व्रत का एहम हिस्सा है
03:48प्रचलित कथा के अनुसार, वीरावती नाम की एक स्त्री अपने साथ भाईयों की एकलोती बहन थी
03:53विवाह के बाद उसने अपने पती की लंबी उम्र के लिए करवा चौत का वरत रखा
03:58दिन भर भूखे प्यासे रहने के कारण वो कमजोर हो गई और चंद्रमा निकलने का इंतजार करने लगी
04:04अपनी बहन की हालत देख कर उसके भाईयों से रहा नहीं गया
04:07उन्होंने दूर एक पेड़ पर दीपक जला कर छलनी की आड़ से ऐसा द्रिश्य बनाया मानो चंद्रमा निकलाया हो
04:13वीरावती ने इसे सच मान कर चंद्रमा समझ कर अरग्य दिया और वरत खोल लिया
04:18कथा की अनुसार वरत अधूरा तूटने के कारण उसके जीवन में कठिनाई आई और उसे अपने पती के संकट का
04:24सामना करना पड़ा
04:25बाद में वीरावती ने श्रध्धा और नियम पूर्वक वरत किया और भगवान की कृपा से उसके पती का जीवन सुरक्षित
04:31हुआ
04:31इस कथा से वरत में धैर्य, आस्था और नियमों के पालन का संदेश लिया जाता है
04:37करवा चौथ की पूजा और आर्ती कैसे करें?
04:41शाम को शुब मुहुर्थ में पूजा की थाली सजाएं, करवा, दीपक, रोली, अक्षत, मिठाई और अन्य पूजा सामगरी रखें
04:49भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और भगवान कार्तिके की पूजा करें
04:54इसके बाद करवा चौथ की कथा सुने और परिवार की परंपरा की अनुसार आर्ती करें
04:58आरती के दौरान माता पार्वती और भगवान शिव का स्मरण करते हुए सुखी दामपत्य जीवन और परिवार की खुशाली की
05:05प्रार्थना की जाती है।
05:06अलग-अलग शेत्रों और परिवारों में करवा माता की आरती के बोल अलग-अलग हो सकते हैं इसलिए अपनी पारिवारिक
05:12परंपरा की अनुसार आरती गा सकते हैं।
05:14रात में चंद्रमा दिखाई देने पर चंद्रदेव को जल से अर्गे दें। इसके बाद छलनी से चंद्रमा और फिर पती
05:21के दर्शन करें। पती के हाथ से पानी ग्रहन करके व्रत पूरा करें। अगर बादल होने के कारण चंद्रमा दिखाई
05:27नहीं दे रहा हो तो अपन
05:43स्थानिय पंचांग से समय की पुष्टी जरूर करें। करवा चौत का ये पर्व प्रेम, विश्वास, समर्पण और परिवार के साथ
05:50को महत्व देने का आवसर है।
05:51पूजा करते समय अपनी सेहत का भी ध्यान रखें और किसी तरह की परेशानी महसूस होने पर जरूरी मदद लेने
05:57में संकोच न करें।

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