00:06करवा चौत का वरत सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास माना जाता है
00:10सुभ़ सरगी खाने से शुरू होने वाला वरत रात में चंद्रमा के दर्शन, अर्ग्य और पती के हाथों जल ग्रहन
00:17करने के बाद पूरा होता है
00:19दिन भर निर्जला वरत रखने वाली महिलाओं को अब सबसे जादा इंतिजार चांद निकलने का है
00:25ऐसे में सवाल है कि आज पूजा का शुब महुर्थ क्या है?
00:29चांद कब दिखाई देगा? छलनी से चंद्रमा और पती को देखने की परंपरा क्यों है? और करवा चौत की वरत
00:35कथा क्या है?
00:36ध्यान दीजे चंद्रमा निकलने का समय शहर के हिसाब से अलग-अलग हो सकता है इसलिए अपनी शहर के स्थानिय
00:42पंचांग या विश्वस्निय धार्मिक कैलेंडर से चंद्रोदय का समय जरूर जांच लें
00:48करवा चौत की पूजा का शुब महुर्थ
00:50आपके दिये गए पंचांग विवरन के अनुसार करवा चौत पर ब्रम्ह मुहूर्थ सुभ़ चार बचकर 48 मिनट से 5 बचकर
00:5849 मिनट तक बताया गया है
00:59इसी दौरान स्नान के बाद सर्गी ग्रहन करके वरत का संकल्प लिया जा सकता है
01:04वही करवा चौत की पूजा का शुब समय शाम 5 बचकर 38 मिनट से 6 बचकर 56 मिनट तक बताया
01:10गया है
01:11इस दौरान भगवान शिव, माता पारवती, भगवान गणेश और भगवान कार्तिकय की पूजा की जाती है
01:17महिलाएं करवा माता की आराधना करती है और अपने पती की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थय तथा दामपत्य जीवन में सुख
01:24शांती की कामना करती है
01:25निशीथा मुहूर्थ रात 11 बचकर 49 मिनट से देर रात 12 बचकर 31 मिनट तक बताया गया है
01:32हालाकि करवा चौध की मुख्य पूजा और व्रत खोलने का समय चंद्रोदय से जुड़ा होता है
01:37इसलिए निशीथा मुहूर्थ को चांद निकलने के समय से न जोड़े
01:45करवा चौध की पूजा में चलनी का विशेश महत्व माना जाता है
01:49परंपरा के अनुसार महिलाए पहले चलनी से चंद्रमा के दर्शन करती है
01:53और फिर उसी चलनी से अपने पती को देखती है
01:55इसके बाद पती उन्हे पानी पिला कर व्रत खुलवाते है
01:59धार्मिक मान्यताओं में चलनी को प्रतीकात्मक रूप से नकारात्मक्ता को दूर रखने और रिष्टों में अच्छाई बनाये रखने से जोड़ा
02:06जाता है
02:06चंद्रमा को मन की शांती और शीतलता का प्रतीक माना जाता है
02:10यही वज़ा है कि चंद्रमा के दर्शन के बाद पती की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और वैवाहिक जीवन में प्रेम
02:16की कामना की जाती है
02:17हालाकि छलनी से देखने की परंपरा का अर्थ केवल धार्मिक रस्म तक सीमित नहीं है
02:22कई परिवारों में इसे आपसी विश्वास, समर्पन और साथ निभाने के भाव से भी जोड़ा जाता है
02:29करवा चौथ पर बन रहे हैं पांच शुब संयोग
02:33जोतिशी ये मान्यताओं के अनुसार इस बार करवा चौथ पर पांच शुब संयोगों की चर्चा की जा रही है
02:38पहला है लक्ष्मी नारायन योग जिसे तुला राशी में बुध और शुक्र की युती से बनने वाला बताया गया है
02:44जोतिश में इस योग को सुख सम्रिध्धी और दामपत्य जीवन में खुशाली से जोड़ा जाता है
02:49दूसरा है परेगी योग जिसका प्रभाव 29 अक्तूबर को देर रात 12 बचकर 6 मिनिट तक बताया गया है
02:55धार्मिक मान्यताओं में इस योग का विशेश महत्व माना जाता है
02:59तीसरा सैयोग गुरुवार का है गुरुवार को भगवान विश्णू और माता लक्ष्मी की पूजा के लिए शुब माना जाता है
03:05इस दिन उनकी आराधना करके परिवार में सुख, शान्ती और सम्रिध्धी की कामना की जाती है
03:10चोथा है बुधा दित्य योग जो सूर्य और बुध की यूती से बनने वाला बताया गया है
03:15जोतिशिय मान्यताओं में इसे बुध्धी, मान सम्मान और कार्यक्षेत्र में उन्नती से जोड़ा जाता है
03:21पांचवा है त्रिग्रही योग जो तुला राशे में सूर्य बुध और शुक्र की मौजूदगी से बनने का दावा किया जा
03:27रहा है
03:27इसे सुक्सुविधाओं, सम्रिध्धी और रिष्टों में मधूर्ता का प्रतीक माना जाता है
03:32ध्यान रहे कि ये जोतिशिय मान्यताए हैं
03:35इनके आधार पर जीवन में किसी खास परिणाम की वैज्ञानिक गयारिंटी नहीं दी जा सकती
03:41करवाचौत की व्रत कथा, वीरावती की कहाने
03:44करवाचौत की कथा सुनने की परंपरा इस व्रत का एहम हिस्सा है
03:48प्रचलित कथा के अनुसार, वीरावती नाम की एक स्त्री अपने साथ भाईयों की एकलोती बहन थी
03:53विवाह के बाद उसने अपने पती की लंबी उम्र के लिए करवा चौत का वरत रखा
03:58दिन भर भूखे प्यासे रहने के कारण वो कमजोर हो गई और चंद्रमा निकलने का इंतजार करने लगी
04:04अपनी बहन की हालत देख कर उसके भाईयों से रहा नहीं गया
04:07उन्होंने दूर एक पेड़ पर दीपक जला कर छलनी की आड़ से ऐसा द्रिश्य बनाया मानो चंद्रमा निकलाया हो
04:13वीरावती ने इसे सच मान कर चंद्रमा समझ कर अरग्य दिया और वरत खोल लिया
04:18कथा की अनुसार वरत अधूरा तूटने के कारण उसके जीवन में कठिनाई आई और उसे अपने पती के संकट का
04:24सामना करना पड़ा
04:25बाद में वीरावती ने श्रध्धा और नियम पूर्वक वरत किया और भगवान की कृपा से उसके पती का जीवन सुरक्षित
04:31हुआ
04:31इस कथा से वरत में धैर्य, आस्था और नियमों के पालन का संदेश लिया जाता है
04:37करवा चौथ की पूजा और आर्ती कैसे करें?
04:41शाम को शुब मुहुर्थ में पूजा की थाली सजाएं, करवा, दीपक, रोली, अक्षत, मिठाई और अन्य पूजा सामगरी रखें
04:49भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और भगवान कार्तिके की पूजा करें
04:54इसके बाद करवा चौथ की कथा सुने और परिवार की परंपरा की अनुसार आर्ती करें
04:58आरती के दौरान माता पार्वती और भगवान शिव का स्मरण करते हुए सुखी दामपत्य जीवन और परिवार की खुशाली की
05:05प्रार्थना की जाती है।
05:06अलग-अलग शेत्रों और परिवारों में करवा माता की आरती के बोल अलग-अलग हो सकते हैं इसलिए अपनी पारिवारिक
05:12परंपरा की अनुसार आरती गा सकते हैं।
05:14रात में चंद्रमा दिखाई देने पर चंद्रदेव को जल से अर्गे दें। इसके बाद छलनी से चंद्रमा और फिर पती
05:21के दर्शन करें। पती के हाथ से पानी ग्रहन करके व्रत पूरा करें। अगर बादल होने के कारण चंद्रमा दिखाई
05:27नहीं दे रहा हो तो अपन
05:43स्थानिय पंचांग से समय की पुष्टी जरूर करें। करवा चौत का ये पर्व प्रेम, विश्वास, समर्पण और परिवार के साथ
05:50को महत्व देने का आवसर है।
05:51पूजा करते समय अपनी सेहत का भी ध्यान रखें और किसी तरह की परेशानी महसूस होने पर जरूरी मदद लेने
05:57में संकोच न करें।