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France में महंगाई को लेकर भारी बवाल, सड़कों पर उतरे 1.10 लाख से ज्यादा प्रदर्शनकारी! जानिए कैसे बढ़ते आर्थिक संकट के बीच 5 नवंबर को देशव्यापी हड़ताल के ऐलान से राष्ट्रपति Emmanuel Macron की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
फ्रांस (France) में बढ़ती महंगाई, महंगे ईंधन और कम वेतन को लेकर जनता का गुस्सा फूट पड़ा है। राजधानी पेरिस (Paris) समेत देश के कई बड़े शहरों में 1.10 लाख से अधिक प्रदर्शनकारी मैक्रों सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। ट्रेड यूनियनों और छात्र संगठनों ने मिलकर सरकार की आर्थिक नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, जिससे राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों (Emmanuel Macron) पर भारी दबाव बन गया है।

प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग वेतन वृद्धि, बेहतर कार्य सुविधाएं और महंगाई से राहत दिलाना है। पेरिस में प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों और युवाओं के बीच तीखी झड़पें भी देखने को मिलीं, जिसके बाद पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी है। महंगाई से लेकर लोकतांत्रिक अधिकारों के मुद्दे पर आम जनता और छात्र पूरी तरह एकजुट होकर सरकार के विरोध में उतर आए हैं।

इस आंदोलन को और धार देने के लिए छात्र और ट्रेड यूनियनों ने 5 नवंबर को पूरे फ्रांस में 'देशव्यापी हड़ताल' (Nationwide Strike) का बड़ा ऐलान किया है। अगर यह हड़ताल होती है, तो फ्रांस में सार्वजनिक परिवहन, स्वास्थ्य और अन्य आपातकालीन सेवाएं पूरी तरह ठप हो सकती हैं। अब देखना होगा कि मैक्रों सरकार 5 नवंबर से पहले जनता की मांगों पर कोई राहत देती है या फ्रांस का यह संकट और गंभीर रूप ले लेगा।


A massive surge of public anger has erupted across France as over 110,000 protesters stormed the streets of Paris against rising inflation and high living costs. Facing pressure from trade unions and student federations demanding wage hikes, President Emmanuel Macron's government is bracing for a nationwide strike announced for November 5.


#FranceProtests #EmmanuelMacron #ParisProtest #FranceStrike

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Transcript
00:00फ्रांस में फिर भड़का गुस्सा
00:03मैक्रों सरकार की खिलाफ सडकों पर उत्रे लाखों लोग
00:07फ्रांस की राजधानी पैरिस से लेकर देश के दूसरे शहरों तक विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं
00:13महंगाई, बढ़ती जीवन यापन लागत, सरकारी नीतियों और सारवजनिक सेवाओं को लेकर लोगों का गुस्सा सडकों पर दिखाई दे रहा
00:22है
00:22राष्टपती मैनुवल मैक्रों की सरकार के सामने एक बार फिर बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है
00:2824 अक्टूबर को हुए ताजा प्रदर्शनों में फ्रांस के ग्रह मंत्राले के मुताबिक पूरे देश में करीब 4,10,000
00:36लोग शामिल हुए
00:37जबकि ट्रेड यूनियन CGT ने प्रदर्शन कारियों की संख्या लगभग 8 लाख बताई
00:43अकेले पैरिस में सरकारी आकड़े के मुताबिक 1,10,000 लोग सड़को पर उत्रे
00:48यानि प्रदर्शन का आकार कितना बड़ा था इसे लेकर सरकार और यूनियनों के आकड़ों में अंतर है
00:54इन प्रदर्शनों की सबसे बड़ी वजह सिर्फ महंगाई नहीं है
00:58लोगों की नाराजगी के पीछे वे आर्थिक और सामाजिक समस्याएं भी हैं
01:03जिनका असर आम परिवारों की रोज मर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है
01:07बढ़ते खर्च के बीच लोग बहतर वेतन, मजबूत सार्वजनिक सेवाओं और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे हैं
01:15छात्रों का कहना है कि स्कूलों और कॉलेजों में शिक्षकों की कमी और बुन्यादी सुविधाओं की समस्याओं को गंभीरता से
01:22लिया जाना चाहिए
01:23वहीं करमचारी और ट्रेड यूनियन वेतन तथा सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दे उठा रहे हैं
01:29लेकिन इस आंदोलन का दाइरा अब आर्थिक मांगों से आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है
01:35प्रदर्शनकारियों के एक वर्ग ने लोकतंत्र, सरकार की जवाब देही और विरोध करने के अधिकार से जुड़े सवाल भी उठाई
01:42है
01:42कुछ प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार उनकी मांगों को परियाप्त महत्वन नहीं दे रही
01:47वहीं सरकार के सामने सारवजनिक व्यवस्था बनाए रखने और हिंसक घटनाओं को रोकने की चुनौती है
01:5417 अक्टूबर को हुए प्रदर्शनों के बाद भी फ्रांस के कही शहरों में तनाब देखा गया था
01:59इसके बाद 24 अक्टूबर को सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई
02:04अधिकारियों ने देश भर में लगभग 70,000 पुलिस कर्मियों और जेंडर मेरी के जवानों को तैनाद किया
02:10पैरिस में प्रदर्शन की शुरुवात शांती पूर्ण रही
02:13लेकिन मार्च खत्म होने के आसपास कुछ जगों पर प्रदर्शन कारियों और पुलिस की बीच जड़ पे हुई
02:19पुलिस ने आसू गैस और पानी की बोचारों का इस्तिमाल किया
02:23अधिकारियों ने देश भर में करीब 1000 गिरफतारियों की जानकारी भी दी
02:28हिंसा और तोड़ फोड की घटनाओं ने हालात को और जटिल बना दिया है
02:32अधिकारियों के मुताबिक कुछ प्रदर्शन कारियों ने पुलिस पर वस्तुए और पटाखे फेके
02:37वहीं कुछ प्रदर्शन कारियों के कुछ समूहों ने पुलिस की कारिवाई पर सवाल उठाए है
02:42इस बीच सुरक्षा चिंताओं के चलते पैरिस के कुछ प्रमुक संग्रहालेयों और सांस्कृतिक संस्थानों को भी बंद रखा गया
02:49हाला कि ये ध्यान रखना जरूरी है कि सभी प्रदर्शन कारी हिंसा में शामिल नहीं थे और बड़ी संख्या में
02:56लोग अपनी आर्थिक तथा सामाजिक मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे
03:00अब इस आंदोलन का अगला बड़ा पड़ाव 5 नवंबर हो सकता है फ्रांस के प्रमुक ट्रेड यूनियनों ने उस दिन
03:07देश व्यापी हरताल और विरोध प्रदर्शन का आहवान किया है यूनियने वेतन बढ़ाने सार्वजनिक सेवाओं को मजबूत करने रोजगार की
03:16सुरक्षा और उद्योगों में निवेश बढ़ाने जैसी मांगे उठा रही हैं सरकार के साथ हुई बैठक के बाद यूनियन नेताओं
03:23ने असंतोष जताया और कहा कि उनकी मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाये गए राश्ट्रपती मैकरों के लिए ये स्थिती
03:30इसलिए भ
03:43प्रदर्शनों से सरकार की नीतियों में क्या बदलाव आएगा ये अभी सपष्ट नहीं है।
04:13अने वाले दिनों में भी देश की राजनीती और जन जीवन के केंद्र में रह सकते हैं।
04:43झाले वाले देश की राजनीती और जीवन के रह सकते हैं।
04:44झाले देश और झाले दोओंवागा ये ऑन जीवन के रह सकते हैं।

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