00:01जय श्री महाकाल इस बार शरद पुन्णिमा 25 और 26 अक्तुबर को मनाई जाएगी
00:0725 तारिक को ब्रत की पुन्णिमा रहेगी 26 तारिक को इसनान और दान की पुन्णिमा रहेगी
00:14शरद पुन्णिमा अश्विन माक्ष की शुकलपक्ष को मनाई जाती है
00:20इस दिन माता लक्ष्मी एवं भगवान विश्नु की पुजन होती है
00:26और साथ में जो वेश्णाव हैं वा पुजन की पुजन करते हैं
00:31यहां क्यों क्योंकि शरत पुण्णिमा को कोजागरी पुण्णिमा के नाम से भी जाना जाता है
00:37इस दिन माता लक्ष्मी जो है वो प्रतिवी पे विचरन करती है
00:42और इस कारण से वहाँ पूछती है कि कौन जगरा है
00:46तो जो राद भर जक्ये भगवान विश्नु और माता लक्ष्मी की पूजन करते हैं
00:50उन्हें दूप दीप नेवेद्य और सफेद मिश्ठान का भोग लगाते हैं
00:54उसे माता लक्ष्मी और भगवान विश्नु मन चाहा वर्द देते हैं
00:58और धनलाप स्वासलाप से परिपूर्ण करते हैं
01:02क्रिश्न भक्त जो हैं वहां भगवान श्री क्रिश्न को सफेद कलर की पोशाग पिना कर दूप दीप नेविद्य करके
01:08और भगवान को सफेद मिश्ठान का भोग लगाके जो पूजन करते हैं उन्हें भगवान श्री क्रिश्न भक्ती सदान करते हैं
01:16और स्वास्त और धनलाप कराते हैं
01:19इसी के साथ साथ इस दिन चंद्रमा अपनी जो है सोला करणाओं से परिपूर्ण होते हैं
01:25और स्वास्त लाप कराने वाले होते हैं
01:29इस्तिती पे विशेश रूप से चंद्रमा का पूजन किया जाता है
01:33इस दिन चंद्रमा को अर्गी दिया जाता है और गाय का दूद और चावल से मिश्रित हीर बना कर उसे
01:42चंद्रमा के नीचे दो से तीन घंटे रख कर अगल दिन उसका प्रशाद रूप में ग्रहण किया जाता है
01:51तो जो भी जीव जन्तु मनुश्य इस दिन चंद्रमा की कलाओं का सेवन करते हैं मतलब उसकी कलाओं से जिन
02:00पर पड़ती है उन्हें और जो उस प्रशाद को ग्रहण करते हैं उन लोगों को स्वास्थ लाव होता है और
02:07वो निरोगी जीवन को पाते हैं
02:09हर वर्ष में एक बार आती है और इस दिन विशेश रूप से ही हमें ज्ञान रख कर भगवान लक्ष्मी
02:18विष्णू एवं श्री कृष्ण और चंद्रमा का पूजन करना चीए और रात भर जग कर भक्ती भाव से कृष्ण भजन
02:26या लक्ष्मी जी की स्तूती श्री सुक्त
02:29इस तोत्र का पाठ और चंद्रमा का पूजन करते हैं अगले दिन जब 26 अक्टूबर रहेगा तो जो खीर का
02:38प्रशाद है वो ग्रहन करना है और शरत प्रितु का दान करना है और जो भी आपका तिर्त छेत्र है
02:46आपके आसपास में या कोई नदी है या कोई ऐसा कुंड है �
02:50जहां पर भगवान का मंदेर है उसके जल से स्नान करना चाहिए अगर आप उस पुंड में या उस नदी
02:55में जाके स्नान नहीं कर सकते हैं तो उससे संबंदित जल या गंगा जल से स्नान करना चाहिए जैश्रीम हाका
03:20झाल