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Fun
Transcript
00:02प्राइब कर दो
00:36प्रोफेसर से लिपट सी गई
00:38बिना किसी शरम के
00:40मैंने अपने हाथ
00:42प्रोफेसर की गर्दन मे डाल दी
00:44बस प्रोफेसर सहाब ने भी
00:47अपने दोनों हाथ मेरी कमर पे रख दिये
00:50और उन हाथों की पकड
00:53मजबूत होती चली गई
00:55और उन्होंने मुझे
00:57बिस्तर पे लिटा दिया
01:03सीमा तुम बहुत खुब्सुरा थो
01:07मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ
01:08मेरे चालीस साल के जवान पती के
01:11मजबूत हाथों की पकड़ से
01:13मेरी तो सांसे ही रुख गई थी
01:17मेरी सांसे तेज हो रही थी
01:19धड़कने तेज हो रही थी
01:22मैंने हिमत करके उपर देखा
01:24तो मुझे पता चला कि
01:26मेरे पती डेव
01:27अपने बीश साल की
01:29नाजुप कोमल पत्नी को
01:31निहा रहे थी
01:36मेरी नजरों से मुझते ही
01:38अपने मरदाना हो ठुलों ने
01:41मेरे कोमल होठों पे लगा दिया
02:18मेरे कोमल पता चला कि
02:20कर दो कर दो
02:49मेरा नाम सीमा है
02:50मैं एक शर्मीली लड़की हूँ
02:53मुझे मेरी माँ हमेशा कहती थी
02:56थोड़ा लोगों से मिला जुला कर
03:00नहीं तो जान पहचान कैसे बनेगी
03:04तेरा ये शर्मीला पन कर जाएगा
03:07आज पहली बार
03:09मैं मेरी प्रेम कहानी लिखने जा रही है
03:13ये कहानी किसे फिल्म के कहानी नहीं है
03:15ये मेरी खुद के कहानी है
03:19इस कहानी को किसे नाटक के तरह मैं समझेगा
03:22ये मेरी जिन्दगी के एक दर्दभरी हाकिकत है
03:26जिसे मैं कभी भूल नहीं सकते
03:30और भूलू भी तो कैसे
03:33हर पल मुझे वो रात याद आती
03:37कभी न बूलने वाले वो रात
03:41जिस रात में दुलहन बनी थी
03:44वो भी एक रात की
04:02बात तब की है जब मैं
04:04एक गल्स कॉलेज में पढ़ती थी
04:07बच्पन से ही गल्स स्कूल और गल्स कॉलेज में पढ़ने की वज़े से
04:11लड़कों की तरफ का आकरशन थोड़ा ज्यादा ही था
04:15पर मैंने कभी किसी लड़के को
04:17खुज से एप्रोच नहीं किया
04:20मेरी लाइफ बिलकुल सिंपल चल रही थी
04:24हमारे कॉलेज में राकेश कुमार नाम के एक प्रोफेसर थी
04:30जिनकी उमर चालिस साल थी
04:33नीचर से वो बहुत रिजर्व थे
04:37ज्यादा वो किसी से बात नहीं करते
04:39हम सब लड़के उन्हें आरके कहके बिलाएब
05:02मुझे वो बहुत पसंद थी
05:08अक्सर मैं किसी न किसी बहाने उन्हें अज़ करने की कोशिश कर दे थी
05:12जान बुझकर कभी अपने किताबे गिरा कर
05:16उनसे बात करने की अधूरी कोशिश कर दी थी
05:19वन साइडेड में उन्हें अपना दिल दे बैठी थी
05:23ये बता तुमारे हिंदी का क्लास कैसे चल रहा है
05:27क्लास तो ठीक चल रहा है सर बट हिंदी लिटरेचर में मुझे बहुत कठनाईया हो रही है
05:32क्यों दिल लगा कर नहीं पढ़ रही हूँ
05:34सर पढ़ तो रही हूँ लेकिन कुछ शब्द हैं जो मुझे समझ में नहीं आ रहे हैं
05:38सर अगर आप बुरा ना माने तो आपसे एक बात पूछो
05:41पूछो
05:41सर कि आप मेरे लिए हिंदी लिटरेचर की ट्यूशन ले सकते हैं आप जो टाइम बोलेंगे मैं वो टाइम पे
05:46आ जाओंगी
05:46नहीं जीमा मैं प्राइवेट ट्यूशन नहीं लेता
05:50लेकिन हाँ अगर तुम क्लास में जो भी कुछ पूछना चाहो मुझसे पूछ सकती हो
05:54अच्छा मुझे क्लास में जाना है
05:57मेरे खायालों में प्रोफेसर ही रहा करते थे
06:01जिस दिन उनकी पतनी का स्वरगवास हो गया था
06:04उसी दिन से उनकी हसी हमेशा के लिए गायव हो गये थे
06:09मुझसे उनकी ये हालत देखी नहीं जा रही थी
06:12वो जब भी मुझसे मिलते थे
06:14मैं उनसे हसी मजब किया करते थे
06:17उनका दिल बहलाने की कोशिश किया करते थे
06:20पर वो हलकी स्माइल देकर निकल जाया करते था
06:25प्रोफेसर सहाब हमारे कॉलेज के एक बड़े से ग्राउंड के
06:29एक खुबसूरत से कॉटिज में अकेली रहते थे
06:35सुबस से बारिश हो रही थी
06:36जैसे ही मैं कॉलेज पहुँची
06:39मुझे चटका लगा
06:40आज कॉलेज बन था
06:42फिर मुझे याद आया कि
06:44प्रोफेसर इसी कॉलेज के कैमपस में रहते हैं
06:47मैंने सोचा
06:48प्रोफेसर से मिलने का इससे अच्छा मौका और नहीं मिल सकता
07:12सिमा तुम यहाँ
07:14वो बारिश बहुत तेज हो रही है तुम अंदर आओ अंदर आओ
07:22वो वो गुड मॉनिक स्व गुड मॉनिक स्व आज कॉलेज क्यों बंद है
07:34अंदर बाहर बारिश हो रही है
07:38सिमा तुम पूरी तरह से भीग चुकी हो तुम्हें सर्दी लग जाएगी तुम अंदर आओ
07:47चलो बुक्स दो मुझे और अंदर आजा आओ
07:55कॉलेज के फाउंडर की देथ हो गई है इसलिए प्रिंस्पल साब में तीन दिन के लिए छुट्टी कर दिये
08:03आओ
08:07आजाओ
08:13रुको मैं तुम्हारे लिए टॉबल लेगे आता हूँ
08:37ये लुटाओ ये बाथ्रों में जाके चेंज करो लो
08:49जाओ जिए जाओ जाओ जाओ ना
08:58सथ, तेक्यू
09:28कर दो
09:55कर दो
10:28कर दो
10:32हुआ हुआ हुआ है
11:03तावल लपिट के मैं बातरूम से आही रही थी
11:06तभी मुझे एहसास हुआ
11:09कि मैं इस हाल में प्रोफेसर के सामने कैसे जाऊंगे
11:20सर प्लीज आप मुझे कपड़े यही बातरूम में दे दिजे
11:25मैं यही पहलूंगी प्लीज
11:29सीमा कपड़े अंदर भीग जाएंगे
11:31तुम यही आके बदल लो
11:35मैंने तुम्हारे लिए कपड़े निकाल दिये हैं
11:37जी सो
11:41मैंने दर्वाजा खोला
11:43और दर्वाजे पे खड़ी होगे
11:54पानी के बूंदे दीरे से मेरे कंदों से होती हुए
11:59मेरे सीने में समाने लगी
12:02आरकी मुझे टावल में देखके
12:05जैसे ठगे से रह गए
12:07मैं भी आरके को देखती रह गए
12:12निर्मला की साड़ी अंदर रख्यो हुई है
12:14तुम जाके चेंज कर लो
12:15ठैंक यू सर
12:21सर
12:24ठग गया
12:25ठीक है
12:50मैं तुरंट अंदर की तरह गई
12:52और दर्वासा लगा दी
12:57मेरी सासे बहुत तेज जन रही थी
13:01मेरी देखी धड़ गई
13:03तेज रवतार से धड़क रही थी
13:12मैंने अपने आपको समाला
13:16मुझे साड़ी पहना बहुत अच्छा लगता है
13:20फिर मुझे हैसास हुआ कि
13:23साड़ी ठीक है से पहना
13:25मुझे आता ही नहीं
13:30जैसे तैसे साड़ी मैंने
13:33अपने भीगे हुए बदन पे लपेट ली
14:04साड़ी पहनते लिए मुझे महसूस हुआ कि
14:06उस वक्त मुझे कैसा लगेगा
14:10जब मैं साड़ी में निप्टी हुए
14:13किसी मर्द के सामने खड़ी होनी
14:17मैं मुझे को भी तू रख ले
14:23रखने लगा है अच्छा तुम से मिलकर
14:30रहने लगी हुँ जब से मैं समरकर
14:36तुझ पे वारू अपना ये जीवन
14:42ओ मेरे सजन तुझ पे अरपन खुद को अरपन
15:11तुम चर्माओ नहीं ये जो कुछ भी हुआ
15:13बस एक इत्तफाक समझो ये कमवक्त बारिश को आज ही आना था तुम ऐसे खड़ी क्यों वह
15:21मैठो आउना मैठो
15:30सीमा तुम बहुत खूबसूरित लग रही हो
15:33बहुत प्यारी लग रही हो
15:36बिलकुल निर्मला की तरह
15:37निर्मला आपकी पत्नी
15:40हाँ वो अब इस दुनिया में नहीं है
15:44मैं उसे बहुत प्यार करता था
15:49एक एकसिडेंट में उसकी मौथ हो गई
15:55तुम्हें इस साड़ी में देखा तो
15:57मुझे निर्मला की याद आ गई
16:01पता है तुम्हारी शकल सूरत
16:04बिलकुल मेरी बत्नी निर्मला जैसी है
16:08तुम्हारी आवाज
16:09तुम्हारा चलना तुम्हारा उटना बैठना बिलकुल निर्मला की तरह है
16:14और हाँ
16:17निर्मला को ये पेंग साड़ी बहुत पसंद थी
16:20वो कैसे दिखती थी
16:23क्या मैं उन्ही की तरह सुन्दर हूँ
16:29रुको मैं उसकी तस्वीर दिखाता हूँ
16:36ये देखो
16:38ओ गाड हमारी शकल सच में बहुत मिलती जुलती है
16:47पर निर्मला दीदी मुझसे ज्यादा सुन्दर है
16:52सीमा तुम निर्मला की तरह सुन्दर हो
16:56जब तुम सिंदूर लगाओगी
16:58माथे पे बिंदिया और गली में मंगा सुत्र पहनोगी
17:02तब बिल्कुल मेरी पत्नी निर्मला की तरह दिखोगी
17:06नहीं नहीं आप तो मेरी कुछ ज़्यादा ही तारीफ कर रहे है
17:10निर्मला दीदी तो मुझसे ज़्यादा है सुन्दर है
17:13सीमा तुम भी बहुत सुन्दर हो
17:15सची
17:19सीमा जब तुम सिंदूर लगाओगी और मंगल सुत्र पहनोगी
17:24तो मुझे बहुत अच्छा लगे, बस, चलो मेरे साथ, आओ, बैठो, मैं तुम्हारे लिए मंगल सुत्र और सिंधूर लेकर आता
17:44हूँ,
17:48सिमा, ये लो, ये मंगल सुत्र और ये सिंधूर,
17:57अगर मेरे मंगल सुत्र पहलने से, बिंदी लगाने से, और माथे पे सिंधूर लगाने से, आर्के को खुशी मिलती है,
18:07तो मैं वो करूँगे,
18:18लगाओ सिंधूर,
18:27ये मंगल सुत्र पहना देजे न, हाँ, मैं पहना देता हूँ, लगाओ मुझे दो, और ये मैंने पहना दिया,
18:44तुम बिल्कुल मेरी निर्मला जैसी लग रही हूँ,
18:49बस, बस ऐसे ही मेरे पास कुछ दिर बैठी रहूँ,
18:52मैं दो, तीन महीनों से, निर्मला को महसूस नहीं कर पाया हूँ,
18:57सीमा, उस ऐसे ही बैठी रहू सीमा,
19:02ऐसे ही बैठी रहू,
19:06बैठी रहूँ,
19:27बैठी रहूँ,
19:38निर्मला के,
19:38तुम मेरी निर्मला नहीं हो सकती,
19:43उसकी तरह तुमे आदर्श पत्मी कभी नहीं बन सकती ओ,
19:48इस तुम्रा जैसा इस दुनिया में कोई नहीं,
19:51कोई भी नहीं है निर्मला जैसा,
19:57मैं स्क्रूज में प्रोफेसर साहब,
20:02माना कि निर्मला आपकी पत्नी थी
20:05पर मैं भी अच्छी पत्नी बन सकती हूँ
20:08तो तुम्हें एक अच्छी पत्नी बनने के लिए एक अच्छा लडका चाहिए
20:12जिससे तुम शादी कर सको
20:13क्या है वो लडका तुमारी जिन्दगी में?
20:18लडका… तो नहीं है
20:20पर आदमी जरूर है
20:23कौन है वो आदमी?
20:29वो आदमी इस वक्त मेरे सामने खड़ा है
20:34और उस आदमी का नाम भी मैं आपको बता सकती है
20:36उस आदमी का नाम है प्रोफेसर राकेश कुमार
20:43सीमा ये नहीं हो सकता
20:45ये बिल्कुल नहीं हो सकता
20:48हमारे और तुम्हारे उमर के बीच पे बहुत फासला है
20:50दुनिया क्या कहेगी हसीगी हमारे उपर दुनिया
20:52तो हसने दीजिये सर
20:56मैंने हमेशा
20:58सिर्फ आपको ही चाहा है
21:02सिर्फ आप से ही प्यार किया है
21:06मगर कभी कहने सकी
21:11सर मैंने दुनिया की कभी परवा नहीं की
21:15आज मौका मिला है आपसे कहने का कि मैं आपसे कितना प्यार करती हूँ
21:21और देखिएगा मैं दिखा दूँगी आपको कि मैं आपकी अच्छे पत्नी बन सकती हूँ
21:28अब प्लीज आप ना मत कहिएगा
21:31सीमा मैं अभी तुमसे बहुत प्यार करता हूँ
21:37कब बनोगी मेरी पत्नी
21:42कब करोगी शानी इससे
21:43आज और अभी जीवन भर के लिए
21:58भीगी भीगी सीराते हैं
22:04दीगा भीगा साये मन
22:10ऐसे मैं तुझ पे कर दूँ सजन
22:18ऐसे मैं तुझ पे कर दूँ सजन
22:24खुद को अरपन
22:27खुद को अरपन
22:30मेरी शीमा
22:31मेरी प्रभी सेंचा
22:41लीजी प्रोफेसर चाथ
22:43भगवान को सक्षी मानकर
22:45मुझे अपने हाथों से मंगल सुद्र पहनाए
22:47मुझे तुब आप दूँ सक्षी मानकर
23:27नहीं सीमा, तुम्हारी जगा मेरे पाउं में नहीं, मेरे दिल में है
23:49आज मैं एक शादी शुदा आउरत बन गए थी, मैंने उनकी आँखों में देखा, उनकी आँखों में मेरे लिए प्यार
23:58था
24:01मुझे लगा कि वो मुझे किस करेंगे
24:07पर उन्होंने मुझे अलग करते हुए कहा
24:12सीमा तुम्हे घर जाना चाहिए
24:15तुम मेरी पत्नी हो
24:18और एक पत्नी की जगह उसके पती का घर होता है
24:22लेकिन समाज की नजरों में अभी भी हम पती-पत्नी नहीं है
24:27और हाँ
24:29तुम रोज आया करो
24:34जैसा आप ठीक समझे
24:36चल, मैं तुम्हे बस्टॉप पिछो देता हूँ
24:40ठीक है चलते हैं
24:42चलिए
24:48मेरे पती ने मुझे बस्टॉप तक छोड़ा
24:56रास्ते बर हम दोनों ने कुछ बात नहीं थी
25:06और मैं वहां से बस पकड़कर घर चलिए
25:31रात में जब मैं अपने विस्तर पे बैठी थी
25:35तब मैं आज दिन में घटे सारे इवेंट को याद कर रही थी
25:45मुझे अपने विहवियर पे आश्यर होने के वज़ाएं खुशी हो रही थी
25:53आरके एक बहुत ही अच्छी इंसान है
25:56और ऐसे इंसान की पत्नी होने का आउसर मिलने पे
26:01मैं खुद को भाग ये शाली समझ रही थी
26:15मैं बार बार अपने मंगल सुत्र को हाथ में लेके देख रही थी
26:33उनका हार एक स्पार्श मेरे अंदर रोमांच भर रहा था
26:38मैं वापस बीस्तर पिलेट गई और अपने पत्ती की याद में खो गई
26:44मैं अगले दिन का इंतजार करने लगी और मुझे पता ही नहीं चला कि मेरी आखे कब लग गए
27:01सिमा तुम यहाँ
27:04सर्प्राइज
27:09तो आज मैडम जी कॉलेज नहीं गई
27:12नहीं आज मेरा मोड नहीं था कॉलेज जाने का
27:16और मैं आपकी पत्नी हूँ ना तो आज से मैं ही आपका खाना बनाया करूंगी
27:21सची
27:24मुझ्ची
27:30अच्छा प्रोफेसर सहाब
27:32जी बोली
27:33एक बात बताईए
27:37आप मुझे धोखा तो नहीं धोगे ना
27:41मेरी प्यारी पत्नी सीमा
27:45ऐसा कैसे हो सकता है
27:47कि मैं तुम्हें धोखा दूँ
27:49और तुम्हारे बिना मेरे जीने का कोई सवाल ही नहीं उठता है
27:53सच बोल रहे हैं या डायलेक मार रहे हैं
27:56बोल ये
27:57तुम्हारी कसम
27:58मेरी कसम
28:04अच्छा बाबा ठीक है बना लूँगा दाडी
28:06ओके बाल भी कटाना
28:09बाल बाल तो मेरे चोटे हैं बाल क्यों कटा हूँ
28:12अच्छा सुना
28:14वह सब छोड़िये मुझे बहुत जोरों के भूख लगे मैं खाना लाओ
28:19मैंने फर्स टाइम आपके लिए कुछ बनाया आप खाओगे नहीं
28:21नहीं तुम मज़ जाओ
28:23अरे छोड़ो मुझे एक खाना ठंडा हो जाएगा ठीक है
28:26इतनी मेनस से बनाया है
28:28कहीं पे भी सोजाओ
28:29कहीं पे भी हाथ लगाते हो मेरे को
28:40तो आज हमारी मेडम ने हमारे लिए पहली बार खाना बनाया है
28:43आई लाइक एट वेल्कूम आई आई आई आई भूख लगी है मुझे भी
28:49आई आई आई आई खाना
28:53खाना तो देखने में ही बहुत अच्छा लग रहा है
28:56भूख और बल गई
28:57देखे बहुत टेस्टी है
29:10अच्छा लेजिया ना
29:17बहुत अच्छा है
29:27कितना अच्छा खाना बनाती हूं मैं
29:45नहीं बस नहीं बस लास लास लास लास
29:55बहुत तेज़ भुष लगी थी नहीं कबसे तो लो फिर एक नहीं वाला और खाना बढ़े लास बिलकुल नहीं आप
30:03खाई ये
30:15खाना तो हमारी मैडम जी नहीं बहुत अच्छा बनाती हूं
30:18लेकिन इस खाने में एक चीज की कमी थी
30:22क्या तुम खुदी सोचो क्या
30:27मैं मीठा बनाना भूल गए रुकिये मैं आपके लिए अभी थोड़ी से शक्तर लेके आती हूं
30:31ने ने ने आप बैठिये आप बैठिये एक्चुली खाने में मीठी की कमी नहीं थी
30:37वो जो कमी थी वो कमी थी तो मैं उठने लगी तो उन्होंने मुझे पकड़ लिया फिर उन्होंने मेरे होटों
30:51पे अपने घरम होट रखती है
30:53मेरे जिस्म में जैसे करंट सा दोड़ गया और होना क्या था हमारे होट एक दुसरे से मिल गए
31:02मैं चौकी जरूर मगर पीछे ना हटी मेरे पती ने मेरे होटों को अपने होटों से पकड़ लिया
31:12क्या फिलिंग्स थी वो
31:17हमारे जुआन एक दुसरे को अच्छे से पहचानने लगे थी
31:23मैं शर्मा के उठके अंदर की तरफ भाग जोड़ियो मुझे किचन में बहुत काम है
31:31और वो जोर जोर से हस रह थी
31:33शक्कर की कमी पूरी हो गई
31:46सिमा तुम जो कर रही हो न वो ठीक नहीं है
31:51आजकल तेरे रंगधं कुछ ठीक नजर नहीं आरे मुझे
31:55क्या कर रही हो सिमा कुछ सुन रही हो मैं क्या बोल रही हो तुम्हें
31:58सुन रही हो मार
31:59चुपेट तु आजकल घर में भी बहुत काम रहती है
32:02और कॉलेज भी नहीं जाती, जब देखो तब उस प्रोफेसर के साथ फोन पे लगी रहती हो
32:06कहीं तुमारा प्यारबार का चक्कर तो नहीं है ना
32:09देखो सिमा, मुझे ये जरा भी पसंद नहीं है
32:12तुम क्यों नहीं समझ रही मेरी बार
32:19अरे कौन सा कॉलेज
32:25अरे प्यार करने से पहले उसकी उंगरे तो देख ली होती
32:28सिमा, मैं बहुत खुश नसीब हूँ, जो तुम मेरी जिन्दगी में आई
32:32थैंक यू
32:33सिमा, हम लोग है ना, एक अफ़ते के लिए कहीं बाहर चलते हैं
32:37अब मेरा मतलब है कि, like husband wife, जिससे हम अपनी शादी शुदा जिन्दगी को अच्छी तरह से जी सके
32:43हलो, एक मिनट, मेरी मम्मी मुझे कहीं बाहर जाने नहीं देगी
32:46वो मेरे पास एक आइडिया है सीमा, वो पता है कि, अगले हफ़ते, college का camp बाहर जा रहा है
32:53मेरे मतलब है, मतलब है, महाबलश्वर जा रहा है, और तुम महाबलश्वर के लिए निकलना
32:56और हम लोग एक काम करेंगे कि महाबलश्वर की बजाए, सीधे लोना वाला चले जाएंगे
33:01और उसके बास सीमा, वो अपनी जिन्दगी जिलेंगे
33:03Seriously? Love you!
33:37प्रीमा जैश्वर के लिए वो कितना खुबसूरत लग रहा है
33:39वाँ
33:41वाँ
33:45वाँ
33:45यह वही कंपती का मंदीर है क्या?
33:48हाँ, यह वही है
33:49ओके
33:50अम
33:52बहुत अच्छा हिलिस्टेशन है ना, मैंने सुना है
34:04मेरी प्रोफेसर साब इतनी बेसबरी अब तो हम लोनावला जा रहे हैं
34:13अल्रेट ये तो हमें भी पता है क्या हम लोनावला जा रहे हैं
34:16एक बात बोलू बोलिये
34:21तुम इतनी खुब्सूरत हुसे हैं
34:24तुमारे चेहरे से नजर आटाने का जीए नहीं करता
34:27और पता है मुझे विश्वास ही नहीं हो रहा है कि तुम मेरी पत्नी हो
34:31आपको है विश्वास?
34:33हाँ बाबा अब मैं यकीन के साथ कह सकता हूँ कि मैं एक बहुत ही खुब्सूरत पत्नी का पत्ती हूँ
34:41थोड़ी है न प्रोफेसर साहब प्लीज इसना अच्छा मौसम है देखने दीजिना
34:47ओहो अब क्या हुआ प्रोफेसर साहब ये कप्ड़े तुम्हारे बहुत छोटी तो नहीं
34:54मेरा मतलब है कि तुम सल्वार कमीज पहनती तो और भी खुब्सूरत लगती है
35:00ओ मेरे शर्मीले प्रोफेसर साहब लोनावला पहुंचने दो अपकी सारी खौईशे पूरी कर दूँगी
35:07ओके बबाबा सौरी
35:09सौरी किसलिए सौरी ने ये मैं किस
35:18राइवर देख रहा है आईए से बड़ा चालाक है
35:25मुझे प्यास लगी है
35:27हाँ है ना पानी है लो मैं दिलाओंगा पानी
35:40बस और कुछ कम आजब कितनी देर में पहुँचेंगे हम बस हम पहुँचने ही वाले थोड़ी दुरी और बच्छी होगी
35:52मेरे लिए नया है ये सब कुछ
36:05welcome sir hello how's your travel good this is your room key thank you please come
36:14this way
36:22happy honeymoon ma'am
36:24thank you
36:25चलो
36:27समाहल के
36:47कर दो
36:49कर दो
37:20मैं अचानक प्रोफेशर से लिपट सी गई
37:23बिना किसी शरम के
37:25मैंने अपने हाथ
37:26प्रोफेशर की गर्दन लिडाई दिया
37:29बस
37:30प्रोफेशर सहाब ने भी
37:32अपनी दोनों हाथ
37:33मेरी कमर पे रख दिये
37:36और उन हाथों की पकड
37:37मजबूत होती चली गई
37:40और उन्होंने मुझे बिस्तर पे लिटा दिया
37:48सीमा तुम बहुत खुब्सुरा था
37:51मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ
37:53मेरे चालिस साल के जवान पती के
37:55मजबूत हाथों की पकड़ से
37:58मेरी तो सांसे ही रुप गए थी
38:01मेरी सांसे तेज हो रही थी
38:04धड़कने तेज हो रही थी
38:06मैंने हीमत करके उपर देखा
38:09तो मुझे पता चला कि
38:11मेरे पती देव अपने बीश साल की
38:14नाजुक कोमल पत्नी को निहा रहे थी
38:21मेरी नजर उन से मिलते ही
38:23अपने मरदाना होठ उनों ने
38:26मेरे कोमल होठों पे लगा दिया
38:32इस्क्यूज मी सर
38:36इस्क्यूज मी सर
38:40जी फर्माइए
38:44यी वो प्रोफेसर राकेश कुमार
38:50आज कल कहीं दिखाई नहीं देते
39:00कहां गए हैं वो इलाहबाद सेमिनार में गए हुए हैं
39:04क्या काम है क्या मैं आपकी कुछ मदद कर सकता हूँ
39:10जी उन्हें कुछ किताब
39:17किताबे उन्हें कुछ किताबे देनी थी
39:20आप मुझे दे दीजिए जब वो आएंगे मैं उन्हें दे दूँगा
39:28कोई बात नहीं जब वो आएंगे तो मैं दे दूँगी
39:47उसके बाद प्रोफेसर आरके मुझे कभी नहीं मिले
39:52सुनने में आया कि कॉलेज के किसी जरूरी सेमिनार को अटेंड करने वो अलहाबाद गय थे
39:58और वहाँ एक कार एक्सिडेंट में उनकी मौत हो गए
40:04मेरे तो जैसे पाउं तले जमीन ही निकल गए
40:10मैं अपना दर्द किसी को बता भी नहीं सकती थी
40:14और ये किसी से कैव भी नहीं सकती थी
40:17कि जिस इंसान की मौत हुई है वो मेरा पती था
40:23पर मन ही मन ये शिकायश जरूर करती थी
40:28कि वो मुझे बता के क्यों नहीं गये
40:32उनका मोबाइल भी स्विच्ट आफ था
40:34मैं प्रोफेसर की याद को भुला न सकती
40:56कुछ दिनों बाद मुझे एक पारसल मिला
41:12भेजने वाले का नाम उस पे नहीं था
41:17मैंने जल्दी जल्दी उस पैकेट को खोला
41:21उसमें वही बुग थी जिसे प्रोफेसर अधूरी छोड़ गये थी
41:27जिसके पहले पन्ने पे लिखा था अरपन
41:32और राइटर का नाम राकेश कुमार लिखा था
41:35मैं कुछ समझ ना सकी
41:41उस किताब में एक चित्थी भी थी
41:45मैंने उसे खोला और जल्दी जल्दी बढ़ने लगी
41:51मेरी प्यारी सीमा
41:53ये अरपन है मेरे जीवन की
41:55एक मात इस्त्री सीमा को
41:58जिसने मुझे दिल से प्यार किया
42:02ये अरपन है मेरी उस प्यारी पत्नी को
42:04जिसने मेरे उम्र की परवाह किये बिना
42:07उसने मेरे प्यार को चुना
42:09दुनिया की परवाह किये बिना
42:12मैंने अपनी सीमा से प्यार किया
42:14बहुत बहुत प्यार किया
42:16सीमा मैं तुम्हें सर्प्राइज देना चाहता था
42:21इसलिए तुम्हें भी न बताए
42:23मैं इलहाबाद इस पुस्तक के प्रकाशन के लिए चला गया
42:28ताकि मेरे आने से पहले ये पुस्तक तुम्हारे हाथों में होगा
42:33प्लीज तुम गुस्सा मत करना
42:36और इस पुस्तक को सुईकार करना
42:38और हाँ
42:40मैं एक दू दिन में वापस आ जाओगा
42:42तुम्हारा राकेश कमार
43:14ज क्या है?
43:16में नहाँ?
43:16जहाँ वापैका?
43:17जय क्यो वर्यो तुमेट prick ना?
43:20है?
43:48हुआ हुआ
44:15मैंने सारे उम्र फिल शादी नहीं की
44:19क्यूंकि मेरी कोख में प्रोफेसर का अंश था
44:24जो प्रोफेसर ने मुझे उस राद दिया था
44:28हो जाओ तुम पे हो जाओ अब फना मैं
44:36बीरान दिल की बस्ती को आबाद कर
44:42पंजर जमी मुझे को भी गुलजार कर
44:49तुझ पे वारों अपना ये तन्मन
44:55ओ मेरे सजन ओ मेरे सजन तुझ पे अरपन

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