00:00KANPUR में दसायरे के मौके पर एक बेहद अनोखी परमपरा देखने को मिलती है
00:05जहार रावड का पुतला जलाने से पहले उसकी बकाइदा पूजा पाथ और आरती की जाती है
00:10शिवाला इलाके में इस्थित ये 200 साल पुराना रावड मंदिर साल में सिर्फ एक बार यानी सिर्फ दसायरे के दिन
00:18ही खुलता है
00:19आज सुबह करीब साड़े च्छे बजे जैसे ही मंदिर के कपाट खुले से दालूँ की भारी भीड उमर पड़े
00:25इसके बाद मंदिर और मूर्ती की सफाई कर रावड की प्रतमा को घी दूद दही और जल से इस्थनान कराया
00:32गया
00:33मंदिर के पुजालियों और इस्थानी लोगों का मानना है कि रावड कोई साधार पात्र नहीं
00:39बल्कि महाविद्वान और भगवान सिव का परमभक्त था इसलिए यहां उनकी विद्धता और ग्यान की पूजा की जाती है
00:46जबकि साम को होने वाला दहन रावड का नहीं बल्कि उसके एहंकार का प्रतीख है
01:09और मैं श्रद्दा तो बहुत है उम्मा तुभी बहुत है कि यह पहना चाहता हूं कि सत्य और असत्य का
01:21कारिक्रम है
01:23हमेशा इसी तरह के से चलता रहता है और लगातार चलता ही रहेगा बस हम लोग अहिंकार का धहन करते
01:30हैं
01:30और सत्य ही होता है यह रामण का मंदिर है जो साल में एक बार खलता है दसहरे के दिन
01:39सुभा इनकी पूजा अर्चना अभिशेक होता है
01:43और साम को हम लोग इसी मैदान में उतला रहन करने के बाद इनके मंदिर को बंद कर देते हैं
01:51महात्व यह है कि यह मंदिर करीब 200 साल पुराना है और यहां चारो दरफ शक्तियों का ही आवास है
02:00सामने बाबा भोले नात का मंदिर और बहार दस महाविद्याओं के रक्षक के रूप में रामण के मंदिर को इस्थाफित
02:08दिया किया है
02:11यहां कम से कम 10,000 आदमी दर्सन करता है हम पिछले 30 साल से दर्सन कर रहे हैं अपने
02:17बच्पने से
02:18which he is also a farmer
02:21which we have to do this
02:22which we have to see
02:25in a kind of duo
02:28and in a kind of a new year
02:33which we have to see
02:39he has to see
02:41the kind of buddhy
02:41that they are not having
02:45Thank you very much.