00:00राजनीती का पहला और अंतिम लक्ष होता है सत्ता
00:02न पाप न पुन्य न धर्म न धर्म सब कुछ नीती है और यही राजनीती
00:07पहले मुख्यमंत्री गोविंद बल्लब पंच से शुरू होकर
00:10यूपी की राजनीती चौधरी चरण सिंग तक आते याते सिध्धानतों से अलग
00:15सत्ता सिध्धी तक आप पहुँची थी इस दौर ने ऐसी नीव रखी
00:19जिसने उत्तर प्रदेश को दशकोट चैन की सांस नहीं ले ले
00:25सरकार किवल सत्ता और सियासत की कहानी नहीं बलकि उन घटनाओं और उन शक्सित्यों की कहानी जो सियासत की दिशा
00:33को निर्धारित करते
00:35और जब बात यूपी की हो भईया तो किरदार ऐसे ऐसे होते हैं जो पुराना और तय जियोमेट्री जोग्राफिया पल
00:42में बदल देते हैं
00:431979 के चुनावों तक आते यूपी में यही हो रहा था
00:531979 में कॉंग्रिस बहुमत से दूर रही पर सरकार बना ली
00:56सरकार चली एक साल से कुछ कम फिर चौधरी चरण सिंह की सरकार आई 225 दिन की इसके बाद फिर
01:06लगा रश्रुपति शासर
01:11लेकिन 17 दिन बाद ही सरकार बन गई सीम बने त्रिभुवन नारायन सिंह 166 दिन बाद ये सरकार भी नहीं
01:20देख अब सीम बने कमलापती त्रिपाटी कुल दो साल 79 दिन के लिए
01:31फिर लगा रश्रुपति शासर 148 दिन बाद जब फिर बनी सरकार तो मुख्यमंत्री बने हेम वती नंदन भूगुणा
01:43इसके बाद ततकाल चिनाव होने वाले थे और चिनाव में एक भागदोड करने वाले युवा मुख्यमंत्री की जरुरत थी
01:54इसलिए हेम वतीन भूगुणा का नाम पंडित उमाशंकर दिख्षित के कहने पर पंडित कमलापति जी ने इंद्रा गांधी को सुझा
02:06रहे था
02:09पांचमी विधान सभा में अब तक चार मुख्यमंत्री बदल चुके थे और दूसरी बार राश्रुपति शासन लग चुका था
02:15लेकिन मुख्यमंत्रियों की कहानी का बड़ा ट्वेस्ट आना बाकी था
02:21इंद्रा गांधी से नाराज चल रहे पहाड़ी नेता हेमवती नंदन भहुगुणा को दिल्ली से यूपी भेज दिया गया और बहुत
02:28सोच समझकर ये फैसला लिया गया
02:32इंद्रा गांधी स्वयम में इतनी मजबूत नेता थी कि वह शायद ऐसा उनके बारे में कहा जाता है कि वह
02:39अपने पीछे भी कोई सेकंड लाइन के नेता नहीं देखना चाहती थी
02:42वहगुना के बारे में ये कहा जाता था कि अगर उनकी लोक प्रीटा इसी तरह से बढ़ती गई तो वह
02:47एक दिन प्रदार मंतरी पत के दावेदार हो सकते हैं तो ऐसे में उनकी लोक प्रीटा की वजए से उन्हें
02:53मुक मंतरी तो बनाया गया
02:58बहुगुना भेजे गए थी इसलिए कि केंद्र से उनके रिष्टे अच्छे हो जाएंगे क्यूंकि वो बड़े और जनाधार वाले नेता
03:04थे
03:04लेकिन बात बिगड़ गई संजय गांधी को लेकार
03:14संजय गांधी की जो छवी बन रही थी उस छवी से हमोतिननन भगुणा अपने को नहीं जोड़ना चाहते थे
03:21इंद्रा गांधी से तो जुड़े हुए थे वो ऐसा भी हुआ कि उसूल तक्राए
03:30अजय गांधी बिल्कुल पसंद नहीं करते थे हमोतिननन भगुणा को इंद्रा गांधी यहीं चाहती थी कि इनको हमोतिननन भगुणा संजय
03:40गांधी को लेकर यह खोद भगुणा के अपने इंटर्व्व कर दाशने बस ला रहा हूं तो जाहिसी बात है कि
03:48जब राजितिक
03:49हश्चे बढ़ने लगे तो बगुणा जैसा कदावद नेता इस्तीफा दे देना चाहता है इस्तीफा दिया उन्होंने उन्हें मनाया गया
04:00बहराल एक बार कुर्सी छोड़ी तो मना लिये गए और लेही दिन यानि 5 मार्च 1974 को कुर्सी पर फिर
04:07वापसी हो गई
04:10लेकिन तब तक काफी कुछ बदल रहा था पाच जून 1974 को पटना के गांधी मैदान से जैप्रकाश नारान सत्ता
04:17परिवर्तन के लिए संपूर्ण करांती का नारा दे चुके थे
04:22जेपी आंदूलन की आद से बहुगुणा ने यूपी को काफी हद तक बचाय रखा था
04:2725 जून 1975 को देश पर आपात काल थोप दिया गया बहुगुणा इस फैसले से बहुत आहत थे लेकिन कॉंग्रेस
04:35में वो तब भी बने रहे और दबाओं में सरकार चलती रही
04:40आखरकार उन्हें इस्तीफा देने को कह दिया गया
04:4329 नवंबर 1975 को बहुगुणा ने इस्तीफा दे दिया
04:47प्रदेश में राश्टुपती शासन लगा दिया गया
04:5252 दिन तक यूपी में राश्टुपती शासन लगा रहा
04:56इस बीच हर्याना मध्यप्रदेश जैसे राज्यों की सीम बदले गया
05:00इस फैसले में मुख्यमंत्रियों के चुनाओ पर संजय गांधी की पसंद साफ जलक रही थी
05:06यूपी में भी नए मुख्यमंत्री के तौर पर नाराण दत्तिवारी को कुरसी पर बिठा दिया गया
05:11माना जा रहा था एंडी तिवारी भी संजय गांधी की ही पसंद थे
05:30रखते हैं उसके उससे जो उन्होंने संजय गांधी जो समय बहुत प्रभावी थे बहुत प्रभावी थे उनके हां जो इस्थान
05:38मना लिया था बहुणा जी अपना स्वाविवान कायम रखे रहे
05:46तिवारी सरकार एक साल निन्यानवे दिन तक चली और इसके बाद एक बार फिर राश्ट्रोपती शासन लगाया गया
05:54राजनीती के लिहाज से अब तक देश काफी बदल चुका था जेपी आंदोलन के बाद उपजे हालात का असर यूपी
06:01में भी दिख रहा था
06:04विपक्ष जन्ता पार्टी के नाम से एक जूट हुए
06:08एमर्जेंसी के बाद 1977 में यूपी विधान सभा के नए सिरे से चुनाव हुए
06:12कॉंग्रेस के पेरों तले जमीन ही रही खिसकी सर से आस्मान से मट गया
06:17जन्ता पार्टी ने प्रदेश की 425 में से 352 सीटें जीत लिए
06:23कॉंग्रेस ने जीती केवल 47
06:28जन्ता पार्टी की ओर से मुख्यमंत्री बनाया गया आजमगड के सांसद राम नरेश यादव को
06:34अला कि तब तक मुलाइम सिंग यादव भी यादव वोटर्स के बीच खासे लोग प्रिय हो चुके थे
06:40मुलाइम सिंग तीन बार के विधायक ने थे मुलाइम सीम नहीं बने पशुपालन मंत्री बने
06:45अंदर ही अंदर वो यह समझ चुके थे कि चौधरी चरण सिंग अगर जाते तो वो ही मुख्य मंत्री बनते
06:50है जन्ता पार्टी की सरकार में भी सब ठीक ठाक नहीं था
06:58दो साल बाद राम नरेश यादव का भी इस्तीफा हो गया बाबु बनार्सी दास मुख्य मंत्री बने लेकिन एक साल
07:05बाद फिर राश्ट्रुपाती शासन लग गया जन्ता पार्टी कॉंग्रेस का विकल्प बनने चली थी लेकिन उसका जो सियासी हश्र हुआ
07:12उसने कॉं�
07:14जीवनी देदी देश में भी और उत्तर प्रदेश में भी
07:191980 में देश और यूपी के चुना हुए और पूरे देश में इंदेरा के नाम की आंधी चल गए
07:27यूपी में कॉंग्रेस ने 425 में से 309 सीटें जीत लिए जन्संग से बनी भारतिय जनता पार्टी को 11 सीटें
07:35में लिए
07:38आपात काल की बाद की ये बदली हुई कॉंग्रेस थी पूराने नेताओं की जगे नई ब्रिगेड तयार थी
07:44आम चुनावू में यूपी ने लगभग हर बड़े नाम को चुनकर लोगसभा भेजा था
07:49लिहाजा यूपी का मुख्य मंत्री ऐसा होना चाहिए था जो पार्टी और परिवार के प्रतीश समर्पित हो
07:55और काम भी कर सके इंद्रा गांधी और संजय गांधी ने वीपी सिंग पर भरूसा किया
08:04उस समय जो संजय गांधी के सहयोगी थे जिसको संजय ब्रिगेड भी कहते थे या अलग-अलग विशेशन दिये जाते
08:13थे
08:16तो वो दरसल वीपी सिंग उस ब्रिगेट की खोश थी
08:20लेकिन वीपी सिंग के लिए ये कुरसी काटेदार थी
08:2449 मंत्रियों में से उनके चुरे हुए केवल 6 मंत्री थे
08:28जाती ये दरारों को भी वीपी सिंग पाट नहीं पा रहे थे
08:31और वो इस बात से बेहत परिशान थे कि 180 विधायकों समेत उनके आधे मंत्री मंडल पर आपराधिक माम ले
08:38थे
08:39विश्वनात प्रताप सिंग ने 9 बार मंत्री मंडल में फेर बदल जरूर किया
08:44लेकिन उन्हें एहम बदलाव करने की इजाज़त नहीं दी थे
08:50मुख्यमंत्री रहते वीपी सिंग कॉंग्रेस के नेताओं के रवये पर भी सवाल उठा दिया करते थे
08:55यही कारण था कि कॉंग्रेस के कई सांसद उनके पक्ष में नहीं थे
08:59पेरहाल विश्वनात् प्रताप सिंग इंद्रा गांधी के पसंदीदा थे तो सरकार चलती रही
09:04वीपी सिंग एक मांड्या के राजा थे अच्छे संपन परिवार में पैदा हुए थे लेकिन उनका जो मानुए परक्ष था
09:15वह बहुत मजबूत था
09:18जब बिनोवा भावे का आंदोनन चला जो सर्प्लस लेंड है या जो अत्रित भूमी है वो भूमी इनमें बाट दी
09:27जाए तो राज परिवार होते हुए भी उन्होंने इसका इसको अपने हाथ में लिया आंदोनन को भी और उन्होंने खुद
09:35की भी जमीन दियर और उनकी भ
09:39जारीख होने लगी और जब उन्होंने वित्मंत्री पद से इस्तीफा दिया बोफोर्स के मामले उठाए तो हम लोग भी उस
09:49समय विपक्ष में थे और एक विकल्प की तलास में थे तो उस समय ये नारे गूजते ते राजा नहीं
09:55पकीर है देश की तकबीर है और वही नारे
09:59और वही वातावन उनको प्रधानमंत्री कुर्शी के करीव ले गया उस दोरान बुंदेल खंड में डाकूओं का बड़ा आतंक था
10:08और ये वीपी सरकार के लिए बड़ी चुनोती था वीपी सिंग ने एलान कर दिया था कि अगर डाकूओं से
10:15यूपी को मुक्त नहीं करा �
10:17पाया तो मुख्य मंत्री की कुर्सी छोड़ दूंगा पर डाकूओं का आतंक बेकाबू हो रहा था पूलन देवी ने फरवरी
10:261981 में बेहमाई हत्या कांड को अंजाम दी 21 ठाकूरों की हत्या कर दे मार्च 1982 में वीपी सिंग के
10:33भाई और भतीजे की हत्या ड़कैतों ने कर द
10:3928 जून 1982 को ड़कैतों ने कानपूर और मैनपूरी में 21 लोगों का नसला था इस हत्याकांड से वीपी सिंग
10:49इतने विक्षुब्ध हुए कि उन्होंने CM5 से त्याग पत्र दे दिया