00:00जैश्री महाकाल, सुनातन परंपरा हिंदु धर्व में कन्या पुजन क्यों किया जाता है? उसका महत्व क्या है? और कन्या है
00:08किसको बोला गया है?
00:10यहां मैं आपको बताता हूँ कि कन्या पुजन जो है हमारे घर में सब्तमी, अश्टमी और नौमी तीजी को किया
00:18जाता है
00:30बात होताहें कि दो वर्ष से लेके 10 वर्ष की आयोतक की जो कन्या हुती है उसका हम पूजन करते
00:38हैं।
00:38इन इस दिन माता हमारे घर में कुल-देवी के रूप में विराज-मान होती है।
00:44सभी रोगों को, सभी व्याधि को, सभी वाद विबात को हर के कल्यान वरद्धी की प्राक्ति कराने वाली होती है
00:52इसी संदर्वं में आपको बताओंगा कि दो वर्ष से दस वर्ष की आयू तक की ही कन्या को इसमें क्यों
00:59लिया गया है
01:00को कि परंपरा के अनुसार जो दो वर्ष की कन्या होती है उसे हम कुमारी के रूप में पूछते हैं
01:07यह दुख और सत्रूओं का नाश करने वाली होती है
01:12तीन वर्ष की जो कन्या होती है वा त्री मूर्थी के रूप में पुजाती है
01:16या धन धान्या और सुख सम्रद्धी की प्राप्ति करवाने वाली होती है
01:21चार वर्ष की जो कन्या होती है वो कल्यानी के रूप में हम पूझते हैं
01:27वो परिवान का कल्यान करने वाली होती है
01:29पांच वर्ष की कन्या रोहेनी के रूप में हम पूझते हैं
01:34यहां सारे रोगों को हरके हमें व्यादी से मुक्त करने वाली होती है
01:38छे वर्ष की कन्या कालिका के रूप में पूजी जाती है
01:42यह विध्या विजय और राज योग का कल्यान कारी वर देखे जाती है
01:47साथ वर्ष की कन्या हमें चंडिका के रूप में पूजनी चाहिए ये इश्वर्य और धंकी प्राप्ति करवाने वाली होती है
01:54आठ वर्ष की कन्या शामभवी के रूप में पूजी जाती है
01:59ये बाद विबाद में विजय और लोक प्रियता को बढ़ाने वाली होती है
02:03नो वर्ष की कन्या दुलगा के रूप में पूजी जाती है
02:06ये शत्रों का नाश करके कठिन से कठिन कार्यों में विजय दिलाने वाली होती है
02:11दस वर्ष की कर्णिया सुबद्रा के रूप में पूजी जाती है, सभी मनों कामनाओं की पूर्ती करती है, हमारा जो
02:20धर्म है वह हमें स्प्री का अपमान नहीं, स्प्री का सम्मान सिखाता है, और इसी को ध्यान में रखते वे
02:28माता जो पारवती है, उन्हें प्रकृति का र�
02:41जो आज कर्णियाओं का आप पुजन करेंगे, यही आगे जाके किसी की माता बनेगी, बेहने बनेगी, इसी प्रकार मलब श्रजन
02:48करने वाली बनेगी, अगर इस्त्री ना हो तो इस धर्ती का जो संतुलन वहाँ बिगड़ जाता है, मलब श्रजन रुक
02:55जाता है, इसी प्र
02:57प्रकार हर भगवान के रूप में भी हम माताओं का पुजन करते हैं तेसे महाकाली महालक्ष्मि महार सरस्वती तेसे सिया
03:04राम राधा कृष्ण अलब हर मुख्य भगवान के पहले भी तन्याम अलब किसी स्प्री का नाम जूरता है इसी प्रकार
03:14आप शिव शब्दों को दे�
03:27जाता है इस प्रकार इस्प्री के बगर पुजश अधूरा है इसके लिए भगवान शिव ने अर्द नारिश पर सुरूप लेके
03:33सब को बताया कि नारी पुरुश से प्रसक नहीं है इसी रूप में हमें माता नाव दुरुगा का इन कन्याओं
03:41के रूप में पूजन करना च
03:44चाहिए और इस्त्रियों को कभी भी हमें इसा नहीं करना चीए कि आपको इसका अधिकार नहीं है उसका अधिकार नहीं
03:51हमेशा उनको सब चीज का अधिकार होता है आप यह भूल जाते हैं कि वही आपकी जननी है इसलिए उन्हें
03:58माता के रूप में जगत जननी भी कहा जात
04:18परन्तु क्या बोलते हैं रोगान शेशा नहां पंसी तुस्टा रुस्टा तु कामान सकलान विस्टान अगर वो रुष्ट हो जाए तो
04:28आपके सकल कुटम बकानाश करने वाली होती है
04:30इसी प्रकार माता का पूजन करना चीए उनका आशिरवाद लेना चीए और उनसे कामना करना चीए कि है माता हमारे
04:37घर में धन्न दानने की अन्न की कमी कभी ना हो
04:41हमारे घर से जवर पीड़ा व्यादी बाद विवात को आप हरें
04:46और ऐसे रुप में माता का पूजन करके उन्हें भोजन कराके
04:50दक्षिना देके उनके चरणे शपर्ष करके उनका शुब आशिरवाद लेना चाहिए
04:55धन्यवाद जये श्री महाका
05:12अजये श्री महाद जये श्री महाद जये श्री महाद लेए