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पंचकुला के मां मनसा देवी शक्तिपीठ की क्या है धार्मिक मान्यता? देखें अद्भुत अविश्‍वसनीय अकल्‍पनीय

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00:00नमस्कार मैं हूँ श्वीता सिंग और आप देख रहे हैं आज तक आज का अद्भुत अविश्वस्निय अकल्पनिय नवरात्र यानि शक्ति
00:08अराधना के नौ दिनों से जुड़ा
00:09देश में यहां तक की देश ही क्या भारतिय उप महद्वीप के अलग-अलग हिस्सों में जो भारत की सीमाओं
00:15से बाहर के हिस्से भी हैं वहाँ पर 51 शक्ति पीठ स्थित हैं
00:21कहते हैं देवी सती के शरीर के अंग-अलग-अलग हिस्सों में जहां-जहां गिरे वहाँ-वहाँ पर ये शक्ति
00:30पीठ स्थापित हुए
00:31पर क्या ये सभी शक्ति पीठ एक दूसरे से अलग है या फिर किसी न किसी रूप में जुड़े हैं
00:38शक्ति को एक सूत्र में बांधते हैं
00:41आज हम हर्याना के पंचकुला के माता मंसा देवी शक्ती पीठ में मौजूद हैं और यही से हम आपको उन
00:50सभी शक्ती पीठों को जुड़ते हुए सूत्र दिखाएंगे जुड़ती हुई पूरी शक्ती के बारे में बताएंगे
01:29नवरात्र के नौ दिन, नौ दिन तक देवी की पूझा, नौ रूपों की आराधना,
01:36नौ शक्तियों का स्मरण, लेकिन नौ ही क्यों है, क्या ये सिर्फ एक धार्मिक परंपरा है, या इस अंक के
01:43पीछे कोई अर्थ चिपा है?
01:48नौ अंक पूर्णांक है और शक्ति का प्रतिक है, जोतिस के हिसाब से भी नौ का अंक जो है, वो
02:01मंगल का है, जो शक्ति और उर्जा का प्रतिक है
02:06नवरात्र में नौ दिन, नव दुर्गा के नौ रूप और देवी की शक्ति के नौ अलग-अलग स्वरूप
02:13लिकिन बात केवल नौ तक सीमित नहीं है
02:19सनातन परंपरा में अंकों का बड़ा महत्व रहा है
02:22नौ दूनी अठारथ, अठारथ
02:25यानि अश्टादश प्रमुक शक्ति पीठों का उलेक भी महत्वपूर्ण
02:35शक्ति पीठ अलग-अलग गरंथों के अनुसार जो हमारे सास्त्रिय गरंथ है
02:41उनमें तांत्रिक गरंथों में अलग भागवत के जो गरंथ है उसमें अलग
02:47इस प्रकार से 9, 18, 51 यहां तक की 108 शक्ति पीठों का भी वरनन हमें प्राप्त होता है
02:54और यह देवी के विविन स्वरूपों के अनुसार, विविन कताओं के अनुसार, उन सक्ति पीठों का वहां विचार है
03:08वैसे अलग अलग ग्रंथों और परमपराओं में शक्ति पीठों की संख्या अलग अलग मिलती है
03:14लेकिन सर्व मान्य है 51 शक्ति पीठ
03:22पर क्या यह सिर्फ अलग अलग धार्मिक परमपराओं में चली आ रही संख्याई है या फिर इन अंकों के पीछे
03:28कोई ऐसा गणित है जिसे हमारे पूर्वज किसी और तरीके से समझते थे
03:38शक्ति परमेश्वरत शे भिन्ना चतुता व्यवार काले उर्शेश विष्णू भोगे भवानी समरे चादुगा पर्डेय चकाली लेकिन क्योंकि शक्ति जो अपने
03:48शरीर को दग्ध किया था तो शक्ति के अंग जहां जहां जहां बिग्यों एक्यों कि शक्ति जो चेटन �
04:01को जो है पुनिफल या उसके मनो कमना पूर्ण होती है आज हम आस्था कि इस कहानी को विज्ञान और
04:10रहस्य की कसोटी पर भी परखेंगे
04:13मनसा देवी से शुरू होगी हमारी ये यात्रा और हम समझेंगे कि क्या 51 शक्ति पीट सिर्फ मंदिर है या
04:22इनमें कोई अद्रिश शक्ति संबंध है
04:28मा के दर्सन मात्र से क्योंकि मा मनसा देवी नाम ही मनसा है जो सबकी मनों कामनाओं को पूरा करती
04:35है
04:36नवरात्र वास्ता में देखा जाए तो माभगवति के सिर्फ नौ दिन नहीं है मनुष्य के जीवन के नौ दिन भी
04:42है वो नौ दिन कैसे है यदि सब्ता के साथ दिनों तक जाएं तो लेकिन नौ दिन का मतलब नवचीतना
04:51नवजागरती
04:54देवी सती के शरीर के अलग-अलग अंग अलग-अलग जगहों पर गिरे तो क्या इन जगहों के पीछे भी
05:00कोई सोच थी
05:04क्या इन शक्तिपीठों का स्थान केवल संयोग है या इनके पीछे धर्ती दिशा उर्जा और खगोलिय गणना से जुड़ा कोई
05:12रहस्य भी हो सकता है
05:14पौराणिक कथाएं कहती है ये महादेव के मोह भंग के लिए विष्णु के चलाए सुधर्शन चक्र से माता सती के
05:22देह का विभाजनuldade
05:23आस्था कहती है ये विभाजन वोकर भी शक्ति का विस्तार है
05:31ये पंचकुला का माता मनसा देवी शक्ति पीठ है जहाँ पर लोग केवल मा के सामने अपनी मनतों को लेकर
05:39नहीं आते हैं बलकि मा से अपनी दिल की बाते करने के लिए आते हैं
05:42निर्मान तो इसका करवाया गया 1811 के बाद लेकिन इस पूरी जगे का जो इतिहास है वो इन इमारतों से
05:54कहीं अधिक प्राचीन और पौरानिक है
05:59ये मा मनसा भगवान शिव की छोटी पुत्री और पौरानिक वर्णनों के अनुसार नागों की सामराज़
06:14ये स्थान प्राचीन शक्ति पीट है
06:17मन्दिर का प्राचीन नाम सती मंदिर था
06:20सती मंदिर की कहानी आपको आगे सुनाएंगे लेकिन कहते हैं कि 18-वी शताब्दी में महाराजा गोपाल सिंग ने मा
06:27मनसा से मांगी अपनी मनुकामना पूरी होने पर
06:30जब मंदिर को आज का ये स्वरूप दिया, तो मंदिर का नाम मंसा देवी मंदिर हो गया
06:37ये मंदिर का निर्मान पांडव कालिन समय में हुआ था जो कि पांडवों दुआरा यहां पुजार्चना की गई थी
06:46ये उससे भी पहले का ये मंदिर है जो राजा गोपाल दास जी ने इस मंदिर का निर्मान किया था
06:53जो मने माजरा के राजा थे तो नो निर्मान किया था
06:58कहते हैं कि कभी इस मंदिर तक कई किलोमीटर लंबी सुरंग आती थी जिससे होकर राजा गोपाल से नित्य पूजा
07:05किया करते थे
07:30करीब 200 साल से श्रद्धाली मंसा देवी मंदिर में
07:34निरंतर देश के कोने कोने से मनु कामना ही लेकर आते हैं श्रद्धाली की मान्यता है कि जो मांगा वो
07:41मिला
07:54मां उसके हुकम के विना कुछ नी हो सकता मैं आज भी सोचुना तो आज भी कम से कम नी
07:58पांसे छे मिने बाद मां के चरनों में आया हूं नि तो मैं मौसली यहीं पे रहत हूं चंटी गड़ा
08:03नि तो मैं मां की जब किरपा होती
08:07जब उसके हुकम के विना कुछ नी हो सकता मा जो हम दिल से बुलाएंगे तो मां पलशीन में सुन
08:15लेती है जैकारा मामंसा देवी जीदा बोल साचे दरवाज की
08:23अध्भुत्मा मंसा के प्रती श्रधालों की अकल्पनी ये आस्था जो आता है तो फिर एक आध्यात्मिक रिष्टा उसका मंदिर से
08:30जुड़ जाता है
08:56आज ये शक्तिपीट भले ही मा मंसा की महिमा से जुड़ा है
09:00लेकिन इसकी कथाएं युगों पुरानी मान्यताओं से जुड़ी है जो मंदिर के प्राचीन नाम सती मंदिर का पखान करती है
09:07जब राजा दक्ष ने यग किया था तो सभी देवी देवताओं को यहां आमंत्रित किया था
09:13परन्तु दुर भाग्या से भगवान संकर को यहां आमंत्रित नी किया गया
09:18तो पारवती जी कहने लगी संकर भगवान को कि मेरे पिता ने यग रचाया है उसमें मुझे जाना चाहिए
09:25तो वो संकर जी कहने लगे कि बगायर बुलाए नहीं जाना चाहिए इससे अपमान हो सकता है
09:32परन्तु वो हट कर वैठी और वहां बगायर बुलाए वहां चली गी तो वहां उन्होंने देखा कि ब्रमा जी का
09:40आशन था
09:41विश्णु जी का था परन्तु भगवान संकर का वहां आशन नहीं था इससे वो दुखी तो होगी और उन्होंने अपने
09:48शरीर को अगनी में नोचावर कर दिया
09:50वहां भगवान संकर ने तृतिय द्रिष्टी से देखा कि अनर्थ हो गया तो वो वहां आए और उस शरीर को
09:57उठा करके परवतों पे गुमने लगे
10:00परंतु बर्मा जी कहने लगे कि विश्णू को कि ये शरीर को छोड़ेंगे नहीं तो इसके आप चक्कर द्वारा इसके
10:08शरीर को छोटे-छोटे टुकडे किये जाए जहां
10:11तो उनोंने चक्कर द्वारा टुकडे किये गए और छोटे-छोटे आंग जहाँ गिरे
10:16वहां सक्तिपीठ की उत्पत्ति होयी
10:18तो यहां माता मंसा देवी में मस्तिषक आगर भाग गी रहा था
10:21तो यहां मंसा देवी की उत्पतिए
10:23वह स्थान शक्तिपीठ हो गया
10:34इसलिए मस्तिश्क का अग्र भाग यहां गिरने के कारण यह स्थान अनंत काल से शक्ति पीठ था और इसी कारण
10:41लोगों की श्रद्धा का केंद्र बना रहा
10:53कि यह वो स्थान है जहां पर कहते हैं कि देवी सती का मस्तिश्क का अग्ला हिस्सा गिरा था
10:59जिस भी शक्ति पीठ में जाकर आप रार्थना करते हैं वहां की जो सिद्धी होती है उस क्षेत्र की वो
11:07सती के शरीर के उस अंग से जरूर जुड़ती है
11:11जो उस क्षेत्र में गिरा होता है अब जैसे यहां मस्तिश्क का हिस्सा कहा जाता है इसी लिए मनो कामना
11:18की सिद्धी यह यहां पर मानिता प्रबल है
11:28अद्भुत है ये भक्तों की भक्ति का ये स्वरूप जिसमें वो मा मनसा की दैविय व्याख्या करते हैं
11:34और मा मनसा के नाम के साथ अपनी मनो कामनाओं के भाव को जोड़ते हैं
11:42हल जगे जहां पर शरीर का जो अंग गिरता है उससे जुड़ी शक्ति होती है
11:46मस्तिष्क तो सबसे पर जो जो जो निश्चित पूरण होती है
11:55हां मनो कामना पूरण होती है जी कोई भी व्यक्ति सरदा भाव से आता है
11:59तो उसके मनो कामना निश्चित रूप से पूरण होती है
12:04मा मनसा, देवी, तीन पिंडियों के रूप में स्थापित है और हर पिंडी की अलग महिमा है
12:13बाई और माता महा लक्ष्मी स्थापित है जो धन, वैभव और एश्वर्य प्रदान करती है
12:19मध्य में स्वयम मा मनसा है जो भक्तों के मन को समझते हुए उनकी मनो कामना पूरी करती है
12:25दाई और माता महा सरस्वती विराजमान है जो बुद्धी विवेक और ज्ञान प्रदान करती है
12:31मा के दर्सन मात्र से क्योंकि मा मनसा देवी नाम ही मनसा है जो सबकी मनों कामनाओं को पूरा करती
12:37है
12:48मन्दिर का द्रिश्य अध्भुत था हमें वहां कई ऐसे शद्धालू मिले जो इसलिए यहां हमेशा आते हैं कि उन्होंने जो
12:55मांगा था वो चमतकृत रूप से उन्हें प्राप्त हुआ
13:02मैं रेल्वे सेलेक्शन बोर्ड चंडीगट से सेलेक्ट हुआ था अभी मुख्य कार्याले अधिचक पत्पिक कारियरत हुँ एस्टोर डिपार्टमेंट पर माता
13:10की किरपा थी मैंने मननत मांगी थी कि अगर माता एक बार में सेलेक्शन करा देंगी तो मैं जितनी बारी
13:16इ
13:28नवरात्र के पवित्र दिनों में यहां दूर दराज से संत आते हैं और मां के दर्बार में अपनी हाजिरी लगाते
13:35हैं
13:36नौ दिन का मतलब नवचेतना नवजागरती जो मा भगवती प्रथम शैल पुत्री से लेकर के नव में सिद्ध दात्री तक
13:45हम लोग जाते हैं
13:46तो मा भगवती अपने अनेग रूपों में हमें यही सिखाती हैं कि संसार में जितनी भी माता हैं जितनी भी
13:52बहने वो सम मा का ही रूप है
13:54कोई शैल पुत्री है, एक शैल पुत्री के रूप में हमारे सामने भी खड़ी हैं, हमारी बहन, तो दुर्गा सबसती
14:01में ही एक आध्याय में आया है कि विद्या समस्ता तब देवी रूपा, जो जितनी भी संसारम विद्या हैं, जितनी
14:09भी स्त्रिया हैं, सम मा का ही सुरूप
14:13मां के रूप निराले हैं तो शद्धालों की भक्ति भी अद्भुत है जो आध्भ्यात्मिक शक्ति के वशिभूत दर्शनों को आते
14:20हैं
14:52मां मंसा देवी मंदिर की भव्यता भी अद्भुत है जो सद्यों पुराने वैभव का अब तक संजोए हुए है
15:01मातारानी में आप सब की बिलीफ है जी बहुत बिलीफ है मातारानी में बड़ा मन लगता है इदर आकर
15:08क्या कहते हैं इस थान के बारे में मनों काम ना लेकर अपनी कोई भी पूरी होती है जी सच्चे
15:14मन से मांगो कर तो पूरी होती है और यह समय भी वैसे भी बहुत अच्छा है और आप लोग
15:19पूरा परिवार यहां पर आम तो और पर आते रहते हैं
15:21अ़िध रातेर, कोईब ते रार भुते दो आट

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