00:00वसु और देव की हल्दी की रस्म चल रही है, घर में खुशियों का महौल है और दोनों की एंट्री
00:05के साथ फंक्शन की रौनक और बढ़ जाती है, लेकिन इसी खुशियों के बीच चंद्रीका की नजर एक ही बात
00:11पर है, किसी भी तरह हल्दी का ये फंक्शन बिना किसी परे
00:29पर किसी तरीके की परेशानी का सामना ना करना पड़े, इसलिए वो पूरे फंक्शन पर ध्यान रखती है और चीज
00:36को समालने की कोशिश भी करती है, वसु और देव की एंट्री के बाद हल्दी की रस्म आगे बढ़ती है
00:41और चंद्रीका भी पूरी तरह से इस बात का ध्य
00:43रखती है कि फंक्शन में कोई गडबर ना हो और सब कोच अच्छे से हो जाए अब चंद्रीका किस कोशिश
00:49से हल्दी का फंक्शन तो पूरा हो जाता है लेकिन सवाल ये है कि क्या आगे भी वसु का इसी
00:54तरह से वो साथ देती रहेंगी और कि वसु और देव की शादी की ब
01:12तुबत्ता दो बिटा फोल को तुबत्ता ले जो बैठो तुबत्ता लेलो बैठो जिबा ये अपना जी का लेके उले पूरसी
01:24प्रत को अधा आम लो जैगे पे आई है अक्शन
01:39जिस तरह बनी को पहली महनी लगाने का हम उसी तरह से पहली अन्दी का हम उसकी मागा जाओ जाओ
01:58देखो
02:02अच्छ का लाँ लगाए थे अच्छ का लगाई ये सर अच्छ करों तरह में अच्छु अच्छ करों इकिकाल में आ
02:25याँ