00:00अचारे जी, क्या मेडिटेशन से विचार खत्म हो सकते हैं?
00:03निरे विचार में छलांग मारनी हैं तुमको
00:08यह फिजूल का मिस्टिसिजम है
00:10जैसे पेट का काम है पचाना
00:13वैसे ही मस्तिश का काम है
00:15सोचना
00:17तुचों कोई पेट के पीछे पढ़ाए कि पचाने नहीं दूगा
00:22जो पेट पचाए वो अपवित्र है
00:25और हमने करा गया है धर्म के नाम पे
00:27एक भी बाल उगने नहीं दूगा
00:31और कोई कह रहा है कि
00:33एक भी बाल गिरने नहीं दूगा
00:38तुमसे पूछ के उगा है बाल
00:40किस किस ने दाड़ी मूच को
00:42अपॉइंटमेंट डेट दी थी
00:44कि उस दिन हम जाएंगे ऐसे खड़े होंगे
00:46आईने के सामने तुम मूच दिखनी चाहिए
00:49जो हो रहा है हो रहा है न
00:50तुम कहे के लिए घुसर हो बीच में
00:52तुम्हारा क्या लेना देना इससे
00:55जाओ कहीं पर
00:57तो अध्यात्म के नाम पर
00:58डंडा लेके पीछे पड़े हैं विचारों के ही
01:01मेडिटेशन का पूरा
01:03व्यवसाय पूरा उद्ध्योग ही
01:05चल रहा है इसी पर कि
01:07इसको सोचने विचारने के
01:09काबिल मत छोड़ो
01:11तो वो तो कोई भहुत मुश्किल बात ही नहीं
01:13वो ऐसे ही नहीं सोच पाता
01:15तुम उसको क्या निर्विचार बता रहे हो
01:18वो तो अविचारी है
01:20उसका खोपड़ा ऐसे ही नहीं चलता कभी
01:23विचार में कोई समस्या
01:26और विचार में कोई
01:27श्रेष्ठता भी विचार जैसे डकार
01:32डकार माने कोई उपद्रव तो नहीं कर दिया
01:35और डकार में कुछ श्रेष्ठता भी नहीं है
01:39कि खड़े हो जाओ जोर से डकारो और बूलो हम बहुत बड़े डकारक है
01:45जब बहुत बड़ा डकारक होना
01:47कोई सम्मान की बात नहीं
01:49तो बहुत बड़ा विचारक होना भी
01:50कौन से भारी सम्मान की बात हो गई
01:53कि है
01:55शारी रिक्रिया है हो गई